06 Jan डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना
डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना: भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव
पाठ्यक्रम : सामान्य अध्ययन-III : विज्ञान और प्रौद्योगिकी और रोज़गार, भारतीय अर्थव्यवस्था
परिचय :
सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक तकनीकी जगत की आधारशिला हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G नेटवर्क, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा प्रणाली, अंतरिक्ष अन्वेषण और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में इनकी भूमिका अपरिहार्य है। वैश्विक सप्लाई चेन में संकट और रणनीतिक निर्भरता के मद्देनजर भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (Design Linked Incentive – DLI) योजना को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनाया है। हाल ही में, योजना के तहत 24 चिप डिज़ाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटर्स, टेलीकॉम, रक्षा और IoT जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं। यह योजना न केवल चिप निर्माण को बढ़ावा देती है, बल्कि उच्च-मूल्य वाले डिज़ाइन इकोसिस्टम को मजबूत करके भारत को वैश्विक खिलाड़ी बनाने की दिशा में कार्यरत है।

DLI योजना की पृष्ठभूमि :
DLI योजना की शुरुआत वर्ष 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में चिप डिज़ाइन इकोसिस्टम को सशक्त बनाना है, ताकि देश केवल सेमीकंडक्टर निर्माण पर निर्भर न रहकर डिज़ाइन की उच्च-स्तरीय क्षमताओं में भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके। योजना का कार्यान्वयन C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing) द्वारा किया जा रहा है, जो स्टार्ट-अप्स और MSMEs को वित्तीय प्रोत्साहन तथा डिज़ाइन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करती है। वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए यह योजना एक रणनीतिक कदम है।
DLI योजना के उद्देश्य :
DLI योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- घरेलू स्टार्ट-अप्स और MSMEs को चिप डिज़ाइन क्षेत्र में प्रोत्साहन देना।
- भारत में आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम का विकास करना।
- वैश्विक चिप वैल्यू-चेन में भारत की भागीदारी बढ़ाना।
- नवाचार, पेटेंट दाखिल और निजी निवेश को बढ़ावा देना।
- रक्षा, टेलीकॉम और IoT जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक विकसित करना।
यह योजना सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत को ‘फैबलेस’ (डिज़ाइन-केंद्रित) मॉडल की ओर ले जाती है, जहां डिज़ाइन पर फोकस करके उच्च-मूल्य निर्माण सुनिश्चित किया जाता है।
योजना के प्रमुख घटक :
1. वित्तीय प्रोत्साहन
DLI योजना दो श्रेणियों में वित्तीय सहायता प्रदान करती है:
उत्पाद डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन : चिप डिज़ाइन की R&D और विकास पर फोकस।
परिनियोजन (Deployment) से संबद्ध प्रोत्साहन: डिज़ाइन को बाजार में उतारने और व्यावसायीकरण के लिए सहायता।
ये प्रोत्साहन परियोजना लागत के 70% तक कवर कर सकते हैं, जो स्टार्ट-अप्स को जोखिम कम करने में मदद करते हैं।
2. डिज़ाइन अवसंरचना सहायता
- स्वीकृत कंपनियों को Chip IN सेंटर के माध्यम से उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:
- नेशनल इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल ग्रिड तक रिमोट एक्सेस।
- IP कोर रिपॉजिटरी तक पहुंच, जो पूर्व-विकसित इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का उपयोग सक्षम बनाती है।
- प्रोटोटाइपिंग (Multi-Project Wafer – MPW) सहायता।
- सिलिकॉन चरण के बाद चिप सत्यापन (Post-Silicon Validation) का समर्थन।
- ये सुविधाएं छोटी कंपनियों को महंगे टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच प्रदान करती हैं, जो अन्यथा अनुपलब्ध होतीं।
3. पात्रता मानदंड :
स्टार्ट-अप्स एवं MSMEs : सेमीकंडक्टर उत्पाद डिज़ाइन और परिनियोजन के लिए वित्तीय तथा अवसंरचना सहायता के पात्र।
अन्य घरेलू कंपनियां: सेमीकंडक्टर डिज़ाइन के परिनियोजन के लिए केवल वित्तीय प्रोत्साहन की पात्र।
पात्रता के लिए कंपनियों को घरेलू होना चाहिए और योजना के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।
योजना की उपलब्धियां :
DLI योजना ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। हाल ही में केंद्र ने योजना के तहत 24 चिप डिज़ाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो रणनीतिक क्षेत्रों जैसे वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटर्स, टेलीकॉम, रक्षा और IoT में केंद्रित हैं।
अन्य प्रमुख उपलब्धियां:
- 16 टेप-आउट्स पूर्ण, जो डिज़ाइन को प्रोटोटाइप में बदलने की प्रक्रिया दर्शाते हैं।
- 6 ASIC (Application-Specific Integrated Circuit) चिप्स विकसित।
- 10 पेटेंट दायर।
- निजी निवेश में 3 गुना से अधिक वृद्धि, जो उद्योग में विश्वास दर्शाती है।
- ये परिणाम दर्शाते हैं कि योजना व्यावहारिक नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है, साथ ही सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को 70% तक की सब्सिडी प्रदान करके आगे बढ़ा रही है।
महत्त्व और प्रभाव :
- DLI योजना भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति का ‘मस्तिष्क’ है, जबकि निर्माण पहलें उसका भाग ।
- इसका महत्व निम्नलिखित है:
- वैश्विक चिप डिज़ाइन हब के रूप में भारत का उभार।
स्टार्ट-अप संस्कृति और डीप-टेक इनोवेशन को प्रोत्साहन।
रोजगार सृजन और उच्च-कौशल वाले मानव संसाधनों का विकास।
रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करना।
आयात निर्भरता कम करके सप्लाई चेन को मजबूत बनाना।
यह योजना सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के साथ मिलकर भारत को वैश्विक मूल्य-श्रृंखला में सशक्त स्थान दिला रही है।
निष्कर्ष :
डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा की कुंजी है। 24 परियोजनाओं की मंजूरी और अन्य उपलब्धियां दर्शाती हैं कि योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। यदि डिज़ाइन और निर्माण को समानांतर रूप से विकसित किया जाए, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा। सरकार को इसे निरंतर समर्थन देकर और अधिक स्टार्ट-अप्स को शामिल करके मजबूत बनाना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.इसे वर्ष 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत प्रारंभ किया गया।
2.योजना का कार्यान्वयन C-DAC द्वारा किया जाता है।
3.योजना के तहत अब तक 24 चिप डिज़ाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें 16 टेप-आउट्स पूर्ण हो चुके हैं।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.“डिज़ाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है।” उपयुक्त उदाहरणों सहित चर्चा कीजिए।
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