पीएम-अजय: अनुसूचित जाति के सशक्तिकरण हेतु आदर्श ग्राम योजना की प्रगति

पीएम-अजय: अनुसूचित जाति के सशक्तिकरण हेतु आदर्श ग्राम योजना की प्रगति — Aadarsh Gram Yojana Progress

पीएम-अजय: अनुसूचित जाति के सशक्तिकरण हेतु आदर्श ग्राम योजना की प्रगति

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक सशक्तिकरण  |  GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों का कल्याण  |  GS Paper III — समावेशी विकास, मानव संसाधन
  • Prelims: पीएम-अजय, आदर्श ग्राम योजना, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, अनुसूचित जाति (SC) सशक्तिकरण, ग्राम विकास योजना (VDP), डिजिटल शासन, छात्रावास घटक, आजीविका घटक
  • Essay: समावेशी विकास: भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में अनुसूचित जाति समुदायों का उत्थान, सरकारी योजनाएं और जमीनी स्तर पर परिवर्तन: आदर्श ग्रामों के माध्यम से सशक्तिकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-अजय अनुसूचित जाति समुदायों के समग्र सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए ‘आदर्श ग्राम’, ‘आजीविका’ और ‘शिक्षा’ पर केंद्रित एक एकीकृत योजना है, जो डिजिटल शासन के माध्यम से कार्यान्वित होती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) के तहत आदर्श ग्राम योजना की प्रगति पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में बताया गया है कि आदर्श ग्राम योजना के माध्यम से 47.59 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं, 16,759 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया है, और 46,782 से अधिक विकास कार्य संपन्न हुए हैं। यह योजना अनुसूचित जाति बहुल गांवों में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में अनुसूचित जाति (SC) समुदाय ऐतिहासिक रूप से सामाजिक-आर्थिक असमानताओं और भेदभाव का सामना करते रहे हैं।
  • इन समुदायों के उत्थान और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए विभिन्न सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों की आवश्यकता महसूस की गई है।
  • पूर्व में, अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) जैसे कार्यक्रम इन समुदायों के विकास पर केंद्रित थे, जिन्हें बाद में पुनर्गठित किया गया।
  • पीएम-अजय योजना, तीन पूर्ववर्ती योजनाओं – अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (SCA to SCSP), बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (BJRY) और प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (PMAGY) – को मिलाकर बनाई गई है।
  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे में सुधार, आजीविका के अवसर पैदा करना और शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना है।
  • यह योजना ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) क्या है?

  • पीएम-अजय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण करना है।
  • यह योजना गरीबी कम करने, सतत आजीविका के अवसर पैदा करने, अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचनात्मक सुधार लाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
  • इस योजना में तीन मुख्य घटक शामिल हैं: आदर्श ग्राम योजना, सहायता-अनुदान घटक (आजीविका और कौशल विकास के लिए), और छात्रावास घटक (शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए)।
  • योजना का कार्यान्वयन तकनीक-आधारित और परिणाम-उन्मुख संरचना के माध्यम से किया जाता है, जिसमें पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग शामिल है।
  • इसका लक्ष्य जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत करके और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
  • यह योजना राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।
  • पीएम-अजय का अंतिम लक्ष्य अनुसूचित जाति समुदायों को भारत की विकास यात्रा में पूरी तरह से शामिल होने के लिए सशक्त बनाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
तीन घटकों का समावेशन आदर्श ग्राम, आजीविका और शिक्षा के माध्यम से अनुसूचित जाति के समग्र विकास को सुनिश्चित करता है।
आदर्श ग्राम योजना अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर केंद्रित है।
सहायता-अनुदान घटक कौशल विकास, आय-सृजन और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देता है, जिससे आर्थिक सशक्तिकरण होता है।
छात्रावास घटक अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए शिक्षा तक पहुंच में सुधार करता है, विशेषकर लड़कियों के लिए, जिससे शैक्षिक अंतराल कम होता है।
डिजिटल शासन (पोर्टल/ऐप) पारदर्शिता, प्रभावी निगरानी, निधि की निगरानी और जियो-टैग रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है, जिससे कार्यान्वयन में दक्षता आती है।
सामुदायिक भागीदारी स्थानीय समुदायों को योजना प्रक्रिया में शामिल करता है, जिससे स्वामित्व और स्थिरता बढ़ती है।

महत्व

सामाजिक सशक्तिकरण

  • यह योजना अनुसूचित जाति समुदायों को सामाजिक-आर्थिक असमानताओं से बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे वे समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।
  • शिक्षा और आजीविका के अवसरों में वृद्धि से इन समुदायों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है।

समावेशी विकास

  • आदर्श ग्रामों के माध्यम से बुनियादी सेवाओं और अवसंरचना में सुधार करके, यह योजना सुनिश्चित करती है कि विकास का लाभ समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुंचे।
  • यह भारत के समग्र विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करता है, जहां कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।

आर्थिक उत्थान

  • कौशल विकास और आय-सृजन गतिविधियों के माध्यम से, यह योजना अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है, जिससे उनकी गरीबी कम होती है।
  • स्थायी आजीविका के अवसर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करते हैं।

शैक्षिक उन्नति

  • छात्रावासों के निर्माण से अनुसूचित जाति के छात्रों, विशेषकर लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंच बढ़ती है, जिससे साक्षरता दर और उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ती है।
  • यह शैक्षिक अंतराल को कम करने और एक समान अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण है।

शासन में पारदर्शिता और दक्षता

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
  • जियो-टैगिंग और ऑनलाइन निगरानी से परियोजनाओं की प्रगति का वास्तविक समय पर मूल्यांकन संभव होता है।

चुनौतियाँ

1. निधि का प्रभावी उपयोग

  • आवंटित निधियों का समय पर और उचित उपयोग सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वयन क्षमता में भिन्नता हो सकती है।

2. जमीनी स्तर पर जागरूकता

  • योजना के लाभों और प्रक्रियाओं के बारे में लक्षित लाभार्थियों के बीच पर्याप्त जागरूकता की कमी हो सकती है।
  • समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

3. अवसंरचना का रखरखाव

  • निर्मित अवसंरचना (जैसे छात्रावास, सड़कें) का दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है।
  • स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण आवश्यक है।

4. कौशल विकास और बाजार लिंकेज

  • प्रदान किए गए कौशल प्रशिक्षण को बाजार की मांग के अनुरूप बनाना और प्रशिक्षित व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना।
  • स्थानीय उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित करना।

5. सामाजिक रूढ़िवादिता और भेदभाव

  • योजना के कार्यान्वयन में अभी भी कुछ क्षेत्रों में सामाजिक रूढ़िवादिता और भेदभाव एक बाधा बन सकते हैं।
  • सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन के लिए जागरूकता अभियान आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निधि वितरण में विलंब परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बाधा डालता है और लागत में वृद्धि कर सकता है।
गुणवत्ता नियंत्रण निर्मित अवसंरचना और प्रदान की गई सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप योजना के निष्पक्ष और प्रभावी कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता है।
डेटा की सटीकता और सत्यापन लाभार्थियों और परियोजनाओं से संबंधित डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
अंतर-विभागीय समन्वय विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी कार्यान्वयन को धीमा कर सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय)
  • प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (PMAGY) – पीएम-अजय में समाहित
  • अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (SCA to SCSP) – पीएम-अजय में समाहित
  • बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (BJRY) – पीएम-अजय में समाहित
  • स्टैंड-अप इंडिया योजना
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC)
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
  • दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)

आगे की राह

  • निधि के प्रभावी उपयोग के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षमता निर्माण और समयबद्ध व्यय सुनिश्चित करना।
  • जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियानों को तेज करना और स्थानीय समुदायों को योजना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना।
  • निर्मित अवसंरचना के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना और पर्याप्त निधि आवंटित करना।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों को बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप बनाना और प्रशिक्षित युवाओं के लिए मजबूत बाजार लिंकेज स्थापित करना।
  • सामाजिक रूढ़िवादिता और भेदभाव को दूर करने के लिए व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान चलाना और समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
  • डिजिटल शासन प्लेटफॉर्म को और मजबूत करना, डेटा की सटीकता सुनिश्चित करना और वास्तविक समय पर निगरानी को बढ़ावा देना।
  • अंतर-विभागीय समन्वय को बेहतर बनाने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना ताकि योजनाओं का एकीकृत और कुशल कार्यान्वयन हो सके।
  • योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और आवश्यकतानुसार नीतिगत सुधार करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सामाजिक सशक्तिकरण · समावेशी विकास · अनुसूचित जाति उत्थान · आदर्श ग्राम · बुनियादी ढांचा विकास · आजीविका सृजन · कौशल विकास · शैक्षिक पहुंच · डिजिटल शासन · सामुदायिक भागीदारी · सामाजिक न्याय · नीतिगत हस्तक्षेप

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
  • अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का उन्मूलन।
  • अनुच्छेद 46: राज्य द्वारा अनुसूचित जातियों और जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना।
  • अनुच्छेद 330: लोकसभा में अनुसूचित जातियों के लिए सीटों का आरक्षण।
  • अनुच्छेद 332: राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों के लिए सीटों का आरक्षण।
  • अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का प्रावधान।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989: अत्याचारों से सुरक्षा।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा।

अवधारणा प्रवाह

अनुसूचित जाति समुदायों की सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ  →  पीएम-अजय योजना का शुभारंभ (आदर्श ग्राम, आजीविका, छात्रावास घटक)  →  अनुसूचित जाति बहुल गांवों का चयन और ग्राम विकास योजनाएँ  →  बुनियादी ढांचा विकास, कौशल प्रशिक्षण, शैक्षिक सहायता  →  आदर्श ग्रामों की घोषणा, नागरिकों का सशक्तिकरण  →  समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचा विकास पर केंद्रित है।
2. इसमें बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना को समाहित किया गया है।
3. पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग इसके डिजिटल शासन के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि पीएम-अजय केवल बुनियादी ढांचा विकास पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसमें आजीविका सृजन और शिक्षा तक पहुंच भी शामिल है। कथन 2 सही है, बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना पीएम-अजय में समाहित की गई है। कथन 3 भी सही है, पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन डिजिटल शासन के लिए उपयोग किए जाते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) का नोडल मंत्रालय है?

  1. गृह मंत्रालय
  2. ग्रामीण विकास मंत्रालय
  3. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
  4. जनजातीय कार्य मंत्रालय

उत्तर: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय — प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है, जो अनुसूचित जाति समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए जिम्मेदार है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है? इस योजना के प्रमुख घटकों और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पीएम-अजय की भूमिका पर प्रकाश डालें, जिसमें इसके तीन मुख्य घटकों (आदर्श ग्राम, आजीविका, छात्रावास) के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास में योगदान को विस्तार से समझाएं। दूसरे भाग में, योजना के प्रमुख घटकों का संक्षिप्त विवरण दें। अंत में, कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों जैसे निधि का प्रभावी उपयोग, जागरूकता की कमी, अवसंरचना का रखरखाव, कौशल-बाजार लिंकेज और सामाजिक रूढ़िवादिता पर चर्चा करें। निष्कर्ष में, योजना के महत्व और आगे की राह पर एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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