तमिलनाडु के सांसदों से मिलेंगे सीएम विजय, परिसीमन विधेयक पर चर्चा

CM Vijay to hold consultation with Tamil Nadu MPs on Delimitation Bill on August 9 — diagram

तमिलनाडु के सांसदों से मिलेंगे सीएम विजय, परिसीमन विधेयक पर चर्चा

Delimitation ProcessBill ProposalCenter introduces DelimitationConsultationCM Vijay meets MPsParliament PassBill passed in ParliamentCommission SetupDelimitation Commission formedSeat RedistributionSeats adjusted per population
Delimitation Process

✎ परिसीमन निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन है, जो जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर 'एक व्यक्ति, एक वोट' के सिद्धांत को सुनिश्चित करता है और 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद इसका व्यापक प्रभाव अपेक्षित है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ
  • Prelims: परिसीमन आयोग, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 170, जनसंख्या जनगणना, लोकसभा सीटें, राज्य विधानसभा सीटें, अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण, 42वाँ संविधान संशोधन, 84वाँ संविधान संशोधन, 87वाँ संविधान संशोधन
  • Essay: भारत में संघवाद: चुनौतियाँ और भविष्य, प्रतिनिधित्व का संकट: क्या जनसंख्या आधारित परिसीमन न्यायसंगत है?

त्वरित पुनरावृत्ति: परिसीमन निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन है, जो जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करता है और 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद इसका व्यापक प्रभाव अपेक्षित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर राज्य के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के साथ 9 अगस्त, 2026 को एक परामर्श बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह बैठक विधेयक के राज्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई है, क्योंकि केंद्र सरकार संसद में इस विधेयक को पारित करने के लिए कदम उठा रही है।

पृष्ठभूमि

  • परिसीमन का अर्थ किसी देश या एक विधायी निकाय वाले प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना है।
  • भारत में, परिसीमन का कार्य एक उच्चाधिकार प्राप्त निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसके आदेशों को कानून के समान माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • संविधान के अनुच्छेद 82 (Article 82) के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद संसद एक परिसीमन अधिनियम बनाती है। अनुच्छेद 170 (Article 170) राज्यों को भी इसी तरह के परिसीमन की अनुमति देता है।
  • पहला परिसीमन आयोग 1952 में गठित किया गया था। इसके बाद 1963, 1973 और 2002 में आयोगों का गठन किया गया।
  • 42वें संविधान संशोधन (42nd Constitutional Amendment) अधिनियम, 1976 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों के परिसीमन को 2001 की जनगणना के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, ताकि परिवार नियोजन कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा सके।
  • 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया, लेकिन राज्यों के भीतर सीटों के पुनर्वितरण की अनुमति दी।
  • 87वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने 2001 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की अनुमति दी, न कि 1991 की जनगणना के आधार पर।
  • वर्तमान में, लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर निर्धारित है और यह 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक अपरिवर्तित रहेगी।

परिसीमन क्या है?

  • परिसीमन का तात्पर्य किसी देश में विधायी निकायों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया से है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या में परिवर्तन को दर्शाने और सभी नागरिकों के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों को पुनर्गठित करना है।
  • परिसीमन आयोग का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है और इसमें सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner) और संबंधित राज्य निर्वाचन आयुक्त (State Election Commissioners) शामिल होते हैं।
  • आयोग का मुख्य कार्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना, अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के लिए आरक्षित सीटों की पहचान करना और जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आवंटन करना है।
  • परिसीमन आयोग के आदेश अंतिम होते हैं और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, जिससे इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वायत्तता सुनिश्चित होती है।
  • यह प्रक्रिया जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • आगामी परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की आशंका है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि उत्तरी राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं, जिससे संघवाद पर बहस छिड़ गई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परिसीमन विधेयक पर परामर्श यह विधेयक के राज्य पर संभावित प्रभावों को समझने और सांसदों की चिंताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
तमिलनाडु के सांसदों से चर्चा राज्य के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को शामिल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है और राज्य के हितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक यह दर्शाता है कि परिसीमन एक राष्ट्रीय मुद्दा है जिसका राज्यों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
राज्य के हितों पर प्रभाव परिसीमन से विधानसभा और संसदीय सीटों की संख्या और संरचना बदल सकती है, जिससे राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सीधा असर पड़ेगा।

महत्व

राजनीतिक महत्व

  • परिसीमन (Delimitation) विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना है, जिसका सीधा प्रभाव राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ता है।
  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा सांसदों के साथ परामर्श राज्य के विशिष्ट हितों और चिंताओं को केंद्र सरकार के समक्ष रखने में मदद करेगा।
  • यह संघवाद (Federalism) के सिद्धांत को मजबूत करता है, जहां केंद्र और राज्य सरकारों के बीच महत्वपूर्ण विधायी मामलों पर चर्चा होती है।

संवैधानिक महत्व

  • परिसीमन प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 82 (लोकसभा के लिए) और अनुच्छेद 170 (राज्य विधानसभाओं के लिए) के तहत की जाती है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक राज्य में प्रतिनिधित्व उसकी जनसंख्या के अनुपात में हो, जैसा कि संविधान में परिकल्पित है।
  • जनसंख्या वृद्धि में क्षेत्रीय असमानताओं के कारण दक्षिणी राज्यों को प्रतिनिधित्व में संभावित कमी का डर है, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि उत्तरी राज्यों की तुलना में धीमी रही है।

सामाजिक महत्व

  • परिसीमन से विभिन्न सामाजिक समूहों और समुदायों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है, खासकर आरक्षित सीटों के संदर्भ में।
  • यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर उचित रूप से किया जाए।

चुनौतियाँ

1. जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व

  • दक्षिणी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे उन्हें डर है कि परिसीमन के बाद लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
  • यह राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों के लिए ‘दंडित’ करने जैसा प्रतीत हो सकता है, जिससे संघवाद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2. राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन

  • यदि सीटों का पुनर्वितरण केवल नवीनतम जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित होता है, तो यह दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकता है और उत्तरी राज्यों के प्रभाव को बढ़ा सकता है।
  • यह राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति संतुलन को बाधित कर सकता है।

3. परिसीमन आयोग की स्वतंत्रता

  • परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) एक स्वतंत्र निकाय है, लेकिन इसकी सिफारिशों पर राजनीतिक दलों के बीच अक्सर मतभेद होते हैं।
  • विधेयक के पारित होने और कार्यान्वयन में राजनीतिक सहमति एक चुनौती हो सकती है।

4. राज्यों की संप्रभुता पर प्रभाव

  • कुछ राज्यों को यह चिंता है कि परिसीमन उनके राज्य के भीतर राजनीतिक सीमाओं और प्रतिनिधित्व को केंद्र सरकार द्वारा एकतरफा रूप से बदलने का प्रयास है।
  • यह राज्य की स्वायत्तता और संघवाद के सिद्धांतों पर बहस को जन्म दे सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जनसंख्या नियंत्रण बनाम प्रतिनिधित्व जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को लोकसभा में कम सीटों का सामना करना पड़ सकता है।
राज्यों के बीच शक्ति संतुलन परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है।
संघवाद का सिद्धांत राज्यों को यह महसूस हो सकता है कि उनके हितों को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा जा रहा है, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव आ सकता है।
राजनीतिक सर्वसम्मति का अभाव परिसीमन विधेयक पर विभिन्न राजनीतिक दलों और राज्यों के बीच आम सहमति बनाना एक चुनौती है।

आगे की राह

  • केंद्र सरकार को परिसीमन प्रक्रिया के संबंध में सभी राज्यों के साथ व्यापक और समावेशी परामर्श करना चाहिए।
  • जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को प्रतिनिधित्व में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक तंत्रों पर विचार किया जाना चाहिए।
  • परिसीमन आयोग को अपनी सिफारिशें देते समय जनसंख्या के साथ-साथ अन्य कारकों, जैसे भौगोलिक निरंतरता और प्रशासनिक इकाइयों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
  • एक राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए राजनीतिक दलों और राज्यों के बीच गहन संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  • परिसीमन के प्रभावों पर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया जा सकता है, जिसमें विभिन्न परिदृश्यों और उनके निहितार्थों का विश्लेषण हो।
  • परिसीमन के संबंध में संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है, ताकि सभी राज्यों के हितों को संतुलित किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परिसीमन विधेयक · अनुच्छेद 82 · अनुच्छेद 170 · जनसंख्या प्रतिनिधित्व · संघीय ढाँचा · राज्यों का प्रतिनिधित्व · लोकसभा सीटें · राज्य विधानसभा सीटें · जनसांख्यिकीय लाभांश · संवैधानिक संशोधन · समान प्रतिनिधित्व · मतदाता संख्या

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘लोकसभा सीटों का पुनर्समायोजन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 170’, ‘note’: ‘राज्य विधानसभा सीटों का पुनर्समायोजन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 330’, ‘note’: ‘लोकसभा में SC/ST सीटों का आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 332’, ‘note’: ‘राज्य विधानसभाओं में SC/ST सीटों का आरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन विधेयक का प्रस्ताव  →  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा सांसदों के साथ परामर्श  →  राज्य के हितों और चिंताओं पर चर्चा  →  जनसंख्या वृद्धि में असमानताओं के कारण प्रतिनिधित्व में संभावित परिवर्तन  →  संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव  →  लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों का पुनर्समायोजन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है।
2. परिसीमन आयोग एक उच्च-शक्ति वाला निकाय है जिसके आदेशों को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के परिसीमन को 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 सही है। परिसीमन आयोग के आदेशों को कानून के समान बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। कथन 3 गलत है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के परिसीमन को 2001 तक के लिए स्थगित कर दिया था। बाद में, 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने इस स्थगन को 2026 तक बढ़ा दिया।

Q2. परिसीमन आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. परिसीमन आयोग में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त, संबंधित राज्य के चुनाव आयुक्त और सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल होते हैं।
2. आयोग का मुख्य कार्य विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है ताकि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में जनसंख्या का अनुपात लगभग समान हो।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है। परिसीमन आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश अध्यक्ष के रूप में, मुख्य चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य के चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। कथन 2 सही है। आयोग का मुख्य कार्य जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से खींचना है ताकि जनसंख्या के अनुपात में सीटों का समान वितरण सुनिश्चित हो सके।

Q3. अभिकथन (A): परिसीमन का उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को प्राप्त करना है।
कारण (R): परिसीमन यह सुनिश्चित करता है कि सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगभग समान हो।

  1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि परिसीमन का मूल उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के वोट के मूल्य को समान बनाना है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या को समान करके ही ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में परिसीमन की प्रक्रिया और इसके संवैधानिक प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। क्या आपको लगता है कि आगामी परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिसीमन की परिभाषा और उद्देश्य से शुरुआत करें। संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 82, 170, 330, 332) का उल्लेख करें। परिसीमन आयोग की संरचना और कार्यों का वर्णन करें। 42वें और 84वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से सीटों के स्थगन के ऐतिहासिक संदर्भ को स्पष्ट करें। दक्षिणी राज्यों पर संभावित प्रभाव का विश्लेषण करें, जिसमें जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता और परिणामस्वरूप कम सीटों की संभावना शामिल हो। संघीय संतुलन, प्रतिनिधित्व के सिद्धांत और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के आदर्श पर इसके प्रभावों पर चर्चा करें। इस मुद्दे से जुड़े विभिन्न दृष्टिकोणों (जनसंख्या नियंत्रण को पुरस्कृत करना बनाम प्रतिनिधित्व का नुकसान) को प्रस्तुत करें और एक संतुलित निष्कर्ष दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment