तमिलनाडु के पेरुनदुरई में SIPCOT प्रदूषण: 25 गांवों का भूजल पीने योग्य नहीं, UPSC के लिए महत्वपूर्ण

How industrial pollution from SIPCOT contaminated groundwater in 25 villages in Tamil Nadu’s Perundurai | Explained — diagram

तमिलनाडु के पेरुनदुरई में SIPCOT प्रदूषण: 25 गांवों का भूजल पीने योग्य नहीं, UPSC के लिए महत्वपूर्ण

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SIPCOT contamination path

✎ औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न अनुपचारित अपशिष्ट जल का अनुचित निपटान भूजल संदूषण का एक प्रमुख कारण है, जिसके लिए प्रभावी अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों और नियामक निगरानी की आवश्यकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन  |  GS Paper I — भूगोल (मानव भूगोल)  |  GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय
  • Prelims: SIPCOT, भूजल संदूषण, अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ETP/CETP), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB)
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, औद्योगीकरण बनाम पर्यावरणीय स्थिरता, जल सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न अनुपचारित अपशिष्ट जल का अनुचित निपटान भूजल संदूषण का एक प्रमुख कारण है, जिसके लिए प्रभावी अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों और नियामक निगरानी की आवश्यकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु के इरोड जिले में पेरुंदुरई SIPCOT औद्योगिक विकास केंद्र के आसपास के 25 गाँवों में भूजल संदूषण का मुद्दा फिर से चर्चा में है। तमिलनाडु जल आपूर्ति और जल निकासी (TWAD) बोर्ड ने पिछले वर्ष इन गाँवों में 37 जल स्रोतों से प्राप्त पानी को पीने के अयोग्य घोषित किया था। यह मामला औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों और उनके दीर्घकालिक समाधानों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • SIPCOT (State Industries Promotion Corporation of Tamil Nadu) औद्योगिक विकास केंद्र, पेरुंदुरई में 1991 में 2,700 एकड़ में स्थापित किया गया था, जिसमें 250 से अधिक उद्योग शामिल हैं, जिनमें 52 कपड़ा रंगाई और प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं।
  • किसानों और निवासियों ने वर्षों से आरोप लगाया है कि कपड़ा प्रसंस्करण इकाइयों से प्रदूषित रिसाव पास के नाला ओडाई और बाद में ओडाइकट्टूर टैंक तथा पुंजई पलाथोलुवु टैंक में प्रवेश कर गया।
  • 2001 में, कावेरी और कलिंगरायन नहर के किनारे संचालित 23 चमड़ा इकाइयों को SIPCOT में स्थानांतरित कर दिया गया था। इन इकाइयों को भी एक सामान्य अपशिष्ट जल उपचार व्यवस्था से जोड़ा गया था।
  • प्रदूषण की शिकायतों के बाद 2021 में चमड़ा इकाइयों और सामान्य अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (CETP) को बंद कर दिया गया था।
  • पेरुंदुरई SIPCOT प्रभावित जन कल्याण संघ (Perundurai SIPCOT Affected People’s Welfare Association) ने 2018 में इस मुद्दे को उठाना शुरू किया।
  • वर्तमान में, दूषित रिसाव जल के उपचार और उद्योगों को पानी की आपूर्ति के लिए ₹136.76 करोड़ की लागत से एक सामान्य अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (CETP) निर्माणाधीन है।

भूजल संदूषण और औद्योगिक प्रदूषण

  • भूजल संदूषण (Groundwater Contamination) तब होता है जब मानव गतिविधियों या प्राकृतिक प्रक्रियाओं के कारण हानिकारक पदार्थ भूजल में मिल जाते हैं, जिससे वह पीने या अन्य उपयोगों के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।
  • औद्योगिक प्रदूषण (Industrial Pollution) विभिन्न उद्योगों द्वारा उत्पन्न अपशिष्टों, जैसे रासायनिक अपशिष्ट, भारी धातुएँ, विषैले पदार्थ आदि के अनुचित निपटान या रिसाव के कारण होता है।
  • कपड़ा रंगाई और प्रसंस्करण इकाइयाँ (Textile Dyeing and Processing Units) भारी मात्रा में रसायनों और रंगों का उपयोग करती हैं, जिनके अपशिष्ट जल में उच्च TDS, जैविक और अकार्बनिक प्रदूषक होते हैं।
  • चमड़ा उद्योग (Tannery Industry) क्रोमियम जैसे भारी धातुओं और अन्य विषैले रसायनों का उपयोग करता है, जो यदि अनुपचारित छोड़ दिए जाएँ तो गंभीर भूजल संदूषण का कारण बनते हैं।
  • अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (Effluent Treatment Plants – ETPs) और सामान्य अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (Common Effluent Treatment Plants – CETPs) औद्योगिक अपशिष्ट जल को पर्यावरण में छोड़ने से पहले उपचारित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ETPs व्यक्तिगत इकाइयों के लिए होते हैं जबकि CETPs कई इकाइयों के लिए साझा सुविधाएँ होती हैं।
  • भारत में, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) और जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974) जैसे कानून औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) इन कानूनों को लागू करने और पर्यावरणीय मानकों की निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
SIPCOT औद्योगिक विकास केंद्र, पेरुंदुरई तमिलनाडु में एक प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर, जिसमें 250 से अधिक उद्योग शामिल हैं।
भूजल संदूषण 25 गाँवों में पीने के लिए अनुपयुक्त पाया गया, जिससे स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
वस्त्र रंगाई और प्रसंस्करण इकाइयाँ SIPCOT में 52 इकाइयाँ, जिनमें से अधिकांश के पास व्यक्तिगत अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ETP) हैं, फिर भी प्रदूषण का स्रोत हैं।
चमड़ा उद्योग (Tannery Operations) 2001 में कावेरी और कलिंगरायन नहर से SIPCOT में स्थानांतरित की गईं, 2021 में प्रदूषण की शिकायतों के बाद बंद कर दी गईं।
कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) दूषित पानी के उपचार के लिए ₹136.76 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन, लेकिन दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • औद्योगिक अपशिष्टों के अनुचित निपटान से भूजल और सतही जल निकायों का व्यापक संदूषण।
  • मिट्टी और जल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव, जैव विविधता को खतरा।
  • पर्यावरण नियमों के प्रभावी प्रवर्तन और निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

सामाजिक महत्व

  • दूषित पानी के कारण स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव, विशेषकर पीने और कृषि के लिए।
  • किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव, क्योंकि वे दूषित जल निकायों का उपयोग खेती के लिए नहीं कर सकते।
  • प्रदूषण के खिलाफ सामुदायिक आंदोलनों और जन जागरूकता की बढ़ती भूमिका।

आर्थिक महत्व

  • प्रदूषण नियंत्रण उपायों और उपचार संयंत्रों में भारी निवेश की आवश्यकता, जो उद्योगों और सरकार दोनों पर वित्तीय बोझ डालता है।
  • कृषि उत्पादकता में कमी और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव।
  • सतत औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने की चुनौती।

शासनिक महत्व

  • पर्यावरण संरक्षण कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन में कमियाँ उजागर करता है।
  • स्थानीय निकायों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और औद्योगिक इकाइयों के बीच समन्वय की आवश्यकता।
  • प्रदूषण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक और स्थायी नीतियों के निर्माण पर जोर।

चुनौतियाँ

1. औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन

  • कई उद्योगों द्वारा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (ETP) का अप्रभावी संचालन और अनुपचारित अपशिष्टों का निर्वहन।
  • कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की क्षमता और दक्षता सुनिश्चित करना।

2. भूजल संदूषण

  • औद्योगिक अपशिष्टों के रिसाव से भूजल स्रोतों का दूषित होना, जिससे पीने योग्य पानी की कमी।
  • दूषित भूजल के स्वास्थ्य और कृषि पर दीर्घकालिक प्रभाव।

3. नियामक प्रवर्तन में कमियाँ

  • पर्यावरण नियमों और कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन में चुनौतियाँ।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की निगरानी और निरीक्षण क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता।

4. दीर्घकालिक समाधान का अभाव

  • मौजूदा उपचार संयंत्रों के बावजूद, स्थायी और दीर्घकालिक समाधानों की कमी।
  • प्रदूषण के मूल कारणों को संबोधित करने और निवारक उपायों को लागू करने की आवश्यकता।

5. सामुदायिक स्वास्थ्य और आजीविका

  • दूषित पानी के कारण स्थानीय आबादी में स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ना।
  • किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव, जिससे आर्थिक अस्थिरता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अनौपचारिक अपशिष्ट निर्वहन उद्योगों द्वारा अनुपचारित अपशिष्टों को ऑक्सीकरण तालाबों, अप्रयुक्त बोरवेलों और जल निकायों में छोड़ना।
ETP/CETP से रिसाव अपशिष्ट भंडारण और उपचार सुविधाओं से रिसाव के कारण भूजल का संदूषण।
उच्च TDS स्तर भूजल में कुल घुलित ठोस (TDS) का अत्यधिक स्तर, जो पीने के लिए अनुपयुक्त बनाता है।
कृषि पर प्रभाव दूषित पानी के कारण फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में कमी, किसानों की आजीविका प्रभावित।
स्वास्थ्य जोखिम दूषित पेयजल के कारण स्थानीय निवासियों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा।

आगे की राह

  • अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (ETP/CETP) की क्षमता और दक्षता में सुधार करना तथा उनके संचालन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।
  • औद्योगिक अपशिष्टों के अवैध निर्वहन को रोकने के लिए सख्त नियामक प्रवर्तन और उल्लंघनकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई।
  • भूजल संदूषण की निगरानी के लिए एक व्यापक प्रणाली स्थापित करना और प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक सुरक्षित पेयजल स्रोतों की व्यवस्था करना।
  • उद्योगों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और शून्य तरल निर्वहन (Zero Liquid Discharge) प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) प्रक्रियाओं को मजबूत करना और औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले जनभागीदारी सुनिश्चित करना।
  • प्रदूषण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक और स्थायी नीतियाँ विकसित करना, जिसमें जल पुनर्चक्रण और अपशिष्टों का पुनः उपयोग शामिल हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

औद्योगिक प्रदूषण · भूजल संदूषण · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम · केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड · राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड · अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र · साझा बहिःस्राव उपचार संयंत्र · सतत विकास · पर्यावरण प्रभाव आकलन · प्रदूषण नियंत्रण · जल प्रदूषण · पर्यावरण न्याय

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य’}

अवधारणा प्रवाह

SIPCOT औद्योगिक विकास केंद्र में उद्योगों की स्थापना  →  औद्योगिक अपशिष्टों का अनुचित उपचार और निर्वहन  →  भूजल और सतही जल निकायों का संदूषण  →  स्थानीय गाँवों में पीने के पानी की अनुपयुक्तता  →  निवासियों के स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव  →  पर्यावरण नियमों के प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एक सांविधिक निकाय है।
2. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की सुरक्षा और सुधार के लिए आवश्यक उपाय करने का अधिकार देता है।
3. साझा बहिःस्राव उपचार संयंत्र (CETP) केवल कपड़ा उद्योगों के लिए अनिवार्य हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CPCB जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है। कथन 2 सही है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एक व्यापक कानून है जो केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है। कथन 3 गलत है। CETP विभिन्न प्रकार के उद्योगों के लिए स्थापित किए जाते हैं, न कि केवल कपड़ा उद्योगों के लिए।

Q2. कथन (A): औद्योगिक संदूषण से भूजल का दूषित होना एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है।
कारण (R): उद्योगों द्वारा अनुपचारित या अपर्याप्त रूप से उपचारित बहिःस्राव को जल निकायों या भूमि में छोड़ा जाना भूजल संदूषण का एक प्रमुख कारण है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि औद्योगिक प्रदूषण से भूजल का दूषित होना एक गंभीर समस्या है, जैसा कि तमिलनाडु के पेरुनदुरई में देखा गया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि अनुपचारित औद्योगिक बहिःस्राव सीधे भूजल को दूषित करता है। कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ औद्योगिक प्रदूषण के कारण भूजल संदूषण भारत में एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है। इस समस्या के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसके समाधान के लिए सरकारी नीतियों और नियामक ढाँचे की प्रभावशीलता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: औद्योगिक प्रदूषण और भूजल संदूषण की समस्या का संक्षिप्त परिचय, तमिलनाडु के पेरुनदुरई जैसे हालिया उदाहरणों का उल्लेख।
2. भूजल संदूषण के कारण: अनुपचारित औद्योगिक बहिःस्राव, अपर्याप्त अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ETP/CETP), पुराने बुनियादी ढाँचे से रिसाव, खतरनाक कचरे का अनुचित निपटान, नियामक निगरानी की कमी।
3. सरकारी नीतियाँ और नियामक ढाँचा: जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB/SPCB) की भूमिका; पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया; राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की भूमिका; साझा बहिःस्राव उपचार संयंत्र (CETP) योजनाएँ।
4. प्रभावशीलता का आलोचनात्मक परीक्षण: नीतियों के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ (जैसे निगरानी की कमी, प्रवर्तन में ढिलाई, भ्रष्टाचार), CETP की सीमित क्षमता और प्रभावशीलता, उद्योगों द्वारा नियमों का उल्लंघन, जन जागरूकता और भागीदारी की कमी, न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता।
5. आगे की राह/सुझाव: कठोर प्रवर्तन, उन्नत उपचार प्रौद्योगिकियों का उपयोग, सतत औद्योगिक प्रथाओं को बढ़ावा देना, जन जागरूकता, नागरिक समाज की भागीदारी, नियामक निकायों को सशक्त बनाना, प्रदूषण फैलाने वाले पर भुगतान का सिद्धांत (Polluter Pays Principle) का प्रभावी कार्यान्वयन।

स्रोत: The Hindu

Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: तमिलनाडु के पेरुन्दुराई में SIPCOT द्वारा स्थापित औद्योगिक इकाइयों से उत्पन्न प्रदूषण के कारण निम्नलिखित में से कौन-सा प्रभाव हुआ है?

  1. A. 25 गांवों में भूजल प्रदूषण
  2. B. तटीय क्षेत्रों में लवणीय जल का अतिक्रमण
  3. C. कृषि भूमि में भारी धातुओं की कमी
  4. D. वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि

उत्तर: A. 25 गांवों में भूजल प्रदूषण — SIPCOT द्वारा स्थापित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रसायनों ने पेरुन्दुराई के 25 गांवों में भूजल को प्रदूषित किया है।

Mains: SIPCOT द्वारा स्थापित औद्योगिक प्रदूषण के कारण पेरुन्दुराई क्षेत्र में भूजल प्रदूषण के प्रमुख कारणों एवं इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का वर्णन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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