निजी एफएम रेडियो: क्षेत्रीय भाषा में 20% कंटेंट अनिवार्य, जानिए नई नीति के प्रमुख बिंदु

निजी एफएम रेडियो: क्षेत्रीय भाषा में 20% कंटेंट अनिवार्य, जानिए नई नीति के प्रमुख बिंदु

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय संस्कृति  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — संचार नेटवर्क, आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: निजी एफएम रेडियो नीति, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, प्रसार भारती, ई-नीलामी, स्थानीय भाषा कंटेंट, आकांक्षी जिले
  • Essay: भारत में क्षेत्रीय संस्कृति और भाषा के संरक्षण में मीडिया की भूमिका, डिजिटल युग में सार्वजनिक सेवा प्रसारण और सरकार की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: निजी एफएम रेडियो नीति का उद्देश्य प्रसारण सेवाओं का विस्तार करना और स्थानीय संस्कृति व भाषा को बढ़ावा देने के लिए 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट को अनिवार्य करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने हाल ही में राज्यसभा में बताया कि वर्तमान में 386 निजी एफएम रेडियो चैनल कार्यरत हैं। सरकार ने 234 नए शहरों में 730 एफएम चैनलों के लिए ई-नीलामी की प्रक्रिया पूरी की है, जिससे इस क्षेत्र में 9 नए प्रसारकों सहित कुल 18 सफल बोली लगाने वाले सामने आए हैं। इस विस्तार के साथ, निजी एफएम रेडियो नीति के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक प्रसारक अपने दैनिक प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा और संस्कृति को समर्पित करे, जिसमें क्षेत्रीय परंपराएँ और लोक संगीत शामिल हों।

पृष्ठभूमि

  • भारत में रेडियो प्रसारण का इतिहास काफी पुराना है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद, ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio) ने सार्वजनिक सेवा प्रसारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद, निजी एफएम रेडियो चैनलों को अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे प्रसारण क्षेत्र में विविधता आई।
  • सरकार ने निजी एफएम रेडियो के तीसरे चरण की नीति (Phase III Policy) के तहत प्रसारकों को प्रसार भारती (Prasar Bharati) के टावरों और साइटों तक पहुँच की अनुमति दी है, ताकि वे तेजी से परिचालन शुरू कर सकें।
  • ई-नीलामी (e-auction) प्रक्रिया के माध्यम से चैनलों का आवंटन पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और नए खिलाड़ियों को बाजार में प्रवेश करने का अवसर देता है।
  • सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं (Public Service Announcements) और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर भी नज़र रखती है, साथ ही आपात स्थितियों में सत्यापित जानकारी के प्रसार के लिए प्रसारकों के साथ समन्वय स्थापित करती है।
  • स्थानीय कंटेंट को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित और संवर्धित करना है।

भारत में निजी एफएम रेडियो नीति

  • निजी एफएम रेडियो नीति का मुख्य उद्देश्य देश में रेडियो प्रसारण सेवाओं का विस्तार करना और श्रोताओं को विविध प्रकार के कार्यक्रम उपलब्ध कराना है।
  • इस नीति के तहत, निजी प्रसारकों को विशिष्ट शहरों में एफएम रेडियो चैनल संचालित करने के लिए लाइसेंस दिए जाते हैं, आमतौर पर ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से।
  • नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय कंटेंट को बढ़ावा देना है, जिसके तहत प्रत्येक प्रसारक को अपने कुल प्रसारण समय का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा, संस्कृति, परंपराओं और लोक संगीत पर केंद्रित करना होता है।
  • निजी एफएम रेडियो के तीसरे चरण की नीति प्रसारकों को प्रसार भारती के मौजूदा बुनियादी ढाँचे, जैसे कि टावर और साइट, का उपयोग करने की अनुमति देती है, जिससे परिचालन लागत कम होती है और सेवाएँ तेजी से शुरू की जा सकती हैं।
  • सरकार आशय पत्र (Letter of Intent – LOI) जारी करती है और अनुमति समझौते (Grant of Permission Agreement – GOPA) निष्पादित करती है, जिसमें विशेष रूप से वामपंथी उग्रवाद प्रभावित (LWE) और आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में संचालन के लिए समयसीमा निर्धारित होती है।
  • यह नीति सार्वजनिक सेवा के प्रति भी प्रतिबद्ध है, जिसके तहत सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान सत्यापित जानकारी के समय पर प्रसार के लिए प्रसारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखती है।
  • नीति का लक्ष्य न केवल मनोरंजन प्रदान करना है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करना और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना भी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
निजी FM रेडियो चैनलों की संख्या वर्तमान में 386 निजी FM रेडियो चैनल कार्यरत हैं, जो देश भर में रेडियो पहुँच और विविधता को दर्शाते हैं।
स्थानीय भाषा/कंटेंट की अनिवार्यता प्रत्येक प्रसारक को अपने दैनिक प्रसारण का कम से कम 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा और स्थानीय कंटेंट (क्षेत्रीय संस्कृति, परंपराएँ, लोक संगीत) में प्रसारित करना होगा, जिससे क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा मिलता है।
ई-नीलामी प्रक्रिया सरकार ने 234 नए शहरों में 730 FM चैनलों के लिए पारदर्शी ई-नीलामी की, जिससे नए खिलाड़ियों को प्रवेश मिला और प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
प्रसार भारती के टावरों तक पहुँच निजी FM रेडियो के तीसरे चरण की नीति प्रसारकों को प्रसार भारती (Prasar Bharati) के टावरों और साइटों का उपयोग करने की अनुमति देती है, जिससे संचालन तेजी से शुरू हो सके।
सार्वजनिक सेवा घोषणाएँ सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर नज़र रखती है, जिससे महत्वपूर्ण जानकारी का समय पर प्रसार सुनिश्चित होता है।

महत्व

सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व

  • स्थानीय भाषा और कंटेंट की अनिवार्यता क्षेत्रीय संस्कृतियों, परंपराओं और लोक संगीत को बढ़ावा देती है, जिससे भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होता है।
  • FM रेडियो स्थानीय समुदायों के लिए सूचना, मनोरंजन और शिक्षा का एक सुलभ माध्यम है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ अन्य मीडिया की पहुँच सीमित है।
  • यह नीति स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करती है, जिससे स्थानीय कला और संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है।

आर्थिक महत्व

  • FM रेडियो क्षेत्र में नए चैनलों की नीलामी और नए खिलाड़ियों का प्रवेश रोजगार के अवसर पैदा करता है और इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देता है।
  • स्थानीय कंटेंट के माध्यम से स्थानीय व्यवसायों और उत्पादों का विज्ञापन संभव होता है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
  • प्रसार भारती के बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने की अनुमति से निजी प्रसारकों के लिए परिचालन लागत कम होती है, जिससे छोटे शहरों में भी रेडियो सेवाओं का विस्तार संभव होता है।

शासन और सूचना प्रसार

  • सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर नज़र रखती है, जिससे नागरिकों तक महत्वपूर्ण जानकारी और कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित होती है।
  • आपात स्थितियों और महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान सत्यापित जानकारी के समय पर प्रसार के लिए सरकार प्रसारकों के साथ समन्वय स्थापित करती है, जो आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा में सहायक है।
  • यह नीति विशेष रूप से वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित और आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में रेडियो सेवाओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करती है, जिससे इन क्षेत्रों में सूचना का अंतराल कम होता है।

चुनौतियाँ

1. स्थानीय कंटेंट की गुणवत्ता और उपलब्धता

  • 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और विविध स्थानीय कार्यक्रमों का निर्माण एक चुनौती हो सकता है।
  • छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रतिभाओं और संसाधनों की कमी हो सकती है, जिससे कंटेंट उत्पादन में बाधा आ सकती है।

2. राजस्व और वित्तीय स्थिरता

  • छोटे शहरों में FM चैनलों के लिए विज्ञापन राजस्व सीमित हो सकता है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक परिचालन प्रभावित हो सकता है।
  • नीलामी में उच्च बोली लगाने से प्रसारकों पर वित्तीय बोझ पड़ सकता है, जिससे कंटेंट की गुणवत्ता पर समझौता हो सकता है।

3. नियामक अनुपालन और निगरानी

  • स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता और सार्वजनिक सेवा घोषणाओं के प्रसारण की निगरानी एक जटिल कार्य है, जिसके लिए प्रभावी नियामक तंत्र की आवश्यकता है।
  • उल्लंघन के मामलों में दंड और प्रवर्तन सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

4. तकनीकी बुनियादी ढाँचा और पहुँच

  • दूरदराज के क्षेत्रों में FM प्रसारण के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढाँचे (टावर, ट्रांसमीटर) का अभाव हो सकता है, भले ही प्रसार भारती के टावरों तक पहुँच की अनुमति हो।
  • बिजली की आपूर्ति और रखरखाव जैसी समस्याएँ भी परिचालन को प्रभावित कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्थानीय कंटेंट का उत्पादन गुणवत्तापूर्ण और विविध स्थानीय कार्यक्रमों के निर्माण के लिए संसाधनों और प्रतिभा की कमी।
वित्तीय व्यवहार्यता छोटे शहरों में सीमित विज्ञापन राजस्व के कारण FM चैनलों की वित्तीय स्थिरता पर दबाव।
नियामक प्रवर्तन स्थानीय कंटेंट और सार्वजनिक सेवा घोषणाओं के अनुपालन की प्रभावी निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई।
बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता दूरदराज के क्षेत्रों में प्रसारण के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढाँचे और बिजली की आपूर्ति।
सूचना का असंतुलन केवल 20% स्थानीय कंटेंट के साथ, शेष 80% में गैर-स्थानीय या व्यावसायिक कंटेंट का प्रभुत्व हो सकता है।

आगे की राह

  • स्थानीय कंटेंट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कलाकारों, लेखकों और सांस्कृतिक संगठनों के साथ साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
  • छोटे शहरों में FM चैनलों की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए विज्ञापन राजस्व के नए मॉडल तलाशना या सरकारी सहायता पर विचार करना।
  • स्थानीय कंटेंट की गुणवत्ता और मात्रा की निगरानी के लिए एक मजबूत और पारदर्शी नियामक तंत्र स्थापित करना।
  • प्रसार भारती के बुनियादी ढाँचे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और दूरदराज के क्षेत्रों में प्रसारण पहुँच बढ़ाने के लिए नए टावरों और ट्रांसमीटरों में निवेश करना।
  • सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रसारकों के साथ नियमित संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • FM रेडियो के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना।
  • FM रेडियो के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके स्थानीय कंटेंट को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने के लिए हाइब्रिड मॉडल विकसित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

निजी एफएम रेडियो · स्थानीय कंटेंट · क्षेत्रीय संस्कृति · प्रसार भारती · आकांक्षी जिले · सार्वजनिक सेवा घोषणाएँ · सूचना और प्रसारण मंत्रालय · ई-नीलामी · संचार नीति · लोक संगीत

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा FM चैनलों की ई-नीलामी  →  निजी FM चैनलों की संख्या में वृद्धि  →  स्थानीय कंटेंट (20%) की अनिवार्यता  →  क्षेत्रीय संस्कृति और भाषाओं को बढ़ावा  →  सूचना प्रसार और सामुदायिक सशक्तिकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निजी एफएम रेडियो नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रत्येक प्रसारक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके दैनिक प्रसारण कंटेंट का कम से कम 20 प्रतिशत शहर की स्थानीय भाषा में हो।
2. इस नीति के तहत, प्रसारक केवल सरकारी टावरों और साइटों का उपयोग कर सकते हैं।
3. सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर नज़र रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि नीति में 20 प्रतिशत स्थानीय भाषा कंटेंट अनिवार्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि नीति प्रसारकों को प्रसार भारती के टावरों और साइटों तक पहुँच की अनुमति देती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं करती कि वे केवल उन्हीं का उपयोग करें। कथन 3 सही है क्योंकि सरकार सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और सरकारी योजनाओं के प्रसारण पर नज़र रखती है।

Q2. भारत में निजी एफएम रेडियो चैनलों के विनियमन से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय प्राथमिक रूप से उत्तरदायी है?

  1. गृह मंत्रालय
  2. सूचना और प्रसारण मंत्रालय
  3. संचार मंत्रालय
  4. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

उत्तर: सूचना और प्रसारण मंत्रालय — निजी एफएम रेडियो चैनलों के विनियमन और नीतियों के निर्माण के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) प्राथमिक रूप से उत्तरदायी है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में भी उल्लेख किया गया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में निजी एफएम रेडियो चैनलों की भूमिका स्थानीय संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने में कितनी महत्वपूर्ण है? सरकार की वर्तमान नीति के आलोक में, इस क्षेत्र में चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, निजी एफएम रेडियो चैनलों की स्थानीय संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने में भूमिका पर विस्तार से चर्चा करें, जिसमें 20 प्रतिशत स्थानीय कंटेंट की अनिवार्यता, क्षेत्रीय परंपराओं और लोक संगीत के कार्यक्रमों का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, सरकार की वर्तमान नीति (जैसे ई-नीलामी, प्रसार भारती के टावरों तक पहुँच, आकांक्षी जिलों में संचालन) का विश्लेषण करते हुए, इस क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे राजस्व मॉडल, कंटेंट की गुणवत्ता, छोटे शहरों में पहुँच) और अवसरों (जैसे स्थानीय प्रतिभा को बढ़ावा देना, सूचना का प्रसार, सामुदायिक जुड़ाव) पर प्रकाश डालें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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