07 Aug फार्मास्युटिकल पीएलआई योजना: 6,659 करोड़ रुपये का वितरण, जानिए पूरा लेखा-जोखा

✎ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात निर्भरता कम करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, विशेषकर फार्मास्युटिकल सेक्टर में।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति, निवेश मॉडल
- Prelims: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI), फार्मास्युटिकल सेक्टर, थोक दवाएं, चिकित्सा उपकरण, आत्मनिर्भर भारत, विनिर्माण प्रोत्साहन
- Essay: भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में सरकारी नीतियों की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात निर्भरता कम करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, विशेषकर फार्मास्युटिकल सेक्टर में।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी। उन्होंने मार्च 2026 तक इस योजना के तहत वितरित प्रोत्साहन राशि का विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें दवाओं, थोक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजनाओं के तहत हुई प्रगति और थोक दवाओं के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं पर प्रकाश डाला गया।
पृष्ठभूमि
- भारत विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है और ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में जाना जाता है। हालांकि, देश अभी भी कुछ महत्वपूर्ण थोक दवाओं (Active Pharmaceutical Ingredients – APIs) और चिकित्सा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर करता है।
- इस आयात निर्भरता को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें फार्मास्युटिकल सेक्टर भी शामिल है।
- कोविड-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता को उजागर किया, जिससे भारत में घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो गई।
- फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए PLI योजना का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाना है।
- थोक दवाओं के लिए PLI योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण थोक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे देश की आयात निर्भरता कम हो सके।
- चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना का उद्देश्य भारत में चिकित्सा उपकरण विनिर्माण को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात बिलों को कम करना है।
- यह योजना उन कंपनियों को प्रोत्साहन प्रदान करती है जो भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री से लाभ कमाती हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अभिन्न अंग बनाना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
- थोक दवाओं के लिए PLI योजना का कुल परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण थोक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
- योजना के तहत प्रोत्साहन राशि परियोजनाओं में निर्मित उत्पादों की बिक्री के आधार पर जारी की जाती है, जो उत्पादन और बिक्री के बीच सीधा संबंध स्थापित करती है।
- थोक दवाओं के कार्यान्वयन में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, उच्च उपयोगिता लागत और किण्वन आधारित औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा है।
- किण्वन (Fermentation) एक जैविक प्रक्रिया है जो जीवित कोशिकाओं की गतिविधि पर निर्भर करती है, जिसकी वृद्धि दर धीमी होती है, जिससे परियोजनाओं के आरंभ होने में देरी होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) | घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल। |
| वित्तीय परिव्यय | दवा क्षेत्र के लिए कुल 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| योजना का आरंभ | वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू हुई, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल हब बनाना है। |
| प्रोत्साहन राशि का वितरण | मार्च 2026 तक 6,659 करोड़ रुपये की राशि वितरित, जो योजना की प्रगति को इंगित करती है। |
| थोक दवाओं के लिए PLI | महत्वपूर्ण सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित। |
| चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI | चिकित्सा उपकरण विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देने का लक्ष्य। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि करती है।
- निर्यात को बढ़ावा देकर व्यापार संतुलन में सुधार और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि में सहायक है।
- फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश आकर्षित करती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलती है।
सामरिक महत्व
- महत्वपूर्ण दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम करके देश की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाती है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों के प्रति देश की भेद्यता को कम करती है, विशेषकर स्वास्थ्य आपात स्थितियों में।
- भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करती है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में योगदान मिलता है।
सामाजिक महत्व
- गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करके सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करती है।
- फार्मास्युटिकल और संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करती है।
- अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देकर नवाचार और नई दवा खोजों को प्रोत्साहित करती है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण में देरी
- परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि प्राप्त करने में लगने वाला लंबा समय कार्यान्वयन में बाधा डालता है।
- यह परियोजना की समय-सीमा और लागत को प्रभावित करता है, जिससे निवेशकों का उत्साह कम हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक नीतियां
2. पर्यावरण मंजूरी में विलंब
- विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां प्राप्त करने में अत्यधिक समय लगता है।
- यह नियामक बाधाएं परियोजनाओं को शुरू होने से रोकती हैं और निधि वितरण को प्रभावित करती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण
3. उच्च उपयोगिता लागत
- बिजली, पानी और अन्य आवश्यक उपयोगिताओं की उच्च लागत विनिर्माण को महंगा बनाती है।
- यह भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करता है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, औद्योगिक नीति
4. किण्वन आधारित औषधियों की लंबी निर्माण अवधि
- किण्वन (Fermentation) एक जैविक प्रक्रिया है जो रासायनिक संश्लेषण की तुलना में धीमी होती है।
- इससे थोक औषधियों के उत्पादन में अधिक समय लगता है, जिससे परियोजनाएं शुरू होने में देरी होती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी
5. प्रोत्साहन राशि वितरण का आधार
- प्रोत्साहन राशि उत्पादों की बिक्री के आधार पर जारी की जाती है, जिससे परियोजनाओं में देरी होने पर वितरण प्रभावित होता है।
- यह शुरुआती चरण में कंपनियों के लिए नकदी प्रवाह (Cash Flow) की चुनौती पैदा कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, औद्योगिक प्रोत्साहन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और लागत में वृद्धि। |
| पर्यावरण मंजूरी | नियामक बाधाएं और परियोजना शुरू होने में अनावश्यक विलंब। |
| उच्च उपयोगिता लागत | विनिर्माण लागत में वृद्धि और उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव। |
| किण्वन आधारित उत्पादन | लंबी निर्माण अवधि के कारण उत्पादन और प्रोत्साहन वितरण में देरी। |
| प्रोत्साहन वितरण का तरीका | बिक्री आधारित वितरण से शुरुआती नकदी प्रवाह की समस्या और परियोजना में देरी का प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) – फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) – थोक दवाओं के लिए
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) – चिकित्सा उपकरणों के लिए
आगे की राह
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और तेज करना, एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली (Single Window Clearance System) को प्रभावी बनाना।
- पर्यावरण मंजूरी प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बनाना और समयबद्ध तरीके से निर्णय सुनिश्चित करना।
- विनिर्माण इकाइयों के लिए बिजली और पानी जैसी उपयोगिताओं की लागत को कम करने हेतु विशेष नीतियां बनाना।
- किण्वन आधारित उत्पादन प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना तथा नई तकनीकों को अपनाना।
- प्रोत्साहन वितरण प्रणाली में लचीलापन लाना, जैसे कि शुरुआती चरण में कुछ अग्रिम प्रोत्साहन या मील के पत्थर आधारित वितरण।
- घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और अनुकूल नियामक वातावरण प्रदान करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) · फार्मास्युटिकल क्षेत्र · थोक दवाएँ · आत्मनिर्भर भारत · विनिर्माण प्रोत्साहन · आयात प्रतिस्थापन · किण्वन आधारित औषधियाँ · पर्यावरण मंजूरी · भूमि अधिग्रहण · आर्थिक संवृद्धि
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(b)’, ‘note’: ‘सामुदायिक भौतिक संसाधनों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करना’}
अवधारणा प्रवाह
PLI योजना का आरंभ → घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन → उत्पादन में वृद्धि → बिक्री में वृद्धि → प्रोत्साहन राशि का वितरण → आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी।
2. थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत, किण्वन आधारित औषधियों के निर्माण में लंबी अवधि एक बाधा रही है।
3. चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना में कंपोनेंट-लिंक्ड इंसेंटिव (Component-Linked Incentive) को शामिल करने का प्रस्ताव है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी। कथन 2 भी सही है क्योंकि थोक दवाओं के लिए PLI परियोजनाओं में किण्वन आधारित औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। कथन 3 गलत है क्योंकि चिकित्सा उपकरणों के PLI में कंपोनेंट-लिंक्ड इंसेंटिव और PLI दोनों को शामिल करने संबंधी सुधार की कोई योजना नहीं है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न कर रहा/रहे है/हैं?
1. भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय
2. पर्यावरण मंजूरी
3. उच्च उपयोगिता लागत
4. रासायनिक संश्लेषण पर अत्यधिक निर्भरता
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय, पर्यावरण मंजूरी और उच्च उपयोगिता लागत थोक दवाओं के लिए PLI योजना के कार्यान्वयन में बाधाएँ हैं। रासायनिक संश्लेषण पर अत्यधिक निर्भरता एक बाधा नहीं है, बल्कि किण्वन आधारित औषधियों की धीमी निर्माण अवधि एक बाधा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के उद्देश्यों और अब तक की प्रगति का समालोचनात्मक परीक्षण करें। इसके कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख बाधाओं पर भी प्रकाश डालें। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: PLI योजना का संक्षिप्त परिचय और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में इसके महत्व का उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. योजना के उद्देश्य: आत्मनिर्भरता, विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, आयात निर्भरता कम करना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत करना, उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन।
2. अब तक की प्रगति: वित्तीय परिव्यय, वितरित प्रोत्साहन राशि (दवाओं, थोक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए मार्च 2026 तक के आंकड़े), योजना के तहत हुए निवेश और उत्पादन में वृद्धि का सामान्य उल्लेख।
3. कार्यान्वयन में बाधाएँ: भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय, पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करने में देरी, उच्च उपयोगिता लागत, किण्वन आधारित औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि, जैविक प्रक्रियाओं की धीमी गति, निधि वितरण का उत्पादन से जुड़ा होना।
4. समालोचनात्मक विश्लेषण: उद्देश्यों की प्राप्ति में चुनौतियों, धीमी प्रगति के कारण, और इन बाधाओं के दीर्घकालिक प्रभावों पर चर्चा।
निष्कर्ष: इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए संभावित उपाय और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में PLI योजना के भविष्य की संभावनाओं पर संतुलित दृष्टिकोण।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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