17 Aug एसईईडी योजना: विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों का आर्थिक सशक्तिकरण
SEED SchemeDWBDNT BoardDNT CommunitiesNC-DNT Commission✎ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) विमुक्त (D-notified), घुमंतू (Nomadic) और अर्ध-घुमंतू (Semi-Nomadic) समुदायों (DNT/NT/SNT) के कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए केंद्रित…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक सशक्तिकरण | GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप, कमजोर वर्गों का कल्याण
- Prelims: विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय (DNT/NT/SNT), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए विकास और कल्याण बोर्ड (DWBDNC), डीएनटी के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए योजना (SEED), राष्ट्रीय आयोग (DNT/NT/SNT के लिए), कल्याणकारी योजनाएँ
- Essay: भारत में हाशिए पर पड़े समुदायों का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, समावेशी विकास: सामाजिक न्याय के आयाम
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) विमुक्त (D-notified), घुमंतू (Nomadic) और अर्ध-घुमंतू (Semi-Nomadic) समुदायों (DNT/NT/SNT) के कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए केंद्रित उपाय लागू कर रहा है।
पृष्ठभूमि
- विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय भारत के सबसे हाशिए पर पड़े और कमजोर समुदायों में से हैं, जिनकी आबादी लगभग 15 करोड़ होने का अनुमान है।
- ऐतिहासिक रूप से, इन समुदायों को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान ‘आपराधिक जनजाति अधिनियम’ (Criminal Tribes Act) के तहत ‘जन्मजात अपराधी’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिससे उन्हें सामाजिक कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ा।
- स्वतंत्रता के बाद, इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया, लेकिन इन समुदायों को ‘विमुक्त’ (D-notified) कर दिया गया, फिर भी वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे।
- इन समुदायों की विशिष्ट समस्याओं और आवश्यकताओं के समाधान के लिए, जनवरी 2015 में डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग (National Commission for DNT/NT/SNT) का गठन किया गया था, जिसने दिसंबर 2017 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- आयोग की सिफारिशों के आधार पर, केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए विकास और कल्याण बोर्ड (DWBDNC) का गठन किया।
- DWBDNC इन समुदायों के कल्याण और विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों को लागू करने के लिए एक नोडल निकाय के रूप में कार्य करता है।
डीएनटी के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए योजना (सीईईडी) क्या है?
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका और आवास के क्षेत्रों में व्यापक सहायता प्रदान करके उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान करना है।
- यह योजना डीएनटी उम्मीदवारों को सिविल सेवा, रेलवे, बैंक आदि जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए मुफ्त गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्रदान करती है, जिससे उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें।
- स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में, यह योजना डीएनटी समुदायों के सदस्यों को स्वास्थ्य बीमा में सहायता प्रदान करती है।
- आजीविका घटक के तहत, यह समुदाय स्तर पर आजीविका से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देती है, जैसे कौशल विकास प्रशिक्षण और सूक्ष्म-उद्यमों के लिए सहायता, जिससे इन समुदायों के सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
- आवास के लिए, यह योजना इन समुदायों के सदस्यों को घरों के निर्माण के वास्ते वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे उन्हें सुरक्षित और स्थायी आवास मिल सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| शिक्षा सहायता | डीएनटी उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्रदान करके शैक्षिक अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करना। |
| स्वास्थ्य देखभाल सहायता | डीएनटी समुदायों के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य बीमा में सहायता प्रदान करके स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
| आजीविका पहल | समुदाय स्तर पर आजीविका से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देकर आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना। |
| आवास सहायता | इन समुदायों के सदस्यों के लिए घरों के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करके बेहतर जीवन-यापन की स्थिति सुनिश्चित करना। |
| व्यापक दृष्टिकोण | शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका और आवास को कवर करके इन समुदायों की मुख्य सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करना। |
महत्व
सामाजिक न्याय
- यह योजना विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों (DNT/NT/SNT) को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करती है, जो सामाजिक न्याय के संवैधानिक आदर्शों के अनुरूप है।
- इन समुदायों के ऐतिहासिक वंचन और हाशिए पर धकेले जाने को संबोधित करती है, जिससे उन्हें समान अवसर प्राप्त हो सकें।
मानव विकास
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच प्रदान करके मानव विकास सूचकांकों में सुधार करती है, जिससे इन समुदायों के जीवन स्तर में वृद्धि होती है।
- आजीविका और आवास सहायता के माध्यम से गरीबी उन्मूलन और जीवन की गुणवत्ता में सुधार में योगदान करती है।
आर्थिक सशक्तिकरण
- प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और आजीविका पहलों के माध्यम से आर्थिक अवसरों का सृजन करती है, जिससे इन समुदायों की आय में वृद्धि होती है।
- वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें आत्मनिर्भर बनने और आर्थिक रूप से सशक्त होने में मदद करती है।
समावेशी विकास
- यह सुनिश्चित करती है कि देश के विकास का लाभ समाज के सबसे वंचित वर्गों तक भी पहुंचे, जिससे समावेशी विकास का लक्ष्य प्राप्त हो सके।
- इन समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पहचानती है और उन्हें पूरा करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप प्रदान करती है।
चुनौतियाँ
1. पहचान और प्रमाणीकरण
- इन समुदायों के सदस्यों की सटीक पहचान और प्रमाणीकरण एक चुनौती है, क्योंकि उनके पास अक्सर स्थायी निवास या पहचान दस्तावेज नहीं होते हैं।
- यह योजना के लाभों को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: कमजोर वर्ग
2. जागरूकता और पहुंच
- इन समुदायों के बीच योजना के बारे में जागरूकता की कमी हो सकती है, जिससे वे इसके लाभों का पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाते हैं।
- दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों तक पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
3. संस्थागत क्षमता
- योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मजबूत संस्थागत ढांचे और पर्याप्त मानव संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता एक महत्वपूर्ण कारक है।
यूपीएससी लिंक: शासन: संस्थागत क्षमता
4. सांस्कृतिक संवेदनशीलता
- इन समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं और जीवन शैली को समझना और उनका सम्मान करना महत्वपूर्ण है।
- योजनाओं को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए जो उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखे।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं
5. निगरानी और मूल्यांकन
- योजना के प्रभाव का नियमित और प्रभावी ढंग से निगरानी और मूल्यांकन करना आवश्यक है ताकि इसकी कमियों को दूर किया जा सके और सुधार किए जा सकें।
- डेटा संग्रह और विश्लेषण में चुनौतियां हो सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पहचान की कमी | कई डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के पास स्थायी निवास या पहचान प्रमाण की कमी है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना मुश्किल हो जाता है। |
| सामाजिक बहिष्कार | ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर होने के कारण, इन समुदायों को अभी भी सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। |
| शिक्षा का अभाव | शिक्षा तक सीमित पहुंच और उच्च ड्रॉपआउट दर के कारण साक्षरता दर कम है, जिससे रोजगार के अवसर कम होते हैं। |
| स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच | स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और वित्तीय बाधाओं के कारण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच सीमित है। |
| आजीविका असुरक्षा | पारंपरिक आजीविका के अवसरों में कमी और कौशल की कमी के कारण आजीविका असुरक्षा बनी हुई है। |
| आवास की कमी | स्थायी आवास की कमी और खराब रहने की स्थिति इन समुदायों के लिए एक बड़ी समस्या है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए विकास और कल्याण बोर्ड (DWBDNC)
आगे की राह
- डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाए, जिसमें उनकी सटीक पहचान और प्रमाणीकरण शामिल हो।
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएं, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
- स्थानीय स्वशासन संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को योजना के कार्यान्वयन में शामिल करके जमीनी स्तर पर पहुंच बढ़ाई जाए।
- इन समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएं।
- स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तैनाती की जाए।
- आवास सहायता के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता और बिजली तक पहुंच सुनिश्चित की जाए।
- योजना के प्रभाव का नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाए और प्राप्त फीडबैक के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।
- इन समुदायों के सांस्कृतिक मूल्यों और प्रथाओं का सम्मान करते हुए समावेशी विकास मॉडल अपनाए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय · डीएनटी/एनटी/एसएनटी · सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय · डीएनटी के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए योजना (सीईईडी) · विकास और कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) · सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण · शिक्षा · स्वास्थ्य देखभाल · आजीविका · आवास · समावेशी विकास · वंचित समुदाय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता
- अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का प्रतिषेध
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि
अवधारणा प्रवाह
डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों का ऐतिहासिक वंचन और हाशिए पर धकेला जाना। → इन समुदायों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन (जनवरी 2015)। → आयोग की सिफारिशों के आधार पर DWBDNC का गठन (फरवरी 2019)। → DWBDNC द्वारा SEED योजना का कार्यान्वयन। → शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और आवास में व्यापक सहायता प्रदान करना। → इन समुदायों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (डीएनटी/एनटी/एसएनटी) समुदायों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन जनवरी 2015 में किया गया था।
2. डीएनटी के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए योजना (सीईईडी) केवल शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है।
3. विकास और कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय आयोग का गठन जनवरी 2015 में हुआ था। कथन 2 गलत है क्योंकि सीईईडी योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका और आवास जैसे चार घटक शामिल हैं। कथन 3 सही है। डीडब्ल्यूबीडीएनसी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
Q2. डीएनटी के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए योजना (सीईईडी) के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
1. डीएनटी उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्रदान करना।
2. डीएनटी समुदायों के लिए स्वास्थ्य बीमा में सहायता प्रदान करना।
3. समुदाय स्तर पर आजीविका से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देना।
4. डीएनटी समुदायों के सदस्यों के लिए घरों के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सीईईडी योजना के चार मुख्य घटक हैं: शिक्षा (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग), स्वास्थ्य देखभाल (स्वास्थ्य बीमा), आजीविका (समुदाय स्तर पर पहल) और आवास (घरों के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता)। अतः सभी चारों उद्देश्य सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में डीएनटी के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए योजना (सीईईडी) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह योजना इन समुदायों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने में पर्याप्त है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (डीएनटी/एनटी/एसएनटी) समुदायों के संक्षिप्त परिचय और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (जैसे आपराधिक जनजाति अधिनियम, 1871) से करें।
सीईईडी योजना के मुख्य घटकों (शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका, आवास) और उनके उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करें।
योजना के सकारात्मक प्रभावों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालें, जैसे कि शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुंच में सुधार।
योजना की सीमाओं और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण करें। इसमें शामिल हो सकते हैं: इन समुदायों की विशाल और विविध आबादी तक पहुंच की कमी, योजना के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाएँ, सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी, भूमिहीनता और पहचान संबंधी मुद्दे, और आजीविका के अवसरों की स्थिरता।
डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग की सिफारिशों और विकास और कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) की भूमिका का उल्लेख करें।
सुधार के लिए सुझाव दें, जैसे कि लक्षित हस्तक्षेप, सामुदायिक भागीदारी, डेटा संग्रह में सुधार और अंतर-मंत्रालयी समन्वय।
निष्कर्ष में, समावेशी विकास के लिए इन समुदायों के सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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