19 Sep कर्नाटक ने नीति आयोग के ई-मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में तीसरा स्थान हासिल किया
✎ भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) नीति आयोग द्वारा विकसित एक मूल्यांकन ढाँचा है जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की प्रगति का आकलन करता है, जिसमें कर्नाटक ने IEMI 2025 में तीसरा…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण
- Prelims: भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI), नीति आयोग, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), चार्जिंग अवसंरचना, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, फेम इंडिया योजना, बैटरी स्वैपिंग नीति
- Essay: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति: चुनौतियाँ और अवसर, सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत के प्रयास
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) नीति आयोग द्वारा विकसित एक मूल्यांकन ढाँचा है जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की प्रगति का आकलन करता है, जिसमें कर्नाटक ने IEMI 2025 में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) 2025 में कर्नाटक ने 73 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में की गई प्रगति का मूल्यांकन करता है, जिसमें नीतिगत ढाँचे और कार्यान्वयन परिणाम दोनों शामिल हैं। दिल्ली ने 84 अंकों के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया, उसके बाद महाराष्ट्र 78 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
पृष्ठभूमि
- इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicles – EV) परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान प्रस्तुत करते हैं।
- भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए कई नीतियाँ और योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें फेम इंडिया योजना (FAME India Scheme) प्रमुख है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत चार्जिंग अवसंरचना (Charging Infrastructure) का विकास आवश्यक है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के चार्जिंग स्टेशन शामिल हों।
- राज्यों की नीतियाँ और उनके कार्यान्वयन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कर्नाटक 2017 में एक समर्पित इलेक्ट्रिक वाहन नीति पेश करने वाला भारत का पहला राज्य था।
- इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि के साथ-साथ बैटरी उत्पादन और रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकियों का विकास भी महत्वपूर्ण है, जो एक चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देगा।
- भारत का लक्ष्य 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) प्राप्त करना है, जिसमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एक प्रमुख स्तंभ है।
भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) क्या है?
- भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) नीति आयोग द्वारा WRI इंडिया के सहयोग से विकसित एक व्यापक मूल्यांकन ढाँचा है।
- यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की प्रगति का आकलन करता है।
- यह नीतिगत ढाँचे, कार्यान्वयन परिणामों और विभिन्न मापदंडों पर राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है।
- सूचकांक में ‘चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रेडीनेस (CIR)’ जैसे महत्वपूर्ण संकेतक शामिल हैं, जिसमें कर्नाटक ने 97 अंक प्राप्त किए, जो देश में सबसे अधिक है।
- IEMI 2025 सूचकांक का दूसरा संस्करण है, जो राज्यों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में अपनी प्रगति को ट्रैक करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करता है।
- यह सूचकांक राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है और इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की दिशा में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- सूचकांक 65 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले क्षेत्राधिकारों को ‘शीर्ष प्रदर्शनकर्ता’ (Top Performers) के रूप में वर्गीकृत करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| NITI आयोग का भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) 2025 | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक गतिशीलता की प्रगति का मूल्यांकन करता है, जिसमें नीतिगत ढाँचे और कार्यान्वयन परिणाम दोनों शामिल हैं। |
| कर्नाटक का तीसरा स्थान | राज्य की इलेक्ट्रिक गतिशीलता को आगे बढ़ाने में हुई प्रगति को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है। |
| चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तत्परता (CIR) में सर्वोच्च स्कोर (97) | इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में सहायता के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे के विकास में कर्नाटक की अग्रणी भूमिका को दर्शाता है। |
| समर्पित इलेक्ट्रिक वाहन नीति (2017) | कर्नाटक भारत का पहला राज्य था जिसने इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री, चार्जिंग बुनियादी ढाँचे और समर्पित विनिर्माण क्षेत्रों को कवर करते हुए एक समर्पित नीति पेश की। |
| EV बिक्री में वृद्धि और पंजीकरण | राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता और उनके लिए अनुकूल माहौल का संकेत देता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है, जिससे आयात बिल में कमी आती है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
- EV विनिर्माण और संबंधित उद्योगों में निवेश से रोज़गार सृजन होता है और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
- चार्जिंग बुनियादी ढाँचे के विकास से नए व्यावसायिक अवसर पैदा होते हैं और सेवा क्षेत्र का विस्तार होता है।
पर्यावरणीय महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहन कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) और वायु प्रदूषण (Air Pollution) को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।
- यह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के भारत के लक्ष्यों में योगदान देता है और सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देता है।
सामरिक महत्व
- इलेक्ट्रिक गतिशीलता में प्रगति भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करती है।
- यह ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को बढ़ाता है और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति देश की भेद्यता को कम करता है।
सामाजिक महत्व
- बेहतर वायु गुणवत्ता से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, जिससे बीमारियों का बोझ कम होता है।
- शांत इलेक्ट्रिक वाहन शहरी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को कम करने में मदद करते हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
चुनौतियाँ
1. चार्जिंग बुनियादी ढाँचे का विस्तार
- देश भर में, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, पर्याप्त और सुलभ चार्जिंग स्टेशनों की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- तेज़ चार्जिंग (Fast Charging) सुविधाओं की उपलब्धता और मानकीकरण (Standardization) सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा
2. बैटरी प्रौद्योगिकी और लागत
- इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत, विशेषकर बैटरी की लागत, उपभोक्ताओं के लिए एक बाधा बनी हुई है।
- बैटरी के जीवनकाल, रेंज और सुरक्षा में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था
3. जागरूकता और उपभोक्ता स्वीकृति
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों और रखरखाव के बारे में उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी है।
- ‘रेंज एंग्जायटी’ (Range Anxiety) यानी चार्ज खत्म होने के डर को दूर करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, अर्थव्यवस्था
4. कौशल विकास और रोज़गार
- इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए कुशल कार्यबल की कमी है, जिसमें विनिर्माण, रखरखाव और चार्जिंग स्टेशन संचालन शामिल हैं।
- पारंपरिक ऑटोमोबाइल उद्योग से EV उद्योग में संक्रमण के लिए श्रमिकों को पुनः कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास, उद्योग
5. कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण
- इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के निपटान और पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए प्रभावी नीतियों और बुनियादी ढाँचे की कमी है।
- पर्यावरण पर बैटरी कचरे के नकारात्मक प्रभाव को कम करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, अपशिष्ट प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च प्रारंभिक लागत | इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को आम जनता के लिए कम आकर्षक बनाती है। |
| सीमित चार्जिंग बुनियादी ढाँचा | विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा के लिए, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में बाधा डालता है। |
| बैटरी का जीवनकाल और प्रतिस्थापन लागत | उपभोक्ताओं के लिए दीर्घकालिक स्वामित्व की लागत और चिंताएँ बढ़ाती है। |
| ग्रिड पर दबाव | इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या से बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है, खासकर पीक आवर्स में। |
| कौशल अंतराल | इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल कार्यबल की कमी। |
आगे की राह
- चार्जिंग बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना और देश भर में इसकी पहुँच बढ़ाना, विशेषकर राजमार्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में।
- बैटरी प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि लागत कम हो सके, रेंज बढ़ाई जा सके और सुरक्षा में सुधार हो सके।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives) जैसे सब्सिडी, कर छूट और आसान ऋण उपलब्ध कराना।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों, रखरखाव और चार्जिंग सुविधाओं के बारे में सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना।
- इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- पुरानी बैटरियों के सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण के लिए प्रभावी नीतियाँ और बुनियादी ढाँचा विकसित करना।
- स्मार्ट ग्रिड (Smart Grid) प्रौद्योगिकियों में निवेश करना ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती माँग को कुशलता से प्रबंधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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अवधारणा प्रवाह
NITI आयोग द्वारा IEMI का प्रकाशन → राज्यों की इलेक्ट्रिक गतिशीलता प्रगति का मूल्यांकन → कर्नाटक का शीर्ष प्रदर्शन (तीसरा स्थान) → EV नीति, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बिक्री में वृद्धि → इलेक्ट्रिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में सफलता → पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) 2025 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह नीति आयोग द्वारा WRI इंडिया के सहयोग से विकसित किया गया है।
2. यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में प्रगति का मूल्यांकन करता है।
3. कर्नाटक IEMI 2025 में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि IEMI नीति आयोग द्वारा WRI इंडिया के सहयोग से विकसित किया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में प्रगति का मूल्यांकन करता है। कथन 3 सही है क्योंकि कर्नाटक ने IEMI 2025 में तीसरा स्थान प्राप्त किया है और उसे शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में वर्गीकृत किया गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा राज्य भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति पेश करने वाला पहला राज्य था?
- महाराष्ट्र
- दिल्ली
- कर्नाटक
- गुजरात
उत्तर: कर्नाटक — कर्नाटक 2017 में एक समर्पित इलेक्ट्रिक वाहन नीति पेश करने वाला भारत का पहला राज्य था, जिसमें वाहन बिक्री, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और समर्पित विनिर्माण क्षेत्रों को शामिल किया गया था।
Q3. अभिकथन (A): इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से भारत में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
कारण (R): इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तुलना में अधिक ऊर्जा कुशल होते हैं और शून्य टेलपाइप उत्सर्जन करते हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन ऊर्जा कुशल होते हैं और सीधे कोई उत्सर्जन नहीं करते हैं, जो अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में राज्यों की भूमिका का परीक्षण करें। इस संदर्भ में, नीति आयोग के भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) जैसे सूचकांकों का महत्व क्या है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के महत्व और इसके पर्यावरणीय व आर्थिक लाभों का संक्षिप्त परिचय।
2. राज्यों की भूमिका: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में राज्यों की विभिन्न भूमिकाओं का विश्लेषण करें, जिसमें शामिल हैं:
a. नीति निर्माण: समर्पित EV नीतियों का विकास (जैसे कर्नाटक की 2017 की नीति)।
b. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को बढ़ावा देना।
c. प्रोत्साहन और सब्सिडी: EV खरीद पर वित्तीय प्रोत्साहन, रोड टैक्स में छूट आदि।
d. विनिर्माण और R&D को बढ़ावा देना: EV और बैटरी विनिर्माण इकाइयों को आकर्षित करना।
e. जागरूकता और क्षमता निर्माण: उपभोक्ताओं और उद्योग के लिए जागरूकता कार्यक्रम।
f. सार्वजनिक परिवहन में EV का एकीकरण: ई-बसों और अन्य सार्वजनिक EV का उपयोग।
3. IEMI का महत्व: नीति आयोग के भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (IEMI) जैसे सूचकांकों के महत्व पर चर्चा करें:
a. प्रदर्शन मूल्यांकन: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन।
b. प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा: राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना।
c. नीति निर्माण में सहायता: डेटा-संचालित नीतिगत निर्णयों के लिए आधार प्रदान करना।
d. सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान: सफल मॉडल और रणनीतियों को उजागर करना जिन्हें अन्य राज्य अपना सकते हैं।
e. निवेश आकर्षित करना: निवेशकों को सूचित निर्णय लेने में मदद करना।
f. जवाबदेही और पारदर्शिता: राज्यों को उनके EV लक्ष्यों के प्रति जवाबदेह बनाना।
4. निष्कर्ष: भारत के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों के सक्रिय योगदान और IEMI जैसे उपकरणों की निरंतर आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक राज्य हाल ही में NITI आयोग द्वारा जारी ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025’ में किस स्थान पर रहा है?
- पहला स्थान
- दूसरा स्थान
- तीसरा स्थान
- चौथा स्थान
उत्तर: तीसरा स्थान — NITI आयोग द्वारा जारी ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025’ में कर्नाटक राज्य तीसरे स्थान पर रहा है।
Mains: कर्नाटक राज्य द्वारा ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025’ में तीसरे स्थान पर पहुंचने के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों तथा आने वाले समय में आवश्यक सुधारों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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