केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27 : प्रमुख क्षेत्र

केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27 : प्रमुख क्षेत्र

केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27 : प्रमुख क्षेत्र 

    इस बजट के तीन प्रमुख कर्तव्य हैं— (1) आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देना निवेश, उद्योग और रोजगार सृजन को मजबूत करना (2) जनता की उम्मीदों को पूरा करना ...  Budget 2026:वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार के तीन कर्तव्यों को किया स्पष्ट, छह क्षेत्रों में पहलों की भी घोषणा - Nirmala Sitharaman Highlights Three Key Duties Of Government In ...

सामान्य अध्ययन-III :  भारतीय अर्थव्यवस्था वृद्धि एवं विकास योजना सरकारी बजट राजकोषीय नीति समावेशी विकास
प्रिलिम्स के लिये: केंद्रीय बजट, बायोसिमिलर, इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना, दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण, ऑरेंज इकोनॉमी, प्रतिभूति लेनदेन कर (STT)
मेन्स के लिये: आर्थिक विकास और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण में बजट की भूमिका, विनिर्माण-आधारित विकास और आत्मनिर्भर भारत, पूंजीगत व्यय-आधारित विकास बनाम रोज़गार सृजन, महत्त्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक स्वायत्तता

वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27  में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को बढ़ावा देना 

  • बजट 2026-27 में जॉब क्रिएशन, इनोवेशन और सॉफ्ट पावर के लिए ऑरेंज इकोनॉमी (क्रिएटिव इकोनॉमी) पर ज़ोर दिया गया है।
    ऑरेंज इकोनॉमी में नॉलेज-बेस्ड एक्टिविटीज़ शामिल हैं जो आइडियाज़ को कल्चरल गुड्स में बदलती हैं, जिन्हें इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के हिसाब से वैल्यू दी जाती है।
  • खास घोषणाओं में स्कूल/कॉलेजों में AVGC लैब्स और ईस्ट में एक नया NID शामिल है, जो भारत की $30 बिलियन की क्रिएटिव इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगा
  • केंद्रीय वित्त मंत्री ने संघीय बजट 2026 में ऑरेंज इकोनॉमी (क्रिएटिव इकोनॉमी) पर ज़ोर दिया।। साथ ही, रोजगार सृजित करने, नवाचार, निर्यात और सॉफ्ट पावर में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।

ऑरेंज इकोनॉमी क्या है?

  • ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ शब्द का प्रतिपादन 2013 में कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति इवान डुके मार्केज़ और फेलिप बुइट्रैगो ने अपनी पुस्तक “ऑरेंज इकोनॉमी: एन इनफिनिट ऑपर्च्युनिटी” में किया था।
  • यह उन ज्ञान-आधारित आर्थिक गतिविधियों को संदर्भित करती है, जहां विचारों और रचनात्मकता को सांस्कृतिक वस्तुओं एवं सेवाओं में बदल दिया जाता है। इनका मूल्य मुख्य रूप से बौद्धिक संपदा द्वारा निर्धारित होता है।
  • पारंपरिक विनिर्माण आधारित संवृद्धि के विपरीत, इस अर्थव्यवस्था में शामिल क्षेत्रक भौतिक वस्तुओं की बजाय विचारों, कलात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक पूंजी से अपना मूल्य प्राप्त करते हैं।
  • प्रमुख क्षेत्रक: इसमें दृश्य-श्रव्य मीडिया (फिल्म, टीवी), लाइव संगीत कार्यक्रम, गेमिंग उद्योग, डिजाइन, थिएटर आदि शामिल हैं।

बजट 2026-27 की मुख्य घोषणाएं : 

AVGC (एनीमेशन, VFX, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्रक: 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने के लिए मुंबई स्थित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) को सहायता दी जाएगी।
डिजाइन शिक्षा को मजबूती: चैलेंज प्रतिस्पर्धा’ के माध्यम से पूर्वी क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) स्थापित किया जाएगा।
वर्तमान में भारत में 7 NIDs हैं, जिन्हें राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त है।

ऑरेंज इकोनॉमी की वर्तमान स्थिति : 

विश्व भर में, क्रिएटिव इकॉनमी से वार्षिक रूप से $2 ट्रिलियन से अधिक का राजस्व और लगभग 50 मिलियन नौकरियां सृजित होने का अनुमान है।
UNCTAD के अनुमानों के अनुसार, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ देशों की GDP में 0.5% से लेकर 7% से अधिक का योगदान देते हैं।
भारत की क्रिएटिव इंडस्ट्री का आकार $30 बिलियन का है और इसमें रोजगार का हिस्सा भारत की कामकाजी आबादी का लगभग 8% है।

केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27 में वस्त्र क्षेत्रक के लिए एकीकृत कार्यक्रम 

  • यूनियन बजट 2026-27 में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम की घोषणा की गई ताकि फाइबर से लेकर फैशन तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सके।
  • मुख्य सब-कंपोनेंट्स में नेशनल फाइबर स्कीम, टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम, नेशनल हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम, टेक्स-इको इनिशिएटिव और समर्थ 2.0 शामिल हैं।
  • अन्य पहल खादी, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट को मजबूत करने और मेगा टेक्सटाइल पार्क्स के माध्यम से टेक्निकल टेक्सटाइल को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्रक के लिए घोषित एकीकृत कार्यक्रम एक व्यापक नीतिगत ढांचा है। इसका उद्देश्य फाइबर (रेशे) से लेकर फैशन तक और ग्रामीण उद्योगों से लेकर वैश्विक बाजारों तक संपूर्ण वस्त्र क्षेत्रक मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है।

इस कार्यक्रम के पांच प्रमुख उप-घटक और अन्य महत्वपूर्ण पहलें निम्नलिखित हैं:

एकीकृत कार्यक्रम के पांच उप-घटक

राष्ट्रीय फाइबर (रेशा) योजना: इसका लक्ष्य फाइबर क्षेत्रक में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
यह योजना रेशम, ऊन व जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ-साथ मानव निर्मित और आधुनिक युग के नए रेशों को भी सहायता प्रदान करेगी।
वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना: इस घटक का उद्देश्य मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और साझा परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों की स्थापना के लिए पूंजीगत सहायता के माध्यम से पारंपरिक वस्त्र उद्योग संकुलों का आधुनिकीकरण करना है।
राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम: हथकरघा एवं हस्तशिल्प के लिए मौजूदा योजनाओं को इस एकीकृत राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत समाहित व मजबूत किया जाएगा।
टेक्स-इको पहल: इसका उद्देश्य विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और पर्यावरण के अनुकूल वस्त्र एवं परिधान निर्माण को बढ़ावा देना है।
समर्थ 2.0: इसका लक्ष्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ गहन सहयोग के माध्यम से वस्त्र कौशल तंत्र का आधुनिकीकरण करना है।

वस्त्र क्षेत्रक के लिए घोषित अन्य पहलें : 

महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल: यह पहल खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूती प्रदान करेगी। यह वैश्विक बाजार संपर्क और ब्रांडिंग आदि पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।
साथ ही, यह ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पहल को भी समर्थन करेगी।
मेगा टेक्सटाइल पार्क्स और तकनीकी वस्त्र: यह पहल तकनीकी वस्त्र क्षेत्रक में विकास को बढ़ावा देगी। यह औद्योगिक, चिकित्सा, रक्षा एवं अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए एक उच्च-क्षमता वाला क्षेत्रक है।

केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27  में ‘बायोफार्मा शक्ति’ (Biopharma SHAKTI) पहल : 

  • केंद्रीय वित्त मंत्री ने बायोफार्मा शक्ति की घोषणा की ताकि भारत को बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स पर फोकस करते हुए एक ग्लोबल बायोमैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा सके।
  • इस पहल में 5 सालों में ₹10,000 करोड़ की फंडिंग, 3 नए NIPERs बनाना, 7 मौजूदा NIPERs को अपग्रेड करना और 1,000+ क्लिनिकल ट्रायल सेंटर्स का नेटवर्क बनाना शामिल है।
  • भारत की बायोइकॉनमी 2024 में बढ़कर $165.7 बिलियन हो गई है, और 2030 तक $300 बिलियन का टारगेट है, जो GDP में 4.25% का योगदान देगा।
  • केंद्रीय वित्त मंत्री ने ‘बायोफार्मा शक्ति/ Biopharma SHAKTI (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उन्नति के लिए रणनीति)’ की घोषणा की। यह पहल भारत को वैश्विक जैव-विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

बायोफार्मा शक्ति/ Biopharma SHAKTI के बारे में  : 

उद्देश्य: भारत को बायोफार्मास्यूटिकल विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना। इसका मुख्य ध्यान ‘बायोलॉजिक्स’ और ‘बायोसिमिलर्स’ के घरेलू उत्पादन के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार करने पर है।
बायोलॉजिक्स: ये वे दवाएं हैं, जो प्राकृतिक और जीवित स्रोतों जैसे पशु, पादप कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों से बनाई जाती हैं। इनमें टीके, रक्त व रक्त के घटक, सोमेटिक सेल्स, जीन थेरेपी, प्रोटीन आदि शामिल हैं।
बायोसिमिलर्स: ये दवाएं बायोलॉजिक्स की ही नकल होती हैं। ये मूल जैविक उत्पाद के समान ही प्रभावशाली होती हैं और इनमें कोई महत्वपूर्ण चिकित्सकीय अंतर नहीं होता है।
वित्त-पोषण: अगले 5 वर्षों के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान

रणनीति:

3 नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित किए जाएंगे तथा 7 मौजूदा संस्थाओं को अपग्रेड किया जाएगा।
पूरे देश में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त नैदानिक (क्लिनिकल) परीक्षण केंद्रों का एक नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों और एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा संवर्ग (कैडर) की नियुक्ति की जाएगी, ताकि दवाओं की मंजूरी में लगने वाला समय कम हो सके।

संभावित परिणाम: 

उन्नत जैव-विनिर्माण अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा;वाचार को बढ़ावा मिलेगा और हाई-वैल्यू (अत्यधिक सटीक व प्रभाव) वाली अगली पीढ़ी की थेरेपी में भारत की क्षमताओं में वृद्धि होगी। भारत में नैदानिक शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी और दवा विकास में तेजी आएगी।
अत्यधिक कुशल कार्यबल विकसित होगा; उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्रक के विकास में सहायता प्राप्त होगी।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था :

जैव-अर्थव्यवस्था का अर्थ एक ऐसी आर्थिक प्रणाली से है, जो भोजन, ऊर्जा और औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए पादप, जानवरों एवं सूक्ष्मजीवों जैसे नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग करती है।
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 की 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है। वर्ष 2030 तक इसके 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
यह देश की GDP में 4.25% का योगदान देती है। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था चार मुख्य उप-क्षेत्रकों से संचालित होती है: जैव-औद्योगिक (47%), बायोफार्मा (35%), बायोएग्री (8%) और जैव-अनुसंधान (9%)

केंद्रीय बजट (Union Budget)  2026-27 में कृषि विकास के लिए ‘भारत-विस्तार’ (Bharat-VISTAAR) 

भारत-विस्तार/ Bharat-VISTAAR (वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज) एक बहुभाषी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल होगा। यह ‘एग्रीस्टैक’ पोर्टल और कृषि पद्धतियों पर ‘ICAR’ (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के पैकेज को AI प्रणाली के साथ एकीकृत करेगा।एग्रीस्टैक को कृषि के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के रूप में परिकल्पित किया गया है। यह ‘इंडिया डिजिटल इकोसिस्टम आर्किटेक्चर’ (InDEA) 2.0 पर आधारित है।

भारत-विस्तार/ Bharat-VISTAAR के बारे में

विस्तार (VISTAAR) कृषि सूचना एवं सलाहकार सेवाओं के प्रति समर्पित एक खुला, अंतर्संचालनीय और संघीय (Federated) सार्वजनिक नेटवर्क है।
संघीय (Federated) सार्वजनिक नेटवर्क: आपस में जुड़े व स्वायत्त डिजिटल नेटवर्क्स का एक समूह, जो एक साथ मिलकर एक एकल एवं एकीकृत वर्चुअल नेटवर्क के तौर पर कार्य करते हैं।
यह एक विकेंद्रीकृत भंडार (Repository) के रूप में कार्य करेगा, जो विभिन्न निजी व सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर सत्यापित कृषि संबंधी कंटेंट, सर्वोत्तम प्रथाओं और कृषि-कौशल की खोज एवं उपलब्धता को आसान बनाएगा।

संभावित महत्त्व: 

  • डेटा-संचालित और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।
  • सटीकता, स्थानीयकृत अंतर्दृष्टि, डेटा सेवाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदान करके प्रत्येक चरण {आदान (इनपुट), फसल उत्पादन, बाजार आदि} पर किसान द्वारा निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा।
  • अनुकूलित, फसल-विशिष्ट और क्षेत्र-विशिष्ट सलाहकारी सहायता के माध्यम से बाजार के जोखिमों को कम करना।
  • वास्तविक समय (real-time) निगरानी, कृषि विस्तार सेवाओं के बेहतर वितरण और लक्षित हस्तक्षेपों में सरकार की मदद होगी।

केंद्रीय बजट “चैंपियन MSMEs” शामिल

  • तीन तरह का तरीका इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल मदद के ज़रिए MSMEs को ‘विकसित भारत’ के लिए ‘चैंपियन’ के तौर पर सपोर्ट करता है।
  • इक्विटी सपोर्ट में ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड और ‘आत्मनिर्भर भारत फंड’ के लिए ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप शामिल है।
  • लिक्विडिटी को TReDS प्लेटफॉर्म के ज़रूरी इस्तेमाल, क्रेडिट गारंटी, GeM इंटीग्रेशन और सेकेंडरी मार्केट डेवलपमेंट जैसे तरीकों से बढ़ाया जाता है।
  • यह ‘विकसित भारत’ के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को ‘चैंपियन’ के तौर पर आगे बढ़ने में मदद करने के लिए एक त्रि-आयामी दृष्टिकोण को मान्यता देता है।

इस त्रि-आयामी दृष्टिकोण में निम्नलिखित शामिल हैं:

  इक्विटी सहायता

  चयनित मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10,000 करोड़ का समर्पित SME संवृद्धि कोष।
  2021 में स्थापित ‘आत्मनिर्भर भारत निधि’ में सूक्ष्म उद्यमों के लिए ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि (top up) का प्रस्ताव।

 तरलता यानी चलनिधि सहायता

 TReDS (व्यापार प्राप्य बट्टा प्रणाली) प्लेटफॉर्म की क्षमता को अधिकतम करने के लिए चार विशिष्ट उपाय:
 अनिवार्य TReDS उपयोग: सभी CPSEs (केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्रक के उद्यम) की MSMEs से खरीदारी का निपटान TReDS के माध्यम से किया जाएगा।
 क्रेडिट गारंटी सहायता: सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट (CGTMSE), TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए गारंटी प्रदान करेगा। इससे ऋणदाताओं का जोखिम कम होगा।
 GeM–TReDS एकीकरण: गवर्नमेंट-ई मार्केट (GeM) को TReDS के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि सरकारी खरीद डेटा को वित्त-पोषकों के साथ साझा किया जा सके। इससे MSMEs को तेजी से और वहनीय ऋण मिल सकेगा।
द्वितीयक बाजार विकास: तरलता बढ़ाने के लिए TReDS प्राप्तियों (receivables) को ‘परिसंपत्ति-समर्थित प्रतिभूतियों’ के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

 पेशेवर सहायता (कॉर्पोरेट मित्र)

ये मान्यता प्राप्त पैरा-प्रोफेशनल किफायती लागत पर अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में MSMEs की मदद करेंगे।
ICAI (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया), ICSI (भारतीय कंपनी सचिव संस्थान) और ICMAI (भारतीय लागत लेखाकार संस्थान) जैसी पेशेवर सस्थाओं को इन पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए अल्पकालिक व मॉड्यूल-आधारित पाठ्यक्रम डिजाइन करने की सुविधा दी जाएगी।

TReDS (व्यापार प्राप्य बट्टा प्रणाली) के बारे में : 

TReDS एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है। इसे MSMEs को उनकी प्राप्तियों (receivables) को नकदी में बदलकर कार्यशील पूंजी प्राप्त करने में मदद करने के लिए स्थापित किया गया है।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के बारे में:

इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और सिडबी द्वारा सन 2000 में स्थापित किया गया था।
इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से जमानत के अभाव में या बिना किसी तीसरे पक्ष की गारंटी के MSMEs को स्वीकृत ऋण सुविधाओं के लिए ऋण देने वाली सदस्य संस्थाओं (MLIs) को ऋण गारंटी प्रदान करना है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.निम्नलिखित में से कौन-से विषय केंद्रीय बजट एवं आर्थिक नीतियों से सीधे संबद्ध हैं?

  1. इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना
  2. दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक
  3. प्रतिभूति लेनदेन कर (STT)
  4. ऑरेंज इकोनॉमी

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (d)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. पूंजी बजट और राजस्व बजट के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिये। इन दोनों बजटों के संघटकों को समझाइये। (2021)

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