08 Aug तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया
✎ भारत में केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संघवाद की आधारशिला हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के संवैधानिक विभाजन पर आधारित हैं और समय-समय पर विभिन्न समितियों द्वारा इनकी समीक्षा की जाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ | GS Paper II — केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
- Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, उच्च-स्तरीय समिति, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति, संविधान की सातवीं अनुसूची, राजकोषीय संघवाद, सरकारी आदेश
- Essay: भारत में संघवाद: चुनौतियाँ और आगे की राह, सहकारी संघवाद और प्रतिस्पर्धी संघवाद का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संघवाद की आधारशिला हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के संवैधानिक विभाजन पर आधारित हैं और समय-समय पर विभिन्न समितियों द्वारा इनकी समीक्षा की जाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) की रिपोर्ट के भाग-I के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट को व्यापक पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है, क्योंकि इसका तमिल संस्करण पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट (exclusive copyright) को भी रद्द करने का आदेश दिया है।
पृष्ठभूमि
- तमिलनाडु की पिछली DMK सरकार ने 15 अप्रैल, 2025 को केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
- इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ (Justice Kurian Joseph) ने की थी।
- सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन को समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था।
- समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 16 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत किया था।
- मुख्यमंत्री स्टालिन ने 18 फरवरी, 2026 को इस रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किया था।
- हाल ही में, 30 जुलाई, 2026 को लोक विभाग द्वारा एक सरकारी आदेश जारी किया गया, जिसमें रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक करने और उसके कॉपीराइट को रद्द करने का निर्देश दिया गया।
भारत में केंद्र-राज्य संबंध
- भारतीय संविधान संघात्मक है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है।
- संविधान के भाग XI और XII में केंद्र-राज्य विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का विस्तृत वर्णन है।
- सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है।
- प्रशासनिक संबंधों में अनुच्छेद 256 से 263 तक केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक सहयोग और समन्वय का प्रावधान है।
- वित्तीय संबंधों में अनुच्छेद 268 से 293 तक कराधान, राजस्व वितरण और ऋण लेने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जो राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) का आधार हैं।
- समय-समय पर केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए विभिन्न आयोगों और समितियों का गठन किया गया है, जिनमें सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) प्रमुख हैं।
- इन संबंधों में तनाव के मुख्य बिंदु अक्सर वित्तीय संसाधनों के वितरण, राज्यपाल की भूमिका, अखिल भारतीय सेवाओं और राज्यों की स्वायत्तता से संबंधित होते हैं।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) भारत में केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च-स्तरीय समिति का गठन | केंद्र-राज्य संबंधों की जटिल प्रकृति का अध्ययन करने और सुधारों का सुझाव देने के लिए एक समर्पित मंच। |
| रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करना | केंद्र-राज्य संबंधों पर समिति की सिफारिशों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है। |
| रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण का विमोचन | तमिलनाडु के बाहर भी रिपोर्ट की पहुंच और प्रभाव को बढ़ाता है, राष्ट्रीय बहस को बढ़ावा देता है। |
| कॉपीराइट रद्द करना | रिपोर्ट के स्वतंत्र उपयोग, प्रसार और विश्लेषण को सक्षम बनाता है, ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देता है। |
| न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता | समिति की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है, जिससे उसकी सिफारिशों को अधिक वजन मिलता है। |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का तमिलनाडु सरकार का निर्णय केंद्र-राज्य संबंधों के मामलों में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को समिति की सिफारिशों का सीधे मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे शासन में सुधार होता है।
संघवाद
- यह कदम भारत में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को मजबूत करता है, जहां राज्य सरकारें संघ के साथ अपने संबंधों के संबंध में सक्रिय रूप से अपनी चिंताओं और सुझावों को व्यक्त करती हैं।
- यह केंद्र-राज्य संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को बढ़ावा देता है, जो भारतीय संघवाद के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
नीति निर्माण
- समिति की सिफारिशें केंद्र-राज्य संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भविष्य की नीतियों और विधायी सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकती हैं।
- रिपोर्ट का सार्वजनिक होना विभिन्न हितधारकों को इन सिफारिशों पर विचार-विमर्श करने और अपनी प्रतिक्रिया देने में सक्षम करेगा, जिससे अधिक समावेशी नीति निर्माण होगा।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य संबंधों में असंतुलन
- राज्यों को अक्सर वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy) की कमी और केंद्रीय योजनाओं पर अत्यधिक निर्भरता का सामना करना पड़ता है।
- प्रशासनिक और विधायी क्षेत्रों में केंद्र का हस्तक्षेप राज्यों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism)
- राज्यों के लिए राजस्व के सीमित स्रोत और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी को लेकर विवाद।
- वित्त आयोग (Finance Commission) की सिफारिशों और उनके कार्यान्वयन को लेकर राज्यों की चिंताएँ।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, वित्त आयोग
3. अंतर-राज्यीय विवाद
- नदी जल बँटवारे, क्षेत्रीय दावों और सीमा विवादों जैसे मुद्दों पर राज्यों के बीच संघर्ष।
- इन विवादों को सुलझाने में केंद्र की भूमिका और उसकी प्रभावशीलता।
यूपीएससी लिंक: अंतर-राज्यीय संबंध, नदी जल विवाद
4. राज्यपाल की भूमिका
- राज्यपाल (Governor) के पद की निष्पक्षता और उसकी संवैधानिक भूमिका को लेकर अक्सर विवाद होते हैं।
- राज्य सरकारों को बर्खास्त करने या विधेयक को मंजूरी देने में राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों का उपयोग।
यूपीएससी लिंक: राज्यपाल की भूमिका, संवैधानिक पद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय स्वायत्तता | राज्यों के लिए राजस्व के सीमित स्रोत और केंद्रीय अनुदान पर निर्भरता। |
| विधायी क्षेत्राधिकार | समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर केंद्र द्वारा कानून बनाने से राज्यों की स्वायत्तता का हनन। |
| प्रशासनिक नियंत्रण | अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) पर केंद्र का नियंत्रण और राज्यों पर इसका प्रभाव। |
| संस्थागत तंत्र | अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) जैसे मंचों की अप्रभावी भूमिका। |
| संविधान का अनुच्छेद 356 | राज्य सरकारों को बर्खास्त करने के लिए इसके दुरुपयोग की संभावना। |
आगे की राह
- राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और उनके राजस्व स्रोतों को मजबूत करना।
- अंतर-राज्यीय परिषद जैसे संवैधानिक निकायों को सक्रिय और प्रभावी बनाना।
- राज्यपाल के पद की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) की सिफारिशों को लागू करना।
- केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण की समीक्षा करना, विशेषकर समवर्ती सूची के संबंध में।
- केंद्र-राज्य संबंधों पर नियमित परामर्श और संवाद के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित करना।
- विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देना और राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं का सम्मान करना।
- राज्यों के बीच विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संघ-राज्य संबंध · सहकारी संघवाद · राजकोषीय संघवाद · प्रशासनिक संबंध · विधायी संबंध · उच्च-स्तरीय समिति · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · अनुच्छेद 245-255 · अनुच्छेद 256-263 · अनुच्छेद 268-281 · पारदर्शिता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 245-255’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंध’}
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अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार ने समिति का गठन किया → समिति ने केंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की → रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश → कॉपीराइट रद्द कर पारदर्शिता सुनिश्चित की गई → केंद्र-राज्य संबंधों पर राष्ट्रीय बहस को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का भाग XI संघ और राज्यों के बीच विधायी संबंधों से संबंधित है।
2. अनुच्छेद 263 अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) की स्थापना का प्रावधान करता है।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) का गठन 1983 में संघ-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया गया था।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। संविधान का भाग XI (अनुच्छेद 245 से 263) संघ और राज्यों के बीच विधायी और प्रशासनिक संबंधों से संबंधित है। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 263 अंतर-राज्यीय परिषद की स्थापना का प्रावधान करता है, जिसका उद्देश्य संघ और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना है। कथन 3 सही है। सरकारी आयोग का गठन जून 1983 में केंद्र-राज्य संबंधों की जांच के लिए किया गया था और इसने 1987 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
Q2. कथन (A): तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का आदेश दिया है।
कारण (R): यह कदम संघ-राज्य संबंधों में पारदर्शिता और खुलेपन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि तमिलनाडु सरकार ने वास्तव में रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का आदेश दिया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक पहुंच बढ़ाने के लिए उठाया गया है, जैसा कि समाचार में बताया गया है। R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में संघ-राज्य संबंधों की प्रकृति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, तमिलनाडु सरकार द्वारा संघ-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखने के हालिया निर्णय के महत्व पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में संघवाद और भारत में इसकी अनूठी प्रकृति का संक्षिप्त उल्लेख करें। मुख्य भाग में, संघ-राज्य संबंधों के विभिन्न आयामों (विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय) पर चर्चा करें और उनके बीच तनाव के क्षेत्रों को उजागर करें। सरकारी आयोग, पुंछी आयोग जैसे विभिन्न आयोगों की सिफारिशों का उल्लेख करें। तमिलनाडु सरकार के हालिया निर्णय को पारदर्शिता, जवाबदेही और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें। निष्कर्ष में, संघ-राज्य संबंधों को मजबूत करने के लिए आगे के उपायों और सहकारी संघवाद के महत्व पर जोर दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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