11 Aug जनगणना 2027: ट्रांसजेंडर प्रमुख वाले परिवारों का होगा सर्वेक्षण, राज्यसभा में जानकारी
✎ जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल किया जाएगा, जो समावेशी डेटा संग्रह की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे | GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन
- Prelims: जनगणना 2027, ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवार, डिजिटल जनगणना, स्व-गणना (Self-enumeration), जनसंख्या गणना, आवास सूचीकरण, जाति गणना
- Essay: समावेशी विकास और डेटा का महत्व, डिजिटल इंडिया और शासन में इसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल किया जाएगा, जो समावेशी डेटा संग्रह की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राज्यसभा को सूचित किया गया है कि आगामी जनगणना 2027 में ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों (transgender-headed households) को भी शामिल किया जाएगा। यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें आवास सूचीकरण (Houselisting) और आवास जनगणना (Housing Census) के पहले चरण में परिवार के मुखिया के लिंग के रूप में ‘पुरुष’, ‘महिला’ और ‘ट्रांसजेंडर’ तीनों श्रेणियों का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह कदम समावेशी डेटा संग्रह की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में जनगणना प्रत्येक दस वर्ष पर आयोजित की जाती है, जो देश की जनसंख्या, जनसांख्यिकी और सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं का व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है।
- पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, और 2021 की जनगणना COVID-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।
- जनगणना अधिनियम, 1948 (Census Act, 1948) जनगणना के संचालन के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner of India) जनगणना के संचालन के लिए जिम्मेदार शीर्ष निकाय हैं।
- सरकार ने जनगणना 2027 के संचालन के लिए ₹11,718 करोड़ की राशि को मंजूरी दी है।
जनगणना क्या है और इसकी प्रक्रिया क्या है?
- जनगणना किसी देश या उसके एक सुपरिभाषित हिस्से में सभी व्यक्तियों के जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक डेटा को एकत्र करने, संकलित करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।
- भारत में जनगणना का संचालन गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के अधीन भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा किया जाता है।
- जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी: पहला चरण आवास सूचीकरण और आवास जनगणना (अप्रैल 2026 से शुरू), और दूसरा चरण जनसंख्या गणना (फरवरी 2027 तक)।
- पहले चरण में आवास की स्थिति, परिवार के विवरण, उपलब्ध सुविधाओं और परिवार के पास मौजूद संपत्तियों के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसमें मुखिया के लिंग के लिए ‘पुरुष/महिला/ट्रांसजेंडर’ विकल्प शामिल होंगे।
- दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसके प्रश्न उचित समय पर अधिसूचित किए जाएंगे।
- इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और नागरिकों के लिए स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध होगा, जहाँ वे स्वयं डेटा जमा कर सकेंगे।
- डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए प्रगणक (enumerators) घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे और स्व-गणना डेटा की पुष्टि भी करेंगे।
- डेटा सुरक्षा के लिए मोबाइल डेटा संग्रह, डेटा ट्रांसमिशन और सर्वर स्तर पर उपयुक्त उपाय किए गए हैं, और प्रगणकों को पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों का समावेश | सामाजिक समावेशन और सटीक डेटा संग्रह को बढ़ावा |
| दो चरणों में जनगणना | आवास सूचीकरण और जनसंख्या गणना के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण |
| स्व-गणना की सुविधा | नागरिकों के लिए डेटा जमा करने में सुविधा और पहुंच |
| पूर्णतः डिजिटल प्रक्रिया | दक्षता, डेटा सटीकता और पारदर्शिता में वृद्धि |
| जाति गणना का समावेश | सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करना |
| माइग्रेशन के कारणों पर प्रश्न | जनसंख्या गतिशीलता और शहरीकरण के पैटर्न को समझना |
महत्व
सामाजिक समावेशन
- ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को जनगणना में शामिल करना लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान और उनके योगदान को मान्यता देता है।
- सटीक डेटा संग्रह से सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी, जिससे उनके लिए लक्षित नीतियां और कार्यक्रम तैयार किए जा सकेंगे।
- यह समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि कोई भी वर्ग जनगणना प्रक्रिया से बाहर न रहे, जिससे भारत के सभी नागरिकों की सही तस्वीर सामने आए।
नीति निर्माण और शासन
- जनगणना डेटा नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों पर डेटा उपलब्ध होने से आवास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट हस्तक्षेपों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
- जाति गणना का समावेश सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को उजागर करेगा और वंचित समूहों के उत्थान के लिए लक्षित विकास कार्यक्रमों को डिजाइन करने में सहायक होगा।
- माइग्रेशन के कारणों पर डेटा शहरीकरण, ग्रामीण-शहरी प्रवास और क्षेत्रीय विकास असंतुलन को समझने में मदद करेगा, जिससे बेहतर शहरी नियोजन और क्षेत्रीय विकास रणनीतियाँ बनेंगी।
प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता
- पूर्णतः डिजिटल जनगणना प्रक्रिया डेटा संग्रह, प्रसंस्करण और विश्लेषण में दक्षता बढ़ाएगी। इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और डेटा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- स्व-गणना की सुविधा नागरिकों को अपनी सुविधानुसार डेटा जमा करने का विकल्प प्रदान करती है, जिससे भागीदारी बढ़ती है और प्रक्रिया अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनती है।
- डेटा सुरक्षा उपायों का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे, जिससे नागरिकों का विश्वास बना रहे।
चुनौतियाँ
1. डेटा सटीकता और कवरेज
- दूरदराज के क्षेत्रों और हाशिए पर पड़े समुदायों तक पहुंच सुनिश्चित करना, विशेष रूप से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए, एक चुनौती हो सकती है।
- स्व-गणना के बावजूद, यह सुनिश्चित करना कि सभी नागरिक सही और पूर्ण जानकारी प्रदान करें, महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
- जनगणना कर्मियों को ट्रांसजेंडर समुदाय की संवेदनशीलता और विशिष्ट पहचान संबंधी मुद्दों के बारे में पर्याप्त प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
- डिजिटल उपकरणों के उपयोग और डेटा सत्यापन प्रक्रियाओं के लिए व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास
3. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा एकत्र करते समय डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
- साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा
4. जाति गणना की संवेदनशीलता
- जाति गणना से संबंधित डेटा संग्रह और उसके उपयोग को लेकर सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता को सावधानी से संभालना होगा।
- यह सुनिश्चित करना कि डेटा का उपयोग केवल विकास और समावेशन के उद्देश्यों के लिए हो, महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज, सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ट्रांसजेंडर पहचान | समुदाय के भीतर पहचान की विविधता और उसे सटीक रूप से दर्ज करने की चुनौती। |
| डिजिटल साक्षरता | ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग में स्व-गणना के लिए डिजिटल साक्षरता की कमी। |
| डेटा सुरक्षा | व्यक्तिगत और संवेदनशील डेटा के बड़े पैमाने पर संग्रह में गोपनीयता भंग होने का जोखिम। |
| जाति डेटा का उपयोग | जाति-आधारित डेटा के संभावित राजनीतिक दुरुपयोग या सामाजिक विभाजन की आशंका। |
| प्रवासी आबादी | अस्थायी या बेघर प्रवासी आबादी की सटीक गणना सुनिश्चित करना। |
| जनगणना कर्मियों की संवेदनशीलता | ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ बातचीत में जनगणना कर्मियों की संवेदनशीलता और पूर्वाग्रहों को दूर करना। |
आगे की राह
- जनगणना कर्मियों के लिए व्यापक और संवेदनशील प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, विशेष रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ बातचीत के संबंध में।
- डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और स्व-गणना प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी ढांचे को लागू करना, जिसमें डेटा एन्क्रिप्शन और एक्सेस नियंत्रण शामिल हैं।
- जाति गणना डेटा के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करना, ताकि इसका उपयोग केवल सामाजिक-आर्थिक विकास और समावेशन के लिए हो।
- हाशिए पर पड़े और कमजोर समूहों, जैसे ट्रांसजेंडर, प्रवासी और बेघर व्यक्तियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति विकसित करना।
- जनगणना प्रक्रिया में नागरिक समाज संगठनों और समुदाय-आधारित समूहों को शामिल करना, विशेष रूप से संवेदनशील डेटा संग्रह के लिए।
- डेटा की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन और निगरानी तंत्र को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जनगणना 2027 · ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवार · समावेशी नीति · सामाजिक-आर्थिक डेटा · नीति निर्माण · डिजिटल जनगणना · आत्म-गणना · डेटा सुरक्षा · सामाजिक न्याय · जनसांख्यिकीय परिवर्तन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘भेदभाव का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘जनगणना संघ सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार ने जनगणना 2027 की घोषणा की। → जनगणना में ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करने का निर्णय लिया गया। → यह कदम सामाजिक समावेशन और लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा। → सटीक डेटा संग्रह से लक्षित नीतियां और कार्यक्रम बनेंगे। → परिणामस्वरूप, ट्रांसजेंडर समुदाय का बेहतर विकास और कल्याण सुनिश्चित होगा।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जनगणना 2027 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह स्वतंत्रता के बाद की 16वीं जनगणना होगी।
2. यह पूरी तरह से डिजिटल अभ्यास होगा और नागरिकों को आत्म-गणना (self-enumeration) का विकल्प प्रदान करेगा।
3. इसमें पहली बार ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों से संबंधित डेटा भी एकत्र किया जाएगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद की 16वीं जनगणना नहीं, बल्कि 16वीं जनगणना होगी (स्वतंत्रता के बाद की 8वीं)। कथन 2 और 3 सही हैं, जैसा कि समाचार में बताया गया है।
Q2. जनगणना 2027 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी: पहला चरण मकान सूचीकरण और आवास जनगणना, और दूसरा चरण जनसंख्या गणना।
2. पहले चरण में परिवार के मुखिया के लिंग (पुरुष, महिला, ट्रांसजेंडर) के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी।
3. डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप में डेटा स्थिरता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन नियम शामिल किए जाएंगे।
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी तीनों कथन सही हैं। जनगणना दो चरणों में होगी, पहले चरण में मुखिया के लिंग की जानकारी एकत्र की जाएगी, और मोबाइल ऐप में डेटा सटीकता के लिए सत्यापन नियम होंगे।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में जनगणना के ऐतिहासिक महत्व और सामाजिक-आर्थिक डेटा संग्रह में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। साथ ही, ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करने के हालिया निर्णय के निहितार्थों पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में जनगणना के महत्व और इसके दशकीय अभ्यास का संक्षिप्त परिचय।
2. ऐतिहासिक महत्व: ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्रता के बाद तक जनगणना के विकास और इसके बदलते उद्देश्यों पर प्रकाश डालें।
3. सामाजिक-आर्थिक डेटा संग्रह में भूमिका: नीति निर्माण, योजना, संसाधनों के आवंटन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लक्षीकरण में जनगणना डेटा की केंद्रीय भूमिका का विश्लेषण करें। (उदाहरण: गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा)।
4. ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करने का निर्णय: इस निर्णय का विवरण दें और इसके पीछे के कारणों (समावेशिता, सामाजिक न्याय) पर चर्चा करें।
5. निहितार्थ: इस समावेश के सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत निहितार्थों का विश्लेषण करें। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व, लक्षित योजनाओं का निर्माण, सामाजिक स्वीकृति में वृद्धि और मानवाधिकारों की दिशा में प्रगति शामिल हो सकती है।
6. चुनौतियाँ: डेटा संग्रह में संभावित चुनौतियों (संवेदनशीलता, गोपनीयता, प्रशिक्षण) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
7. निष्कर्ष: एक समावेशी और प्रतिनिधि जनगणना के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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