गगनयात्रियों का आईएसएस मिशन प्रशिक्षण प्रारंभिक चरण पूरा, जानिए प्रमुख बिंदु

गगनयात्रियों का आईएसएस मिशन प्रशिक्षण प्रारंभिक चरण पूरा, जानिए प्रमुख बिंदु

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: गगनयान मिशन, ISRO, NASA, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS), स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान, एक्सिओम मिशन 4 (Ax-4), सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण
  • Essay: अंतरिक्ष कूटनीति: वैश्विक सहयोग और भारत की भूमिका, विज्ञान और प्रौद्योगिकी: मानव प्रगति का इंजन

त्वरित पुनरावृत्ति: गगनयानियों के प्रशिक्षण का प्रारंभिक चरण ISRO-NASA के संयुक्त मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को आगे बढ़ाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS) के लिए संयुक्त ISRO-NASA मिशन हेतु नामित गगनयानियों (अंतरिक्ष यात्रियों) के प्रशिक्षण का प्रारंभिक चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। अगस्त 2024 के पहले सप्ताह में संयुक्त राज्य अमेरिका में शुरू हुए इस प्रशिक्षण में मिशन से संबंधित विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया, जो भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का गगनयान मिशन देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
  • ISRO और NASA के बीच लंबे समय से सहयोग रहा है, जिसमें पृथ्वी अवलोकन, चंद्र अन्वेषण और अब मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
  • एक्सिओम मिशन 4 (Axiom Mission 4 – Ax-4) एक निजी अंतरिक्ष उड़ान मिशन है जो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंच प्रदान करता है, और इसमें भारतीय गगनयात्री भी शामिल होंगे।
  • यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करेगा जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता है, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में इसकी स्थिति मजबूत होगी।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन एक बहुराष्ट्रीय सहयोगी परियोजना है जो विभिन्न देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण (Microgravity) वातावरण में वैज्ञानिक अनुसंधान करने का अवसर प्रदान करती है।

गगनयानियों का प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन

  • प्रारंभिक प्रशिक्षण चरण में मिशन से संबंधित जमीनी सुविधाओं का दौरा, मिशन प्रक्षेपण चरणों का अवलोकन और स्पेसएक्स सूट फिट जांच शामिल थी।
  • गगनयानियों को स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के विभिन्न ऑनबोर्ड प्रणालियों से परिचित कराया गया, जिसमें अंतरिक्ष से फोटोग्राफी, दैनिक संचालन और संचार प्रोटोकॉल शामिल थे।
  • प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू अंतरिक्ष में विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों, विशेषकर चिकित्सा आपात स्थितियों से निपटने का अभ्यास था।
  • आगामी प्रशिक्षण में अंतरिक्ष स्टेशन के अमेरिकी कक्षीय खंड के शेष मॉड्यूल और सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण वातावरण में वैज्ञानिक अनुसंधान प्रयोग करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पृथ्वी की निचली कक्षा में एक मॉड्यूलर अंतरिक्ष स्टेशन है, जो विभिन्न देशों के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है।
  • यह स्टेशन संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, कनाडा, जापान और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष कार्यक्रमों का एक संयुक्त प्रयास है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
गगनयानियों का प्रारंभिक प्रशिक्षण चरण पूर्ण यह ISRO और NASA के संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS) मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
संयुक्त ISRO-NASA मिशन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है और भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाता है।
एक्सिओम मिशन 4 (Ax-4) के लिए प्रशिक्षण यह मिशन वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ानों और ISS तक पहुंच में भारत की भागीदारी को दर्शाता है।
प्रशिक्षण में आपातकालीन परिदृश्य शामिल अंतरिक्ष में सुरक्षा और आकस्मिकता प्रबंधन के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जिसमें चिकित्सा आपात स्थितियाँ भी शामिल हैं।
स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान से परिचितता आधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और प्रणालियों के साथ गगनयानियों की दक्षता सुनिश्चित करता है।

महत्व

सामरिक महत्व

  • यह मिशन भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करता है और अंतरिक्ष अन्वेषण में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
  • ISRO और NASA के बीच सहयोग अंतरिक्ष कूटनीति (Space Diplomacy) को मजबूत करता है और भविष्य के संयुक्त उद्यमों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व

  • गगनयानियों का प्रशिक्षण अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान और सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) वातावरण में प्रयोगों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight) क्षमताओं को विकसित करने और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में मदद करेगा।

आर्थिक महत्व

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और विकास से संबंधित उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास से अन्य क्षेत्रों में भी नवाचार और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुकूलन

  • अमेरिकी प्रणालियों और तकनीकों को भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित करना एक चुनौती हो सकती है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) समझौतों और बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

2. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का समन्वय

  • दो अलग-अलग अंतरिक्ष एजेंसियों (ISRO और NASA) के बीच समन्वय और संचार सुनिश्चित करना जटिल हो सकता है।
  • विभिन्न देशों के नियामक और सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है।

3. मानव सुरक्षा और स्वास्थ्य

  • अंतरिक्ष में मानव सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है, जिसमें आपातकालीन स्थितियों का प्रबंधन शामिल है।
  • दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों के लिए गगनयानियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी महत्वपूर्ण है।

4. उच्च लागत और संसाधन प्रबंधन

  • मानव अंतरिक्ष मिशनों में भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है।
  • संसाधनों का कुशल प्रबंधन और लागत-प्रभावशीलता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
प्रशिक्षण की जटिलता विभिन्न प्रणालियों और आपातकालीन परिदृश्यों में गगनयानियों को पूरी तरह से कुशल बनाना।
अंतरिक्ष में जोखिम विकिरण, माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव और तकनीकी विफलताओं सहित अप्रत्याशित खतरों का सामना करना।
मिशन की समय-सीमा मिशन को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा करना, जिसमें विभिन्न चरणों का समन्वय शामिल है।
अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानूनों और संधियों का अनुपालन सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission)

आगे की राह

  • गगनयानियों के लिए उन्नत प्रशिक्षण मॉड्यूल को समय पर पूरा करना, जिसमें ISS के शेष अमेरिकी कक्षीय खंड और सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण में वैज्ञानिक प्रयोग शामिल हैं।
  • ISRO और NASA के बीच तकनीकी और परिचालन समन्वय को और मजबूत करना, जिससे मिशन की सफलता सुनिश्चित हो सके।
  • अंतरिक्ष में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल (Emergency Response Protocol) और चिकित्सा सहायता प्रणालियों को लगातार बेहतर बनाना।
  • मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने हेतु अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भविष्य के मिशनों के लिए भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को तैयार करना।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना, जिससे नवाचार और लागत-दक्षता बढ़ सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

गगनयान मिशन · अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन · अंतरिक्ष सहयोग · मानव अंतरिक्ष उड़ान · इसरो-नासा संयुक्त मिशन · अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी · सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान · अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण

अवधारणा प्रवाह

गगनयानियों का प्रारंभिक प्रशिक्षण पूर्ण  →  ISRO-NASA संयुक्त ISS मिशन की दिशा में प्रगति  →  अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगों की तैयारी  →  भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का विकास  →  वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में भारत की स्थिति मजबूत

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. गगनयान मिशन और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. गगनयान मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजना है।
2. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित एक कृत्रिम उपग्रह है।
3. इसरो और नासा के बीच संयुक्त मिशन के तहत गगनयान यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करेंगे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है। गगनयान मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना है, न कि चंद्रमा पर। कथन 2 सही है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित एक बहुराष्ट्रीय अनुसंधान सुविधा है। कथन 3 सही है। हालिया समाचार के अनुसार, इसरो और नासा के संयुक्त प्रयास के तहत गगनयान यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करेंगे।

Q2. अंतरिक्ष मिशनों के संदर्भ में, ‘गगनयान यात्री’ के प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण में निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधियाँ शामिल थीं?

1. मिशन-संबंधी जमीनी सुविधा पर्यटन।
2. SpaceX ड्रैगन अंतरिक्ष यान से परिचय।
3. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के ऑनबोर्ड सिस्टम से परिचित होना।
4. अंतरिक्ष में विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों के लिए प्रशिक्षण।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए समाचार के अनुसार, गगनयान यात्रियों के प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण में मिशन-संबंधी जमीनी सुविधा पर्यटन, SpaceX ड्रैगन अंतरिक्ष यान और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के ऑनबोर्ड सिस्टम से परिचय, तथा अंतरिक्ष में विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों के लिए प्रशिक्षण शामिल था। SpaceX सूट फिट चेक और चयनित अंतरिक्ष खाद्य विकल्प भी इस चरण का हिस्सा थे।

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के संबंध में सही है?

  1. यह मिशन भारत को जीवाश्म ईंधन का शुद्ध निर्यातक बनाने पर केंद्रित है।
  2. इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
  3. यह मिशन केवल परिवहन क्षेत्र में हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देता है।
  4. इस मिशन के तहत परमाणु ऊर्जा का उपयोग करके हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा।

उत्तर: इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। — राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है और न ही केवल परमाणु ऊर्जा पर निर्भर करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भारत के रणनीतिक हितों को कैसे आगे बढ़ाता है? इसरो और नासा के बीच संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालें, जैसे कि लागत साझाकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार और भू-राजनीतिक प्रभाव। दूसरे भाग में, इसरो और नासा के संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन मिशन का उदाहरण देते हुए बताएं कि यह सहयोग भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को कैसे मजबूत करता है, गगनयान यात्रियों के प्रशिक्षण और भविष्य की मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, तथा भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करता है।

स्रोत: ISRO


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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