डीएमके ने सीमांकन विधेयक को समर्थन देने की रखी शर्तें, जानिए क्या हैं मांगे

DMK lays down conditions to support delimitation Bill — diagram

डीएमके ने सीमांकन विधेयक को समर्थन देने की रखी शर्तें, जानिए क्या हैं मांगे

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परिसीमन प्रक्रिया

✎ परिसीमन का उद्देश्य 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत को बनाए रखते हुए जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है, लेकिन भारत में इसे संघीय प्रतिनिधित्व के संवेदनशील मुद्दे के रूप में देखा जाता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ  |  GS Paper II — संसद और राज्य विधायिका – संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय
  • Prelims: परिसीमन आयोग, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 170, जनसंख्या जनगणना, लोकसभा सीटें, राज्य विधानसभा सीटें, संवैधानिक संशोधन, 1971 की जनगणना, 1976 का 42वाँ संशोधन, संसदीय बहुमत
  • Essay: भारत में संघवाद और प्रतिनिधित्व का भविष्य, संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया और राजनीतिक सहमति का महत्त्व

त्वरित पुनरावृत्ति: परिसीमन का उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बनाए रखते हुए जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है, लेकिन भारत में इसे संघीय प्रतिनिधित्व के संवेदनशील मुद्दे के रूप में देखा जाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार द्वारा नए परिसीमन (Delimitation) अभ्यास के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने की संभावना के बीच, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने विधेयक को समर्थन देने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। यह घटनाक्रम सरकार के विपक्षी दलों तक पहुँचने के प्रयासों के बीच आया है, क्योंकि संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

पृष्ठभूमि

  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना।
  • भारत में, परिसीमन का कार्य एक उच्च-शक्ति निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसके आदेशों को कानून का बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद संसद एक परिसीमन अधिनियम बनाती है। अनुच्छेद 170 राज्यों को भी प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करने का निर्देश देता है।
  • आगामी परिसीमन अभ्यास में, दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता के कारण उन्हें लोकसभा में कम प्रतिनिधित्व मिल सकता है, जबकि उत्तरी राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे संघीय संतुलन प्रभावित होगा।

परिसीमन (Delimitation) क्या है?

  • परिसीमन का शाब्दिक अर्थ है किसी देश में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं या हदबंदी को तय करने का कार्य।
  • इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या में परिवर्तन के कारण निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से खींचना है, ताकि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग समान जनसंख्या हो और सभी नागरिकों के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
  • भारत में, परिसीमन आयोग का गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया जाता है। इस आयोग में एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) और संबंधित राज्य के राज्य चुनाव आयुक्त (State Election Commissioner) शामिल होते हैं।
  • परिसीमन आयोग के मुख्य कार्य हैं: निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का निर्धारण करना; अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के लिए आरक्षित सीटों की पहचान करना; और अपने आदेशों को भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित करना।
  • संविधान के तहत, परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। इसका उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया को राजनीतिक विवादों से बचाना है।
  • भारत में अब तक चार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है: 1952, 1963, 1973 और 2002 में।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परिसीमन पर संवैधानिक रोक (Constitutional Freeze) वर्तमान में 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों पर रोक है, जो नवीनतम जनगणना (2027 में अपेक्षित) के बाद समाप्त हो जाएगी। DMK इसे अगले 25 वर्षों तक जारी रखना चाहती है।
लोकसभा सीटों में 50% की वृद्धि DMK सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50% की एकमुश्त वृद्धि का समर्थन करती है, जैसा कि गृह मंत्री ने पहले मौखिक रूप से वादा किया था।
राज्यों के लिए सीटों की अनुसूची DMK चाहती है कि विधायी पैकेज में प्रत्येक राज्य के लिए सीटों की संख्या की एक अनुसूची (Schedule) शामिल की जाए।
संवैधानिक संशोधन विधेयक केंद्र सरकार परिसीमन अभ्यास के लिए एक संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने पर विचार कर रही है, जिसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
विपक्षी दलों से संपर्क सरकार विधेयक के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने हेतु विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और DMK से संपर्क कर रही है।

महत्व

राजनीतिक महत्व

  • परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा भारतीय राजनीति में एक संवेदनशील विषय रहा है, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए, जिन्हें जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के कारण अपनी संसदीय सीटों के कम होने का डर है।
  • DMK की शर्तें केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि विधेयक पारित कराने के लिए उसे दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है और DMK के 22 लोकसभा सदस्य इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
  • यह मुद्दा संघवाद (Federalism) और राज्यों के प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों पर बहस को फिर से जीवित करता है, खासकर जब जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया जाता है।

संवैधानिक महत्व

  • परिसीमन से संबंधित संवैधानिक संशोधन भारतीय संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) के सिद्धांतों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में।
  • 1976 के 42वें संशोधन द्वारा लगाई गई सीटों पर रोक का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करना था; इसे हटाना या संशोधित करना इस उद्देश्य पर पुनर्विचार को दर्शाता है।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • परिसीमन का सीधा प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ता है, जिससे नीतियों और संसाधनों के वितरण पर असर पड़ सकता है।
  • जनसंख्या वृद्धि और विकास के विभिन्न स्तरों वाले राज्यों के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है, ताकि किसी भी क्षेत्र को अनुचित रूप से नुकसान न हो।

चुनौतियाँ

1. संवैधानिक संशोधन के लिए बहुमत जुटाना

  • संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सरकार के लिए एक चुनौती है।
  • विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, परिसीमन अभ्यास के लिए किसी भी संवैधानिक संशोधन का विरोध कर रहे हैं, जिससे सरकार के लिए आम सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है।

2. दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताएँ

  • दक्षिण भारतीय राज्य, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें डर है कि परिसीमन से लोकसभा में उनकी सीटों का हिस्सा कम हो जाएगा, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव घटेगा।
  • यह चिंता संघवाद के सिद्धांतों और राज्यों के बीच समानता के मुद्दे को उठाती है, खासकर जब प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होता है।

3. जनसंख्या नियंत्रण और प्रतिनिधित्व का संतुलन

  • परिसीमन का मुद्दा जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के बीच एक जटिल संतुलन बनाने की चुनौती प्रस्तुत करता है।
  • यदि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को कम प्रतिनिधित्व मिलता है, तो यह भविष्य में जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को हतोत्साहित कर सकता है।

4. राजनीतिक आम सहमति का अभाव

  • परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच व्यापक आम सहमति का अभाव है, जिससे विधेयक को पारित कराना और उसके कार्यान्वयन को सुचारु बनाना मुश्किल हो सकता है।
  • विभिन्न राज्यों और राजनीतिक दलों के अपने-अपने हित और चिंताएँ हैं, जिन्हें संबोधित करना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीटों पर संवैधानिक रोक हटाना दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी का डर, जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव।
लोकसभा सीटों में 50% वृद्धि प्रतिनिधित्व के अनुपात और संसद के आकार पर संभावित प्रभाव, विभिन्न राज्यों के बीच असमानता।
संवैधानिक संशोधन के लिए बहुमत विपक्षी दलों का विरोध, सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने में कठिनाई।
संघवाद पर प्रभाव जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से राज्यों के बीच क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका।
राजनीतिक ध्रुवीकरण परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति का अभाव, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।

आगे की राह

  • केंद्र सरकार को सभी राजनीतिक दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए ताकि उनकी चिंताओं को समझा जा सके और उनका समाधान किया जा सके।
  • परिसीमन के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, जिसमें सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
  • जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को दंडित न करने के लिए एक तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, संभवतः उनके प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए विशेष प्रावधानों के माध्यम से।
  • संवैधानिक संशोधन विधेयक के मसौदे को सार्वजनिक डोमेन में रखा जाना चाहिए ताकि व्यापक जन-बहस और सुझाव प्राप्त किए जा सकें।
  • परिसीमन के दीर्घकालिक प्रभावों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाना चाहिए, जिसमें संघवाद, प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय एकता पर इसके प्रभाव शामिल हैं।
  • संसद में आम सहमति बनाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री को विपक्षी दलों के साथ निरंतर संवाद और समन्वय स्थापित करना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परिसीमन · लोकसभा सीटें · संवैधानिक संशोधन · जनगणना · संघवाद · संसदीय लोकतंत्र · राज्यों का प्रतिनिधित्व · जनसंख्या अनुपात · संसदीय प्रक्रिया · राजनीतिक सहमति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 170’, ‘note’: ‘राज्यों की विधानसभाओं का परिसीमन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 330’, ‘note’: ‘लोकसभा में SC/ST सीटों का आरक्षण’}
  • {‘article’: ’42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976′, ‘note’: ‘लोकसभा सीटों पर रोक लगाई गई’}
  • {‘article’: ’84वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2001′, ‘note’: ‘सीटों पर रोक 2026 तक बढ़ाई गई’}

अवधारणा प्रवाह

जनगणना डेटा जारी होता है।  →  परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है।  →  परिसीमन आयोग निर्वाचन क्षेत्रों का सीमांकन करता है।  →  संसदीय सीटों का पुनर्वितरण होता है।  →  राज्यों के प्रतिनिधित्व में परिवर्तन होता है।  →  राजनीतिक और संवैधानिक बहस उत्पन्न होती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 82 परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
2. परिसीमन का उद्देश्य सभी निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या के समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों को 2001 की जनगणना तक के लिए फ्रीज कर दिया था।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 सही है। परिसीमन का मुख्य उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बनाए रखना है। कथन 3 गलत है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों को 2026 तक के लिए फ्रीज कर दिया था, न कि 2001 की जनगणना तक।

Q2. परिसीमन आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
2. परिसीमन आयोग के आदेश लोकसभा और संबंधित राज्य विधानसभाओं के समक्ष रखे जाते हैं, लेकिन उनमें कोई संशोधन की अनुमति नहीं होती।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है। संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत, परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। कथन 2 सही है। आयोग के आदेशों को लोकसभा और संबंधित राज्य विधानसभाओं के समक्ष रखा जाता है, लेकिन उनमें कोई संशोधन नहीं किया जा सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ परिसीमन के संवैधानिक प्रावधानों और इसके उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए। क्या आपको लगता है कि वर्तमान परिसीमन अभ्यास संघवाद के सिद्धांतों के लिए एक चुनौती प्रस्तुत कर सकता है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: परिसीमन की परिभाषा और भारत में इसकी आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 82 और अनुच्छेद 170 का उल्लेख, परिसीमन आयोग के गठन और शक्तियों पर प्रकाश डालना। 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा सीटों के फ्रीज का संदर्भ।
3. परिसीमन के उद्देश्य: ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत, जनसंख्या के समान प्रतिनिधित्व, भौगोलिक अखंडता और अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण जैसे उद्देश्यों को स्पष्ट करना।
4. संघवाद के लिए चुनौती: दक्षिणी राज्यों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर चर्चा करना, जैसे कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त करने वाले राज्यों को कम प्रतिनिधित्व मिलना, जिससे संघीय संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व में क्षेत्रीय असंतुलन की संभावना।
5. पक्ष में तर्क: जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व के लोकतांत्रिक सिद्धांत को बनाए रखने की आवश्यकता, ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत का महत्व।
6. निष्कर्ष: संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए परिसीमन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता पर जोर देना।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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