पीएम सेतु (PM SETU) योजना

पीएम सेतु (PM SETU) योजना

  • मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन – 3 – से संबंधित। 
  • प्रारंभिक परीक्षा के – ‘ कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, विकसित भारत 2047, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs), शिल्पकार प्रशिक्षण योजना, प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT), ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC)’ खण्ड से संबंधित। 

 

खबरों में क्यों ?

 

 

  • हाल ही में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने पीएम सेतु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और मार्गदर्शन के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) का गठन किया है।
  • यह समिति योजना के रणनीतिक दिशा-निर्देश तय करने, प्रगति की निगरानी करने और उद्योग जगत के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होगी। 
  • वर्ष 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को दी गई मंजूरी के बाद, NSC का गठन इसके जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की शुरुआत का प्रतीक है।

 

पीएम सेतु योजना क्या है?

 

  • पीएम सेतु एक महत्वाकांक्षी व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण उन्नयन योजना है। इसका मुख्य लक्ष्य भारत के ‘औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों’ (ITIs) की स्थिति को सुधारकर उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है।
  • बजट : योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपये का विशाल कोष आवंटित किया गया है।
  • दृष्टिकोण : यह ‘सरकारी नेतृत्व वाले प्रशिक्षण’ से हटकर ‘उद्योग नेतृत्व वाले कौशल विकास’ की ओर एक आदर्श बदलाव है।
  • मूल दर्शन : इस योजना के तहत उद्योग केवल लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण विधियों और बुनियादी ढांचे के डिजाइन में सक्रिय भागीदार हैं।

 

योजना की मुख्य विशेषताएँ : 

 

  • पीएम सेतु योजना की संरचना को भारतीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र की आधारभूत और संरचनात्मक कमियों को दूर करने के उद्देश्य से अत्यंत वैज्ञानिक तरीके से डिज़ाइन किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

 

हब-एंड-स्पोक मॉडल (Hub-and-Spoke Model) : 

 

  • इस मॉडल का प्राथमिक उद्देश्य संसाधनों का विकेंद्रीकरण और इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना है। जो निम्नानुसार है – 
  • हब (Hub) : योजना के अंतर्गत देश भर के 200 चयनित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को अत्याधुनिक ‘हब’ के रूप में रूपांतरित किया जाएगा। इन केंद्रों को आधुनिक मशीनरी, उन्नत डिजिटल लैब और उच्च स्तरीय प्रमाणित प्रशिक्षकों से सुसज्जित किया जाएगा।
  • स्पोक (Spoke) : प्रत्येक ‘हब’ संस्थान अपने भौगोलिक परिवेश में स्थित लगभग चार ‘स्पोक’ ITIs के लिए एक मार्गदर्शक (Mentor) के रूप में कार्य करेगा। यह व्यवस्था संसाधनों के साझा उपयोग (Resource Sharing) को बढ़ावा देगी, जिससे दूरदराज के छोटे संस्थानों को भी उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ मिल सकेगा।

 

वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र (Global Centers of Excellence) : 

 

  • भारत को ‘विश्व की कौशल राजधानी’ बनाने की दिशा में पाँच प्रमुख राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs) का चयन किया गया है। भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना स्थित इन केंद्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप उन्नत किया जाएगा। 
  • इनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करना और वैश्विक रोजगार बाजार के लिए कुशल कार्यबल तैयार करना है।

 

विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) शासन मॉडल : 

 

  • प्रशासनिक दक्षता और उद्योग की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक उन्नत ITI का प्रबंधन एक ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ (SPV) के माध्यम से किया जाएगा:
  • स्वामित्व संरचना : इसमें उद्योग भागीदारों की 51% और सरकार की 49% हिस्सेदारी होगी। यह बहुमत उद्योग जगत को देने का उद्देश्य प्रशिक्षण को बाजार की मांग के अनुरूप बनाना है।
  • प्रशासनिक लचीलापन : SPV मॉडल के माध्यम से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और पारंपरिक नौकरशाही की बाधाएं कम होंगी, जिससे संस्थान अपनी आवश्यकताओं के अनुसार त्वरित बदलाव कर सकेंगे।
  • वित्तीय सहायता : सरकार इस मॉडल के तहत उद्योग भागीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास हेतु 83% तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

 

भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रम निर्माण करना और उभरते क्षेत्र : 

 

  • प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) ने उभरती प्रौद्योगिकियों को ध्यान में रखते हुए 31 नए युग के पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। ये पाठ्यक्रम मुख्य रूप से निम्नलिखित उच्च-विकास वाले क्षेत्रों पर केंद्रित हैं – 
  • उन्नत विनिर्माण : उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं को पूरा करना।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर : भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के मिशन में सहायता करना।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EVs) : हरित परिवहन और भविष्य की ऑटोमोबाइल जरूरतों के लिए कार्यबल तैयार करना।
  • लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट : आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता बढ़ाने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना।

 

भारत में पीएम सेतु योजना के कार्यान्वयन की मुख्य चुनौतियाँ : 

 

  • इतनी व्यापक और महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन के मार्ग में कई गंभीर चुनौतियाँ और बाधाएँ भी विद्यमान हैं। जो निम्नलिखित है – 
  • उद्योग-अकादमिक तालमेल का अभाव : भारत में पारंपरिक रूप से शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक जगत के बीच समन्वय की कमी रही है। कई निजी उद्योगों को अभी भी सरकारी ITIs के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी करने में संकोच होता है, क्योंकि उन्हें निवेश की सुरक्षा और परिणामों की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं।
  • बुनियादी ढांचे का भौगोलिक असंतुलन : शहरी केंद्रों में बुनियादी ढांचा विकसित करना अपेक्षाकृत सरल है, किंतु ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित ITIs में निरंतर बिजली आपूर्ति, उच्च गति इंटरनेट और आधुनिक परिष्कृत मशीनों के रखरखाव को सुनिश्चित करना एक बहुत बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।
  • प्रशिक्षकों की तकनीकी दक्षता का अभाव : योजना की सफलता सीधे तौर पर प्रशिक्षकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। वर्तमान में अधिकांश ITI प्रशिक्षकों के पास आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और रोबोटिक्स का वास्तविक व्यावहारिक अनुभव नहीं है। उन्हें वैश्विक स्तर के मानकों पर फिर से प्रशिक्षित करना एक समय लेने वाली प्रक्रिया है।
  • व्यावसायिक शिक्षा के प्रति सामाजिक धारणा : भारतीय समाज में आज भी व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की अकादमिक डिग्री की तुलना में कमतर माना जाता है। ‘डिग्री बनाम कौशल’ की इस सामाजिक मानसिकता के कारण मेधावी छात्र ITI की तुलना में सामान्य कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं, जो इस योजना के सफल नामांकन में एक बाधा है।
  • विशाल कोष का कुशल प्रबंधन : योजना के लिए आवंटित 60,000 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि का पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और परिणाम-उन्मुख आवंटन सुनिश्चित करना एक जटिल प्रशासनिक कार्य है। फंड के उपयोग की निगरानी और समयबद्ध परिणामों की प्राप्ति के लिए एक कठोर निगरानी तंत्र की आवश्यकता होगी।

 

महत्वपूर्ण सारांश तालिका :

 

विशेषता विवरण
कुल बजट ₹60,000 करोड़
मॉडल हब-एंड-स्पोक (200 हब ITIs)
प्रबंधन SPV (51% उद्योग : 49% सरकार)
मुख्य लक्ष्य रोजगार क्षमता में वृद्धि और ITI का आधुनिकीकरण

 

विद्यमान चुनौतियों का समाधान कैसे किया जा सकता है ?

 

  • इन चुनौतियों से निपटने के लिए निम्नलिखित रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं:
  • प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (ToT) : प्रशिक्षकों को उद्योग में ‘इंटर्नशिप’ के लिए भेजना चाहिए ताकि वे वास्तविक दुनिया की तकनीकों को सीख सकें।
  • प्रोत्साहन योजनाएँ : जो उद्योग SPV में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, उन्हें कर छूट या ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में वरीयता दी जानी चाहिए।
  • डिजिटल एकीकरण : सभी ‘स्पोक’ संस्थानों को वर्चुअल रियलिटी (VR) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) के माध्यम से ‘हब’ की सुविधाओं से जोड़ा जाना चाहिए।
  • नियमित ऑडिट : SPVs के प्रदर्शन का तिमाही आधार पर स्वतंत्र ऑडिट किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

 

आगे की राह : 

 

 

  • योजना की सफलता के लिए भविष्य में इन कदमों पर ध्यान देना आवश्यक है:
  • पाठ्यक्रमों का स्थानीयकरण करना : पाठ्यक्रमों को स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुसार अनुकूलित किया जाना चाहिए। (जैसे- ऑटोमोबाइल क्लस्टर में ईवी पर जोर)।
  • छात्रों के लिए कौशल ऋण से संबंधित आसान ऋण प्रक्रिया को सुनिश्चित करना : छात्रों के लिए आसान ऋण प्रक्रिया सुनिश्चित करना ताकि वे महंगे आधुनिक पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकें।
  • वैश्विक स्तर पर मान्य अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन को सुनिश्चित करना : यह सुनिश्चित करना कि पीएम सेतु के तहत मिलने वाला प्रमाण पत्र वैश्विक स्तर पर मान्य हो, जिससे भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के द्वार खुल सकें।
  • निजी निवेश को बढ़ावा देना : एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स (AIPs) को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखकर उन्हें प्लेसमेंट की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए।

 

निष्कर्ष : 

 

  • पीएम सेतु योजना केवल एक नवीनीकरण योजना नहीं है, बल्कि यह भारत को ‘दुनिया की कौशल राजधानी’ बनाने की दिशा में एक रणनीतिक निवेश है। हब – एंड – स्पोक मॉडल और उद्योग-नेतृत्व वाली शासन प्रणाली (SPV) के माध्यम से, यह योजना शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने की क्षमता रखती है। यदि इसका क्रियान्वयन सही दिशा में होता है, तो यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में आधारशिला साबित होगी।

 

स्रोत – पी. आई. बी एवं द इकॉनोमिक टाइम्स।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. पीएम सेतु योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) का गठन किया गया है जो रणनीतिक दिशा-निर्देश तय करेगी।
  2. इस योजना के तहत प्रत्येक उन्नत ITI का प्रबंधन ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ (SPV) द्वारा किया जाएगा, जिसमें सरकार की 51% और उद्योग भागीदारों की 49% हिस्सेदारी होगी।
  3. हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत 200 चयनित ITIs को ‘हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अपने आसपास के ‘स्पोक’ संस्थानों का मार्गदर्शन करेंगे।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? 

A. केवल कथन 1 और 2 

B. केवल कथन 2 और 3 

C. केवल कथन 1 और 3 

D. कथन 1, 2 और 3 सभी। 

  • उत्तर : C. केवल 1 और 3 
  • व्याख्या : कथन 2 गलत है क्योंकि ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ (SPV) मॉडल में उद्योग भागीदारों की हिस्सेदारी 51% और सरकार की हिस्सेदारी 49% रखी गई है, ताकि उद्योग जगत का नेतृत्व बना रहे। अतः विकल्प C सही उत्तर है।

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. पीएम सेतु योजना के मुख्य उद्देश्यों और इसकी अनूठी कार्यान्वयन संरचना पर प्रकाश डालते हुए चर्चा कीजिए कि यह योजना भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में कितनी सहायक सिद्ध होगी? इसके सफल क्रियान्वयन के मार्ग में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उसके समाधान के उपायों का भी उल्लेख कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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