एसआईटी रिपोर्ट: एपीपीएससी ग्रुप-I 2018 भर्ती में ओएमआर शीट्स में हेराफेरी, हस्ताक्षरों में गड़बड़ी

OMR sheets altered, signatures forged, says SIT report on Group-I 2018 recruitment — diagram

एसआईटी रिपोर्ट: एपीपीएससी ग्रुप-I 2018 भर्ती में ओएमआर शीट्स में हेराफेरी, हस्ताक्षरों में गड़बड़ी

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Recruitment fraud cycle

✎ लोक सेवा आयोगों की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और जवाबदेही सुनिश्चित करना सुशासन और सार्वजनिक विश्वास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता, सत्यनिष्ठा और अभिशासन।
  • Prelims: राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC), भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, OMR शीट में हेरफेर, जाली हस्ताक्षर, विशेष जांच दल (SIT), भ्रष्टाचार, नैतिकता और जवाबदेही
  • Essay: लोक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व।, भर्ती प्रक्रियाओं में कदाचार: कारण, प्रभाव और समाधान।

त्वरित पुनरावृत्ति: लोक सेवा आयोगों की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और जवाबदेही सुनिश्चित करना सुशासन और सार्वजनिक विश्वास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) द्वारा 2018 में आयोजित ग्रुप-I भर्ती प्रक्रिया की जांच कर रहे एक विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में OMR शीटों में हेरफेर, अधिकारियों के हस्ताक्षरों का जालसाजी, उत्तर पुस्तिकाओं का अनधिकृत मूल्यांकन और उम्मीदवारों के चयन में अनियमितताओं जैसे कई गंभीर कदाचारों का खुलासा हुआ है। यह मामला लोक सेवा आयोगों की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

पृष्ठभूमि

  • दिसंबर 2018 में APPSC द्वारा ग्रुप-I भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके लिए 1.14 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था।
  • प्रारंभिक परीक्षा मई 2019 में और मुख्य परीक्षा दिसंबर 2020 में आयोजित की गई थी।
  • जांच में पाया गया कि मूल्यांकन प्रक्रिया दो निजी फर्मों को सौंपी गई थी, जिनके तत्कालीन APPSC सचिव से संबंध होने की बात कही गई है।
  • APPSC द्वारा पहचाने गए 452 योग्य विषय विशेषज्ञों को दरकिनार कर लगभग 25 स्कूल शिक्षकों, निजी व्याख्याताओं, 66 डेटा एंट्री ऑपरेटरों, क्लर्कों, सुरक्षा गार्डों और इलेक्ट्रीशियन को मूल्यांकन कार्य में लगाया गया।
  • उत्तर पुस्तिकाओं को APPSC के स्ट्रॉन्ग रूम से हटाकर कथित तौर पर 84 दिनों तक एक रिसॉर्ट में रखा गया, जो APPSC नियमों का उल्लंघन था।
  • केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं द्वारा 736 उम्मीदवारों के परीक्षा पत्रों की जांच में 718 OMR शीटों में बदलाव पाए गए, जिनमें से 160 चयनित उम्मीदवारों की OMR शीटों में हेरफेर किया गया था।
  • रिपोर्ट में परीक्षक-1, परीक्षक-2, जांच अधिकारियों और शिविर अधिकारियों के हस्ताक्षरों में भी जालसाजी का उल्लेख किया गया है।

लोक सेवा आयोगों की भर्ती प्रक्रिया और चुनौतियाँ

  • भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत स्थापित संवैधानिक निकाय हैं, जिनका मुख्य कार्य संघ और राज्यों के लिए लोक सेवकों की भर्ती करना है।
  • इन आयोगों का उद्देश्य योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित करना और सार्वजनिक सेवाओं में निष्पक्षता, पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखना है।
  • भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न चरण शामिल होते हैं, जिनमें अधिसूचना जारी करना, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाएँ आयोजित करना, साक्षात्कार (यदि लागू हो) और अंतिम चयन सूची जारी करना शामिल है।
  • OMR शीट (Optical Mark Recognition) का उपयोग वस्तुनिष्ठ प्रकार की परीक्षाओं में उत्तरों के मूल्यांकन के लिए किया जाता है, जो मानवीय त्रुटि को कम करने और मूल्यांकन में गति लाने में सहायक होती हैं।
  • भर्ती प्रक्रियाओं में कदाचार, जैसे OMR शीट में हेरफेर, जाली हस्ताक्षर, अनधिकृत मूल्यांकन और प्रश्न पत्र लीक, सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं और योग्य उम्मीदवारों के अवसरों को प्रभावित करते हैं।
  • ऐसे कदाचारों से निपटने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाता है, जो किसी विशिष्ट मामले की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
  • भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कानूनी ढाँचा, तकनीकी समाधान (जैसे डिजिटल मूल्यांकन), सख्त निगरानी और नैतिक आचरण आवश्यक हैं।
  • न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) भी भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को चुनौती देने और न्याय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण तंत्र है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
OMR शीटों में हेरफेर यह परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है, जिससे योग्य उम्मीदवारों का चयन बाधित होता है।
हस्ताक्षरों का जालीकरण यह दर्शाता है कि प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की मिलीभगत या उनकी पहचान का दुरुपयोग किया गया, जो धोखाधड़ी का एक स्पष्ट मामला है।
अनाधिकृत मूल्यांकनकर्ता योग्य विषय विशेषज्ञों के बजाय निजी फर्मों द्वारा नियुक्त अप्रशिक्षित व्यक्तियों से मूल्यांकन कराना परिणामों की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।
परीक्षा सामग्री का अनाधिकृत स्थानांतरण APPSC के नियमों का उल्लंघन करते हुए OMR शीटों को स्ट्रांग रूम से बाहर ले जाना, कदाचार और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन को दर्शाता है।
डुप्लीकेट OMR शीटों का मुद्रण यह बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की संभावना को इंगित करता है, जहाँ मूल शीटों को बदलकर फर्जी शीटों का उपयोग किया गया हो सकता है।

महत्व

शासन और नैतिकता

  • यह घटना सार्वजनिक सेवा आयोगों (Public Service Commissions) की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाती है, जो राज्य प्रशासन के लिए योग्य कर्मियों का चयन करते हैं।
  • यह सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में नैतिक मानकों के पतन और भ्रष्टाचार के गहरे पैठ को उजागर करता है, जिससे सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है।

सामाजिक प्रभाव

  • लाखों मेहनती और योग्य उम्मीदवारों के लिए यह एक बड़ा झटका है, जो अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद रखते हैं।
  • यह युवाओं में व्यवस्था के प्रति अविश्वास और निराशा पैदा करता है, जिससे सामाजिक अशांति और विरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कानूनी और संस्थागत

  • यह घटना भर्ती एजेंसियों के भीतर आंतरिक नियंत्रणों और निगरानी प्रणालियों की विफलता को दर्शाती है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुधारों की आवश्यकता है।
  • यह न्यायिक हस्तक्षेप और विशेष जांच टीमों (Special Investigation Teams – SIT) की आवश्यकता को रेखांकित करता है ताकि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

चुनौतियाँ

1. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव

  • OMR शीटों में हेरफेर और हस्ताक्षरों का जालीकरण जैसी घटनाएं भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को दर्शाती हैं।
  • निजी फर्मों को मूल्यांकन का कार्य सौंपना और अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा मूल्यांकन कराना प्रक्रिया की अपारदर्शिता को बढ़ाता है।

2. संस्थागत भ्रष्टाचार

  • APPSC के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित संलिप्तता संस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
  • यह दर्शाता है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए सार्वजनिक पद का दुरुपयोग किया गया।

3. प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग

  • बारकोड नंबरों का उपयोग करके डुप्लीकेट OMR शीटों का मुद्रण प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग को दर्शाता है।
  • यह सुरक्षा प्रणालियों में कमजोरियों को उजागर करता है जिनका फायदा उठाया जा सकता है।

4. विश्वास का संकट

  • इस तरह की घटनाओं से जनता, विशेषकर उम्मीदवारों का, सरकारी भर्ती एजेंसियों पर से विश्वास उठ जाता है।
  • यह राज्य प्रशासन और सुशासन की अवधारणा पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
OMR शीटों का हेरफेर परीक्षा परिणामों की सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता पर सीधा हमला।
हस्ताक्षरों का जालीकरण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग और आपराधिक गतिविधि।
अनाधिकृत मूल्यांकनकर्ता अयोग्य व्यक्तियों द्वारा मूल्यांकन से परिणामों की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर समझौता।
परीक्षा सामग्री का स्थानांतरण सुरक्षा प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन और कदाचार की संभावना।
डुप्लीकेट OMR शीटों का मुद्रण बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और मूल परिणामों को बदलने का प्रयास।
निजी फर्मों को भुगतान अयोग्य सेवाओं के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता।

आगे की राह

  • भर्ती प्रक्रियाओं में एंड-टू-एंड डिजिटल समाधानों को अपनाना, जिसमें OMR शीटों की डिजिटल स्कैनिंग और मूल्यांकन शामिल हो, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो सके।
  • सभी महत्वपूर्ण चरणों, जैसे OMR शीटों का भंडारण और मूल्यांकन, की सीसीटीवी निगरानी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण सुनिश्चित करना।
  • मूल्यांकनकर्ताओं के चयन और प्रशिक्षण के लिए सख्त मानदंड स्थापित करना और उनकी जवाबदेही तय करना।
  • शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना और व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) संरक्षण प्रदान करना ताकि कदाचार की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित किया जा सके।
  • भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके और एक निवारक प्रभाव पैदा हो सके।
  • भर्ती एजेंसियों के भीतर आंतरिक ऑडिट और निगरानी प्रणालियों को मजबूत करना ताकि अनियमितताओं का समय पर पता लगाया जा सके।
  • सार्वजनिक सेवा आयोगों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए उनकी जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विधायी सुधार करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

लोक सेवा आयोग · भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता · नैतिक शासन · जवाबदेही · न्यायिक समीक्षा · प्रशासनिक सुधार · भ्रष्टाचार · OMR शीट हेरफेर · विशेष जांच दल (SIT) · लोक प्रशासन में सत्यनिष्ठा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 315’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 320’, ‘note’: ‘लोक सेवा आयोगों के कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 16’, ‘note’: ‘सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता’}

अवधारणा प्रवाह

भर्ती अधिसूचना जारी  →  परीक्षा आयोजित और OMR शीटों का संग्रह  →  OMR शीटों का अनाधिकृत स्थानांतरण और हेरफेर  →  अयोग्य व्यक्तियों द्वारा मूल्यांकन और हस्ताक्षरों का जालीकरण  →  फर्जी परिणामों के आधार पर चयन  →  SIT जांच और अनियमितताओं का खुलासा  →  न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) की स्थापना का प्रावधान है।
2. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है, लेकिन उन्हें केवल राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है।
3. लोक सेवा आयोगों का मुख्य कार्य संघ और राज्य स्तर पर सिविल सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 315 संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का प्रावधान करता है। कथन 2 भी सही है। SPSC के अध्यक्ष और सदस्यों को राज्यपाल नियुक्त करते हैं, लेकिन हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है। कथन 3 भी सही है। लोक सेवा आयोगों का प्राथमिक कार्य योग्यता-आधारित भर्ती सुनिश्चित करना है।

Q2. अभिकथन (A): लोक सेवा आयोगों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करती हैं और सुशासन के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
कारण (R): ये आयोग संवैधानिक निकाय हैं जिन्हें निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अनियमितताएं सार्वजनिक विश्वास को कम करती हैं और सुशासन के लिए हानिकारक हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि आयोग संवैधानिक निकाय हैं और उनकी भूमिका निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि संवैधानिक निकायों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ही अनियमितताओं के सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करने का कारण बनती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल ही में आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) की भर्ती प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं के आलोक में, भारत में लोक सेवा आयोगों की स्वायत्तता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: APPSC मामले का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए लोक सेवा आयोगों (PSCs) के महत्व और उनकी संवैधानिक स्थिति (अनुच्छेद 315-323) का परिचय दें।
2. स्वायत्तता का महत्व: PSCs की स्वायत्तता क्यों महत्वपूर्ण है (राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति, योग्यता-आधारित चयन, सार्वजनिक विश्वास)।
3. जवाबदेही का महत्व: PSCs की जवाबदेही क्यों आवश्यक है (पारदर्शिता, निष्पक्षता, कदाचार की रोकथाम, संवैधानिक मूल्यों का पालन)।
4. वर्तमान चुनौतियाँ: APPSC मामले में उजागर हुई चुनौतियों का उल्लेख करें (OMR शीट में हेरफेर, हस्ताक्षर जालसाजी, अनधिकृत मूल्यांकन, निजी फर्मों की भूमिका, आंतरिक नियंत्रणों की विफलता)।
5. स्वायत्तता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपाय:
क. संवैधानिक और कानूनी उपाय: अनुच्छेद 317 (हटाने की प्रक्रिया), न्यायिक समीक्षा का दायरा।
ख. प्रशासनिक सुधार: भर्ती प्रक्रिया का डिजिटलीकरण और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, OMR शीट की सुरक्षा, मूल्यांकनकर्ताओं की योग्यता और प्रशिक्षण, मजबूत आंतरिक ऑडिट प्रणाली, शिकायत निवारण तंत्र।
ग. नैतिक शासन: आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों के लिए आचार संहिता, हितों के टकराव से बचाव।
घ. प्रौद्योगिकी का उपयोग: AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करके अनियमितताओं का पता लगाना, बायोमेट्रिक सत्यापन।
ङ. पारदर्शिता: परिणामों का समय पर प्रकाशन, चयन प्रक्रिया का विस्तृत विवरण, RTI के तहत जानकारी उपलब्ध कराना।
च. विशेष जांच दल (SIT) की भूमिका और सिफारिशों का कार्यान्वयन।
6. निष्कर्ष: लोक सेवा आयोगों की विश्वसनीयता बनाए रखने और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए स्वायत्तता और जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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