बीआरआईसीएस देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर टैक्स का किया विरोध

BRICS Environment Ministers oppose European Union’s Carbon Border Tax — diagram

बीआरआईसीएस देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर टैक्स का किया विरोध

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CBAM vs BRICS Response

✎ BRICS देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का विरोध किया है, इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताते हुए, और विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त बढ़ाने का आग्रह किया है, विशेषकर अनुकूलन के लिए।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
  • Prelims: BRICS, कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM), जलवायु वित्त, सामान्य किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC), COP30, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों पर इसका प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में संरक्षणवाद और इसके निहितार्थ

त्वरित पुनरावृत्ति: BRICS देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का विरोध किया है, इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताते हुए, और विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त बढ़ाने का आग्रह किया है, विशेषकर अनुकूलन के लिए।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, BRICS देशों के पर्यावरण मंत्रियों ने यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपाय बताया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। BRICS देशों ने विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त (Climate Finance) को तत्काल बढ़ाने का भी आग्रह किया है, विशेषकर जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) के लिए।

पृष्ठभूमि

  • BRICS पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, मिस्र और इथियोपिया के पर्यावरण मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
  • यूरोपीय संघ का CBAM 1 अक्टूबर, 2023 को रिपोर्टिंग-मात्र चरण के साथ शुरू हुआ और 1 जनवरी, 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो गया। इसके तहत आयातकों को अपने माल में निहित कार्बन उत्सर्जन से जुड़े CBAM प्रमाणपत्र खरीदने और जमा करने होंगे।
  • BRICS देशों ने चिंता व्यक्त की कि CBAM जैसे उपाय जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने, अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और लचीलापन विकसित करने के विकासशील देशों के प्रयासों को कमजोर करते हैं।
  • संयुक्त घोषणापत्र में ‘सामान्य किंतु विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं’ (Common But Differentiated Responsibilities और Respective Capabilities – CBDR-RC) के सिद्धांत का आह्वान किया गया, जो इस बात पर जोर देता है कि सभी सहयोग प्रतिबद्धताएँ स्वैच्छिक और प्रत्येक देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए।
  • BRICS देशों ने COP30 में पहुँचे नए सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (New Collective Quantified Goal – NCQG) को पूरा करने के लिए धनी राष्ट्रों से आग्रह किया है।
  • भारत ने 13वीं BRICS बैठक की मेजबानी चीन को सौंप दी है, जो 2027 में इसकी अगुवाई करेगा।

कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) क्या है?

  • कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ द्वारा आयातित कार्बन-गहन वस्तुओं, जैसे स्टील, लोहा, उर्वरक, एल्यूमीनियम और सीमेंट पर लगाया जाने वाला एक आयात शुल्क है।
  • इसका उद्देश्य आयातित वस्तुओं के कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को कम करना है, जिससे यूरोपीय संघ के भीतर उत्पादन करने वाले उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान न हो, क्योंकि वे कड़े कार्बन उत्सर्जन नियमों का पालन करते हैं।
  • CBAM के तहत, यूरोपीय संघ में आयात करने वाले व्यवसायों को उन वस्तुओं के उत्पादन में उत्सर्जित कार्बन की मात्रा के बराबर ‘CBAM प्रमाणपत्र’ खरीदने होंगे।
  • यह तंत्र यूरोपीय संघ के ‘फिट फॉर 55’ पैकेज का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1990 के स्तर से कम से कम 55 प्रतिशत तक कम करना है।
  • विकासशील देश इसे एक व्यापार बाधा और संरक्षणवादी उपाय के रूप में देखते हैं, जो उनकी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करेगा और उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों और जलवायु परिवर्तन पर बहुपक्षीय समझौतों के सिद्धांतों, विशेषकर CBDR-RC के उल्लंघन के रूप में भी देखा जा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ (EU) द्वारा आयातित कार्बन-सघन वस्तुओं पर लगाया गया शुल्क, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
BRICS देशों का विरोध BRICS देशों ने CBAM को ‘एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी’ उपाय बताया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है।
जलवायु वित्त की मांग BRICS देशों ने विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त, विशेषकर जलवायु अनुकूलन (climate adaptation) के लिए, बढ़ाने का आग्रह किया।
COP 30 का नया सामूहिक परिमाणीकृत लक्ष्य (NCQG) विकसित देशों से 2035 तक विकासशील देशों के लिए अनुकूलन वित्त को तीन गुना करने का आग्रह किया गया।
साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं (CBDR-RC) यह सिद्धांत जलवायु परिवर्तन से निपटने में देशों की अलग-अलग जिम्मेदारियों और क्षमताओं को रेखांकित करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • CBAM जैसे उपाय विकासशील देशों के निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • यह व्यापार बाधाओं को बढ़ा सकता है और वैश्विक व्यापार प्रवाह को बाधित कर सकता है, विशेषकर कार्बन-सघन उद्योगों में।

सामरिक महत्व

  • BRICS देशों का एकजुट विरोध वैश्विक जलवायु शासन में विकासशील देशों की सामूहिक आवाज को मजबूत करता है।
  • यह विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु परिवर्तन के बोझ और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर चल रही बहस को उजागर करता है।

पर्यावरण महत्व

  • CBAM का उद्देश्य कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है, लेकिन विकासशील देशों का तर्क है कि यह उनके जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को कमजोर करता है।
  • जलवायु वित्त की कमी विकासशील देशों को अनुकूलन और शमन (mitigation) उपायों को लागू करने से रोकती है, जिससे वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा आती है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • यह घटना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और पर्यावरण नीतियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
  • BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को मजबूत करती है, जो वैश्विक मुद्दों पर विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

चुनौतियाँ

1. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का प्रभाव

  • CBAM विकासशील देशों के निर्यात पर अतिरिक्त लागत लगाता है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम होती है।
  • यह इस्पात, लोहा, उर्वरक, एल्यूमीनियम और सीमेंट जैसे कार्बन-सघन उद्योगों को विशेष रूप से प्रभावित करेगा।

2. जलवायु वित्त की कमी

  • विकसित देशों द्वारा जलवायु वित्त के वादे पूरे न करने से विकासशील देशों में जलवायु अनुकूलन और शमन परियोजनाओं में बाधा आती है।
  • यह जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने की विकासशील देशों की क्षमता को सीमित करता है।

3. साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां (CBDR) सिद्धांत का क्षरण

  • CBAM जैसे एकतरफा उपाय CBDR-RC सिद्धांत को कमजोर करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के ऐतिहासिक योगदान और क्षमता के आधार पर जिम्मेदारियों को बांटता है।
  • यह विकसित और विकासशील देशों के बीच विश्वास की कमी को बढ़ा सकता है।

4. व्यापार बाधाएं और संरक्षणवाद

  • विकासशील देश CBAM को एक व्यापार बाधा और संरक्षणवादी उपाय के रूप में देखते हैं, जो मुक्त व्यापार के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
  • यह वैश्विक व्यापार प्रणाली में तनाव पैदा कर सकता है और संभावित रूप से जवाबी उपायों को जन्म दे सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
CBAM का क्रियान्वयन विकासशील देशों के उद्योगों पर वित्तीय बोझ और प्रतिस्पर्धात्मकता का नुकसान।
जलवायु वित्त का अपर्याप्त प्रवाह विकासशील देशों की जलवायु अनुकूलन और शमन क्षमता में कमी।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियम CBAM का WTO नियमों के साथ संभावित टकराव और व्यापार विवादों का जोखिम।
वैश्विक जलवायु सहयोग एकतरफा उपायों से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विश्वास में कमी।
विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व वैश्विक जलवायु नीतियों के निर्माण में विकासशील देशों की चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित न करना।

आगे की राह

  • विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु वित्त के वितरण और उपयोग पर एक स्पष्ट और पारदर्शी तंत्र स्थापित करना।
  • CBAM जैसे व्यापार-संबंधित जलवायु उपायों पर अंतर्राष्ट्रीय सहमति और सहयोग को बढ़ावा देना, ताकि वे व्यापार बाधा न बनें।
  • साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं (CBDR-RC) के सिद्धांत को बनाए रखना और जलवायु कार्रवाई में ऐतिहासिक योगदान को पहचानना।
  • विकासशील देशों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तक पहुंच और हस्तांतरण में सहायता प्रदान करना ताकि वे अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम कर सकें।
  • बहुपक्षीय मंचों, जैसे BRICS और G20, का उपयोग करके वैश्विक जलवायु शासन में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना।
  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन के लिए वित्तपोषण को प्राथमिकता देना और इसे विकासशील देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों और जलवायु नीतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कार्बन सीमा समायोजन तंत्र · BRICS · जलवायु वित्त · सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधाएँ · जलवायु अनुकूलन · विकसित बनाम विकासशील देश · संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन · हरित अर्थव्यवस्था · वैश्विक जलवायु शासन

अवधारणा प्रवाह

यूरोपीय संघ द्वारा कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का कार्यान्वयन।  →  CBAM को विकासशील देशों द्वारा व्यापार बाधा और संरक्षणवादी उपाय के रूप में देखा जाना।  →  BRICS पर्यावरण मंत्रियों द्वारा CBAM का विरोध और जलवायु वित्त की मांग।  →  साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां (CBDR-RC) सिद्धांत पर जोर।  →  वैश्विक जलवायु शासन और व्यापार संबंधों पर प्रभाव।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ द्वारा आयातित कार्बन-सघन वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक शुल्क है।
2. BRICS देशों ने CBAM का समर्थन किया है क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करता है।
3. CBAM का उद्देश्य आयातित वस्तुओं के कार्बन पदचिह्न को कम करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CBAM यूरोपीय संघ द्वारा आयातित कार्बन-सघन वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक शुल्क है। कथन 2 गलत है। BRICS देशों ने CBAM का विरोध किया है, इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण उपाय बताया है। कथन 3 सही है। CBAM का उद्देश्य आयातित वस्तुओं के कार्बन पदचिह्न को कम करना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत ‘सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ’ (CBDR-RC) को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?

  1. A. सभी देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए समान रूप से जिम्मेदार होना चाहिए, चाहे उनकी ऐतिहासिक भूमिका कुछ भी हो।
  2. B. विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की तुलना में अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए, उनकी ऐतिहासिक भूमिका और क्षमता को देखते हुए।
  3. C. विकासशील देशों को विकसित देशों की तुलना में जलवायु परिवर्तन से निपटने में अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
  4. D. जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी केवल उन देशों पर है जो वर्तमान में सबसे अधिक उत्सर्जन करते हैं।
  5. E. इनमें से कोई नहीं

उत्तर: B. विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की तुलना में अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए, उनकी ऐतिहासिक भूमिका और क्षमता को देखते हुए। — सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ (CBDR-RC) सिद्धांत यह स्वीकार करता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, लेकिन विकसित देशों की ऐतिहासिक उत्सर्जन और वित्तीय तथा तकनीकी क्षमताओं के कारण उनकी जिम्मेदारी अधिक है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के उद्देश्यों की व्याख्या करें। BRICS देशों द्वारा इसके विरोध के पीछे के प्रमुख तर्कों का समालोचनात्मक परीक्षण करें और वैश्विक जलवायु शासन पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में CBAM के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए, जैसे कि कार्बन रिसाव को रोकना और आयातित वस्तुओं के कार्बन पदचिह्न को कम करना। इसके बाद, BRICS देशों द्वारा व्यक्त की गई आपत्तियों का विस्तार से विश्लेषण करना चाहिए, जिसमें इसे एकतरफा, भेदभावपूर्ण और व्यापार बाधा के रूप में देखना शामिल है। ‘सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ’ (CBDR-RC) के सिद्धांत के उल्लंघन पर भी प्रकाश डालना चाहिए। अंत में, वैश्विक जलवायु शासन, विशेष रूप से जलवायु वित्त और विकसित तथा विकासशील देशों के बीच सहयोग पर CBAM के संभावित नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करनी चाहिए।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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