खाद्यान्न उत्पादन एवं भंडारण : भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़

खाद्यान्न उत्पादन एवं भंडारण : भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़

पाठ्यक्रम – मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 – के अंतर्गत ‘ भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास ’ खण्ड के अर्थशास्त्र एवं कृषि से संबंधित और ‘ खाद्यान्न उत्पादन एवं भंडारण : भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ ’ विषय से जुड़ा हुआ   

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS), कृषि अवसंरचना कोष (AIF), कृषि विपणन अवसंरचना (AMI), भारतीय खाद्य निगम (FCI), सहकारी समिति, कोल्ड स्टोरेज, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)  

मुख्य परीक्षा के लिए – गाँवों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की क्या भूमिका है? भारत के लिए खाद्यान्न भंडारण क्यों महत्वपूर्ण है?

 

खबरों में क्यों?

 

 

  • भारत का कृषि क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है, हाल ही में खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के कारण, विशेष रूप से चर्चा में है। 
  • सतत कृषि, फसल विविधीकरण और पोषण सुरक्षा पर बढ़ते विमर्श के साथ, सरकार और नीति-निर्माता चावल, गेहूँ, मोटे अनाज (मिलेट्स) और दलहन जैसी फसलों के उत्पादन को सशक्त करने पर बल दे रहे हैं। ये फसलें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर हैं, जो भारत की विशाल जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने और ग्रामीण आजीविका को समर्थन देने में केन्द्रीय भूमिका निभाती हैं। 
  • हाल के वर्षों में फसल उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने तथा पोषण एवं जलवायु-संवेदनशील फसल के रूप में मोटे अनाज को बढ़ावा देने से कृषि क्षेत्र का महत्त्व और अधिक बढ़ा है।
  • कृषि वर्ष 2024–25 के तृतीय अग्रिम अनुमानों के अनुसार, भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है — कुल 353.96 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ है, जिसमें 117.51 मिलियन टन गेहूँ और 149.07 मिलियन टन चावल शामिल हैं।

 

खाद्यान्न भंडारण का महत्त्व : 

 

  • प्रभावी भंडारण अवसंरचना भारत की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन, अपव्यय में कमी और किसानों तथा उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 

खाद्यान्न भंडारण के प्रमुख उद्देश्य :

 

  1. कटाई के बाद हानि में कमी : आधुनिक भंडारण सुविधाएँ जैसे वैज्ञानिक गोदाम और कोल्ड स्टोरेज, कृषि उत्पादों के अपव्यय को काफी हद तक कम करती हैं।
  2. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना : पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है।
  3. किसानों को संकटग्रस्त बिक्री से बचाना : पर्याप्त भंडारण सुविधा किसानों को अपनी फसल को उचित मूल्य मिलने तक सुरक्षित रखने का अवसर देती है।
  4. मूल्य स्थिरीकरण को सुनिश्चित करना : रणनीतिक बफर स्टॉक आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचाता है।
  5. गुणवत्ता बनाए रखना : वैज्ञानिक भंडारण नमी, तापमान और कीट नियंत्रण के माध्यम से अनाज की गुणवत्ता और पोषण स्तर को सुरक्षित रखता है।

 

भारत में खाद्यान्न भंडारण प्रणाली : 

 

केंद्रीकृत भंडारण प्रणाली :

 

  • खाद्य निगम (FCI) भारत में खाद्यान्न के केंद्रीकृत भंडारण के लिए प्रमुख एजेंसी है। केंद्रीय पूल के तहत राज्यों या FCI द्वारा सीधे अनाज की खरीद की जाती है। राज्य एजेंसियों द्वारा खरीदे गए अनाज FCI को सौंपे जाते हैं, और उनकी लागत की प्रतिपूर्ति FCI द्वारा की जाती है। यह स्टॉक आगे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) या अन्य राज्यों में भेजने के लिए उपयोग होता है।
  • 1 जुलाई 2025 तक, FCI और राज्य एजेंसियों के पास केंद्रीय पूल के खाद्यान्न के लिए कुल 917.83 लाख मीट्रिक टन (LMT) की ढकी हुई एवं CAP भंडारण क्षमता उपलब्ध है।
  • सम्मिलित या शामिल भंडारण क्षमता : सम्मिलित या शामिल भंडारण क्षमता से तात्पर्य खाद्यान्नों की उस कुल मात्रा से है जिसे पूरी तरह से छत और दीवारों से घिरे ढाँचों, जैसे गोदामों, वेयरहाउसों या साइलो में संग्रहित किया जा सकता है। 
  • ‘कवर एंड प्लिंथ’ (CAP) : ‘कवर एंड प्लिंथ’ (CAP) भंडारण में खाद्यान्नों को ऊँचे प्लिंथ पर संग्रहित किया जाता है और लकड़ी के क्रेटों का उपयोग डनेज सामग्री के रूप में किया जाता है।

 

कोल्ड स्टोरेज अवसंरचना :

 

  • फलों, सब्जियाँ, डेयरी उत्पाद, मांस, समुद्री उत्पाद आदि जैसे सड़ने वाली या नाशवान वस्तुओं के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज आवश्यक है। यह ताप-नियंत्रित श्रृंखला (cold chain) उत्पादों की ताजगी और पोषण बनाए रखती है तथा नुकसान घटाती है। इसमें प्री-कूलिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोरेज, ब्लास्ट फ्रीजिंग और रेफ्रिजरेटेड परिवहन शामिल हैं।

 

विकेन्द्रीकृत भंडारण और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की भूमिका : 

 

  • विकेन्द्रीकृत भंडारण योजना 1997-98 में शुरू की गई थी, जिसके तहत राज्य स्वयं NFSA के अंतर्गत खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और वितरण करते हैं। इससे परिवहन लागत घटती है और स्थानीय खरीद को प्रोत्साहन मिलता है।
  • प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) किसानों को ऋण, विपणन और स्थानीय स्तर पर भंडारण की सुविधा प्रदान करती हैं। ये 500–2000 टन क्षमता वाले गाँव-स्तरीय गोदाम स्थापित करती हैं, जिससे किसानों को उचित मूल्य और कम परिवहन लागत का लाभ मिलता है। 
  • सरकार ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण हेतु ₹2,516 करोड़ की मंजूरी दी है। जून 2025 तक 73,492 प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) कंप्यूटरीकृत हो चुकी हैं और 5,937 नई PACS पंजीकृत की गई हैं।

 

खाद्यान्न भंडारण को सशक्त करने वाली प्रमुख योजनाएँ : 

 

  1. कृषि अवसंरचना कोष (AIF) : वर्ष 2020 में शुरू की गई यह योजना कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु मध्यम से दीर्घकालिक ऋण सुविधा प्रदान करती है। इसके अंतर्गत ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी दी जाती है। यह योजना किसानों को फार्म-गेट स्तर पर भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग और लॉजिस्टिक्स विकसित करने में मदद करती है।
  2. कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) : यह संविलित कृषि विपणन योजना (ISAM) का प्रमुख घटक है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गोदामों और भंडारण इकाइयों के निर्माण/सुधार हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है। 30 जून 2025 तक, 27 राज्यों में कुल 49,796 भंडारण परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं, जिनसे 982.94 लाख टन की भंडारण क्षमता विकसित हुई है। इन परियोजनाओं के लिए ₹4,829.37 करोड़ की सब्सिडी दी गई है।
  3. कोल्ड स्टोरेज हेतु पूंजी निवेश सब्सिडी योजना : यह योजना सड़ने वाले या नाशवान उत्पादों के वैज्ञानिक भंडारण को प्रोत्साहित करती है। सामान्य क्षेत्रों में परियोजना लागत का 35% और उत्तर-पूर्वी, पहाड़ी व अनुसूचित क्षेत्रों में 50% सब्सिडी दी जाती है। इससे कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ती है, शेल्फ-लाइफ लंबी होती है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है।
  4. सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना (2023) : मई 2023 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य सहकारी समितियों के स्तर पर गोदाम, प्रसंस्करण इकाइयाँ और उचित मूल्य की दुकानें स्थापित करना है। यह योजना AIF, AMI, SMAM और PMFME जैसी मौजूदा योजनाओं के संसाधनों को एकीकृत करती है, जिससे भंडारण क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला और किसानों की आय में सुधार हो।

 

निष्कर्ष : 

 

  • कृषि भारत की जीवनरेखा है — यह करोड़ों लोगों की आजीविका, पोषण और आर्थिक विकास का आधार है। रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद, प्रभावी भंडारण और वितरण प्रणाली सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है ताकि प्रत्येक अनाज उपभोक्ता तक पहुँचे। 
  • जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या की चुनौतियों को देखते हुए भंडारण क्षमता का विस्तार, तकनीकी उन्नयन और अपव्यय में कमी भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए निर्णायक होंगे। 
  • खाद्यान्न फसलें, केवल फसलें भर नहीं हैं, बल्कि वे भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता और वैश्विक खाद्य प्रणाली की रीढ़ हैं।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।  

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. भारत की कृषि भंडारण प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 

  1. जुलाई 2025 तक FCI और राज्य एजेंसियों के अंतर्गत कुल भंडारण क्षमता 900 LMT से अधिक है।
  2. प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) मुख्यतः गाँव-स्तरीय खरीद केंद्र और उचित मूल्य की दुकानों के रूप में कार्य करती हैं।
  3. कृषि अवसंरचना कोष (AIF) कटाई के बाद प्रबंधन हेतु ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी प्रदान करता है।

निम्न में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2 केवल
(b) 2 और 3 केवल
(c) 1 और 3 केवल
(d) 1, 2 और 3

उत्तर – (d)

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. भारत की खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता के संदर्भ में खाद्यान्न भंडारण के महत्व का विश्लेषण कीजिए। केंद्रीकृत और विकेन्द्रीकृत भंडारण प्रणालियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते हुए, कृषि अवसंरचना कोष (AIF), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) तथा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) जैसी सरकारी पहलों की इस क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में भूमिका पर चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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