07 Aug थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना: आयात पर निर्भरता घटाने का बड़ा कदम

✎ थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना भारत को महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल अवयवों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय। सरकारी बजट। | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसके प्रभाव। देशज प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण।
- Prelims: थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयव (API), महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI), फार्मास्युटिकल उद्योग, आत्मनिर्भर भारत
- Essay: भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाओं की भूमिका।, आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का लचीलापन: भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग का विशेष संदर्भ।
त्वरित पुनरावृत्ति: थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना भारत को महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल अवयवों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने थोक दवाओं के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना के लिए 6,940 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है, जिसमें से मार्च 2026 तक 87.70 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन वितरित किया जा चुका है। यह पहल भारत की आयात पर निर्भरता को कम करने और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फार्मास्युटिकल उत्पादक है, लेकिन सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के लिए चीन जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भर है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान ने इस निर्भरता की कमजोरियों को उजागर किया, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई।
- सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की।
- थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना विशेष रूप से फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करने और भारत को महत्वपूर्ण दवाओं के उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
- इस योजना के तहत, मार्च 2026 तक 4,329.95 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश के मुकाबले कुल 5,070.45 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया गया है, जो योजना की सफलता को दर्शाता है।
उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात बिलों को कम करना है।
- यह योजना विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों को भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहित करना, बड़े निवेश आकर्षित करना और रोजगार सृजित करना है।
- थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- इस योजना के तहत, पात्र निर्माताओं को उनके वृद्धिशील उत्पादन और बिक्री पर एक निश्चित प्रतिशत प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है, जो उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
- योजना का लक्ष्य भारत को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में इसकी भूमिका को मजबूत करना है।
- यह योजना न केवल आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देती है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| घरेलू उत्पादन को बढ़ावा | महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्रियों (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के आयात पर निर्भरता कम करना। |
| 48 परियोजनाओं को मंजूरी | देश भर में फार्मास्युटिकल विनिर्माण क्षमता का विस्तार और विविधीकरण। |
| 6,940 करोड़ रुपये का स्वीकृत परिव्यय | योजना के तहत प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता। |
| 5,070.45 करोड़ रुपये का निवेश | निजी क्षेत्र से मजबूत प्रतिबद्धता और योजना के उद्देश्यों की दिशा में प्रगति। |
| 18 API का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू | पेनिसिलिन जी, डेक्सामेथासोन, एटोरवास्टेटिन जैसे महत्वपूर्ण दवाओं के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर आयात बिल में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
- फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बल मिलेगा।
- उच्च मूल्य वर्धित उत्पादों के उत्पादन से भारत की निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।
सामरिक महत्व
- महत्वपूर्ण दवाओं और उनके घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम होने से देश की औषधि सुरक्षा (Drug Security) सुनिश्चित होगी।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में व्यवधानों के प्रति भारत की भेद्यता कम होगी, विशेषकर महामारी जैसी स्थितियों में।
- भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी, जिससे भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।
सामाजिक महत्व
- देश में दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य में सुधार होगा, जिससे आम जनता को लाभ होगा।
- गुणवत्तापूर्ण दवाओं के घरेलू उत्पादन से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।
- अनुसंधान और विकास (Research and Development) को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे नई दवाओं और उपचारों का विकास संभव होगा।
चुनौतियाँ
1. अनुसंधान और विकास में निवेश की कमी
- भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं के उत्पादन पर केंद्रित है, जिससे मौलिक अनुसंधान में निवेश कम है।
- नए API के विकास और नवाचार के लिए पर्याप्त R&D पारिस्थितिकी तंत्र का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास एवं अनुप्रयोग
2. गुणवत्ता नियंत्रण और नियामक चुनौतियाँ
- वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना एक चुनौती है, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए।
- नियामक प्रक्रियाओं में जटिलता और समय-खपत घरेलू उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन – सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
3. बुनियादी ढांचा और कौशल अंतर
- उन्नत विनिर्माण सुविधाओं और विशिष्ट कौशल वाले कार्यबल की कमी कुछ क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता को बाधित कर सकती है।
- पर्याप्त बिजली, जल और लॉजिस्टिक्स समर्थन की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे आदि
4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीन जैसे प्रमुख उत्पादकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो लागत प्रभावी उत्पादन प्रदान करते हैं।
- वैश्विक व्यापार नियमों और शुल्कों में बदलाव भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोजगार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आयात पर निर्भरता | महत्वपूर्ण KSM/DI/API के लिए अभी भी चीन जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भरता। |
| वाणिज्यिक उत्पादन में देरी | कुछ स्वीकृत परियोजनाओं में अभी तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है, जिससे योजना के लाभों में देरी हो रही है। |
| राज्यों में असमान विकास | कुछ राज्यों में परियोजनाओं की संख्या और निवेश अपेक्षाकृत कम है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन हो सकता है। |
| प्रोत्साहन वितरण की गति | स्वीकृत परिव्यय के मुकाबले प्रोत्साहन वितरण की गति धीमी है, जिससे निवेशकों का उत्साह प्रभावित हो सकता है। |
| तकनीकी उन्नयन | पुराने विनिर्माण प्रक्रियाओं को आधुनिक, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों में बदलने की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (बल्क ड्रग्स के लिए)
आगे की राह
- अनुसंधान और विकास (R&D) में सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ावा देना, विशेषकर नवीन API के विकास के लिए।
- गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को मजबूत करना और नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रह सकें।
- फार्मास्युटिकल क्लस्टर (Pharmaceutical Clusters) विकसित करना और साझा बुनियादी ढाँचा (Common Infrastructure) प्रदान करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए विशिष्ट कार्यबल तैयार करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को तकनीकी उन्नयन और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
- योजना के तहत प्रोत्साहन वितरण प्रक्रिया को और अधिक कुशल और समयबद्ध बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना · थोक दवाएं · महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) · औषधि मध्यवर्ती (डीआई) · सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयव (एपीआई) · घरेलू उत्पादन · आत्मनिर्भर भारत · आयात निर्भरता में कमी · फार्मास्युटिकल क्षेत्र · विनिर्माण प्रोत्साहन · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (ख)’, ‘note’: ‘सामुदायिक भौतिक संसाधनों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करना’}
अवधारणा प्रवाह
भारत की आयात पर निर्भरता → घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन की आवश्यकता → PLI योजना का शुभारंभ → घरेलू विनिर्माण क्षमता का विकास → आयात निर्भरता में कमी और आत्मनिर्भरता → आर्थिक संवृद्धि और औषधि सुरक्षा में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. थोक दवाओं के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (केएसएम), औषधि मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
2. इस योजना के तहत केवल रासायनिक संश्लेषण आधारित उत्पादों को ही प्रोत्साहन दिया जाता है।
3. योजना का लक्ष्य फार्मास्युटिकल उत्पादों के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का प्राथमिक उद्देश्य भारत में केएसएम, डीआई और एपीआई के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना किण्वन आधारित और रासायनिक संश्लेषण आधारित दोनों प्रकार के उत्पादों को कवर करती है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना का एक प्रमुख लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से उत्पाद थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना के तहत अनुमोदित है/हैं?
1. पेनिसिलिन जी
2. एटोरवास्टेटिन
3. विटामिन बी6
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — पेनिसिलिन जी, एटोरवास्टेटिन और विटामिन बी6 तीनों ही थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना के तहत अनुमोदित उत्पादों की सूची में शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ थोक दवाओं के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के उद्देश्यों और अब तक की उपलब्धियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में यह योजना कितनी प्रभावी सिद्ध हुई है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना का संक्षिप्त परिचय और इसके प्रमुख उद्देश्य।
उद्देश्य: योजना के मुख्य उद्देश्यों का विस्तृत वर्णन, जैसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (केएसएम), औषधि मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात निर्भरता कम करना, विनिर्माण क्षमता बढ़ाना और निवेश आकर्षित करना।
उपलब्धियां: योजना के तहत अब तक की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख, जिसमें स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या (48), स्वीकृत परिव्यय (6,940 करोड़ रुपये), वास्तविक निवेश (5,070.45 करोड़ रुपये), सृजित उत्पादन क्षमता (28 एपीआई/केएसएम/डीआई), और उन उत्पादों का नाम (जैसे पेनिसिलिन जी, एटोरवास्टेटिन) जिनका उत्पादन शुरू हो चुका है, शामिल हैं। प्रोत्साहन राशि के वितरण (87.70 करोड़ रुपये) का भी उल्लेख करें।
समालोचनात्मक विश्लेषण: योजना की सफलताओं के साथ-साथ चुनौतियों और सीमाओं पर भी प्रकाश डालें। उदाहरण के लिए, कुछ परियोजनाओं का अभी तक वाणिज्यिक उत्पादन हासिल न कर पाना, या कुछ राज्यों में निवेश और उत्पादन की धीमी गति।
आत्मनिर्भरता पर प्रभाव: चर्चा करें कि यह योजना भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में कैसे योगदान दे रही है। आयात पर निर्भरता में कमी, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, नवाचार और रोजगार सृजन पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करें।
निष्कर्ष: योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए, भविष्य की राह और सुधार के संभावित क्षेत्रों पर संक्षिप्त टिप्पणी।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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