06 Aug बीआरआईसीएस शिक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक: ओडिशा में प्रमुख मुद्दों पर चर्चा
✎ ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक ने सदस्य देशों के बीच प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, कौशल विकास, अनुसंधान और योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — सामाजिक न्याय (शिक्षा)
- Prelims: ब्रिक्स, ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE), कौशल विकास, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, शैक्षणिक नेतृत्व, पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ
- Essay: बहुपक्षीय मंचों में भारत की भूमिका और वैश्विक शिक्षा में सहयोग, 21वीं सदी में समावेशी और लचीली शिक्षा प्रणालियों का निर्माण
त्वरित पुनरावृत्ति: ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक ने सदस्य देशों के बीच प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, कौशल विकास, अनुसंधान और योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, 13वीं ब्रिक्स (BRICS) शिक्षा मंत्रियों की बैठक ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भाग लिया। इस बैठक में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE), कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता और शैक्षणिक नेतृत्व जैसे प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (2026) के तहत आयोजित इस बैठक ने सदस्य देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।
पृष्ठभूमि
- ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक (BRICS Education Track) सदस्य देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
- बैठक से पहले, भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी, जिसमें शिक्षा मंत्रियों की घोषणा के मसौदे पर चर्चा की गई।
- इन बैठकों का उद्देश्य समावेशी, लचीली और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।
ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक और प्रमुख प्राथमिकताएँ
- ब्रिक्स शिक्षा ट्रैक ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
- यह मंच सदस्य देशों को शिक्षा नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करता है।
- बैठक में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) पर विशेष जोर दिया गया, जो बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- कौशल विकास (Skill Development) और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET) को बढ़ावा देना भी एक प्रमुख प्राथमिकता है, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जा सके।
- सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार (Collaborative Research and Innovation) को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे सदस्य देशों के बीच ज्ञान सृजन और साझाकरण को बढ़ावा मिल सके।
- योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) का उद्देश्य सदस्य देशों के छात्रों और पेशेवरों के लिए गतिशीलता और अवसरों को बढ़ाना है।
- शैक्षणिक नेतृत्व (Academic Leadership) के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि शिक्षा संस्थानों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके।
- पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों (Traditional and Indigenous Knowledge Systems) के ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांतों को भी चर्चा में शामिल किया गया, जो सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) | बच्चों के समग्र विकास और भविष्य की सीखने की नींव के लिए महत्वपूर्ण। |
| कौशल विकास (Skill Development) | युवाओं को रोजगार योग्य बनाने और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक। |
| अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation) | वैज्ञानिक प्रगति, तकनीकी विकास और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण। |
| योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) | BRICS देशों के बीच छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाता है। |
| शैक्षणिक नेतृत्व (Academic Leadership) | शिक्षा प्रणालियों को मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नेतृत्व क्षमता विकसित करना। |
| पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ (Traditional and Indigenous Knowledge Systems) | सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सतत विकास के लिए उनका उपयोग। |
महत्व
शैक्षणिक सहयोग
- BRICS देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) से लेकर उच्च शिक्षा तक के विभिन्न पहलू शामिल हैं।
- योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता से छात्रों और पेशेवरों के लिए BRICS देशों में अध्ययन और कार्य करने के अवसर बढ़ते हैं।
आर्थिक और सामाजिक विकास
- कौशल विकास और अनुसंधान एवं नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने से सदस्य देशों की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
- समावेशी और लचीली शिक्षा प्रणालियों के विकास से सामाजिक समानता और मानव पूंजी का निर्माण होता है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण है, जो वैश्विक शिक्षा एजेंडे को आकार देने में मदद करता है।
- यह बैठक भारत को BRICS की अध्यक्षता के तहत अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने का अवसर प्रदान करती है।
चुनौतियाँ
1. शैक्षणिक असमानताएँ
- BRICS देशों के भीतर और उनके बीच शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच में महत्वपूर्ण असमानताएँ मौजूद हैं।
- डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) और ग्रामीण-शहरी अंतर शिक्षा तक पहुँच को प्रभावित करते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
2. योग्यताओं का मानकीकरण
- विभिन्न देशों की शिक्षा प्रणालियों और मूल्यांकन मानकों में अंतर के कारण योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता एक जटिल प्रक्रिया है।
- एक साझा ढाँचा विकसित करना जिसमें सभी सदस्य देश सहमत हों, एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: बहुपक्षीय संस्थाएँ
3. फंडिंग और संसाधन
- शिक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करना, विशेषकर अनुसंधान और नवाचार के लिए, एक बड़ी चुनौती है।
- बुनियादी ढाँचे, प्रौद्योगिकी और योग्य शिक्षकों की कमी कई देशों में एक बाधा है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: मानव संसाधन विकास
4. तकनीकी एकीकरण
- शिक्षा में प्रौद्योगिकी के प्रभावी एकीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे, डिजिटल साक्षरता और शिक्षकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
- साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ भी महत्वपूर्ण हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी: शिक्षा में प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच | ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव। |
| शिक्षक प्रशिक्षण और विकास | आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और प्रौद्योगिकी के लिए शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण। |
| पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता | उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम को अद्यतन करने की आवश्यकता। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में बाधाएँ | भाषा, सांस्कृतिक और नियामक अंतर सहयोग को सीमित कर सकते हैं। |
| अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रोत्साहन | पर्याप्त फंडिंग और एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) 2020
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana)
आगे की राह
- BRICS देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों का नियमित आदान-प्रदान किया जाए।
- योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए एक पारदर्शी और मानकीकृत ढाँचा विकसित किया जाए।
- प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) में निवेश बढ़ाया जाए और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए और आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा दिया जाए।
- अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त परियोजनाओं और फंडिंग तंत्रों को मजबूत किया जाए।
- डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया जाए और शिक्षकों को प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाए।
- पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को पाठ्यक्रम में एकीकृत करने के तरीकों का पता लगाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
BRICS · शिक्षा सहयोग · प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा · कौशल विकास · अनुसंधान और नवाचार · योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता · शैक्षणिक नेतृत्व · पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ · समावेशी शिक्षा · सतत विकास लक्ष्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 45’, ‘note’: ‘बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक → प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श (ECCE, कौशल विकास, अनुसंधान) → BRICS शिक्षा मंत्रियों की घोषणा का मसौदा → सदस्य देशों के बीच सहयोग और आम सहमति → समावेशी और लचीली शिक्षा प्रणालियों का विकास → आर्थिक संवृद्धि और मानव पूंजी निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह बैठक ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी।
2. इस बैठक में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) तथा कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
3. BRICS समूह में वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, लेकिन हाल ही में इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात भी इसमें शामिल हुए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। बैठक ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी और इसमें ECCE तथा कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई। कथन 3 गलत है क्योंकि इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात BRICS के नए सदस्य हैं, लेकिन भारत पहले से ही मूल BRICS का हिस्सा है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से BRICS शिक्षा ट्रैक के तहत सहयोग के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से है/हैं?
1. तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET)
2. योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता
3. पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर BRICS मार्गदर्शक सिद्धांत
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी विकल्प (TVET, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, और पारंपरिक तथा स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर BRICS मार्गदर्शक सिद्धांत) BRICS शिक्षा ट्रैक के तहत सहयोग के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ BRICS शिक्षा मंत्रियों की हालिया बैठक के संदर्भ में, BRICS देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में सहयोग के प्रमुख आयामों पर चर्चा कीजिए। वैश्विक शिक्षा प्रणाली को समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बनाने में यह सहयोग किस प्रकार सहायक हो सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक का संक्षिप्त उल्लेख और इसके महत्व पर प्रकाश।
2. BRICS शिक्षा सहयोग के प्रमुख आयाम:
क. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) का सुदृढ़ीकरण।
ख. कौशल विकास और तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET) को बढ़ावा देना।
ग. अनुसंधान और नवाचार में सहयोग।
घ. योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को सुगम बनाना।
ङ. शैक्षणिक नेतृत्व का विकास।
च. पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर BRICS मार्गदर्शक सिद्धांतों का कार्यान्वयन।
छ. सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण।
3. वैश्विक शिक्षा प्रणाली को समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बनाने में BRICS सहयोग की भूमिका:
क. ज्ञान और संसाधनों का साझाकरण: सदस्य देशों के बीच अनुभवों और सफल मॉडलों का आदान-प्रदान।
ख. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में योगदान, विशेषकर SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा)।
ग. डिजिटल शिक्षा और प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना।
घ. सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देना।
ङ. शिक्षा में असमानताओं को कम करने के प्रयासों को बल देना।
च. भविष्य की चुनौतियों (जैसे महामारी, जलवायु परिवर्तन) के लिए शिक्षा प्रणालियों को तैयार करना।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: भाषा बाधाएँ, विभिन्न शैक्षणिक प्रणालियाँ, वित्तपोषण की आवश्यकताएँ, और इन चुनौतियों का समाधान कैसे किया जा सकता है।
5. निष्कर्ष: BRICS सहयोग के माध्यम से एक अधिक न्यायसंगत, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण वैश्विक शिक्षा परिदृश्य के निर्माण की संभावना।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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