न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत फसलों का कवरेज बढ़ाना

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत फसलों का कवरेज बढ़ाना

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत फसलों का कवरेज बढ़ाना : सरकार की पहल और चुनौतियां

  पाठ्यक्रम :  जीएस-3 : भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि

न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत फसलों का कवरेज बढ़ाना : सरकार की पहल और चुनौतियां

परिचय : 

नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025: भारतीय कृषि क्षेत्र में किसानों की आय सुरक्षा और उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) एक महत्वपूर्ण नीति है। हाल ही में, कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में एमएसपी के तहत फसलों के कवरेज को बढ़ाने संबंधी जानकारी साझा की। यह जानकारी दर्शाती है कि सरकार लगातार प्रयासरत है कि अधिक से अधिक फसलों को एमएसपी के दायरे में लाया जाए, ताकि किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाया जा सके। आइए, इस विषय पर विस्तार से समझते हैं कि एमएसपी कैसे काम करता है, फसलों का कवरेज कैसे बढ़ाया जा रहा है और इसमें क्या चुनौतियां हैं।

एमएसपी का निर्धारण और महत्वपूर्ण कारक

प्रत्येक वर्ष, सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर 22 अनिवार्य कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। इन फसलों में धान, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, जौ, दालें (जैसे चना, तूर, मूंग, उड़द, मसूर), तिलहन (जैसे मूंगफली, सोयाबीन, सरसों, तिल, सूरजमुखी, नाइजरसीड), कपास, जूट और नारियल शामिल हैं। सीएसीपी की सिफारिशें विभिन्न राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के दृष्टिकोणों पर आधारित होती हैं।

एमएसपी निर्धारित करते समय, आयोग कई महत्वपूर्ण कारकों पर विचार करता है:

महत्वपूर्ण कारक  : 

उत्पादन लागत: किसानों की वास्तविक लागत को ध्यान में रखते हुए, कम से कम 50 प्रतिशत का मार्जिन सुनिश्चित किया जाता है। इससे किसानों को लाभकारी मूल्य मिलता है।
मांग-आपूर्ति की स्थिति: घरेलू बाजार में फसल की उपलब्धता और मांग को संतुलित किया जाता है।
घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कीमतें: वैश्विक बाजार की कीमतों से तुलना करके एमएसपी तय किया जाता है।
फसलों के बीच कीमत समानता: विभिन्न फसलों की कीमतों में संतुलन बनाए रखना, ताकि किसान एक फसल पर निर्भर न रहें।
कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों के बीच व्यापार की शर्तें: अर्थव्यवस्था के समग्र संतुलन को ध्यान में रखा जाता है।
संसाधनों का सही उपयोग: भूमि, पानी और अन्य उत्पादन संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना। ये कारक न केवल किसानों की आय बढ़ाते हैं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की स्थिरता भी बनाए रखते हैं।

फसलों को एमएसपी के दायरे में शामिल करने की शर्तें 

एमएसपी ढांचे के तहत फसलों को शामिल करना आसान नहीं है। यह कई मानदंडों पर निर्भर करता है, जैसे:

  • फसल का अपेक्षाकृत लंबे समय तक चलने वाला होना (खराब न होने वाली)।
  • बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली और उपभोग की जाने वाली फसलें
  • खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक होना। उदाहरण के लिए, अनाज और मोटे अनाज जैसी फसलें आसानी से एमएसपी में शामिल हो जाती हैं, क्योंकि ये स्टोरेज और वितरण के लिए उपयुक्त हैं।
  • फल, सब्जियां या अन्य पेरिशेबल फसलें अक्सर बाहर रह जाती हैं, क्योंकि इनकी खरीद और भंडारण चुनौतीपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि इन मानदंडों को लचीला बनाकर अधिक फसलों को कवर किया जाए, लेकिन यह संसाधनों और बाजार की गतिशीलता पर निर्भर करता है।

खरीद प्रक्रिया और सरकारी एजेंसियां 

एमएसपी घोषणा के बाद, सरकार किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से फसलों की खरीद करती है। यह प्रक्रिया निम्नलिखित तरीके से संचालित होती है:

  • अनाज और मोटे अनाज: भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य निर्धारित राज्य एजेंसियां इनकी खरीद करती हैं।
  •  दालें, तिलहन और नारियल: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद की जाती है। यह खरीद तब होती है जब बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो, और संबंधित राज्य सरकार से सलाह ली जाती है। 
  • प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद की जाती है। यह खरीद तब होती है जब बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो, और संबंधित राज्य सरकार से सलाह ली जाती है।
  • मुख्य एजेंसियां नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) हैं।
  • कपास और जूट: भारतीय कपास निगम (सीसीआई) और भारतीय जूट निगम (जेसीआई) के माध्यम से एमएसपी पर खरीद की जाती है।
    किसानों के पास विकल्प होता है कि वे अपनी फसल सरकारी एजेंसियों को बेचें या खुले बाजार में, जहां कीमतें अधिक लाभदायक हों। इससे किसानों को लचीलापन मिलता है और बाजार की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।

चुनौतियां : 

एमएसपी के कवरेज को बढ़ाने में कई चुनौतियां हैं, जैसे भंडारण सुविधाओं की कमी, राज्य स्तर पर कार्यान्वयन में असमानता और बाजार की उतार-चढ़ाव। हाल के वर्षों में, सरकार ने पीएम-आशा जैसी योजनाओं के माध्यम से कवरेज बढ़ाने के प्रयास किए हैं, लेकिन अभी भी कई फसलें (जैसे कुछ सब्जियां और फल) बाहर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और बेहतर लॉजिस्टिक्स से कवरेज को और विस्तार दिया जा सकता है।

आगे की राह: 

एमएसपी किसानों की आय सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ है। सरकार का उद्देश्य अधिक फसलों को शामिल करके कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है, जो अंततः खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास में योगदान देगा। राज्यसभा में दी गई जानकारी से स्पष्ट है कि सरकार इस दिशा में निरंतर कार्यरत है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत फसलों का कवरेज बढ़ाने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.वर्तमान में MSP केवल खरीफ फसलों पर लागू होता है, रबी फसलों पर नहीं।
2.MSP निर्धारण का प्रमुख उद्देश्य किसानों को मूल्य अस्थिरता से संरक्षण देना है।
3.भारत में MSP की सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा की जाती है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) 1 और 2 केवल
(b) 2 और 3 केवल
(c) 1 और 3 केवल
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) 2 और 3 केवल

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नीति के उद्देश्यों की चर्चा कीजिए तथा फसलों के कवरेज को बढ़ाने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्दों में)

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