11 Aug नासा ने इसरो को चंद्रमा आधार कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया, जानिए पूरी जानकारी
✎ नासा ने इसरो को अपने मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानवता की पहली चौकी स्थापित करना है, जो भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत-अमेरिका संबंध, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास
- Prelims: नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन, आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords), संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर समिति (COPUOS), मून बेस कार्यक्रम, भारत-अमेरिका सिविल स्पेस संयुक्त कार्य समूह (CSJWG), चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव
- Essay: अंतरिक्ष सहयोग: वैश्विक साझेदारी और राष्ट्रीय प्रगति, भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर इसके निहितार्थ
त्वरित पुनरावृत्ति: नासा ने इसरो को अपने मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानवता की पहली चौकी स्थापित करना है, जो भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस संयुक्त कार्य समूह (CSJWG) की नौवीं बैठक के दौरान, नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने महत्वाकांक्षी मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान तथा वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए नई संभावनाएँ खोलता है।
पृष्ठभूमि
- भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें विभिन्न संयुक्त मिशन और पहल शामिल हैं।
- आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) के तहत दोनों देशों ने चंद्रमा अन्वेषण के सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की है, जो इस सहयोग का आधार है।
- पिछले वर्ष NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन का सफल प्रक्षेपण दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच मजबूत साझेदारी का एक प्रमुख उदाहरण है।
- यह निमंत्रण फरवरी 2025 में जारी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संयुक्त नेताओं के बयान के अनुरूप है, जिसमें ‘ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी (TRUST) इनिशिएटिव’ के तहत नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
- दोनों पक्ष बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता पर संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर समिति (COPUOS) के दिशानिर्देशों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- मून बेस कार्यक्रम का अनावरण 24 मार्च, 2026 को नासा के ‘इग्निशन’ कार्यक्रम के दौरान किया गया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नेतृत्व को अंतरिक्ष में आगे बढ़ाना है।
मून बेस कार्यक्रम क्या है?
- मून बेस कार्यक्रम नासा द्वारा परिकल्पित एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास किसी अन्य खगोलीय पिंड पर मानवता की पहली चौकी का निर्माण करना है।
- इस कार्यक्रम को तीन चरणों में निष्पादित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी उद्देश्यों को प्राप्त किया जाएगा।
- इसका मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए एक परीक्षण स्थल के रूप में कार्य करना है।
- यह कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति को प्राप्त करने और अंतरिक्ष में अमेरिकी नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए नासा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
- इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग शामिल है, जिसमें अब इसरो को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को विशेष रूप से चुना गया है क्योंकि यहाँ पानी की बर्फ की उपस्थिति की संभावना है, जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हो सकता है।
- यह कार्यक्रम उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए नई क्षमताओं के निर्माण पर केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चौकी | मानवता की पहली अंतरग्रहीय चौकी की स्थापना, भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए आधार |
| तीन-चरणों में निष्पादन | परियोजना की जटिलता और दीर्घकालिक प्रकृति को दर्शाता है, चरणबद्ध दृष्टिकोण से जोखिम प्रबंधन |
| भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (CSJWG) | दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को संस्थागत ढाँचा प्रदान करता है |
| आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) के तहत साझेदारी | अंतरिक्ष अन्वेषण के सिद्धांतों और दिशानिर्देशों पर साझा प्रतिबद्धता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का विस्तार |
| खुले वैज्ञानिक डेटा साझाकरण पर चर्चा | अंतरिक्ष विज्ञान में पारदर्शिता और सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना |
| NISAR मिशन की सफलता के बाद सहयोग का विस्तार | पिछली सफल परियोजनाओं पर आधारित मजबूत साझेदारी, भविष्य के संयुक्त मिशनों का मार्ग प्रशस्त |
महत्व
सामरिक महत्व
- भारत की अंतरिक्ष शक्ति को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलती है, जिससे भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है।
- अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती है, जो द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।
- चंद्रमा पर उपस्थिति भविष्य के अंतरिक्ष संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग में भारत की भूमिका सुनिश्चित करती है।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- ISRO को उन्नत चंद्र अन्वेषण प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता तक पहुँच प्राप्त होगी।
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ की संभावनाओं का पता लगाने में मदद मिलेगी, जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है।
- अंतरिक्ष यान डिजाइन, रोबोटिक्स, जीवन समर्थन प्रणालियों और दीर्घकालिक अंतरिक्ष आवास में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक महत्व
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे, जिससे ‘न्यू स्पेस’ अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
- उच्च-तकनीकी विनिर्माण और संबंधित उद्योगों में निवेश आकर्षित होगा, जिससे रोजगार सृजन होगा।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से अनुसंधान और विकास लागत साझा करने में मदद मिलेगी, जिससे वित्तीय बोझ कम होगा।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को स्थापित करने में भारत की भूमिका बढ़ेगी।
- बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों के दीर्घकालिक स्थायित्व (Long-term Sustainability of Outer Space Activities) पर संयुक्त राष्ट्र समिति (COPUOS) के दिशानिर्देशों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- अंतरिक्ष में शांतिपूर्ण उपयोग और सहयोग के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करता है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी चुनौतियाँ
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अत्यधिक ठंडे तापमान, स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों और अनियमित भूभाग में संचालन के लिए विशेष प्रौद्योगिकियों का विकास।
- पृथ्वी से दूर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति के लिए विश्वसनीय जीवन समर्थन प्रणालियों, विकिरण सुरक्षा और संचार अवसंरचना का निर्माण।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. वित्तीय और संसाधन संबंधी चुनौतियाँ
- एक महत्वाकांक्षी चंद्र आधार कार्यक्रम के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय संसाधनों का आवंटन।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बावजूद, भारत के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, उपकरण और मानव संसाधनों का विकास और तैनाती।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – संसाधन जुटाना
3. अंतर्राष्ट्रीय समन्वय और शासन
- विभिन्न देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना।
- चंद्रमा पर संसाधनों के उपयोग और गतिविधियों के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय कानून और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करना।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध – अंतर्राष्ट्रीय संगठन
4. मानव सुरक्षा और स्वास्थ्य
- अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण, सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण और मनोवैज्ञानिक तनाव जैसे खतरों से बचाना।
- चंद्रमा पर आपातकालीन स्थितियों के लिए पर्याप्त चिकित्सा और बचाव क्षमताओं का विकास।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – मानव अंतरिक्ष उड़ान
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अत्यधिक वातावरण | चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कठोर तापमान और विकिरण का सामना करने वाली प्रणालियों का विकास |
| दीर्घकालिक स्थिरता | मानव चौकी के लिए निरंतर आपूर्ति श्रृंखला और जीवन समर्थन प्रणालियों को बनाए रखना |
| अंतर्राष्ट्रीय कानून | चंद्रमा पर संसाधनों के उपयोग और क्षेत्रीय दावों से संबंधित कानूनी ढाँचे का अभाव |
| तकनीकी एकीकरण | विभिन्न देशों की प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करना |
| वित्तीय वहनीयता | परियोजना की विशाल लागत को साझा करना और दीर्घकालिक फंडिंग सुनिश्चित करना |
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | सहयोग के दौरान संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण और सुरक्षा से संबंधित मुद्दे |
आगे की राह
- ISRO और NASA के बीच एक विस्तृत सहयोग रोडमैप विकसित करना, जिसमें भूमिकाएँ, जिम्मेदारियाँ और समय-सीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित हों।
- चंद्र आधार कार्यक्रम के लिए आवश्यक उन्नत प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देना।
- भारतीय निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे ‘न्यू स्पेस’ पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाया जा सके।
- अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं के विकास में सहयोग को मजबूत करना।
- चंद्रमा पर गतिविधियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनी और नैतिक ढाँचे को विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाना।
- कार्यक्रम के वित्तीय और तकनीकी जोखिमों को कम करने के लिए बहुपक्षीय भागीदारी की संभावनाओं का पता लगाना।
- जनता के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण के महत्व और लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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अवधारणा प्रवाह
NASA द्वारा ISRO को चंद्र आधार कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण → भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (CSJWG) की बैठक में औपचारिक प्रस्ताव → आर्टेमिस समझौते के तहत साझेदारी और खुले वैज्ञानिक डेटा साझाकरण पर सहमति → चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मानवता की पहली चौकी स्थापित करने का लक्ष्य → अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की भूमिका का विस्तार और तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि → भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए आधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आर्टेमिस समझौता (Artemis Accords) बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण अन्वेषण के लिए सिद्धांतों का एक गैर-बाध्यकारी सेट है।
2. भारत आर्टेमिस समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।
3. NASA-ISRO सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) मिशन का उद्देश्य पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। आर्टेमिस समझौता बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण अन्वेषण के लिए सिद्धांतों का एक गैर-बाध्यकारी सेट है। कथन 2 गलत है। भारत ने जून 2023 में आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। कथन 3 सही है। NISAR मिशन पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तनों, जैसे कि भूकंप, ज्वालामुखी और भूस्खलन का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. NASA के ‘चंद्रमा आधार कार्यक्रम’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- इसका उद्देश्य चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव के पास मानव का पहला चौकी स्थापित करना है।
- यह कार्यक्रम केवल अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA द्वारा स्वतंत्र रूप से निष्पादित किया जाएगा।
- यह कार्यक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानवता की पहली चौकी स्थापित करने की परिकल्पना करता है।
- यह विशेष रूप से मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उत्तर: यह कार्यक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानवता की पहली चौकी स्थापित करने की परिकल्पना करता है। — NASA के चंद्रमा आधार कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानवता की पहली चौकी स्थापित करना है। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है, जिसमें ISRO को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-अमेरिका असैन्य अंतरिक्ष सहयोग के बढ़ते दायरे का परीक्षण कीजिए और बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में इसके निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते असैन्य अंतरिक्ष सहयोग का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें हालिया चंद्रमा आधार कार्यक्रम के आमंत्रण का उल्लेख हो।
मुख्य भाग:
1. सहयोग के प्रमुख क्षेत्र: NISAR मिशन, आर्टेमिस समझौता, मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी, खुले वैज्ञानिक डेटा साझाकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सूचीबद्ध करें।
2. सहयोग के कारण और लाभ: दोनों देशों के लिए रणनीतिक, वैज्ञानिक और तकनीकी लाभों पर चर्चा करें (जैसे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, लागत साझाकरण, विशेषज्ञता का आदान-प्रदान, भू-राजनीतिक प्रभाव)।
3. बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में निहितार्थ: संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी समिति (COPUOS) के दिशानिर्देशों का उल्लेख करें। अंतरिक्ष मलबे को कम करने, अंतरिक्ष संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग, अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ से बचने और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के पालन में इस सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डालें।
4. चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा: सहयोग में संभावित चुनौतियों (जैसे प्रौद्योगिकी सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार) और भविष्य में सहयोग के अवसरों (जैसे गहरे अंतरिक्ष मिशन, अंतरिक्ष पर्यटन) पर संक्षिप्त चर्चा करें।
निष्कर्ष: भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग को ‘हैंडशेक से गले लगाने’ तक के रूप में सारांशित करें और वैश्विक अंतरिक्ष शासन तथा स्थिरता में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराएँ।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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