31 Jul केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम-किसान योजना को 2031 तक बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये आवंटित
✎ PM-KISAN योजना किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करती है, जिसे 2030-31 तक 3.15 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विस्तारित किया गया है, जो कृषि निवेश और ग्रामीण आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
- Prelims: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), आधार प्रमाणीकरण, किसान कल्याण योजनाएँ, कृषि निवेश, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, नीति आयोग का मूल्यांकन, वित्तीय समावेशन
- Essay: भारत में कृषि क्षेत्र का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और अवसर, डिजिटल इंडिया और ग्रामीण विकास: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: PM-KISAN योजना किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करती है, जिसे 2030-31 तक 3.15 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विस्तारित किया गया है, जो कृषि निवेश और ग्रामीण आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस अवधि के लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है, जो किसानों की समृद्धि और राष्ट्र की प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- PM-KISAN योजना को फरवरी 2019 में छोटे और सीमांत किसानों को आय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- यह योजना पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करती है।
- योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि निवेश बढ़ाने और उनकी आजीविका को मजबूत करने में मदद करना है।
- यह योजना प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली का उपयोग करती है, जिसमें आधार प्रमाणीकरण और डिजिटल सत्यापन जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिससे पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होती है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान, इस योजना ने किसानों को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता बनी रही।
- स्वतंत्र मूल्यांकनों, जैसे कि नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा किए गए अध्ययनों ने योजना के सकारात्मक प्रभावों की पुष्टि की है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना क्या है?
- PM-KISAN केंद्र सरकार की एक योजना है जो देश के सभी भूमिधारक किसान परिवारों को आय सहायता प्रदान करती है।
- इस योजना के तहत, पात्र किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में तीन समान किस्तों (प्रत्येक 2,000 रुपये) में हस्तांतरित की जाती है।
- योजना का प्राथमिक लक्ष्य किसानों को कृषि आदानों जैसे बीज, उर्वरक, सिंचाई और कृषि मशीनरी खरीदने में मदद करना है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता बढ़े।
- यह योजना अनौपचारिक ऋण पर किसानों की निर्भरता को कम करने और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने में भी सहायक है।
- PM-KISAN डिजिटल इंडिया पहल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आधार-आधारित प्रमाणीकरण और डिजिटल लाभार्थी सत्यापन के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का प्रभावी ढंग से उपयोग करती है।
- योजना ने पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही के उच्च मानक स्थापित किए हैं, जिससे लाभार्थियों तक सहायता निर्बाध रूप से पहुँचती है।
- अब तक, 23 किस्तों में किसानों के बैंक खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है, जिसमें महिला किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं।
- योजना के विस्तार से कृषि में निवेश करने की किसानों की क्षमता बढ़ेगी, उत्पादकता में सुधार होगा और कृषि संबंधी जोखिम कम करने में मदद मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना का विस्तार | प्रधानमंत्री-किसान योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी, कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय। |
| प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) | पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। |
| पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी | आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और एक मजबूत DBT प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है। |
| महिला किसानों का सशक्तिकरण | योजना के तहत महिला किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है, जो कुल लाभार्थियों का लगभग एक चौथाई हैं। |
| कृषि निवेश को बढ़ावा | किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि आवश्यकताओं में समय पर निवेश करने में मदद। |
| ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती | किसानों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि, अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता में कमी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करके कृषि निवेश को बढ़ावा देना और उनकी क्रय शक्ति में वृद्धि करना।
- अनौपचारिक ऋण (Informal Credit) पर किसानों की निर्भरता को कम करना, जिससे ग्रामीण ऋणग्रस्तता में कमी आती है।
- कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से खाद्यान्न सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करना।
सामाजिक महत्व
- छोटे और सीमांत किसानों (Small and Marginal Farmers) की आजीविका को मजबूत करना, जिससे ग्रामीण गरीबी कम होती है।
- महिला किसानों को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करके लैंगिक समानता (Gender Equality) और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
- किसानों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) को बढ़ाना, जिससे कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी मजबूत होती है।
प्रशासनिक महत्व
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता (Transparency) और दक्षता (Efficiency) स्थापित करना।
- डिजिटल इंडिया (Digital India) पहल का प्रभावी उपयोग करके सरकारी सेवाओं की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करना।
- योजना के क्रियान्वयन में जवाबदेही (Accountability) और लीकेज (Leakage) को कम करना।
चुनौतियाँ
1. पात्रता मानदंड का निर्धारण
- योजना के तहत भूमिधारक किसान परिवारों को लाभ मिलता है, जिससे भूमिहीन कृषि श्रमिकों (Landless Agricultural Labourers) को बाहर रखा जा सकता है।
- भूमि रिकॉर्ड (Land Records) के अद्यतन (Updation) और सत्यापन में चुनौतियाँ, जिससे अपात्र लाभार्थियों को लाभ मिल सकता है या पात्र छूट सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र में चुनौतियाँ, सामाजिक न्याय
2. वित्तीय समावेशन की कमी
- दूरदराज के क्षेत्रों में कुछ किसानों के पास बैंक खातों की कमी या डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) का अभाव, जिससे DBT का लाभ उठाने में कठिनाई हो सकती है।
- तकनीकी बाधाएँ जैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी (Internet Connectivity) की कमी, जिससे ऑनलाइन सत्यापन और आवेदन प्रक्रिया में समस्याएँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास, डिजिटल इंडिया
3. मुद्रास्फीति का प्रभाव
- 6,000 रुपये प्रति वर्ष की राशि मुद्रास्फीति (Inflation) के कारण समय के साथ अपनी वास्तविक क्रय शक्ति (Real Purchasing Power) खो सकती है।
- कृषि इनपुट (Agricultural Inputs) की बढ़ती लागत की तुलना में यह सहायता अपर्याप्त हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति के प्रभाव
4. कृषि संकट का व्यापक समाधान
- PM-किसान योजना केवल आय सहायता प्रदान करती है, लेकिन कृषि संकट के अन्य मूल कारणों जैसे बाजार तक पहुंच (Market Access), भंडारण (Storage) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP) की चुनौतियों का समाधान नहीं करती।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) से होने वाले नुकसान के लिए यह योजना सीधे तौर पर कोई बीमा या मुआवजा प्रदान नहीं करती।
यूपीएससी लिंक: कृषि नीतियाँ, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमिहीन किसानों का बहिष्करण | योजना केवल भूमिधारक किसानों को लाभ देती है, जिससे भूमिहीन कृषि श्रमिक वंचित रह जाते हैं। |
| भूमि रिकॉर्ड की त्रुटियाँ | गलत या पुराने भूमि रिकॉर्ड के कारण अपात्र लाभार्थियों को लाभ मिलना या पात्रों का छूट जाना। |
| डिजिटल डिवाइड | ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी, DBT के लाभों तक पहुँच में बाधा। |
| मुद्रास्फीति का क्षरण | वित्तीय सहायता की राशि का मुद्रास्फीति के कारण समय के साथ वास्तविक मूल्य खो देना। |
| कृषि संकट के अन्य पहलू | योजना बाजार पहुंच, भंडारण, ऋण उपलब्धता जैसी व्यापक कृषि चुनौतियों का समाधान नहीं करती। |
| जलवायु परिवर्तन का जोखिम | प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के लिए प्रत्यक्ष सुरक्षा का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
आगे की राह
- भूमिहीन कृषि श्रमिकों को भी आय सहायता प्रदान करने के लिए योजना के दायरे का विस्तार करना या उनके लिए पूरक योजनाएँ विकसित करना।
- भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और अद्यतन (Updation) की प्रक्रिया को तेज करना ताकि पात्रता सत्यापन में त्रुटियों को कम किया जा सके।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना ताकि DBT का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।
- कृषि इनपुट की बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए वित्तीय सहायता की राशि की समय-समय पर समीक्षा करना।
- PM-किसान को अन्य कृषि योजनाओं जैसे फसल बीमा (Crop Insurance), कृषि ऋण (Agricultural Credit) और बाजार लिंकेज (Market Linkages) के साथ एकीकृत करना।
- किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करने के लिए अनुकूलन रणनीतियों (Adaptation Strategies) और बीमा उत्पादों को बढ़ावा देना।
- कृषि उपज के लिए बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं (Processing Facilities) के विकास पर ध्यान केंद्रित करना ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) · किसान कल्याण · कृषि निवेश · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · आय सहायता · डिजिटल इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · कृषि उत्पादकता · वित्तीय समावेशन · खाद्यान्न उत्पादन · महिला किसान सशक्तिकरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।
- अनुच्छेद 39: राज्य अपनी नीति का विशेषतया इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से नागरिकों को जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों।
- अनुच्छेद 46: राज्य जनता के दुर्बल वर्गों के, विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा।
अवधारणा प्रवाह
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी → PM-किसान योजना का विस्तार → किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता → कृषि निवेश में वृद्धि → उत्पादन और आय में सुधार → ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी।
2. इस योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता चार समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
3. नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) के मूल्यांकन के अनुसार, 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने सहायता राशि का उपयोग कृषि गतिविधियों और कृषि निवेश के लिए किया।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि पीएम-किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में हस्तांतरित की जाती है, न कि चार। कथन 3 सही है क्योंकि DMEO के मूल्यांकन के अनुसार, 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने सहायता राशि का उपयोग कृषि गतिविधियों और कृषि निवेश के लिए किया।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. किसानों को कृषि निवेश के लिए आय सहायता प्रदान करना।
2. अनौपचारिक ऋण पर किसानों की निर्भरता को कम करना।
3. कृषि क्षेत्र में महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — पीएम-किसान योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि निवेश के लिए आय सहायता प्रदान करना और अनौपचारिक ऋण पर उनकी निर्भरता को कम करना है। हालांकि, महिला किसानों को लाभ मिलता है, लेकिन योजना का प्राथमिक उद्देश्य उनकी भागीदारी बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना भारतीय कृषि क्षेत्र में किसानों की आय सहायता और सशक्तिकरण में किस प्रकार सहायक रही है? योजना के प्रमुख प्रभावों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पीएम-किसान योजना का संक्षिप्त परिचय (कब शुरू हुई, उद्देश्य, वित्तीय सहायता)।
2. **सहायता और सशक्तिकरण में भूमिका:**
* **प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT):** पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही।
* **कृषि निवेश:** बीज, उर्वरक, सिंचाई, मशीनरी में निवेश को बढ़ावा।
* **अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता में कमी:** ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिरता।
* **महिला किसानों का सशक्तिकरण:** लाभार्थियों में महिला किसानों का महत्वपूर्ण अनुपात (1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक)।
* **खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि:** 2020-21 से 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र और खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के आंकड़े।
* **डिजिटल इंडिया का उपयोग:** आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन।
3. **प्रमुख प्रभाव (सकारात्मक):**
* नीति आयोग के DMEO मूल्यांकन के निष्कर्ष (92% कृषि गतिविधियों में उपयोग, 85% आय में सुधार)।
* कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय सहायता का महत्व।
* किसानों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता में वृद्धि।
4. **चुनौतियाँ (समालोचनात्मक परीक्षण):**
* **पात्रता मानदंड:** भूमिहीन किसानों और बटाईदारों को शामिल न करना।
* **वित्तीय सहायता की अपर्याप्तता:** 6,000 रुपये प्रति वर्ष का कृषि लागतों के मुकाबले कम होना।
* **लाभार्थियों की पहचान में त्रुटियाँ:** आधार और भूमि रिकॉर्ड के मिलान में समस्याएँ।
* **क्षेत्रीय असमानताएँ:** विभिन्न राज्यों में योजना के प्रभाव में अंतर।
* **मुद्रास्फीति का प्रभाव:** वास्तविक आय में कमी।
5. **निष्कर्ष:** योजना की सफलता को स्वीकार करते हुए, इसकी पहुँच और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सुधारों पर बल देना, ताकि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में किसानों की भूमिका सुनिश्चित हो सके।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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