20 Jul ढांचागत परियोजनाओं की निगरानी: पैमाना पोर्टल से पारदर्शिता और प्रभावी प्रबंधन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; आधारभूत संरचना (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)
- Prelims: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, पैमाना पोर्टल, केंद्रीय ढांचागत परियोजनाएं, परियोजना निगरानी, लागत वृद्धि, परियोजना विलंब
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना का महत्व, सुशासन और प्रौद्योगिकी का उपयोग
त्वरित पुनरावृत्ति: पैमाना पोर्टल केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं की कुशल निगरानी, विलंब और लागत वृद्धि को रोकने तथा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) ने हाल ही में राज्यसभा में बताया कि 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत वाली केंद्रीय परियोजनाओं की निगरानी ‘पैमाना’ (Project Assessment, Infrastructure Monitoring and Analytics for Nation-building) नामक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य अवसंरचना परियोजनाओं के कार्यान्वयन में होने वाली देरी और लागत वृद्धि को रोकना तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, जिससे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिल सके।
पृष्ठभूमि
- भारत में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और विकास के लिए मजबूत आधारभूत संरचना (Infrastructure) का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- बड़ी ढांचागत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अक्सर भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और वित्तीय प्रबंधन जैसी चुनौतियों के कारण विलंब और लागत वृद्धि देखी जाती है।
- परियोजनाओं में देरी से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि नागरिकों को मिलने वाले लाभों में भी विलंब होता है।
- सरकार ने इन चुनौतियों का समाधान करने और परियोजनाओं के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया है।
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं की निगरानी का अधिदेश प्राप्त है।
पैमाना पोर्टल क्या है?
- पैमाना (PAIMANA) का पूर्ण रूप ‘प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग एंड एनालिटिक्स फॉर नेशन-बिल्डिंग’ है।
- यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विकसित एक ऑनलाइन पोर्टल/वेब मॉनिटरिंग प्रणाली है।
- इसका मुख्य उद्देश्य 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत वाली केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं की स्थिति की निगरानी करना है।
- पोर्टल का लक्ष्य परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और लागत वृद्धि को रोकना तथा समग्र पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
- सभी संबंधित मंत्रालय/विभाग/कार्यान्वयन एजेंसियां API (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) और डेटा एंट्री मोड के माध्यम से पोर्टल पर परियोजनाओं की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करती हैं।
- पैमाना पोर्टल डेटा विश्लेषण, आउटपुट रिपोर्ट और शीर्ष स्तर की निगरानी के लिए अनुकूलित डैशबोर्ड जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है।
- यह परियोजना-विशिष्ट कारणों जैसे भूमि अधिग्रहण, वन/वन्यजीव/पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां, कानून व्यवस्था और उपयोगिता स्थानांतरण के कारण होने वाले विलंब की पहचान करने में मदद करता है।
- मंत्रालय हितधारकों के साथ मासिक समीक्षा बैठकों और अन्य संचार माध्यमों से नियमित समन्वय स्थापित करता है, जिससे साक्ष्य-आधारित निगरानी में योगदान मिलता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ऑनलाइन पोर्टल/वेब मॉनिटरिंग प्रणाली ‘पैमाना’ | केंद्रीय परियोजनाओं की स्थिति की निगरानी के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच प्रदान करता है। |
| 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निगरानी | बड़ी ढांचागत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान, जो राष्ट्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| डेटा विश्लेषण/आउटपुट रिपोर्ट | परियोजनाओं के प्रदर्शन का गहन विश्लेषण, जिससे निर्णय लेने में सहायता मिलती है। |
| अनुकूलित डैशबोर्ड/रिपोर्ट | शीर्ष स्तर की निगरानी को सुगम बनाता है और हितधारकों को त्वरित जानकारी प्रदान करता है। |
| नियमित अपडेट और समन्वय | परियोजनाओं की वास्तविक समय की स्थिति सुनिश्चित करता है और हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- लागत वृद्धि (Cost Overruns) और कार्यान्वयन में देरी को रोककर सार्वजनिक धन का कुशल उपयोग सुनिश्चित करता है।
- परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है और निवेश पर बेहतर प्रतिफल प्राप्त होता है।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सुचारू कार्यान्वयन से विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है।
शासन और पारदर्शिता
- परियोजना निगरानी में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
- साक्ष्य-आधारित निगरानी (Evidence-based Monitoring) के माध्यम से जवाबदेही (Accountability) बढ़ती है और बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।
- सरकार की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार करता है, जिससे सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा मिलता है।
राष्ट्रीय विकास
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समय पर और कुशल कार्यान्वयन से राष्ट्र निर्माण में तेजी आती है।
- परियोजनाओं के विलंब से होने वाले सामाजिक-आर्थिक नुकसान को कम करता है।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जिससे समग्र विकास प्रक्रिया सुव्यवस्थित होती है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याएँ
- परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता में देरी।
- मुआवजे और पुनर्वास से संबंधित विवाद।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, सामान्य अध्ययन-III: भूमि सुधार
2. पर्यावरण और वन संबंधी स्वीकृतियाँ
- पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) और विभिन्न नियामक अनुमतियों में लगने वाला समय।
- वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: पर्यावरण और पारिस्थितिकी
3. कानून व्यवस्था संबंधी समस्याएँ
- स्थानीय विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
- परियोजना स्थलों पर काम में बाधाएँ।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, सामान्य अध्ययन-III: आंतरिक सुरक्षा
4. उपयोगिता स्थानांतरण
- बिजली लाइनों, पानी की पाइपलाइनों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के स्थानांतरण में जटिलताएँ।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन
5. सिविल कार्यों में देरी
- ठेकेदारों की अक्षमता या वित्तीय बाधाएँ।
- निर्माण सामग्री की कमी या गुणवत्ता संबंधी मुद्दे।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डेटा की सटीकता और अद्यतनता | पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारी की विश्वसनीयता और नियमितता सुनिश्चित करना। |
| तकनीकी और वित्तीय क्षमता | परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की तकनीकी और वित्तीय क्षमता में भिन्नता। |
| अंतर-मंत्रालयी समन्वय | विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना। |
| हितधारकों की भागीदारी | सभी हितधारकों को निगरानी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना। |
| मानव संसाधन और प्रशिक्षण | निगरानी और विश्लेषण के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधनों की उपलब्धता। |
आगे की राह
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- पर्यावरण और वन स्वीकृतियों के लिए एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System) को प्रभावी ढंग से लागू करना।
- परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना, विशेषकर तकनीकी और वित्तीय प्रबंधन में।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को बढ़ाने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना।
- प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करके डेटा की सटीकता और वास्तविक समय की निगरानी सुनिश्चित करना।
- परियोजना प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को और बढ़ाने के लिए नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- परियोजनाओं के विलंब के कारणों का गहन विश्लेषण कर नीतिगत सुधारों को लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ढांचागत परियोजनाएँ · परियोजना निगरानी · लागत वृद्धि · कार्यान्वयन में देरी · पैमाना पोर्टल · सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय · साक्ष्य-आधारित निगरानी · पारदर्शिता
अवधारणा प्रवाह
केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं की पहचान (150 करोड़ रुपये से अधिक) → सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा निगरानी का अधिदेश → ‘पैमाना’ पोर्टल पर परियोजना डेटा का नियमित अद्यतन → डेटा विश्लेषण, रिपोर्ट और डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी → विलंब और लागत वृद्धि के कारणों की पहचान → सुधारात्मक उपाय और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना → परियोजनाओं का समय पर और कुशल कार्यान्वयन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पैमाना पोर्टल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केवल राज्य सरकारों द्वारा वित्त पोषित ढांचागत परियोजनाओं की निगरानी करता है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और लागत वृद्धि को रोकना है।
3. यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा संचालित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि पैमाना पोर्टल 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत वाली केंद्र सरकार की परियोजनाओं की निगरानी करता है। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि इसका उद्देश्य देरी और लागत वृद्धि को रोकना है तथा यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा संचालित है।
Q2. भारत में ढांचागत परियोजनाओं में विलंब के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
- भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याएँ
- पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियाँ
- कानून व्यवस्था संबंधी समस्याएँ
- उपर्युक्त सभी
उत्तर: उपर्युक्त सभी — ढांचागत परियोजनाओं में विलंब के कई कारण होते हैं, जिनमें भूमि अधिग्रहण, वन/वन्यजीव/पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियाँ, कानून व्यवस्था संबंधी समस्याएँ और उपयोगिता स्थानांतरण प्रमुख हैं। ये सभी कारक परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बाधा डालते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ढांचागत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और लागत वृद्धि एक गंभीर चुनौती है। ‘पैमाना’ पोर्टल इस चुनौती से निपटने में किस प्रकार सहायक है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ढांचागत परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि से जुड़ी चुनौतियों का संक्षिप्त विश्लेषण करें। दूसरे भाग में, ‘पैमाना’ पोर्टल की भूमिका, उसके उद्देश्यों (देरी और लागत वृद्धि को रोकना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना), कार्यप्रणाली (ऑनलाइन निगरानी, डेटा अपडेट, विश्लेषण) और प्रमुख विशेषताओं (डैशबोर्ड, रिपोर्ट) पर प्रकाश डालें। अंत में, यह बताएं कि कैसे यह पोर्टल साक्ष्य-आधारित निगरानी और हितधारकों के समन्वय के माध्यम से परियोजना प्रबंधन में सुधार कर रहा है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments