27 Jul कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना: जानें UPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य


मानचित्र व माइंड-मैप: Kosi-Mechi Inter-State Link Project
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (नदी प्रणालियाँ, जल संसाधन) | GS Paper II — शासन (अंतर-राज्यीय जल विवाद, केंद्र-राज्य संबंध), अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत-नेपाल संबंध, सीमा पार नदियाँ) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि, सिंचाई, अवसंरचना), पर्यावरण (बाढ़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन)
- Prelims: कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP), सप्त-कोसी बहुउद्देशीय परियोजना, सन-कोसी कमला डायवर्जन बहुउद्देशीय परियोजना, भारत-नेपाल जल सहयोग, पूर्वी कोसी मुख्य नहर, बाढ़ नियंत्रण
- Essay: जल प्रबंधन और राष्ट्रीय विकास: चुनौतियाँ एवं समाधान, भारत की विदेश नीति में पड़ोसी देशों के साथ जल सहयोग का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना बिहार में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे PMKSY-AIBP के तहत केंद्रीय सहायता प्राप्त है और यह भारत-नेपाल जल सहयोग के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना हाल ही में चर्चा में रही क्योंकि इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के तहत शामिल किया गया है, जिसके लिए केंद्र सरकार 3,652.56 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। यह परियोजना मार्च 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है और इसका उद्देश्य बिहार में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना तथा बाढ़ नियंत्रण में सहायता करना है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार नेपाल के साथ कोसी नदी पर बांधों के निर्माण के लिए नियमित रूप से बातचीत कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में जल प्रबंधन के व्यापक प्रयासों पर प्रकाश पड़ता है।
पृष्ठभूमि
- कोसी नदी, जिसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है, अपनी विनाशकारी बाढ़ और मार्ग बदलने की प्रवृत्ति के लिए जानी जाती है, जिससे बिहार के बड़े हिस्से में जान-माल का भारी नुकसान होता है।
- नदी जोड़ो परियोजना (Inter-linking of Rivers Project) भारत में जल अधिशेष वाले बेसिनों से जल की कमी वाले बेसिनों में पानी स्थानांतरित करके जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है।
- कोसी-मेची लिंक परियोजना, राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) के तहत पूर्वी नहर लिंकों में से एक है, जिसका उद्देश्य कोसी नदी के पानी को मेची नदी बेसिन में मोड़ना है।
- भारत और नेपाल के बीच सीमा पार नदियों, विशेषकर कोसी और गंडक के जल प्रबंधन को लेकर लंबे समय से सहयोग और समझौते होते रहे हैं।
- बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए जल संसाधनों का प्रबंधन बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का लक्ष्य ‘हर खेत को पानी’ सुनिश्चित करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है, जिसमें त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर केंद्रित है।
कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना क्या है?
- कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना भारत में नदी जोड़ो परियोजना का एक महत्वपूर्ण घटक है, विशेष रूप से बिहार राज्य के लिए।
- इसका मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी बेसिन में मोड़कर बिहार के सीमांचल क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है।
- यह परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के तहत शामिल है, जो केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित एक प्रमुख योजना है।
- परियोजना की कुल शेष लागत 6,143.22 करोड़ रुपये है, जिसमें से 3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की जा रही है।
- परियोजना में पूर्वी कोसी मुख्य नहर के पुनर्निर्माण का कार्य शामिल है, जिसके लिए 2639.80 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया गया है और अब तक 8.5 प्रतिशत की भौतिक प्रगति हुई है।
- इसके मार्च 2029 तक पूरा होने का लक्ष्य है, जिससे बिहार के कई जिलों में कृषि उत्पादकता में वृद्धि और बाढ़ के खतरों में कमी आने की उम्मीद है।
- यह परियोजना न केवल सिंचाई प्रदान करेगी बल्कि बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और पेयजल आपूर्ति में भी सहायक होगी।
- भारत सरकार नेपाल के साथ सप्त-कोसी बहुउद्देशीय परियोजना और सन-कोसी कमला डायवर्जन बहुउद्देशीय परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने पर भी काम कर रही है, जो इस क्षेत्र में व्यापक जल प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| परियोजना का नाम | कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना |
| कुल लागत | 6,143.22 करोड़ रुपये (3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता सहित) |
| समाप्ति की लक्षित तिथि | मार्च 2029 |
| शामिल योजना | प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) |
| मुख्य कार्य | पूर्वी कोसी मुख्य नहर का पुनर्निर्माण |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | नेपाल सरकार के साथ कोसी नदी पर बांधों के निर्माण हेतु बातचीत |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह परियोजना बिहार के सीमांचल क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करेगी, जिससे कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
- बाढ़ नियंत्रण उपायों से कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा होगी, जिससे आर्थिक स्थिरता आएगी।
- जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से क्षेत्र में जल-आधारित उद्योगों और गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक महत्व
- सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे पलायन में कमी आएगी।
- बाढ़ से होने वाले विस्थापन और जान-माल के नुकसान में कमी आएगी, जिससे स्थानीय समुदायों का जीवन स्तर सुधरेगा।
- जल सुरक्षा सुनिश्चित होने से क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा और पोषण में सुधार होगा।
पर्यावरणीय महत्व
- बाढ़ नियंत्रण उपायों से पारिस्थितिक तंत्रों को बाढ़ के विनाशकारी प्रभावों से बचाने में मदद मिलेगी।
- जल प्रबंधन से भूजल स्तर को बनाए रखने और जल-जमाव जैसी समस्याओं को कम करने में सहायता मिलेगी।
सामरिक एवं कूटनीतिक महत्व
- भारत और नेपाल के बीच जल संसाधनों के साझा प्रबंधन पर सहयोग से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और विकास परियोजनाओं से क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. अंतर-राज्यीय समन्वय
- परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए बिहार और अन्य संबंधित राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
- जल बंटवारे और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर राज्यों के बीच सहमति बनाना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
2. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- नेपाल के साथ सप्तकोसी बहुउद्देशीय परियोजना और सन-कोसी कमला डायवर्जन बहुउद्देशीय परियोजना पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देना और कार्यान्वयन शुरू करना एक जटिल प्रक्रिया है।
- राजनीतिक अस्थिरता या कूटनीतिक तनाव परियोजना की प्रगति को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारत-नेपाल संबंध, जल कूटनीति
3. वित्तीय और तकनीकी चुनौतियाँ
- परियोजना की विशाल लागत और लंबी अवधि के कारण वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- पूर्वी कोसी मुख्य नहर के पुनर्निर्माण में तकनीकी जटिलताएँ आ सकती हैं, खासकर भूवैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल कारकों के कारण।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ, सार्वजनिक वित्त
4. पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव
- परियोजना के निर्माण से स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर संभावित प्रभावों का आकलन और शमन करना आवश्यक है।
- भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से प्रभावित लोगों का उचित पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित करना एक सामाजिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन, सतत विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| परियोजना की धीमी प्रगति | पूर्वी कोसी मुख्य नहर के पुनर्निर्माण में अब तक केवल 8.5 प्रतिशत की वास्तविक प्रगति हुई है, जिससे मार्च 2029 की समय सीमा पर सवाल उठते हैं। |
| भारत-नेपाल संयुक्त समिति की बैठकें | वर्ष 2025-26 के दौरान भारत-नेपाल संयुक्त समिति की कोई बैठक नहीं हुई, जो द्विपक्षीय परियोजनाओं की प्रगति में बाधा डाल सकती है। |
| विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की स्थिति | सप्तकोसी और सन-कोसी कमला परियोजनाओं के लिए DPR अभी भी सर्वेक्षण और अध्ययन के चरणों में हैं, जिससे उनके कार्यान्वयन में देरी हो रही है। |
| बाढ़ प्रबंधन में केंद्रीय सहायता | पिछले तीन वर्षों में बिहार को बाढ़ प्रबंधन के लिए 206.77 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है, जो समस्या की गंभीरता को देखते हुए अपर्याप्त हो सकती है। |
| स्थायी कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण | भारत सरकार के विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जबकि नदी बेसिन के एकीकृत प्रबंधन के लिए एक स्थायी प्राधिकरण आवश्यक हो सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP)
आगे की राह
- परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए निर्माण गतिविधियों की निगरानी और मूल्यांकन को सुदृढ़ किया जाए।
- भारत और नेपाल के बीच संयुक्त समिति की बैठकों को नियमित रूप से आयोजित किया जाए ताकि द्विपक्षीय परियोजनाओं की प्रगति सुनिश्चित हो सके।
- सप्तकोसी और सन-कोसी कमला बहुउद्देशीय परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए और उनके कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।
- अंतर-राज्यीय जल विवादों और समन्वय संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए एक प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाए।
- परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गहन मूल्यांकन किया जाए और शमन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
- बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत बिहार जैसे राज्यों को पर्याप्त और समय पर केंद्रीय सहायता सुनिश्चित की जाए।
- जल शक्ति मंत्रालय द्वारा नदी बेसिन प्रबंधन के लिए एक एकीकृत और स्थायी दृष्टिकोण पर विचार किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 262’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
- {‘अनुच्छेद 246’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘सातवीं अनुसूची (सूची I, II, III)’: ‘जल संबंधी विषयों पर विधायी शक्तियाँ’}
अवधारणा प्रवाह
कोसी-मेची लिंक परियोजना का PMKSY-AIBP में शामिल होना → सिंचाई क्षमता में वृद्धि और बाढ़ नियंत्रण के प्रयास → कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आय में सुधार → भारत-नेपाल सहयोग से सीमा पार जल प्रबंधन → क्षेत्रीय विकास और स्थिरता को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) के तहत शामिल है।
2. इस परियोजना का उद्देश्य केवल सिंचाई सुविधाएँ प्रदान करना है और इसका बाढ़ नियंत्रण से कोई संबंध नहीं है।
3. भारत सरकार कोसी नदी पर बांधों के निर्माण के लिए नेपाल सरकार के साथ बातचीत कर रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि परियोजना PMKSY-AIBP के तहत शामिल है। कथन 2 गलत है क्योंकि परियोजना का उद्देश्य सिंचाई के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण भी है। कथन 3 सही है क्योंकि भारत सरकार बाढ़ नियंत्रण सहित पारस्परिक लाभ के लिए नेपाल के साथ बांध निर्माण पर बातचीत कर रही है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी परियोजनाएँ भारत और नेपाल के बीच जल संसाधन सहयोग से संबंधित हैं, जिनके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है?
1. सप्त-कोसी बहुउद्देशीय परियोजना
2. सन-कोसी कमला डायवर्जन बहुउद्देशीय परियोजना
3. महाकाली संधि परियोजना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — सप्त-कोसी बहुउद्देशीय परियोजना और सन-कोसी कमला डायवर्जन बहुउद्देशीय परियोजना, दोनों के लिए DPR तैयार की जा रही है। महाकाली संधि परियोजना एक अलग जल-साझाकरण समझौता है, लेकिन वर्तमान संदर्भ में DPR तैयार करने वाली परियोजनाओं में इसका उल्लेख नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना के महत्व का मूल्यांकन कीजिए और भारत में अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। साथ ही, भारत-नेपाल जल सहयोग के संदर्भ में कोसी नदी बेसिन में बहुउद्देशीय परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में कोसी-मेची लिंक परियोजना के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण जैसे लाभों को रेखांकित करें। दूसरे भाग में, अंतर-राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं से जुड़ी चुनौतियों, जैसे पर्यावरणीय प्रभाव, विस्थापन, अंतर-राज्यीय जल विवाद और वित्तीय व्यवहार्यता पर चर्चा करें। तीसरे भाग में, सप्त-कोसी और सन-कोसी कमला डायवर्जन परियोजनाओं के संदर्भ में भारत-नेपाल जल सहयोग की वर्तमान स्थिति और प्रगति को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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