नीलगिरि में आर्द्रभूमि पुनर्स्थापना पहल: जानिए महत्वपूर्ण पहलुओं को

Wetland restoration initiative launched in the Nilgiris — labelled illustration

नीलगिरि में आर्द्रभूमि पुनर्स्थापना पहल: जानिए महत्वपूर्ण पहलुओं को

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3D cutaway: Wetland restoration initiative launched in the Nilgiris

✎ आर्द्रभूमि पारिस्थितिकीय संतुलन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन शमन के लिए महत्वपूर्ण हैं, और नीलगिरि में चल रही बहाली पहल इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन  |  GS Paper I — भूगोल
  • Prelims: आर्द्रभूमि (Wetlands), नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Nilgiris Biosphere Reserve), आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive Species), कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration), पारिस्थितिकीय बहाली (Ecological Restoration), रामसर स्थल (Ramsar Sites)
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन, भारत में जैव विविधता का महत्व और उसके संरक्षण की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: आर्द्रभूमि पारिस्थितिकीय संतुलन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन शमन के लिए महत्वपूर्ण हैं, और नीलगिरि में चल रही बहाली पहल इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, नीलगिरि में आर्द्रभूमि बहाली (Wetland Restoration) पहल का उद्घाटन किया गया है। इस पहल का उद्देश्य आक्रामक पौधों की प्रजातियों को हटाकर और देशी नीलगिरि वनस्पतियों को फिर से लगाकर गंभीर पारिस्थितिकीय क्षरण (Ecological Degradation) को संबोधित करना है। यह परियोजना स्थानीय पारिस्थितिकीय संतुलन को मजबूत करने और देशी पौधों तथा पशु प्रजातियों के लिए एक स्थायी वातावरण सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

पृष्ठभूमि

  • आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र: आर्द्रभूमि, जैसे दलदल, मैंग्रोव और नदियाँ, पृथ्वी के सबसे उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में से हैं। ये जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं।
  • नीलगिरि का महत्व: नीलगिरि पश्चिमी घाट का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। यह क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता और स्थानिक प्रजातियों के लिए जाना जाता है।
  • आक्रामक प्रजातियों का खतरा: आक्रामक प्रजातियाँ, जैसे कि सिलीबम मैरिएनम (Silybum marianum) और अल्टरनेन्थेरा फिलोक्सरोइड्स (Alternanthera philoxeroides), देशी वनस्पतियों को विस्थापित कर देती हैं, जिससे पारिस्थितिकीय संतुलन बिगड़ता है और जैव विविधता को खतरा होता है।
  • जलवायु परिवर्तन से संबंध: आर्द्रभूमि प्राकृतिक कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति दीर्घकालिक लचीलापन प्रदान करती है।
  • सहयोग और भागीदारी: इस पहल में कई संगठन शामिल हैं, जिनमें अरुलागम (Arulagam), अपस्ट्रीम इकोलॉजी फाउंडेशन (Upstream Ecology Foundation), मद्रास रेजिमेंटल सेंटर (Madras Regimental Centre-Wellington) और स्टेट स्ट्रीट फाउंडेशन (State Street Foundation) के स्वयंसेवक शामिल हैं, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक उदाहरण है।
  • सतत् विकास लक्ष्य: आर्द्रभूमि का संरक्षण संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) के साथ संरेखित है, विशेष रूप से SDG 15 (स्थलीय जीवन) और SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता)।

आर्द्रभूमि क्या हैं?

  • आर्द्रभूमि ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पानी भूमि की सतह को कवर करता है या मिट्टी में मौजूद होता है, या तो स्थायी रूप से या मौसमी रूप से।
  • इनमें दलदल, मैंग्रोव, नदियाँ, झीलें, बाढ़ के मैदान, चावल के खेत और प्रवाल भित्तियाँ शामिल हैं।
  • आर्द्रभूमि को ‘पृथ्वी की किडनी’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि वे पानी को शुद्ध करती हैं और प्रदूषण को कम करती हैं।
  • ये कई पौधों और जानवरों की प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करती हैं, जिससे जैव विविधता का संरक्षण होता है।
  • आर्द्रभूमि बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने में मदद करती हैं, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लचीलापन बढ़ता है।
  • रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और उनके संसाधनों के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।
  • भारत में कई रामसर स्थल हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ हैं और उनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं।
  • आर्द्रभूमि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके और उसे मिट्टी में संग्रहीत करके जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आक्रामक प्रजातियों का उन्मूलन पारिस्थितिक क्षरण को संबोधित करना और देशी वनस्पतियों को पुनः स्थापित करना।
नीलगिरि की देशी वनस्पतियों का पुनः परिचय स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करना और जैव विविधता को बढ़ावा देना।
कम ज्ञात आक्रामक प्रजातियों की पहचान क्षेत्र की नाजुक जल विज्ञान (hydrology) को बचाने के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप।
प्राकृतिक आवासों का व्यवस्थित पुनर्वास देशी पौधों और पशु प्रजातियों के पनपने के लिए एक स्थायी वातावरण सुनिश्चित करना।
कार्बन पृथक्करण और जलवायु लचीलापन दलदली भूमि की बहाली से प्राकृतिक कार्बन पृथक्करण में वृद्धि और दीर्घकालिक जलवायु लचीलापन।

महत्व

पर्यावरण

  • यह पहल नीलगिरि में दलदली भूमि (wetland) के पारिस्थितिक क्षरण को रोकने और उसे पलटने में मदद करेगी, जो जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • आक्रामक पौधों की प्रजातियों को हटाने और देशी वनस्पतियों को फिर से लगाने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बहाल होगा।
  • दलदली भूमि के पुनर्वास से प्राकृतिक कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration) में वृद्धि होगी, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक है।

जैव विविधता

  • आक्रामक प्रजातियों जैसे मिल्क थिसल (Silybum marianum) और एलीगेटर वीड (Alternanthera philoxeroides) को हटाने से देशी जैव विविधता का विस्थापन रुकेगा।
  • देशी नीलगिरि वनस्पतियों को फिर से स्थापित करने से स्थानीय पौधों और पशु प्रजातियों के लिए एक स्थायी वातावरण सुनिश्चित होगा।

सामाजिक

  • यह परियोजना संरक्षण NGO, सरकारी संस्थाओं और स्वयंसेवकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है, जो सामुदायिक भागीदारी का एक मॉडल प्रस्तुत करती है।
  • स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित और जागरूक किया जाएगा।

चुनौतियाँ

1. आक्रामक प्रजातियों का प्रबंधन

  • आक्रामक प्रजातियों की पहचान और उन्हें जड़ से खत्म करना एक श्रम-गहन और निरंतर प्रयास है।
  • इन प्रजातियों के फिर से पनपने के जोखिम को कम करने के लिए दीर्घकालिक निगरानी और प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।

2. वित्तपोषण और संसाधन

  • दलदली भूमि बहाली परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण एक चुनौती हो सकती है।
  • परियोजना के पैमाने और अवधि के लिए आवश्यक मानव संसाधनों और विशेषज्ञता की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

3. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन के कारण बदलती वर्षा पैटर्न और तापमान दलदली भूमि के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
  • बहाली प्रयासों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीला बनाने की आवश्यकता है।

4. स्थानीय भागीदारी और जागरूकता

  • स्थानीय समुदायों को बहाली प्रयासों में शामिल करना और उन्हें दलदली भूमि के महत्व के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण है।
  • दीर्घकालिक सफलता के लिए स्थानीय हितधारकों के बीच स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
आक्रामक पौधों की प्रजातियाँ देशी वनस्पतियों का गला घोंटना और पारिस्थितिक संतुलन को बाधित करना।
नाजुक जल विज्ञान आक्रामक प्रजातियों द्वारा क्षेत्र की जल वितरण प्रणाली को खतरा।
जैव विविधता का विस्थापन अनदेखी पौधों के आक्रमण से स्वदेशी जैव विविधता का अपूरणीय नुकसान।
पारिस्थितिक क्षरण दलदली भूमि के आवासों का बिगड़ना, जिससे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का नुकसान होता है।

आगे की राह

  • आक्रामक प्रजातियों के उन्मूलन और देशी वनस्पतियों के पुनः परिचय के लिए एक व्यापक दीर्घकालिक कार्य योजना विकसित करना।
  • दलदली भूमि के स्वास्थ्य और आक्रामक प्रजातियों के फिर से पनपने की निगरानी के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करना।
  • स्थानीय समुदायों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करना।
  • दलदली भूमि के पारिस्थितिक महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।
  • बहाली परियोजनाओं के लिए स्थायी वित्तपोषण मॉडल तलाशना, जिसमें कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) फंड और सरकारी अनुदान शामिल हों।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति दलदली भूमि के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए अनुकूलन रणनीतियों को एकीकृत करना।
  • अन्य क्षेत्रों में दलदली भूमि बहाली के लिए एक मॉडल के रूप में नीलगिरि पहल से सीखे गए सबक का दस्तावेजीकरण और साझा करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आर्द्रभूमि बहाली · पारिस्थितिक क्षरण · आक्रामक प्रजातियाँ · देशी वनस्पति · जैव विविधता संरक्षण · कार्बन पृथक्करण · जलवायु लचीलापन · नीलगिरि पारिस्थितिकी · पर्यावरण संरक्षण · सामुदायिक भागीदारी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

नीलगिरि में दलदली भूमि का पारिस्थितिक क्षरण  →  आक्रामक पौधों की प्रजातियों द्वारा आवासों का दम घुटना  →  आक्रामक प्रजातियों का उन्मूलन और देशी वनस्पतियों का पुनः परिचय  →  स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन का सुदृढीकरण  →  कार्बन पृथक्करण में वृद्धि और जलवायु लचीलापन  →  देशी पौधों और पशु प्रजातियों के लिए स्थायी वातावरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. आक्रामक पादप प्रजातियाँ (Invasive Plant Species) अक्सर देशी जैव विविधता (Native Biodiversity) के लिए खतरा पैदा करती हैं।
3. नीलगिरि क्षेत्र में आर्द्रभूमि बहाली पहल का उद्देश्य केवल जल निकायों की सफाई करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। आर्द्रभूमि कार्बन पृथक्करण में महत्वपूर्ण हैं और आक्रामक प्रजातियाँ देशी जैव विविधता को नुकसान पहुँचाती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि पहल का उद्देश्य आक्रामक प्रजातियों को हटाना और देशी वनस्पतियों को फिर से स्थापित करना भी है, न कि केवल जल निकायों की सफाई।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आर्द्रभूमि बहाली (Wetland Restoration) के महत्व को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?

  1. यह केवल मनोरंजन गतिविधियों को बढ़ावा देता है।
  2. यह आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को नियंत्रित करता है और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करता है।
  3. यह केवल स्थानीय समुदायों के लिए मछली पकड़ने के अवसर प्रदान करता है।
  4. यह कृषि उत्पादकता बढ़ाने का प्राथमिक तरीका है।

उत्तर: यह आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को नियंत्रित करता है और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करता है। — आर्द्रभूमि बहाली का मुख्य उद्देश्य आक्रामक प्रजातियों को हटाकर और देशी वनस्पतियों को फिर से स्थापित करके पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करना है, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार होता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र के महत्व पर चर्चा करें और आक्रामक पादप प्रजातियाँ (Invasive Plant Species) इन नाजुक आवासों के लिए किस प्रकार खतरा उत्पन्न करती हैं। भारत में आर्द्रभूमि बहाली के प्रयासों को सफल बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में आर्द्रभूमि की परिभाषा और उनके महत्व का संक्षिप्त उल्लेख करें। मुख्य भाग में, आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र के बहुआयामी महत्व को विस्तार से समझाएँ (जैसे जैव विविधता, जल शोधन, बाढ़ नियंत्रण, कार्बन पृथक्करण)। इसके बाद, आक्रामक पादप प्रजातियों द्वारा उत्पन्न खतरों का विश्लेषण करें (जैसे देशी प्रजातियों का विस्थापन, जल विज्ञान में परिवर्तन, पारिस्थितिक संतुलन में व्यवधान)। अंत में, भारत में आर्द्रभूमि बहाली के प्रयासों को सफल बनाने के लिए ठोस कदमों (जैसे वैज्ञानिक मूल्यांकन, सामुदायिक भागीदारी, नीतिगत समर्थन, जागरूकता अभियान, स्वदेशी प्रजातियों का पुनरुत्पादन) का सुझाव दें। निष्कर्ष में सतत प्रबंधन और संरक्षण के महत्व पर जोर दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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