नीति आयोग : एमएसएमई (MSME) विकास में योजनागत समन्वय की भूमिका

नीति आयोग : एमएसएमई (MSME) विकास में योजनागत समन्वय की भूमिका

 नीति आयोग : एमएसएमई (MSME) विकास में योजनागत समन्वय की भूमिका

पाठ्यक्रम : सामान्य अध्ययन-III भारतीय अर्थव्यवस्था 

प्रिलिम्स के लिये: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उद्यम पंजीकरण पोर्टल, उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP), खादी और ग्रामोद्योग, ग्राम स्वराज, सतत विकास लक्ष्य, पारंपरिक उद्योगों के उन्‍नयन एवं पुनर्निर्माण के लिये कोष की योजना (SFURTI), सूक्ष्म एवं लघु उद्यम समूह विकास कार्यक्रम (MSE-CDP), एस्पायर (ASPIRE), एमएसएमई इनोवेटिव।

मेन्स के लिये: MSME और भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका, विभिन्न MSME योजनाओं के अभिसरण की आवश्यकता तथा MSME योजनाओं के अभिसरण हेतु नीति आयोग की सिफारिशें

चर्चा में क्यों?

  • नीति आयोग ने “योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से MSME क्षेत्र में दक्षता प्राप्त करना” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिये सरकारी समर्थन की प्रभावशीलता को मज़बूत करने के लिये एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
    यह 18 से अधिक MSME योजनाओं के समन्वय के लिये दो-तरफा दृष्टिकोण की सिफारिश करता है, जिसमें सूचना समन्वय और प्रक्रिया समन्वय शामिल हैं।
  • पहला केंद्रीय और राज्य डेटा को एकीकृत करता है ताकि बेहतर निर्णय लिये जा सकें। दूसरा योजनाओं को एकीकृत करता है ताकि दोहराव कम हो, सेवा वितरण सुगम बने तथा एक समेकित MSME पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिले। नीति आयोग 18 से अधिक MSME योजनाओं को समेकित करने का समर्थन करता है ताकि असंगति को समाप्त किया जा सके।
  • यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है, जो GDP में लगभग 30% और निर्यात में 45% का योगदान देता है। विभिन्न मंत्रालयों में विखंडित योजनाएँ दक्षता और पहुँच को कम करती हैं।
  • NITI आयोग का समन्वय ढाँचा डेटा और प्रक्रियाओं को एकीकृत करके एक सरल, प्रभावी एवं परिणाम-केंद्रित MSME समर्थन प्रणाली बनाने का लक्ष्य रखता है।

MSME क्या हैं?

परिचय : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) वे व्यवसाय हैं जिन्हें उनके संयंत्र एवं मशीनरी या उपकरण में निवेश तथा वार्षिक टर्नओवर के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
MSME क्षेत्र पर सरकारी खर्च 2019-20 में 6,717 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 22,094 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
MSME क्षेत्र को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है, जो संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश तथा कारोबार के आधार पर किया जाता है। इस वर्गीकरण में संशोधन 1 अप्रैल, 2025 से लागू हुआ।

आर्थिक योगदान: भारत की अर्थव्यवस्था में MSME क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30% का योगदान देता है। साथ ही यह देश की 28.13 करोड़ की कार्यबल शक्ति में से 62% को रोज़गार प्रदान करता है और राष्ट्रीय निर्यात में 45% की बड़ी हिस्सेदारी रखता है।
संवृद्धि और प्रदर्शन: यह क्षेत्र वर्ष 2000 से 2016 के बीच औसतन 8.6% की वृद्धि दर से बढ़ा, जो औद्योगिक क्षेत्र (7.6%) से बेहतर है और इसमें 6,000 अलग-अलग उत्पादों का उत्पादन करने की क्षमता है।
औपचारिककरण पहल: भारत में 90% से अधिक MSME अब भी अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं और केवल 9% ही अवैध (अवर्जित) स्थिति से औपचारिक स्थिति में स्थानांतरित हुए हैं। औपचारिककरण को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने उद्यम पंजीकरण पोर्टल तथा उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) की शुरुआत की है।
उद्यम पंजीकरण पोर्टल स्वयं-पंजीकरण की सुविधा प्रदान करता है, जबकि उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों (IMEs) को औपचारिक क्षेत्र में शामिल करने में मदद करता है। उद्यम पोर्टल पर 3.94 करोड़ MSME पंजीकृत हैं और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 2.71 करोड़ अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यम हैं।
संरचना और क्षेत्रीय उपस्थिति: अक्तूबर 2024 तक पंजीकृत MSME में से 25% विनिर्माण क्षेत्र में हैं, जबकि 75% सेवा गतिविधियों में संलग्न हैं। MSME का 51% ग्रामीण क्षेत्रों में और 49% शहरी क्षेत्रों में स्थित है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय से संबंधित प्रमुख संस्था:

विकास आयुक्त कार्यालय (DC-MSME): MSME नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करता है, नीतियों पर सलाह देता है, परामर्श प्रदान करता है, प्रौद्योगिकी उन्नयन को सुगम बनाता है एवं प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन विकसित करता है।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC): विक्रय योग्य वस्तुओं का उत्पादन करना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं कच्चे माल की व्यवस्था करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योगों के माध्यम से ग्रामीण रोज़गार को प्रोत्साहित करता है।
नारियल विकास बोर्ड (कोयर बोर्ड): निर्यात को बढ़ावा देना, अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए और श्रमिकों की जीवन स्थितियों में सुधार करना कोयर उद्योग का विकास करता है।
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC): विपणन सहायता, ऋण सुविधा, कच्चे माल की आपूर्ति और भारत भर में तकनीकी सेवा केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से MSME के विकास को प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (NIMSME): एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है जो उद्यमियों और अधिकारियों के लिये क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करता है ताकि MSME की क्षमताओं एवं प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाया जा सके।
महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान (MGIRI): पेशेवरों को ग्राम स्वराज की ओर आकर्षित करके, पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाना और अनुसंधान एवं विकास तथा पायलट अध्ययनों के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करता है एवं सतत ग्रामीण औद्योगीकरण को गति प्रदान करता है।

प्रमुख MSME योजनाएँ (Major MSME Schemes in India):

1. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
उद्देश्य: स्वरोज़गार के अवसर सृजित करना
क्रियान्वयन: KVIC, KVIB, DIC
सब्सिडी: ग्रामीण 15–35%, शहरी 10–25%

2. क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर MSME (CGTMSE)
उद्देश्य: बिना जमानत ऋण सुविधा
कवरेज: ₹2 करोड़ तक
लाभार्थी: सूक्ष्म एवं लघु उद्यम

3. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
ऋण श्रेणियाँ: शिशु, किशोर, तरुण
अधिकतम ऋण: ₹10 लाख
उद्देश्य: वित्तीय समावेशन

4. स्टैंड-अप इंडिया योजना
लाभार्थी: SC/ST एवं महिला उद्यमी
ऋण सीमा: ₹10 लाख–₹1 करोड़
उद्देश्य: समावेशी उद्यमिता

5. तकनीकी उन्नयन एवं गुणवत्ता सुधार योजनाएँ
ZED (Zero Defect Zero Effect) प्रमाणन
LEAN मैन्युफैक्चरिंग
उद्देश्य: प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना

6. मार्केट एक्सेस एवं ई-मार्केटिंग योजनाएँ
GeM पोर्टल
MSME Sambandh, MSME Sampark
उद्देश्य: सरकारी खरीद में भागीदारी

7. क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP)
उद्देश्य: अवसंरचना विकास एवं सामूहिक दक्षता
सहायता: हार्ड व सॉफ्ट इंटरवेंशन

8. उद्यम पंजीकरण (Udyam Registration)
उद्देश्य: औपचारिकरण एवं लाभों तक आसान पहुँच
आधार आधारित, ऑनलाइन प्रक्रिया

9. आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत MSME उपाय
ECLGS (Emergency Credit Line Guarantee Scheme)
MSME की परिभाषा में संशोधन

MSME योजनाओं के अभिसरण की आवश्यकता क्यों है?

एकाधिक योजनाएँ किंतु समान लक्ष्य: विभिन्न मंत्रालय और विभाग (जैसे- MSME मंत्रालय, ग्रामीण विकास, हस्तशिल्प, नारियल विकास बोर्ड) अतिव्यापन उद्देश्यों वाले कार्यक्रम चलाते हैं (जैसे- नारियल विकास, चर्म, हस्तशिल्प, ग्रामोद्योग के लिये)। इससे एक समान लक्षित लाभार्थी एकाधिक, गैर-समन्वित योजनाओं द्वारा सेवा प्राप्त करते हैं, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है।
संसाधनों की दक्षता और प्रभाव में वृद्धि: योजनाओं के अभिसरण से बेहतर योजना बनाना संभव होता है और केंद्र व राज्य के वित्तीय संसाधनों का साझा उपयोग हो पाता है, जिससे बिखरे हुए निवेश से बचाव होता है। भौतिक और संस्थागत अवसंरचना के संयुक्त उपयोग से अनावश्यक दोहराव रुकता है एवं समग्र रूप से लागत-प्रभावशीलता बढ़ती है।
लाभार्थियों के लिये पहुँच को सरल बनाना: योजनाओं के अभिसरण से MSME योजनाओं के संचालन हेतु एकीकृत मंच तैयार होता है, जिससे लाभार्थियों को विभिन्न एजेंसियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यह समन्वित व्यवस्था समान प्रकृति की योजनाओं से उत्पन्न भ्रम को कम करती है, स्पष्ट जानकारी सुनिश्चित करती है और लाभार्थियों की सहभागिता बढ़ाती है।
शासन और वितरण में सुधार करना: सूचना अभिसरण मंत्रालय के बिखरे हुए डेटा को एक एकीकृत व्यवस्था में लाता है, जिससे बेहतर लाभार्थी ट्रैकिंग और सूचित नीति-निर्माण संभव होता है। निरीक्षण और निगरानी के लिये यह एकीकृत तंत्र, साझा संसाधन पूल का उपयोग करते हुए, जवाबदेही एवं पारदर्शिता को बढ़ाता है।
राष्ट्रीय और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करना: रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य 17 (लक्ष्यों के लिये साझेदारी) का उल्लेख करती है, जो प्रभावी शासन के लिये बहु-क्षेत्रीय सहयोग को महत्त्वपूर्ण बताता है। यह पूर्व समितियों (जैसे- MSME पर पीएम के टास्क फोर्स) की सिफारिशों को भी लागू करता है, जो लंबे समय से बिना किसी लाभ के लक्ष्य तक पहुँचाने के लिये एकल मंच का समर्थन करती रही हैं।
नीति आयोग की MSME योजनाओं के अभिसरण पर रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें क्या हैं?
MSME के लिये केंद्रीकृत पोर्टल: रिपोर्ट एक AI-संचालित केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव करती है जो MSME योजनाओं, अनुपालन, वित्त और बाज़ार की बुद्धिमत्ता को एकीकृत करेगा। इसमें सूचना, प्रक्रिया, अनुपालन और बाज़ार अनुसंधान मॉड्यूल शामिल हैं, जिन्हें AI चैटबॉट्स, डैशबोर्ड एवं मोबाइल एक्सेस द्वारा समर्थित किया जाएगा ताकि MSME को वास्तविक समय में सहायता मिल सके।
क्लस्टर विकास योजनाओं का अभिसरण: पारंपरिक उद्योगों के उन्‍नयन एवं पुनर्निर्माण के लिये कोष की योजना (SFURTI) को सूक्ष्म एवं लघु उद्यम – क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) के साथ एकीकृत करना।
MSE-CDP के तहत पारंपरिक उद्योगों के लिये एक समर्पित उप-योजना, एक एकीकृत शासन संरचना और शिल्प, कलाओं तथा लुप्तप्राय पारंपरिक उद्योगों के संरक्षण हेतु निर्धारित संसाधनों के साथ समेकित वित्तपोषण का प्रस्ताव है, जिससे पैमाना एवं दक्षता में सुधार हो सके।
कौशल विकास कार्यक्रमों का अभिसरण : रिपोर्ट कौशल संबंधी पहलों को तीन-स्तरीय संरचना में तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव करती है जो उद्यमिता एवं व्यावसायिक कौशल, MSME तकनीकी कौशल और ग्रामीण एवं महिला कारीगरों के प्रशिक्षण को कवर करेगी।
यह दृष्टिकोण अतिव्यापित योजनाओं का विलय करता है, संस्थानों के बीच समन्वय में सुधार करता है और समावेश तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु लक्षित कार्यक्रमों को बनाए रखता है।
विपणन सहायता प्रकोष्ठ : MSME विपणन समर्थन को सुव्यवस्थित करने के लिये, रिपोर्ट घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय घटकों वाले एक समर्पित विपणन प्रकोष्ठ का प्रस्ताव करती है।
घरेलू विंग राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों तथा क्रेता-विक्रेता बैठकों में MSME की भागीदारी को सुगम बनाएगा, जबकि अंतर्राष्ट्रीय विंग विदेशों में आयोजित व्यापार मेलों, B2B आयोजनों और क्रेता-विक्रेता बैठकों के माध्यम से वैश्विक बाज़ार तक पहुँच में सहयोग प्रदान करेगा।
MSME इनोवेटिव एवं नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना (ASPIRE): रिपोर्ट में ASPIRE को MSME इनोवेटिव के अंतर्गत कृषि-ग्रामीण उद्यमों के लिये एक विशेष श्रेणी के रूप में एकीकृत करने की अनुशंसा की गई है। इसके तहत मौजूदा ASPIRE निधियाँ यथावत जारी रह सकती हैं, जबकि भविष्य में MSME इनोवेटिव के बजट में एग्रो-रूरल इनक्यूबेटर के लिये एक निश्चित हिस्सा निर्धारित किया जाए। यह एकीकरण उन्नत इनक्यूबेशन सुविधाओं तक पहुँच का विस्तार करता है, बिना किसी अनावश्यक प्रतिबंध के।

निष्कर्ष :

नीति आयोग की रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि MSME योजनाओं का अभिसरण (Convergence) दक्षता बढ़ाने, दोहराव को कम करने और सेवा वितरण में सुधार के लिये अत्यंत आवश्यक है। डेटा, प्रक्रियाओं और संस्थागत प्रयासों के एकीकरण के माध्यम से अभिसरण एक एकीकृत, परिणामोन्मुख MSME पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर सकता है, जिससे सार्वजनिक निवेश का अधिकतम उपयोग एवं समावेशी आर्थिक विकास की गति तीव्र हो सकेगी।

  प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

1. भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)
1.’सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एम.एस.एम.ई.डी) अधिनियम, 2006 के अनुसार, जिनका संयंत्र और मशीनरी में निवेश 15 करोड़ से 25 करोड़ रुपये के बीच है, वे ‘मध्यम उद्यम’ हैं।
2.सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिये गए सभी बैंक ऋण प्राथमिकता क्षेत्रक के अधीन अर्ह हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)

Q.2. विनिर्माण क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिये भारत सरकार ने कौन-सी नई नीतिगत पहल की है/हैं? (2012)
1. राष्ट्रीय निवेश तथा विनिर्माण क्षेत्रों की स्थापना। एकल खिड़की मंज़ूरी (सिगल विडो क्लीयरेंस) की सुविधा प्रदान करना।
2. प्रौद्योगिकी अधिग्रहण तथा विकास कोष की स्थापना।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. भारत की अर्थव्यवस्था के लिये MSME क्षेत्र के महत्त्व की विवेचना कीजिये तथा भारत में MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु MSME योजनाओं के अभिसरण के औचित्य को स्पष्ट कीजिये। 

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