नागरिक-केंद्रित प्रशासन को सशक्त बनाने में डिजिटल पहलों की भूमिका

नागरिक-केंद्रित प्रशासन को सशक्त बनाने में डिजिटल पहलों की भूमिका

नागरिक-केंद्रित प्रशासन को सशक्त बनाने में डिजिटल पहलों की भूमिका  

पाठ्यक्रम  :  जीएस -2 राजनीति और शासन प्रणाली   

 

भारत में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलें, जैसे iGOT कर्मयोगी पोर्टल, न केवल सरकारी अधिकारियों की क्षमता निर्माण करती हैं, बल्कि आम नागरिकों को सेवाओं तक सुगम पहुंच प्रदान करके लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं। ये पहलें डिजिटल इंडिया के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं, जो ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देकर नौकरशाही को चुस्त-दुरुस्त बनाती हैं।

iGOT कर्मयोगी पोर्टल: क्षमता निर्माण का डिजिटल केंद्र :

iGOT कर्मयोगी पोर्टल सरकारी कर्मचारियों के लिए एक एकीकृत ऑनलाइन प्रशिक्षण मंच है, जो ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत शुरू किया गया है। यह पोर्टल डिजिटल तकनीकों का उपयोग करके सीखने को व्यक्तिगत और प्रभावी बनाता है।

iGOT AI सारथी: यह प्रासंगिक शिक्षण संसाधनों की बुद्धिमत्तापूर्वक खोज करने के लिए एक सहायक उपकरण है।
iGOT AI ट्यूटर: यह कोर्स के दौरान व्यक्तिगत सहायता प्रदान करने वाला डिजिटल ट्यूटर है।
कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 : यह एक अगली पीढ़ी की सुविधा है। इसे उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके लिए यह ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR), गेमीफिकेशन और इंटरैक्टिव सिमुलेशन का उपयोग करेगी। ये सुविधाएं सरकारी अधिकारियों को आधुनिक कौशल से लैस करती हैं, जिससे वे नागरिक सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें। उदाहरणस्वरूप, AI टूल्स से प्रशिक्षण की लागत कम होती है और पहुंच बढ़ती है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।

नागरिक-केंद्रित प्रशासन में डिजिटलीकरण के व्यापक प्रभाव : 

डिजिटलीकरण शासन को कागज-मुक्त और नागरिक-अनुकूल बनाने का माध्यम बन चुका है। इसके प्रमुख आयाम निम्नलिखित हैं:

सेवा वितरण की सुगमता: ऑनलाइन पोर्टल जैसे UMANG और DigiLocker नागरिकों को ‘कभी भी, कहीं भी’ सेवाएं प्रदान करते हैं। इससे पासपोर्ट आवेदन, कर दाखिला या पेंशन वितरण जैसी प्रक्रियाएं तेज हो जाती हैं, और नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
नागरिक भागीदारी का संवर्धन: डिजिटल फीडबैक सिस्टम, जैसे MyGov पोर्टल, नागरिकों को नीति निर्माण में शामिल करते हैं। इससे शासन अधिक समावेशी बनता है और नागरिकों की आवाज सुनी जाती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल रिकॉर्ड और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों से ऑडिट ट्रेल बनता है, जो भ्रष्टाचार को कम करता है। उदाहरण के लिए, ई-टेंडरिंग से सरकारी खरीदारी पारदर्शी होती है।
दक्षता और लागत बचत: ऑटोमेशन से नियमित कार्यों में मानवीय त्रुटियां कम होती हैं। डेटा एनालिटिक्स से नीतियां साक्ष्य-आधारित बनती हैं, जैसे कि जन धन योजना में डेटा का उपयोग गरीबी उन्मूलन के लिए।
चुनौतियां और समाधान :  डिजिटल विभाजन (डिजिटल डिवाइड) एक समस्या है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच सीमित है। सरकार द्वारा भारतनेट और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों से इसे दूर किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा भी एक चिंता है, जिसके लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति लागू की गई है।

नागरिक-केंद्रित प्रशासन में  डिजिटलीकरण की भूमिका :

लोक प्रशासन का कायाकल्प : डिजिटलीकरण कठोर व कागज-आधारित नौकरशाही को चुस्त और तकनीक-संचालित शासन प्रणालियों से बदल देता है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
सेवा वितरण में सुधार : ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स सार्वजनिक सेवाओं तक ‘कभी भी-कहीं भी’ पहुंच प्रदान करते हैं। इससे विलंब, कार्यालयों के चक्कर और प्रक्रियात्मक जटिलता कम होती है।
नागरिक सहभागिता और भागीदारी को मजबूत करना : डिजिटल उपकरण फीडबैक पोर्टल, परामर्श और शिकायत प्रणालियों के माध्यम से दो-तरफा अंतर्क्रिया को सक्षम बनाते हैं।
नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाएं मोबाइल एक्सेस, रियल-टाइम अपडेट और वैयक्तिकरण (personalization) के माध्यम से निजी क्षेत्रक जैसी दक्षता प्रदान करती हैं।
जवाबदेही और विश्वास को बढ़ावा : डिजिटलीकरण ट्रैक करने योग्य डिजिटल रिकॉर्ड तथा ऑडिट ट्रेल निर्मित करता है। इससे अधिकारियों के मनमाने निर्णयों और भ्रष्टाचार में कमी आती है।
प्रशासनिक दक्षता में सुधार और लागत में कमी : नियमित कार्यों के स्वचालन (Automation) से नौकरशाही द्वारा विलंब, मानवीय त्रुटियों तथा परिचालन संबंधी व्ययों में कमी आती है।
डेटा-संचालित शासन : डिजिटल प्रणालियां कार्रवाई योग्य डेटा उत्पन्न करती हैं, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण का समर्थन करते हैं

निष्कर्ष: 

डिजिटल पहलें भारत को एक स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल की ओर ले जा रही हैं, जहां नागरिक केंद्र में होता है। iGOT जैसी योजनाएं न केवल क्षमता निर्माण करती हैं, बल्कि शासन को लोकतांत्रिक बनाती हैं। हालांकि, इनका प्रभावी क्रियान्वयन समावेशिता, सुरक्षा और निरंतर नवाचार पर निर्भर करता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.निम्नलिखित में से कौन-सी सुविधा कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 का हिस्सा नहीं है?
A) ऑगमेंटेड रियलिटी (AR)
B) वर्चुअल रियलिटी (VR)
C) ब्लॉकचेन तकनीक
D) गेमीफिकेशन
उत्तर: C 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. “डिजिटल पहलें नागरिक-केंद्रित प्रशासन को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन चुनौतियां भी विद्यमान हैं। iGOT कर्मयोगी पोर्टल के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए तथा समाधान सुझाइए।”

 

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