11 Aug पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: एकीकृत अवसंरचना विकास की प्रमुख पहल

✎ पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान अवसंरचना परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन के लिए एक 'समग्र सरकार' दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy) | GS Paper III — अवसंरचना (Infrastructure) | GS Paper II — शासन (Governance)
- Prelims: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG), भू-स्थानिक डेटा, लॉजिस्टिक्स लागत, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, समग्र सरकार दृष्टिकोण
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना की भूमिका, बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान अवसंरचना परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन के लिए एक ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने हाल ही में पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) की प्रगति और प्रभाव पर प्रकाश डाला है। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना एकीकृत और संयोजित अवसंरचना योजना को सक्षम बना रही है, जिससे विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय स्थापित हो रहा है। यह पहल देश में लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा दे रही है।
पृष्ठभूमि
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया था।
- इसका उद्देश्य अवसंरचना परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
- यह एक ‘समग्र सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण पर आधारित है, जो विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को एक साथ लाता है।
- इस योजना का लक्ष्य डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करना है, जिसके लिए भू-स्थानिक डेटा (Geospatial Data) और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जाता है।
- पीएम गतिशक्ति का उद्देश्य लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध और कुशल कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जिसमें सामाजिक बुनियादी ढाँचा भी शामिल है।
- यह योजना एक एकीकृत योजना फ्रेमवर्क प्रदान करती है, जबकि परियोजनाओं का अनुमोदन और कार्यान्वयन संबंधित मंत्रालयों/राज्यों द्वारा उनके अपने बजटीय प्रावधानों के तहत किया जाता है।
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान क्या है?
- यह अवसंरचना परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन के लिए एक परिवर्तनकारी ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण है।
- यह विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाता है ताकि अवसंरचना विकास को सुव्यवस्थित किया जा सके।
- यह भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एपीआई एकीकरण का उपयोग करके अवसंरचना के विकास की निगरानी, योजना और उसे बेहतर बनाने में मदद करता है।
- योजना का मुख्य उद्देश्य परिवहन के विभिन्न साधनों के माध्यम से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध व कुशल कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जिससे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity) में सुधार हो।
- नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) इस फ्रेमवर्क के तहत गठित एक महत्वपूर्ण निकाय है, जो योजना स्तर पर एकीकृत नियोजन, बहु-विधता (Multi-modality) और डेटा-आधारित निर्णय लेने को सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है।
- अब तक, लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली 396 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन NPG तंत्र के माध्यम से किया जा चुका है।
- इस पहल ने लॉजिस्टिक्स दक्षता, टर्न-अराउंड समय (Turn-Around Time), कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) और औद्योगिक विकास में सुधार किया है, साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया है।
- नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के आकलन के अनुसार, भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 7.9% होने का अनुमान है, जो उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बराबर है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समग्र सरकार दृष्टिकोण | विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन के लिए एक साथ लाता है। |
| डेटा-आधारित निर्णय | भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और API एकीकरण का उपयोग करके अवसंरचना विकास की निगरानी, योजना और सुधार में सहायता करता है। |
| एकीकृत योजना फ्रेमवर्क | परियोजनाओं की एकीकृत, समकालिक और समन्वित योजना बनाने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार होता है। |
| नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) | प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है, एकीकृत नियोजन, बहु-विधता और डेटा-आधारित निर्णय सुनिश्चित करता है। |
| कोई अलग बजटीय प्रावधान नहीं | मौजूदा योजनाओं और बजटीय प्रावधानों के तहत परियोजनाओं के अनुमोदन और कार्यान्वयन को सक्षम बनाता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 7.9% तक अनुमानित है, जो उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बराबर है, जिससे व्यापार सुगमता बढ़ती है।
- आर्थिक संवृद्धि में वृद्धि: राष्ट्रीय राजमार्ग विकास में खर्च किया गया प्रत्येक एक रुपया सकल घरेलू उत्पाद में 3.2 रुपये की वृद्धि करता है, जिससे समग्र आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलता है।
- विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता: एकीकृत अवसंरचना से घरेलू विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है, जिससे वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
सामरिक महत्व
- निर्बाध कनेक्टिविटी: परिवहन के विभिन्न साधनों के माध्यम से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध और कुशल कनेक्टिविटी प्रदान करता है, जिससे क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ता है।
- अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी: सामाजिक बुनियादी ढांचे सहित परियोजनाओं की एकीकृत योजना के माध्यम से अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार होता है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित होती है।
- समग्र अवसंरचना विकास: सड़क, रेल, बंदरगाह, जलमार्ग, बिजली, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार और औद्योगिक गलियारे जैसे सभी अवसंरचना क्षेत्रों को शामिल करता है, जिससे संतुलित विकास होता है।
शासनिक महत्व
- बहु-मंत्रालयी समन्वय: विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में दक्षता आती है।
- डेटा-आधारित नीति निर्माण: भू-स्थानिक डेटा और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करता है, जिससे योजना और कार्यान्वयन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म निजी संस्थाओं और आम जनता को डेटा एनालिटिक्स तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी
- बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अक्सर एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें मुआवजे और पुनर्वास से संबंधित मुद्दे शामिल होते हैं।
- परियोजनाओं को पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और विभिन्न नियामक निकायों से मंजूरी प्राप्त करने में देरी का सामना करना पड़ता है, जिससे लागत और समय-सीमा बढ़ जाती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएँ
2. अंतर-राज्यीय समन्वय
- योजना के बावजूद, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच परियोजनाओं के कार्यान्वयन में समन्वय की कमी चुनौतियां पैदा कर सकती है, खासकर जब परियोजनाएं कई राज्यों से गुजरती हों।
- राज्य-विशिष्ट नियमों और प्रक्रियाओं में भिन्नता भी एकीकृत परियोजना कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
3. निगरानी और मूल्यांकन तंत्र
- हालांकि एक निगरानी फ्रेमवर्क मौजूद है, परियोजनाओं की प्रगति और परिणामों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है, खासकर बड़े पैमाने पर।
- परियोजनाओं के वास्तविक प्रभाव का सटीक मूल्यांकन और सुधारात्मक उपाय करना जटिल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. वित्तीय संसाधन और क्षमता निर्माण
- हालांकि पीएम गतिशक्ति का कोई अलग बजटीय प्रावधान नहीं है, परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- परियोजनाओं के प्रभावी नियोजन और कार्यान्वयन के लिए संबंधित मंत्रालयों/विभागों और राज्यों में तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता का निर्माण आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, मानव संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में देरी और जटिलताएँ। |
| पर्यावरणीय मंजूरी | नियामक बाधाओं और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन में लगने वाला समय। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | बहु-राज्यीय परियोजनाओं में राज्यों के बीच सहयोग की कमी। |
| वित्तीय संसाधन | परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर धन की उपलब्धता। |
| क्षमता निर्माण | प्रभावी नियोजन और कार्यान्वयन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National Logistics Policy)
- प्रगति (PRAGATI)
- सागरमाला (Sagarmala)
आगे की राह
- भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी तंत्र विकसित करना।
- अंतर-राज्यीय और अंतर-मंत्रालयी समन्वय को और मजबूत करने के लिए संस्थागत तंत्रों को बढ़ाना।
- परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए डिजिटल उपकरणों और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करना।
- परियोजना प्रबंधन और तकनीकी विशेषज्ञता में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, विशेष रूप से राज्य स्तर पर।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक नीतियां और नियामक ढांचा तैयार करना।
- परियोजनाओं के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन सुनिश्चित करना।
- पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म को और अधिक इंटरैक्टिव और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना, जिससे हितधारकों की भागीदारी बढ़े।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान · एकीकृत अवसंरचना योजना · समग्र सरकार दृष्टिकोण · भू-स्थानिक डेटा · नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) · लॉजिस्टिक्स दक्षता · अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी · आर्थिक संवृद्धि · राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति · बुनियादी ढांचा विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्य सूची में अवसंरचना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
अवधारणा प्रवाह
एकीकृत अवसंरचना योजना की आवश्यकता → पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का शुभारंभ → डेटा-आधारित निर्णय और भू-स्थानिक मैपिंग → बहु-मंत्रालयी समन्वय और NPG का मूल्यांकन → परियोजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन → लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक संवृद्धि में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGSP NMP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया था।
2. इसका उद्देश्य मंत्रालयों/राज्यों को डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद करने के लिए भू-स्थानिक डेटा और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करना है।
3. पीएम गतिशक्ति पहल के तहत विशिष्ट बजटीय प्रावधान और मात्रात्मक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया था और यह भू-स्थानिक डेटा का उपयोग करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि पीएम गतिशक्ति बिना किसी अलग बजटीय प्रावधान के एक एकीकृत योजना फ्रेमवर्क प्रदान करता है और इसके तहत कोई मात्रात्मक लक्ष्य या व्यय आवश्यकताएं निर्धारित नहीं की गई हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. अवसंरचना परियोजनाओं का एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
2. परिवहन के विभिन्न साधनों के माध्यम से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध व कुशल कनेक्टिविटी प्रदान करना।
3. लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और कारोबार सुगमता में सुधार करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उद्देश्य अवसंरचना परियोजनाओं का एकीकृत नियोजन और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है, जो निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करता है, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है और कारोबार सुगमता में सुधार करता है। अतः, सभी तीनों कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGSP NMP) भारत में अवसंरचना विकास के लिए एक ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण कैसे प्रस्तुत करता है? इसके उद्देश्यों और देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGSP NMP) की संक्षिप्त परिभाषा और इसके लॉन्च की तिथि (अक्टूबर 2021) का उल्लेख।
2. ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण: बताएं कि कैसे यह विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाता है, भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और API एकीकरण का उपयोग करता है।
3. मुख्य उद्देश्य: एकीकृत नियोजन, समन्वित क्रियान्वयन, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार, यात्रा समय में कमी, डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता जैसे उद्देश्यों को सूचीबद्ध करें।
4. लॉजिस्टिक्स दक्षता में भूमिका: राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, ‘प्रगति’, ‘सागरमाला’ जैसी अन्य पहलों के साथ इसके तालमेल पर प्रकाश डालें। NCAER के अध्ययन (लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 7.9% अनुमानित) और IIM बैंगलोर के अध्ययन (राष्ट्रीय राजमार्ग विकास में 1 रुपये का निवेश GDP में 3.2 रुपये की वृद्धि करता है) जैसे प्रासंगिक डेटा का उल्लेख करें।
5. आलोचनात्मक परीक्षण/चुनौतियाँ: बिना किसी विशिष्ट बजटीय प्रावधान के इसके कार्यान्वयन की प्रकृति, परियोजना अनुमोदन और कार्यान्वयन में मंत्रालयों/राज्यों की स्वायत्तता, और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बनाए रखने की चुनौती पर चर्चा करें।
6. निष्कर्ष: भारत की आर्थिक संवृद्धि, विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता पर इसके सकारात्मक प्रभावों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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