पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA), 1996: 30 वर्ष पूर्ण

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA), 1996: 30 वर्ष पूर्ण

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA), 1996: 30 वर्ष पूर्ण

पाठ्यक्रम : GS–II –  शासन, स्थानीय स्वशासन, जनजातीय कल्याण

परिचय :     

दिसंबर 2025 में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) की 30वीं वर्षगांठ मनाई गई। यह अधिनियम पंचायती राज व्यवस्था का विस्तार संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुल अनुसूचित क्षेत्रों तक करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना है, ताकि जनजातीय समुदायों को स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन, सांस्कृतिक संरक्षण और स्वशासन में निर्णायक भूमिका मिल सके। हालांकि, धन, समयसीमा और संस्थागत समर्थन की कमी के कारण इसका क्रियान्वयन अपर्याप्त रहा है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि : 

अनुच्छेद 244: संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जो आदिवासी बहुल क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992: इससे पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संवैधानिक दर्जा मिला, जिससे ग्राम, प्रखंड और जिला स्तर पर स्थानीय स्वशासन मजबूत हुआ। हालांकि, पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत 10 राज्यों (आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना) को इससे बाहर खा गया। इन क्षेत्रों के लिए PESA अधिनियम लाया गया ताकि जनजातीय परंपराओं को ध्यान में रखते हुए स्वशासन का विस्तार हो।

PESA अधिनियम के प्रमुख प्रावधान : 

PESA अधिनियम जनजातीय स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान करता है:

ग्राम सभा का सशक्तिकरण: भूमि अधिग्रहण, विकास परियोजनाओं, लघु वनोपज (जैसे महुआ, तेंदू पत्ता), लघु खनिजों के प्रबंधन में ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति आवश्यक है। यह स्थानीय संसाधनों पर समुदाय का नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
निर्णय लेने के अधिकार: नशीले/मादक पदार्थों की बिक्री और उपभोग को प्रतिबंधित या विनियमित करना।
भूमि संरक्षण और भूमि हस्तांतरण पर नियंत्रण।
ग्राम हाट (बाजार) का प्रबंधन।
साहूकारी (मनी-लेंडिंग) पर नियंत्रण, ताकि आदिवासी शोषण से बच सकें।

संस्कृति एवं परंपराओं का संरक्षण: धिनियम आदिवासी समुदायों की पारंपरिक शासन प्रणालियों, प्रथागत कानूनों और सांस्कृतिक पहचान को मान्यता देता है तथा उनका संरक्षण करता है।
कानूनी सर्वोच्चता: PESA के प्रावधान राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों और सामान्य नियमावलियों पर सर्वोच्चता रखते हैं, जिससे जनजातीय हितों की रक्षा होती है।

PESA अधिनियम की सीमाएँ एवं चुनौतियाँ

तीन दशकों के बाद भी PESA आदिवासी स्वशासन का पूर्ण ढांचा नहीं बन पाया है। प्रमुख कमियां निम्न हैं:

नियम निर्माण में विलंब: अधिनियम में नियम बनाने के लिए अनिवार्य समय-सीमा का अभाव, जिससे कई राज्य अभी भी पूर्ण अनुपालन नहीं कर पाए हैं।
नौकरशाही का वर्चस्व: ग्राम सभाओं की तुलना में प्रशासनिक ढांचे का प्रभुत्व, जो स्थानीय निर्णयों को प्रभावित करता है।
संसाधनों की कमी: अपर्याप्त वित्त, कार्य आवंटन, प्रशिक्षित कर्मियों और संस्थागत समर्थन की कमी।
राज्यों का अपर्याप्त अनुपालन: कई राज्यों में अधिनियम की भावना के अनुरूप कानून नहीं बने, जिससे भूमि अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं में आदिवासियों की सहमति की अनदेखी होती है।

क्रियान्वयन को मजबूत करने की हालिया पहलें : 

सरकार ने PESA के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई कदम उठाए हैं:

PESA–GPDP पोर्टल (सितंबर 2024): यह पोर्टल ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के तहत विकास गतिविधियों की योजना, निगरानी और संसाधन आवंटन को सुगम बनाता है।
संस्थागत समर्थन: केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय में अलग PESA प्रकोष्ठ स्थापित किया गया। साथ ही, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) बनाए जा रहे हैं ताकि क्षमता निर्माण हो सके।
भाषाई प्रसार: प्रशिक्षण सामग्री का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं (तेलुगु, मराठी आदि) और जनजातीय भाषाओं (संथाली, गोंडी, भीली, मुंडारी) में किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़े।

निष्कर्ष : 

PESA अधिनियम आदिवासी क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत शासन और सशक्तिकरण की संवैधानिक भावना को साकार करने का महत्वपूर्ण उपकरण है। हालांकि, इसकी सफलता राज्यों के समयबद्ध नियम निर्माण, ग्राम सभाओं की वास्तविक सशक्तता, पर्याप्त वित्तीय हस्तांतरण और संस्थागत क्षमता निर्माण पर निर्भर है। भविष्य में, इसे वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 जैसे अन्य कानूनों के साथ समन्वित कर आदिवासी कल्याण को मजबूत किया जा सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA), 1996 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.यह अधिनियम ग्राम सभाओं को लघु वनोपज और लघु खनिजों के प्रबंधन में अनिवार्य सहमति का अधिकार देता है।
2.PESA अधिनियम संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत पूर्वोत्तर राज्यों पर लागू होता है।
3.अधिनियम में राज्य कानूनों पर PESA प्रावधानों की सर्वोच्चता प्रदान की गई है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2 केवल
(b) 1 और 3 केवल
(c) 2 और 3 केवल
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.“पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA), 1996 आदिवासी समुदायों को स्वशासन प्रदान करने का महत्वपूर्ण कदम है, किंतु इसके क्रियान्वयन में संरचनात्मक और संस्थागत चुनौतियाँ बनी हुई हैं।” इस कथन की समीक्षा कीजिए तथा प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सुझाव दीजिए। (250 शब्द)

 

No Comments

Post A Comment