31 Jul पीएम-किसान योजना को 2026-31 तक बढ़ाने पर कैबिनेट की मंजूरी, 3.15 लाख करोड़ रुपये आवंटित
✎ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना, जो 2019 में शुरू हुई, भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करती है, और इसे 2030-31 तक 3.15 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विस्तारित…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि
- Prelims: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), कृषि आय सहायता, आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन, किसान कल्याण योजनाएँ, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, नीति आयोग का मूल्यांकन
- Essay: भारत में किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ और समाधान, डिजिटल इंडिया और ग्रामीण विकास: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण का प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना, जो 2019 में शुरू हुई, भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करती है, और इसे 2030-31 तक 3.15 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विस्तारित किया गया है, जिससे कृषि निवेश और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस अवधि के लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन स्वीकृत किया गया है, जो किसानों की समृद्धि और राष्ट्र की प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह विस्तार योजना के माध्यम से किसानों को समय पर और पारदर्शी आय सहायता प्रदान करने के सरकार के प्रयासों को मजबूत करेगा।
पृष्ठभूमि
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य देश के सभी भूमिधारक किसान परिवारों को आय सहायता प्रदान करना है।
- इस योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में (प्रत्येक 2,000 रुपये) सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
- यह योजना प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली का उपयोग करती है, जिसमें आधार प्रमाणीकरण और डिजिटल सत्यापन जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिससे पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होती है।
- अब तक, इस योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे करोड़ों किसान लाभान्वित हुए हैं।
- कोविड-19 महामारी के दौरान भी, किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता बनी रही।
- स्वतंत्र मूल्यांकनों, जैसे कि नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा किए गए आकलन, ने योजना के सकारात्मक प्रभावों की पुष्टि की है, जिसमें कृषि गतिविधियों में निवेश और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता में कमी शामिल है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना
- योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को आय सहायता प्रदान करना है ताकि वे कृषि निवेश बढ़ा सकें और अपनी आजीविका को मजबूत कर सकें।
- पात्रता मानदंड में पात्र भूमिधारक किसान परिवार शामिल हैं।
- वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है और लीकेज कम होता है।
- योजना ने कृषि निवेश को बढ़ावा दिया है, जिससे किसानों को बीज, उर्वरक और कृषि मशीनरी जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीद में मदद मिली है।
- PM-KISAN योजना ने महिला किसानों को भी महत्वपूर्ण रूप से सशक्त किया है, जिसमें 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिला लाभार्थियों को प्राप्त हुई है।
- यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अनौपचारिक ऋण पर उनकी निर्भरता को कम करने में सहायक सिद्ध हुई है।
- डिजिटल इंडिया पहल का एक सफल उदाहरण है, जो आधार-आधारित प्रमाणीकरण और डिजिटल लाभार्थी सत्यापन के माध्यम से वित्तीय सहायता का कुशल वितरण सुनिश्चित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना का विस्तार | प्रधानमंत्री-किसान योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी, कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय। |
| प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) | पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। |
| पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी-आधारित मॉडल | आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और मजबूत DBT प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है। |
| महिला किसानों को सशक्तिकरण | योजना के तहत महिला किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है, जो कुल लाभार्थियों का लगभग एक-चौथाई हैं। |
| कृषि निवेश और आय में वृद्धि | किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी में निवेश करने में मदद मिली है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी है और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम हुई है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- किसानों को समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करके कृषि निवेश को बढ़ावा मिलता है, जिससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
- ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम होती है, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है।
- कृषि क्षेत्र में निरंतर निवेश से खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होती है, जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक है।
सामाजिक महत्व
- महिला किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मिलने से उनका सशक्तिकरण होता है और कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ती है।
- किसानों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता में वृद्धि होती है, जिससे वे कृषि संबंधी जोखिमों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होता है।
प्रशासनिक महत्व
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से वित्तीय सहायता का कुशल और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित होता है, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है।
- आधार प्रमाणीकरण और डिजिटल सत्यापन जैसी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके योजना की दक्षता और जवाबदेही बढ़ती है।
- यह योजना डिजिटल इंडिया पहल का एक सफल उदाहरण है, जो सरकारी सेवाओं के वितरण में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देती है।
चुनौतियाँ
1. पात्रता और पहचान
- योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों की सटीक पहचान करना एक चुनौती हो सकती है, विशेषकर उन मामलों में जहां भूमि रिकॉर्ड अद्यतन नहीं हैं।
- कुछ मामलों में, भूमिहीन किसानों या बटाईदारों को योजना का लाभ नहीं मिल पाता है, जिससे वे वित्तीय सहायता से वंचित रह जाते हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. डिजिटल साक्षरता और पहुंच
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या किसानों को योजना का लाभ उठाने में बाधा डाल सकती है।
- बैंक खातों तक पहुंच और उनके संचालन में आने वाली कठिनाइयां भी कुछ किसानों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों का उत्थान
3. कृषि संकट का समाधान
- यह योजना किसानों को आय सहायता प्रदान करती है, लेकिन कृषि क्षेत्र के संरचनात्मक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, बाजार की अस्थिरता और ऋणग्रस्तता का पूरी तरह से समाधान नहीं करती है।
- वित्तीय सहायता की राशि (6,000 रुपये प्रति वर्ष) कुछ किसानों के लिए उनकी कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र
4. योजना का दुरुपयोग
- कुछ मामलों में, अपात्र व्यक्तियों द्वारा योजना का लाभ उठाने की कोशिश की जा सकती है, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को नुकसान हो सकता है।
- योजना के कार्यान्वयन में निगरानी और मूल्यांकन की कमी से दुरुपयोग की संभावना बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि रिकॉर्ड की सटीकता | अद्यतन भूमि रिकॉर्ड की कमी से पात्र किसानों की पहचान में समस्या। |
| डिजिटल डिवाइड | ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की कमी। |
| छोटे और सीमांत किसानों की आवश्यकताएं | वित्तीय सहायता की राशि कुछ किसानों के लिए अपर्याप्त हो सकती है। |
| योजना का दुरुपयोग | अपात्र व्यक्तियों द्वारा लाभ उठाने की संभावना, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को नुकसान। |
| कृषि के संरचनात्मक मुद्दे | योजना केवल आय सहायता है, कृषि के बड़े संरचनात्मक संकटों का समाधान नहीं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना
आगे की राह
- भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और अद्यतनीकरण को प्राथमिकता देना ताकि पात्र किसानों की पहचान अधिक सटीक हो सके।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार करना ताकि किसान आसानी से योजना का लाभ उठा सकें।
- कृषि क्षेत्र के संरचनात्मक मुद्दों जैसे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल बीमा और बाजार पहुंच में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना।
- योजना के तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता की राशि की समय-समय पर समीक्षा करना ताकि यह किसानों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप हो।
- योजना के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत करना ताकि किसी भी दुरुपयोग को रोका जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।
- कृषि विविधीकरण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना ताकि किसानों की आय के स्रोत बढ़ें और वे बाजार की अस्थिरता से कम प्रभावित हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) · किसानों की आय सहायता · कृषि निवेश · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · डिजिटल इंडिया · आधार प्रमाणीकरण · कृषि उत्पादकता · महिला किसान सशक्तिकरण · नीति आयोग मूल्यांकन · आत्मनिर्भर भारत · किसान कल्याण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी → प्रधानमंत्री-किसान योजना का विस्तार → किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता → कृषि निवेश और उत्पादन में वृद्धि → किसानों की आय में सुधार और सशक्तिकरण → ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी।
2. इस योजना के तहत, पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता चार समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
3. कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। पीएम-किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी। कथन 2 गलत है। वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में हस्तांतरित की जाती है, न कि चार। कथन 3 सही है। कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Q2. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
1. किसानों को कृषि निवेश के लिए आय सहायता प्रदान करना।
2. अनौपचारिक ऋण पर किसानों की निर्भरता को कम करना।
3. कृषि क्षेत्र में महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाना।
4. कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — पीएम-किसान योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि निवेश के लिए आय सहायता प्रदान करना, अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम करना और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है। महिला किसानों को लाभ मिलता है, लेकिन ‘भागीदारी बढ़ाना’ सीधे तौर पर योजना का प्राथमिक उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह एक परिणाम है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना ने भारतीय कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया है? प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसान कल्याण सुनिश्चित करने में इसकी प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: पीएम-किसान योजना का संक्षिप्त परिचय, इसकी शुरुआत (फरवरी 2019) और मुख्य उद्देश्य (प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता) का उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. भारतीय कृषि क्षेत्र पर प्रभाव:
– कृषि निवेश में वृद्धि: बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी में समय पर निवेश।
– उत्पादन क्षमता में वृद्धि: नीति आयोग के मूल्यांकन (2020-21 से 2025-26) के अनुसार खाद्यान्न उत्पादन में 21.18% की वृद्धि का उल्लेख।
– अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता में कमी: 85% लाभार्थियों द्वारा पुष्टि।
2. ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
– ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिरता: आय सहायता से क्रय शक्ति में वृद्धि।
– महिला किसानों का सशक्तिकरण: 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ, लगभग एक-चौथाई लाभार्थी महिलाएँ।
– समग्र ग्रामीण विकास: कृषि क्षेत्र की वृद्धि से संबद्ध क्षेत्रों को लाभ।
3. डीबीटी की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण:
– पारदर्शिता और दक्षता: आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और मजबूत डीबीटी प्रणाली।
– जवाबदेही: सीधे बैंक खातों में हस्तांतरण से बिचौलियों का उन्मूलन।
– चुनौतियों का उल्लेख (यदि कोई हो): भूमि अभिलेखों का अद्यतन, अपात्र लाभार्थियों की पहचान, तकनीकी पहुँच की समस्याएँ (संक्षिप्त में)।
निष्कर्ष: योजना की सफलता को रेखांकित करते हुए, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम-किसान योजना को 2031 तक बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये आवंटित - July 31, 2026
- Cabinet Approves PM-KISAN Scheme Extension till 2030-31 with ₹3.15L Cr Outlay - July 31, 2026
- ‘समुद्र मंथन’ योजना: 84,084 करोड़ रुपये की अपतटीय ऊर्जा क्रांति, जानिए UPSC-PCS दृष्टिकोण - July 31, 2026

No Comments