06 Aug गगनयान मिशन: राज्यसभा में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताई प्रमुख उपलब्धियां और रोडमैप
✎ गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र के साथ मानवरहित मिशन और 2027 तक मानव मिशन के साथ-साथ 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है, जो देश की बढ़ती…
Crew moduleCrew escape systemPropulsion systemविषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) | GS Paper II — शासन, संविधान एवं राजव्यवस्था (Governance, Constitution and Polity)
- Prelims: गगनयान मिशन, व्योममित्र, मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS), क्रू एस्केप सिस्टम (CES), अंतरिक्ष अन्वेषण, ISRO
- Essay: भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र के साथ मानवरहित मिशन और 2027 तक मानव मिशन के साथ-साथ 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है, जो देश की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को गगनयान मिशन और भारत के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप की प्रमुख उपलब्धियों से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ महत्वपूर्ण मानव-रेटिंग उपलब्धियों के साथ वास्तविकता के और निकट पहुंच गया है। इसके साथ ही, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) को 2035 तक चालू करने की योजना भी साझा की गई, जो भारत के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अन्वेषण दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
- इस मिशन के लिए मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (Human-rated Launch Vehicle – HLVM3) के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा ग्राउंड टेस्टिंग पूरी कर ली गई है।
- क्रू मॉड्यूल (Crew Module) और सर्विस मॉड्यूल (Service Module) के प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण हो चुका है, साथ ही पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (Environmental Control and Life Support System – ECLSS) का भी सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण किया गया है।
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्रू एस्केप सिस्टम (Crew Escape System – CES) के लिए आवश्यक सभी पांच प्रकार के मोटरों का विकास और सफल स्थिर परीक्षण किया गया है।
- टीवी-डी1 (TV-D1) प्रक्षेपण यान मिशन, जिसका उद्देश्य उड़ान के दौरान क्रू एस्स्केप सिस्टम का सत्यापन करना था, सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
गगनयान मिशन और भारत का मानव अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप क्या है?
- गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना है।
- इस मिशन के तहत, ‘व्योममित्र’ (Vyommitra) नामक अर्ध-मानव (half-humanoid) को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है।
- इसके बाद, भारत के पहले मानव कक्षीय मिशन से पहले 2027 तक पहले क्रू उड़ान के कॉन्फ़िगरेशन में दो अतिरिक्त मानवरहित मिशन का लक्ष्य रखा गया है।
- मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) एक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया रॉकेट है जो मानव यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए आवश्यक सुरक्षा और विश्वसनीयता मानकों को पूरा करता है।
- क्रू एस्केप सिस्टम (CES) एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली है जो आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को लॉन्च वाहन से सुरक्षित निकालने में सक्षम बनाती है।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station – BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है, जो भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ISRO ने पांच मॉड्यूल वाले अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र संरचना तैयार की है, और सरकार ने पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दी है।
- मिशन के लिए आवश्यक प्रमुख अवसंरचना, जैसे ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, क्रू परीक्षण सुविधा और दूसरे लॉन्च पैड में संशोधन, स्थापित कर ली गई है।
- ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क को अंतिम रूप दे दिया गया है, IDRSS-1 फीडर स्टेशन और स्थलीय लिंक स्थापित कर लिए गए हैं, और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की योजना भी तैयार कर ली गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) का विकास | गगनयान मिशन के लिए आवश्यक सुरक्षित और विश्वसनीय प्रक्षेपण क्षमता सुनिश्चित करता है। |
| क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणालियों का प्रमाणीकरण | अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में ले जाने और वापस लाने के लिए महत्वपूर्ण प्रणोदन क्षमताओं की पुष्टि। |
| पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) का सफल परीक्षण | अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण प्रणालियों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करता है। |
| क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के मोटरों का विकास और परीक्षण | किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पलायन क्षमता प्रदान करता है। |
| टीवी-डी1 (TV-D1) प्रक्षेपण यान मिशन की सफलता | उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम के सत्यापन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर, सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करता है। |
| भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की 2035 तक स्थापना की योजना | भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और अनुसंधान महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। |
महत्व
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- गगनयान मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों के एक विशिष्ट समूह में शामिल करेगा, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में देश की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी।
- स्वदेशी रूप से विकसित मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान, क्रू मॉड्यूल और जीवन समर्थन प्रणालियां भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भरता) को प्रदर्शित करती हैं।
- यह मिशन अंतरिक्ष जीव विज्ञान, सामग्री विज्ञान और माइक्रोग्रैविटी (सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण) अनुसंधान में नए अवसरों को खोलेगा, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार होगा।
रणनीतिक एवं भू-राजनीतिक महत्व
- मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता भारत को अंतरिक्ष कूटनीति में एक मजबूत स्थिति प्रदान करेगी और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग में इसकी भूमिका को बढ़ाएगी।
- यह मिशन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण दोहरी उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देगा, जिससे देश की रणनीतिक क्षमताएं मजबूत होंगी।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताएं क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति संतुलन में इसके प्रभाव को बढ़ाएंगी।
आर्थिक महत्व
- गगनयान कार्यक्रम से एयरोस्पेस, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- मिशन के लिए आवश्यक अनुसंधान और विकास से नई प्रौद्योगिकियों का जन्म होगा, जिनका उपयोग अन्य उद्योगों में भी किया जा सकता है, जिससे नवाचार और आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने और एक जीवंत अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) को बढ़ावा देने में यह मिशन उत्प्रेरक का कार्य करेगा।
सामाजिक महत्व
- गगनयान मिशन युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे देश में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
- यह मिशन राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को बढ़ावा देगा, क्योंकि यह भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का प्रतीक होगा।
- अंतरिक्ष अन्वेषण से प्राप्त ज्ञान और प्रौद्योगिकियां अंततः पृथ्वी पर जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपयोग की जा सकती हैं, जैसे कि उन्नत मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी जटिलताएँ और विश्वसनीयता
- मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक सभी प्रणालियों की त्रुटिहीन विश्वसनीयता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें मानव जीवन शामिल है।
- पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) जैसी जटिल प्रणालियों का विकास और परीक्षण, जो अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और रहने योग्य वातावरण प्रदान करती हैं, अत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञता की मांग करती हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. बजटीय बाधाएँ और संसाधन आवंटन
- 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन महत्वपूर्ण है, लेकिन एक दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के लिए निरंतर और पर्याप्त वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए संसाधनों का कुशल आवंटन और अन्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – राजकोषीय नीति
3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भू-राजनीति
- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (ASA) जैसे अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ समन्वय और सहयोग बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन भू-राजनीतिक परिवर्तनों से यह प्रभावित हो सकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानूनों और संधियों का पालन करते हुए भारत के अंतरिक्ष हितों को आगे बढ़ाना एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध – अंतरिक्ष सहयोग
4. मानव सुरक्षा और आपातकालीन प्रोटोकॉल
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्रू एस्केप सिस्टम (CES) और अन्य आपातकालीन प्रक्रियाओं का लगातार परीक्षण और सुधार करना आवश्यक है।
- अंतरिक्ष में किसी भी अप्रत्याशित घटना के लिए व्यापक आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाएं विकसित करना और उन्हें लागू करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – आपदा प्रबंधन
5. दीर्घकालिक अंतरिक्ष स्टेशन का रखरखाव
- 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना के बाद, इसके रखरखाव, संचालन और उन्नयन के लिए निरंतर तकनीकी और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी।
- अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) और अन्य बाहरी खतरों से अंतरिक्ष स्टेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मानव-रेटेड प्रणालियों की जटिलता | उच्च विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों को प्राप्त करना। |
| मिशन की लागत और वित्तपोषण | दीर्घकालिक कार्यक्रम के लिए निरंतर बजटीय सहायता सुनिश्चित करना। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का समन्वय | विभिन्न एजेंसियों के साथ सुचारू एकीकरण और भू-राजनीतिक प्रभावों का प्रबंधन। |
| अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा | आपातकालीन पलायन और रिकवरी प्रणालियों की प्रभावशीलता। |
| भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन | दीर्घकालिक रखरखाव, रसद और बाहरी खतरों से सुरक्षा। |
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आत्मनिर्भरता | स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करते हुए विदेशी निर्भरता को कम करना। |
आगे की राह
- मानव-रेटेड प्रणालियों, विशेष रूप से जीवन समर्थन और सुरक्षा प्रणालियों के निरंतर और कठोर परीक्षण तथा प्रमाणीकरण पर ध्यान केंद्रित करना।
- अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को और अधिक उन्नत बनाना, जिसमें विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों के लिए व्यापक सिमुलेशन शामिल हों।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स को समर्थन देना।
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग को मजबूत करना, विशेष रूप से डेटा साझाकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान के क्षेत्रों में।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के विकास के लिए एक स्पष्ट और चरणबद्ध रोडमैप तैयार करना, जिसमें तकनीकी, वित्तीय और परिचालन पहलुओं को शामिल किया जाए।
- अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) के प्रबंधन और अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीतियों को विकसित करना और लागू करना।
- अंतरिक्ष अन्वेषण के लाभों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को STEM विषयों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना।
- अंतरिक्ष कानून और नीति ढांचे को अद्यतन करना ताकि भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
गगनयान मिशन · मानव अंतरिक्ष अन्वेषण · भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन · ISRO · क्रू एस्केप सिस्टम · पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली · मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान · व्योममित्र · अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी · अंतरिक्ष कूटनीति · आत्मनिर्भर भारत · अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (j)’, ‘note’: ‘वैज्ञानिक उत्कृष्टता और अन्वेषण को बढ़ावा देना’}
अवधारणा प्रवाह
गगनयान मिशन के लिए बजटीय आवंटन और मंजूरी → मानव-रेटेड प्रणालियों का विकास और परीक्षण → व्योममित्र के साथ मानवरहित मिशन का प्रक्षेपण → मानवयुक्त गगनयान मिशन का सफल प्रक्षेपण → भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना → दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और अनुसंधान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गगनयान मिशन का लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र (हाफ-ह्यूमनॉइड) को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन लॉन्च करना है।
2. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है।
3. गगनयान मिशन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन स्वीकृत किया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को सूचित किया कि व्योममित्र को ले जाने वाला पहला मानवरहित गगनयान मिशन 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है। कथन 2 सही है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है। कथन 3 सही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत आठ मिशनों के निष्पादन के लिए 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन स्वीकृत किया था।
Q2. गगनयान मिशन के संदर्भ में, ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ (CES) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में लंबे समय तक जीवित रहने में मदद करना।
- अंतरिक्ष यान के प्रणोदन प्रणाली को नियंत्रित करना।
- किसी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष यान से बाहर निकालना।
- अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए एक मंच प्रदान करना।
उत्तर: किसी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष यान से बाहर निकालना। — क्रू एस्केप सिस्टम (CES) का प्राथमिक उद्देश्य किसी आपात स्थिति, जैसे कि प्रक्षेपण विफलता, के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष यान से बाहर निकालना है। यह अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रणाली है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ गगनयान मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस कथन के आलोक में, मिशन की प्रमुख उपलब्धियों और भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण विजन पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: गगनयान मिशन का संक्षिप्त परिचय और इसके महत्व पर प्रकाश डालें।
मुख्य भाग:
1. गगनयान मिशन की प्रमुख उपलब्धियाँ:
– मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) का विकास और ग्राउंड टेस्टिंग।
– क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण।
– पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS), तापीय सुरक्षा प्रणाली, मंदन प्रणाली आदि का सफल विकास और परीक्षण।
– क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के लिए मोटरों का विकास और सफल स्थिर परीक्षण।
– प्रमुख मिशन अवसंरचना की स्थापना (ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र)।
– TV-D1 प्रक्षेपण यान मिशन की सफलता और डीसेलरेशन सिस्टम का सत्यापन।
– ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क और रिकवरी योजनाओं का अंतिम रूप दिया जाना।
2. भारत का दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण विजन:
– व्योममित्र (हाफ-ह्यूमनॉइड) को ले जाने वाले मानवरहित प्रायोगिक मिशन (2026 की चौथी तिमाही)।
– पहले मानव कक्षीय मिशन से पहले दो अतिरिक्त मानवरहित मिशन (2027 तक)।
– भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना का लक्ष्य (2035 तक)।
– BAS के लिए पांच मॉड्यूल वाली समग्र संरचना और BAS-01 के विकास की मंजूरी।
– बजटीय आवंटन (20,193 करोड़ रुपये) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (ESA, ASA, फ्रांसीसी एजेंसी)।
निष्कर्ष: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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