01 Sep छत्तीसगढ़: क्रिटिकल खनिज विकास में राज्य की भूमिका हुई मजबूत, जानिए 5 प्रमुख बिंदु
✎ क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स देश की आर्थिक संवृद्धि, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हैं, जिनकी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार; निवेश मॉडल; बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि) | GS Paper III — पर्यावरण (पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन)
- Prelims: क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals), स्ट्रैटेजिक मिनरल्स (Strategic Minerals), खनिज ब्लॉक नीलामी, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET), आत्मनिर्भर भारत, खनिज सुरक्षा, छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधन, खनन लीज (Mining Lease), कंपोजिट लाइसेंस (Composite License)
- Essay: भारत की आर्थिक संवृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा में खनिज संसाधनों की भूमिका।, सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में खनिज क्षेत्र का योगदान।
त्वरित पुनरावृत्ति: क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स देश की आर्थिक संवृद्धि, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हैं, जिनकी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
खान मंत्रालय ने रायपुर, छत्तीसगढ़ में क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी के आठवें चरण के लिए एक रोड शो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस दौरान छत्तीसगढ़ के समृद्ध खनिज संसाधनों और भारत के खनन तथा औद्योगिक विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। आठवें चरण में नौ राज्यों के 20 ब्लॉक्स शामिल किए गए हैं, जिनमें से पांच छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार देश की आर्थिक संवृद्धि, औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स के महत्व को पहचानती है।
- इन खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है।
- खान मंत्रालय ने नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं और त्वरित संचालन के माध्यम से भारत के क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
- अब तक पेश किए गए 88 क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स में से 56 की सफल नीलामी हो चुकी है, जो इस दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।
- छत्तीसगढ़ राज्य खनिज संसाधनों से समृद्ध है और इसमें ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements), रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लौकोनाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की विशाल संभावनाएं हैं।
- राज्य सरकार निवेश को सुगम बनाने, सतत मिनरल डेवलपमेंट (Sustainable Mineral Development) के लिए अनुकूल माहौल बनाने और पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स क्या हैं?
- क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) वे खनिज होते हैं जो किसी देश की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए आवश्यक होते हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति में बाधा आने का उच्च जोखिम होता है।
- इन खनिजों का उपयोग उच्च-तकनीकी उद्योगों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों (जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, पवन टर्बाइन) और रक्षा अनुप्रयोगों में होता है।
- स्ट्रैटेजिक मिनरल्स (Strategic Minerals) वे खनिज होते हैं जिनका महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा उद्देश्यों के लिए होता है, और जिनकी उपलब्धता देश की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण होती है।
- इन खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान का देश की औद्योगिक क्षमता और सामरिक तैयारियों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- भारत में, क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान और उनके अन्वेषण तथा खनन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
- खनन मंत्रालय द्वारा आयोजित नीलामी प्रक्रियाएं इन खनिजों के अन्वेषण और विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करती हैं।
- इन खनिजों के उदाहरणों में लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, टाइटेनियम आदि शामिल हैं।
- एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण भारत की खनिज सुरक्षा को सशक्त बनाने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का आठवां चरण | भारत की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और विकास में तेजी लाना। |
| छत्तीसगढ़ के पांच मिनरल ब्लॉक्स का शामिल होना | राज्य की समृद्ध खनिज क्षमता का उपयोग, निवेश को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय खनिज विकास में योगदान। |
| केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय | खनिज संसाधनों के सतत विकास और निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए आवश्यक। |
| घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर | खनिज मूल्य श्रृंखला (Mineral Value Chain) में मजबूत घरेलू क्षमताओं का विकास, जो भारत की खनिज सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। |
| पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाएँ और तकनीक-आधारित निगरानी | खनन क्षेत्र में दक्षता, जवाबदेही और निवेशकों का विश्वास बढ़ाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) भारत की आर्थिक वृद्धि और औद्योगिक विकास के लिए आधारभूत हैं, विशेषकर स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए।
- इन खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्रों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय समुदायों का विकास होगा।
- मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Domestic Supply Chain) का निर्माण आयात पर निर्भरता कम करेगा और देश की आर्थिक संप्रभुता को बढ़ाएगा।
रणनीतिक महत्व
- क्रिटिकल मिनरल्स देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और रणनीतिक उद्योगों के लिए आवश्यक हैं, जैसे रक्षा और अंतरिक्ष।
- इन खनिजों का सुरक्षित और पर्याप्त घरेलू उत्पादन भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।
- आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर खनिज क्षेत्र में।
पर्यावरण और सतत विकास
- स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स महत्वपूर्ण हैं।
- सतत खनिज विकास (Sustainable Mineral Development) प्रथाओं को बढ़ावा देना, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व शामिल हैं।
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर जनजातीय टिन संग्राहकों को पारदर्शी लाभ वितरण सुनिश्चित करना, जैसा कि टिन पोर्टल जैसी पहलों में देखा गया है।
चुनौतियाँ
1. अन्वेषण और निष्कर्षण
- भारत में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण (Exploration) और निष्कर्षण (Extraction) की गति अपेक्षाकृत धीमी है, जिससे घरेलू आपूर्ति मांग को पूरा करने में अक्षम है।
- अत्याधुनिक अन्वेषण तकनीकों और पर्याप्त निवेश की कमी एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: भारत के भौतिक भूगोल के मुख्य लक्षण; खनिज एवं ऊर्जा संसाधन
2. प्रौद्योगिकी और प्रसंस्करण
- खनिजों के प्रसंस्करण (Processing) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए आवश्यक उन्नत प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता की कमी।
- घरेलू स्तर पर रिफाइनिंग और विनिर्माण क्षमताओं का अभाव, जिससे कच्चे माल का निर्यात और तैयार उत्पादों का आयात होता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: स्वदेशीकरण; नई प्रौद्योगिकियाँ
3. नियामक और नीतिगत बाधाएँ
- खनन लाइसेंसिंग और पर्यावरणीय स्वीकृतियों में देरी, जिससे परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा आती है।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी कभी-कभी नीतिगत अस्पष्टता और कार्यान्वयन चुनौतियों का कारण बनती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; केंद्र-राज्य संबंध
4. आधारभूत संरचना और निवेश
- खनन क्षेत्रों तक पहुँचने और खनिजों के परिवहन के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना (Infrastructure) की कमी।
- उच्च पूंजी निवेश (Capital Investment) की आवश्यकता और निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: आधारभूत संरचना; निवेश मॉडल
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| खनिज अन्वेषण में निवेश की कमी | नए भंडारों की पहचान और मौजूदा भंडारों के पूर्ण उपयोग में बाधा। |
| प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन क्षमताओं का अभाव | कच्चे माल के निर्यात और तैयार उत्पादों के आयात पर निर्भरता, जिससे मूल्य श्रृंखला में नुकसान। |
| नियामक प्रक्रियाओं में जटिलता और देरी | खनन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विलंब और निवेशकों के लिए अनिश्चितता। |
| पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव | खनन गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का जोखिम। |
| कुशल कार्यबल की कमी | आधुनिक खनन तकनीकों और प्रसंस्करण के लिए आवश्यक विशेषज्ञता का अभाव। |
आगे की राह
- क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण को तेज करने के लिए उन्नत तकनीकों और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों में निवेश बढ़ाना।
- खनिजों के प्रसंस्करण, रिफाइनिंग और मूल्य संवर्धन के लिए घरेलू क्षमताओं को विकसित करना, जिसमें अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना शामिल है।
- खनन लाइसेंसिंग और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना, जिससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार हो।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना ताकि खनिज नीति के कार्यान्वयन में एकरूपता और दक्षता सुनिश्चित हो सके।
- निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतिगत ढांचा और प्रोत्साहन प्रदान करना।
- खनन क्षेत्रों में आधारभूत संरचना का विकास करना, जिसमें सड़क, रेल और बिजली की उपलब्धता शामिल है।
- खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए सतत खनन प्रथाओं को अपनाना और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करना।
- खनिज क्षेत्र में कुशल कार्यबल विकसित करने के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
क्रिटिकल मिनरल्स · रणनीतिक खनिज · खनिज सुरक्षा · आत्मनिर्भर भारत · खनिज अन्वेषण · नीलामी प्रक्रिया · सतत खनिज विकास · केंद्र-राज्य समन्वय · औद्योगिक विकास · मूल्य संवर्धन
अवधारणा प्रवाह
क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान और रणनीतिक महत्व → नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से ब्लॉक्स का आवंटन → निवेश और अन्वेषण में वृद्धि → खनिज निष्कर्षण और प्रसंस्करण का विकास → घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण → आर्थिक संवृद्धि और आत्मनिर्भरता में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स भारत की आर्थिक वृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए महत्वपूर्ण हैं।
2. खान मंत्रालय द्वारा आयोजित नीलामी के आठवें चरण में केवल छत्तीसगढ़ के खनिज ब्लॉक शामिल किए गए हैं।
3. टिन पोर्टल का उद्देश्य जनजातीय टिन संग्राहकों को पारदर्शी लाभ वितरण सुनिश्चित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए आवश्यक हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि आठवें चरण में नौ राज्यों के 20 ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें से पांच छत्तीसगढ़ में हैं। कथन 3 सही है क्योंकि टिन पोर्टल जनजातीय टिन संग्राहकों को पारदर्शी लाभ वितरण के लिए बनाया गया है।
Q2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. ग्रेफाइट: ऊर्जा भंडारण
2. रेयर अर्थ एलिमेंट्स: इलेक्ट्रॉनिक्स
3. वैनेडियम: एयरोस्पेस
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — ग्रेफाइट का उपयोग ऊर्जा भंडारण (बैटरी) में होता है। रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च-तकनीकी उत्पादों में होता है। वैनेडियम का उपयोग मुख्य रूप से स्टील मिश्र धातुओं और बैटरी में होता है, जबकि एयरोस्पेस में इसका उपयोग विशिष्ट मिश्र धातुओं में होता है। दिए गए संदर्भ में, सभी तीन युग्म सही सुमेलित माने जा सकते हैं क्योंकि ये सभी क्रिटिकल मिनरल्स के महत्वपूर्ण उपयोगों को दर्शाते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स के महत्व पर चर्चा कीजिए और देश की खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की परिभाषा और भारत की आर्थिक एवं रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए उनके महत्व को संक्षेप में बताएं।
मुख्य भाग:
1. क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व: आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा), उभरती प्रौद्योगिकियों और राष्ट्रीय सुरक्षा में इनकी भूमिका।
2. खनिज सुरक्षा: घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों से निपटने की आवश्यकता।
3. आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण: खनिज मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं का विकास (अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन)।
4. केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय: नीतिगत सुधारों (जैसे खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन), पारदर्शी नीलामी प्रक्रियाओं, त्वरित परिचालन, निवेश को सुगम बनाने और सतत विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने में दोनों स्तरों की भूमिका। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के उदाहरण का उल्लेख करें जहां खनिज संपदा प्रचुर मात्रा में है।
5. चुनौतियाँ: पर्यावरणीय प्रभाव, स्थानीय समुदायों के अधिकार, तकनीकी बाधाएँ और निवेश आकर्षित करने की आवश्यकता।
निष्कर्ष: खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए एक एकीकृत, सहयोगात्मक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करें, जिसमें केंद्र, राज्य और उद्योग सभी हितधारक शामिल हों।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में ‘क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम’ में राज्य की भूमिका को मजबूत करने हेतु उठाए गए प्रमुख कदमों में शामिल है:
- A. राज्य में ‘मिनरल डेवलपमेंट पॉलिसी’ का निर्माण एवं क्रिटिकल मिनरल्स के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना
- B. केंद्र सरकार के ‘मिशन 2030’ के तहत राज्य में लिथियम एवं ग्रेफाइट के निष्कर्षण हेतु विदेशी निवेश आकर्षित करना
- C. राज्य के सभी जिलों में ‘मिनरल म्यूजियम’ स्थापित करना तथा आदिवासी समुदायों को खनिज अधिकार प्रदान करना
- D. भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय खनिज नीति 2019’ के स्थान पर राज्य की स्वतंत्र खनिज नीति लागू करना
उत्तर: A. राज्य में ‘मिनरल डेवलपमेंट पॉलिसी’ का निर्माण एवं क्रिटिकल मिनरल्स के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना — छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में ‘मिनरल डेवलपमेंट पॉलिसी’ का निर्माण किया है तथा क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, ग्रेफाइट) के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) स्थापित करने की योजना बनाई है।
Mains: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम’ में राज्य की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु अपनाई गई ‘मिनरल डेवलपमेंट पॉलिसी’ तथा उसके अंतर्गत प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की संभावित आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, राज्य में आदिवासी समुदायों के अधिकारों एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस नीति के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- ECI’s constitutional mandate under strain: UPSC & State PCS analysis - October 5, 2026
- तीन-भाषा नीति: छात्रों को तीसरी भाषा चुनने की आजादी क्यों जरूरी? - October 5, 2026
- AIIA concludes Swachhata Hi Seva 2026: Key Highlights for UPSC/PCS - October 4, 2026

No Comments