दिव्य कला मेला: दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय अभियान

दिव्य कला मेला: दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय अभियान — Divya Kala Mela: A National Movement

दिव्य कला मेला: दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय अभियान

दिव्य कला मेला: दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय अभियान — Divya Kala Mela: A National Movement
आरेख: Divya Kala Mela: A National Movement

प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Polity & Governance

**“जब समान अवसर मिलते हैं तो प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती”: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘दिव्य कला मेला’ को आत्मनिर्भरता एवं समावेशी राष्ट्र-निर्माण का एक अभियान करार दिया**

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कोलकाता में 31वें दिव्य कला मेले का उद्घाटन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि समान अवसर मिलने पर प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने इस मेले को केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन बताया, जो दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास को क्षमता में, रचनात्मकता को आजीविका में और आकांक्षा को आत्मनिर्भरता में परिवर्तित करता है। यह मेला प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिससे दिव्यांगजन आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में समान भागीदार बन सकें। यह पहली बार है कि भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के संयुक्त प्रयासों से इसका आयोजन किया जा रहा है, जो केंद्र-राज्य सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

सरकार का दृष्टिकोण अब कल्याण-आधारित मॉडल से अधिकार-आधारित सशक्तिकरण मॉडल की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव से गुजर रहा है। 2014 से अब तक, स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगभग 1.82 लाख दिव्यांग लाभार्थियों को लगभग 1,462 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के तहत प्रति वर्ष 20 दिव्यांग छात्रों का चयन विदेश में उच्च शिक्षा के लिए किया जाता है। सहायक उपकरणों को केवल सहायक साधन न मानकर गरिमा एवं आत्मनिर्भरता के उपकरण के रूप में देखा जा रहा है, जो दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘नमस्ते’ योजना, जो मशीनीकृत स्वच्छता को बढ़ावा देती है और स्वच्छता कर्मियों को पीपीई किट, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य बीमा एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है, सरकार की समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, सहायक उपकरणों, दिव्यांग-अनुकूल अवसंरचना एवं रोजगार के क्षेत्र में अपनी पहलों पर प्रकाश डाला। ‘दिव्य कला मेला’ दिव्यांग कारीगरों, शिल्पकारों एवं उद्यमियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने तथा अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी आजीविका, आत्मविश्वास एवं गरिमा में वृद्धि होती है। यह समाज को अधिक समावेशी, सहानुभूतिपूर्ण एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करता है, यह संदेश देता है कि शारीरिक सीमाएं कभी भी प्रतिभा, रचनात्मकता या उत्कृष्टता को सीमित नहीं कर सकती हैं।

**UPSC और State PCS के लिए प्रासंगिकता:**

यह विषय UPSC और State PCS परीक्षाओं के लिए ‘राजव्यवस्था एवं शासन’ (Polity & Governance) खंड के अंतर्गत अत्यंत प्रासंगिक है। यह सामाजिक न्याय, समावेशी विकास, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, केंद्र-

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

अभ्यास प्रश्न

Q1. केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘दिव्य कला मेला’ को किस रूप में वर्णित किया है?

  1. एक सांस्कृतिक उत्सव
  2. आत्मनिर्भरता एवं समावेशी राष्ट्र-निर्माण का एक अभियान
  3. दिव्यांगों के लिए एक खेल प्रतियोगिता
  4. एक शैक्षिक प्रदर्शनी
उत्तर

आत्मनिर्भरता एवं समावेशी राष्ट्र-निर्माण का एक अभियान — केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘दिव्य कला मेला’ को आत्मनिर्भरता एवं समावेशी राष्ट्र-निर्माण का एक अभियान करार दिया है।

Q2. ‘दिव्य कला मेला’ का आयोजन किस मंत्रालय के तत्वावधान में किया जाता है?

  1. संस्कृति मंत्रालय
  2. शिक्षा मंत्रालय
  3. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
  4. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
उत्तर

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय — केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘दिव्य कला मेला’ का उल्लेख किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से संबंधित है।


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