पीएमकेवीवाई 4.0: कौशल विकास में नई क्रांति, रोजगारोन्मुखी लक्ष्यों पर ध्यान

पीएमकेवीवाई 4.0: कौशल विकास में नई क्रांति, रोजगारोन्मुखी लक्ष्यों पर ध्यान — प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के विकास का प्रवाह

पीएमकेवीवाई 4.0: कौशल विकास में नई क्रांति, रोजगारोन्मुखी लक्ष्यों पर ध्यान

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, मानव संसाधन  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, नियोजन, संसाधन जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोजगार
  • Prelims: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड, कौशल परिणाम कोष, पूर्व-अधिगम की मान्यता (RPL), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
  • Essay: भारत में कौशल विकास: चुनौतियाँ और अवसर, जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग: शिक्षा, कौशल और रोजगार की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके रोजगार क्षमता बढ़ाना और नए जमाने की तकनीकों पर केंद्रित एक मांग-आधारित कौशल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship – MSDE) ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) की समीक्षा की है। इस समीक्षा में योजना के विभिन्न चरणों (PMKVY 1.0, 2.0, 3.0 और 4.0) के तहत हुई प्रगति और भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया है। इसमें विशेष रूप से नए जमाने की तकनीकों में कौशल विकास, स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड की सफलता और कौशल परिणाम कोष (Skill Outcomes Fund) की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है, जो भारत में कौशल विकास परिदृश्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में एक बड़ी युवा आबादी है, जिसे जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का लाभ उठाने के लिए कुशल बनाने की आवश्यकता है।
  • पारंपरिक शिक्षा प्रणाली अक्सर उद्योग की बदलती मांगों के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहती है, जिससे रोजगार योग्य कौशल का अभाव होता है।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य कौशल प्रदान करके उनकी आय क्षमता को बढ़ाना और बेरोजगारी को कम करना है।
  • सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को सफल बनाने के लिए एक कुशल कार्यबल के महत्व को पहचाना है।
  • PMKVY को 2015 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना था ताकि उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर मिल सकें।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) क्या है?

  • PMKVY कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की प्रमुख योजना है, जिसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation – NSDC) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योग-संबंधी कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
  • PMKVY 1.0 (2015) ने अल्पकालिक प्रशिक्षण, प्रमाणन और पूर्व-अधिगम की मान्यता (Recognition of Prior Learning – RPL) के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा स्थापित किया।
  • PMKVY 2.0 ने क्षेत्रीय और भौगोलिक कवरेज का विस्तार किया, राज्य-नेतृत्व वाली कार्यान्वयन प्रणाली शुरू की और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ तालमेल को बढ़ावा दिया।
  • PMKVY 3.0 ने स्थानीय कौशल अंतराल की पहचान के लिए राज्य कौशल विकास मिशनों और जिला कौशल समितियों के माध्यम से विकेन्द्रीकृत योजना को मजबूत किया।
  • PMKVY 4.0 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), साइबर सुरक्षा (Cyber Security), सेमीकंडक्टर (Semiconductor), 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things), ड्रोन प्रौद्योगिकी (Drone Technology), ग्रीनहाउस और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए जमाने की और भविष्योन्मुखी नौकरी भूमिकाओं को प्राथमिकता देती है।
  • योजना का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण और प्रमाणन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय स्थायी रोजगार परिणामों पर केंद्रित एक मांग-अनुरूप ढांचा तैयार करना है।
  • हाल ही में, कौशल परिणाम कोष (Skill Outcomes Fund) की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसका उद्देश्य उद्योग-अनुकूल कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से दो लाख से अधिक युवाओं को सहायता प्रदान करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मांग-आधारित कौशल विकास उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण, जिससे रोजगार क्षमता बढ़ती है।
विकेंद्रीकृत योजना (PMKVY 3.0) राज्य कौशल विकास मिशनों और जिला कौशल समितियों के माध्यम से स्थानीय कौशल अंतरालों की पहचान और समाधान।
भविष्योन्मुखी नौकरी भूमिकाएँ (PMKVY 4.0) कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण, भविष्य के कार्यबल के लिए तैयारी।
स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड प्रशिक्षण के बजाय स्थायी रोजगार परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना, विशेषकर महिलाओं के लिए।
कौशल परिणाम कोष उद्योग-अनुकूल कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के लिए नवीन दृष्टिकोणों का परीक्षण और वित्तपोषण।
परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण प्रशिक्षण की मात्रा के बजाय मापने योग्य रोजगार, प्रतिधारण, आय और आजीविका परिणामों पर जोर।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • बेहतर कौशल से उत्पादकता और आय में वृद्धि होती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • उद्योगों की मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का विस्तार होता है।
  • युवाओं को भविष्योन्मुखी कौशल प्रदान करके भारत को वैश्विक कौशल केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायता।

सामाजिक महत्व

  • बेरोजगारी कम करने और युवाओं, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने में सहायक।
  • पूर्व-अधिगम की मान्यता (Recognition of Prior Learning – RPL) से अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक कौशल प्रमाणन मिलता है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और आय बढ़ती है।
  • कौशल विकास से समावेशी विकास सुनिश्चित होता है, जिससे समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में आने का अवसर मिलता है।

शासनिक महत्व

  • योजना के विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन से केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होता है।
  • परिणाम-आधारित मूल्यांकन और जवाबदेही तंत्र से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता और दक्षता में सुधार होता है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल के माध्यम से कौशल विकास में निजी क्षेत्र के निवेश और विशेषज्ञता का लाभ उठाना।

चुनौतियाँ

1. कौशल अंतराल का सटीक आकलन

  • तेजी से बदलते औद्योगिक परिदृश्य में मांग और आपूर्ति के बीच कौशल अंतराल की पहचान करना चुनौतीपूर्ण है।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विभिन्न कौशल आवश्यकताओं को समझना और उन्हें पूरा करना।

2. गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और प्रशिक्षकों की कमी

  • उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे और योग्य प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • प्रशिक्षण मानकों को उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाए रखना।

3. स्थायी रोजगार परिणाम सुनिश्चित करना

  • प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवारों के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • केवल प्रमाणन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय रोजगार प्रतिधारण और आय वृद्धि पर जोर देना।

4. निगरानी और मूल्यांकन की प्रभावशीलता

  • योजना के प्रभाव का नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन सुनिश्चित करना।
  • डेटा संग्रह और विश्लेषण में पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखना।

5. जागरूकता और भागीदारी का अभाव

  • विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में संभावित लाभार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचाना।
  • युवाओं और नियोक्ताओं को कौशल विकास कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उद्योग की बदलती मांग तकनीकी प्रगति के साथ कौशल आवश्यकताओं में तेजी से बदलाव, जिससे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम अप्रचलित हो सकते हैं।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रशिक्षण प्रदाताओं की क्षमता और प्रशिक्षकों की योग्यता में भिन्नता, जिससे प्रशिक्षण परिणामों पर असर पड़ता है।
रोजगार के अवसर प्रशिक्षित उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त और प्रासंगिक रोजगार के अवसर पैदा करने में चुनौती।
वित्तीय स्थिरता दीर्घकालिक कौशल विकास पहलों के लिए सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना।
क्षेत्रीय असमानताएं देश के विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास के बुनियादी ढांचे और अवसरों में असमानता।
डेटा की कमी कौशल अंतराल, रोजगार परिणामों और योजना के प्रभाव पर सटीक और अद्यतन डेटा की उपलब्धता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
  • स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड

आगे की राह

  • उद्योगों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करके कौशल आवश्यकताओं का निरंतर और वास्तविक समय पर आकलन करना।
  • प्रशिक्षण सामग्री और विधियों को अद्यतन करने के लिए नियमित रूप से पाठ्यक्रम समीक्षा और संशोधन करना।
  • प्रशिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम और प्रमाणन प्रक्रियाएं शुरू करना ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
  • रोजगार मेलों, इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित उम्मीदवारों को उद्योग से जोड़ना।
  • कौशल वाउचर और कौशल वित्तपोषण तंत्र जैसे नवीन मॉडलों का परीक्षण और विस्तार करना।
  • योजना के प्रभाव का स्वतंत्र और परिणाम-आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करना।
  • कौशल विकास में निजी क्षेत्र, CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) और परोपकारी संगठनों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना · कौशल विकास · उद्यमिता · रोजगार सृजन · राष्ट्रीय कौशल विकास निगम · स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड · कौशल परिणाम कोष · विकेंद्रीकृत योजना · भविष्योन्मुखी कौशल · नीति आयोग मूल्यांकन · अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान · कौशल अंतराल आकलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(a)’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने के अधिकार का प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}

अवधारणा प्रवाह

उद्योग की बदलती मांग  →  कौशल अंतराल की पहचान  →  मांग-आधारित कौशल प्रशिक्षण  →  रोजगारोन्मुखी कौशल विकास  →  बेहतर रोजगार और आय  →  आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. PMKVY 1.0 ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और मिशनों के साथ तालमेल को बढ़ावा दिया।
2. PMKVY 3.0 ने स्थानीय कौशल अंतराल की पहचान के लिए विकेंद्रीकृत योजना को मजबूत किया।
3. PMKVY 4.0 कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसे नए जमाने की नौकरी भूमिकाओं को प्राथमिकता देती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है। PMKVY 2.0 ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और मिशनों के साथ तालमेल को बढ़ावा दिया, जबकि PMKVY 1.0 ने अल्पकालिक प्रशिक्षण, प्रमाणन और पूर्व-अधिगम की मान्यता के लिए राष्ट्रीय ढांचा स्थापित किया। कथन 2 सही है। PMKVY 3.0 ने स्थानीय कौशल अंतराल, रोजगार के अवसरों और प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान के लिए विकेंद्रीकृत, जमीनी स्तर की योजना को मजबूत किया। कथन 3 सही है। PMKVY 4.0 कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर आदि जैसे क्षेत्रों में नए जमाने की और भविष्योन्मुखी नौकरी भूमिकाओं को प्राथमिकता देती है।

Q2. हाल ही में समाचारों में उल्लिखित ‘स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड’ और ‘कौशल परिणाम कोष’ का संबंध निम्नलिखित में से किस मंत्रालय से है?

  1. शिक्षा मंत्रालय
  2. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
  3. कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
  4. वित्त मंत्रालय

उत्तर: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय — स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड और कौशल परिणाम कोष दोनों ही कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship – MSDE) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation – NSDC) द्वारा संचालित पहलें हैं। इनका उद्देश्य कौशल विकास और स्थायी रोजगार परिणामों को बढ़ावा देना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भारत में कौशल विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही है। इसके विभिन्न चरणों (1.0 से 4.0) में हुए क्रमिक विकास और प्रमुख विशेषताओं का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, कौशल विकास के परिणामों को बेहतर बनाने में ‘स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड’ और ‘कौशल परिणाम कोष’ जैसी पहलों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत PMKVY के उद्देश्य और इसके क्रमिक विकास के संक्षिप्त परिचय से करें। PMKVY के प्रत्येक चरण (1.0, 2.0, 3.0, 4.0) की प्रमुख विशेषताओं और नवाचारों को बिंदुवार स्पष्ट करें, जैसे कि राष्ट्रीय ढांचा, क्षेत्रीय विस्तार, विकेंद्रीकृत योजना और भविष्योन्मुखी कौशल पर ध्यान। इसके बाद, स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड और कौशल परिणाम कोष जैसी नई पहलों की अवधारणा, उनके उद्देश्यों और कौशल विकास के परिणामों को मापने और बेहतर बनाने में उनकी संभावित भूमिका का मूल्यांकन करें। निष्कर्ष में, योजना की समग्र सफलता और भविष्य की चुनौतियों पर संक्षिप्त टिप्पणी करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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