28 Jul भारतीय कदन्न या श्री अन्न की वैश्विक मान्यता : कोडेक्स एलीमेंटेरियस की मुहर
( यह लेख यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 2 के अंतर्गत ‘ भारतीय संविधान और शासन व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय संबंध और महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, महत्वपूर्ण प्राधिकरण और आयोग ’ खंड से और मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 के अंतर्गत ‘ भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास, भारतीय कृषि से संबंधित मुख्य तथ्य और खाद्य प्रसंस्करण ’ यूपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत ‘ कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण, राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक, समेकित बाल विकास सेवा (ICDS), श्री अन्न, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) ’ खंड से संबंधित है।)
खबरों में क्यों ?

- हाल ही में भारत द्वारा संपूर्ण कदन्न ( मिलेट्स ) या मोटे अनाजों के लिए समूहात्मक रूप में मानक विकसित करने में निभाई गई अग्रणी भूमिका की सराहना कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग (CAC) की 88वीं कार्यकारी समिति की बैठक 2025 में, जो इटली के रोम स्थित खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया।
कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन (CAC) :
- कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन (CAC) एक अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानक निकाय है।
- इस निकाय का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और खाद्य व्यापार में उचित प्रथाओं की सुनिश्चितता को तय करना है।
- इस अंतर्राष्ट्रीय संगठन को मई 1963 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation – FAO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation-WHO) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था।
- इसके तहत विभिन्न खाद्य मानक, दिशा-निर्देश, और अभ्यास संहिताएं तैयार की जाती हैं।
- इसके तहत तय किए गए मानकों और संहिताएं आमतौर पर स्वच्छता अभ्यास, लेबलिंग, संदूषक, योजक, निरीक्षण, प्रमाणन, पोषण, और पशु चिकित्सा दवाओं और कीटनाशकों के अवशेषों से निपटने के लिए लागू होती हैं।
- वर्तमान में CAC में कुल 189 सदस्य हैं, जिसमें 188 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
- भारत सन 1964 में CAC का सदस्य बना था।
- कोडेक्स के तहत कमोडिटी मानक विशिष्ट उत्पादों को संदर्भित करते हैं, जबकि क्षेत्रीय मानक संबंधित क्षेत्रों पर लागू होते हैं।
CAC की 88वीं कार्यकारी समिति (CCEXEC) की बैठक :

- भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के CEO के नेतृत्व में भारत ने रोम स्थित FAO मुख्यालय में आयोजित कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग की कार्यकारी समिति (CCEXEC) के वर्तमान बैठक में सक्रिय रूप से भागीदारी की।
- CCEXEC का प्रमुख कार्य नए कार्य प्रस्तावों की समीक्षा और मानक विकास की प्रगति की निगरानी करना है।
- कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग की कार्यकारी समिति (CCEXEC) के 88वीं कार्यकारी समिति की बैठक 2025 के दौरान, भारत ने छोटी इलायची, हल्दी और वेनिला सहित विभिन्न मसालों के मनको के विकास के लिए जोरदार समर्थन किया।
- यह पहल भारत के लिए विशेष महत्त्व रखती है, क्योंकि भारत इन मसालों का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है। अतः इससे भारत को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में आसानी होगी।
- इसके अलावा, भारत ने वनस्पति तेलों के लिए मानकों की प्रगति, शिगा टॉक्सिन उत्पादन करने वाले एस्चेरिचिया कोलाई (Shiga Toxin-Producing Escherichia Coli) के नियंत्रण हेतु दिशा-निर्देशों, और खाद्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण में पानी के सुरक्षित उपयोग और पुनः उपयोग का समर्थन किया।
- भारत ने खाद्य पैकेजिंग में पुनर्नवीनीकृत सामग्रियों के उपयोग से संबंधित खाद्य सुरक्षा विचारों पर कोडेक्स द्वारा एक मार्गदर्शन विकसित करने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया।
- यह पहल जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- अंततः, भारत ने खाद्य संपर्क अनुप्रयोगों के लिए पोस्ट उपभोक्ता PET (पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट) के पुनर्चक्रण पर FSSAI द्वारा विकसित दिशा-निर्देशों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) :

- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है।
- भारत में इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत स्थापित किया गया है।
- यह निकाय भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है।
- यह भारत में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को विनियमित तथा पर्यवेक्षण करके सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और संवर्द्धन के लिए एक जिम्मेदार निकाय है।
- FSSAI का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसके छह क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली, गुवाहाटी, मुंबई, कोलकाता, कोचीन और चेन्नई में स्थित है।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने का कार्य करता है।
- FSSAI मानव उपभोग के लिये पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने का कार्य करता है।
- इसके अलावा यह देश के सभी राज्यों, ज़िला एवं ग्राम पंचायत स्तर पर खाद्य पदार्थों के उत्पादन और बिक्री के निर्धारित मानकों को बनाए रखने में सहयोग करता है।
- यह समय-समय पर खुदरा एवं थोक खाद्य-पदार्थों की गुणवत्ता की भी जाँच करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य खाद्य सामग्री के लिए वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित मानकों का निर्माण करना है और खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को नियंत्रित करने के माध्यम से मानव-उपभोग के लिए सुरक्षित और संपूर्ण आहार की उपलब्धि सुनिश्चित करना है।
कदन्न : भविष्य की पोषणयुक्त फसलें और सतत कृषि का एक समग्र समाधान :
- परिचय : कदन्न, जिन्हें पारंपरिक रूप से ‘श्री अन्न’ के नाम से जाना जाता है, छोटे आकार के अनाज हैं जो खरीफ मौसम में उगाए जाते हैं। ये फसलें घास कुल (पोएसी) से संबंधित हैं और कम जलवायु संसाधनों में भी सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है। इनकी बहुउपयोगिता, पोषण मूल्य और पर्यावरणीय अनुकूलता के कारण ये फिर से वैश्विक कृषि चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
पोषण और स्वास्थ्य लाभ की दृष्टिकोण से इसका महत्व :
- कदन्न गेहूँ और चावल की तुलना में अधिक पौष्टिक हैं। ये प्रोटीन, फाइबर, आयरन, जिंक और बी-विटामिन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और ये ग्लूटेन-फ्री होते हैं, जिससे ये मधुमेह और सीलिएक रोगियों के लिये एक बेहतरीन विकल्प बनते हैं।
कदन्न उत्पादन में भारत की वैश्विक भूमिका :
- भारत ने कदन्नों के महत्व को विश्व मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसके फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष घोषित किया। यह कदम न केवल भारत की कूटनीतिक सफलता दर्शाता है, बल्कि पारंपरिक कृषि ज्ञान के वैश्वीकरण की दिशा में एक बड़ी पहल भी है।
कदन्न का गुणवत्ता मानक और भारत में उत्पादन की स्थिति :
- FSSAI ने कदन्नों के लिए व्यापक गुणवत्ता मानक तय किए हैं, जो न केवल घरेलू उपभोग हेतु आवश्यक हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी अहम हैं।
- भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा कदन्न उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में 38.4% का योगदान देता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
- निर्यात और आर्थिक योगदान वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 1.46 लाख मीट्रिक टन बाजरा निर्यात कर 70.89 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई की। इसके प्रमुख खरीदार देश यूएई, सऊदी अरब, अमेरिका, जापान और नेपाल हैं, जो दर्शाता है कि कदन्न न केवल पोषण का माध्यम हैं बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जन का स्रोत भी बन चुके हैं।
कदन्नों के प्रसार में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रमुख पहलें :
भारत सरकार ने कदन्नों के प्रसार हेतु अनेक योजनाएं लागू की हैं। जो निम्नलिखित है –
- PLISMBP (2022–2027) : कदन्न-आधारित रेडी-टू-ईट/रेडी-टू-कुक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाता है।
- NFSM उप-मिशन : भारत सरकार द्वारा 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में किसानों को बीज, उपकरण और प्रशिक्षण में सहायता प्रदान करता है।
- पोषण योजनाएं : TPDS, ICDS, मिड-डे मील और पोषण अभियान में कदन्नों को सम्मिलित किया गया है ताकि पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- FSSAI का ‘ईट राइट’ अभियान : संतुलित आहार के अंग के रूप में कदन्नों की भूमिका पर बल देता है।
- RKVY और राज्य स्तरीय मिशन : विभिन्न राज्यों को उनकी स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार कदन्न के प्रसार की स्वतंत्रता दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय मानक निर्माण में भारत की भागीदारी :
- भारत ने कोडेक्स अलिमेंटेरियस आयोग ( Codex Alimentarius Commission – CAC ) के साथ मिलकर वैश्विक खाद्य मानकों के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। मसालों और पाक जड़ी-बूटियों पर समिति की अध्यक्षता करने के अलावा भारत अब कदन्न और ताजे खजूर के वैश्विक मानक विकसित करने की अगुवाई भी कर रहा है। हल्दी और ब्रोकली जैसे उत्पादों के लिये भी मानक तय करने की दिशा में भारत अग्रणी और नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।
निष्कर्ष :
- कदन्न केवल पारंपरिक भोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि यह सतत कृषि, पोषण सुरक्षा और आर्थिक विकास की दिशा में एक समग्र समाधान हैं।
- भारत ने न केवल इन फसलों की खेती और उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है, बल्कि वैश्विक मंचों पर इनके महत्व को स्थापित कर उन्हें ‘भविष्य के अनाज’ के रूप में मान्यता दिलाई है।
- आने वाले वर्षों में भारत की नीतियाँ और पहलें कदन्नों को कृषि और आहार प्रणाली का मजबूत स्तंभ बना सकती हैं।
स्रोत – पी.आई.बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. अंतर्राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के उपयोग से संबंधित विवादों को निपटाने के लिए WTO किसके साथ सहयोग करता है? ( UPSC – 2018 )
A. खाद्य सुरक्षा मानकीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन।
B. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ स्टैंडर्ड्स यूज़र्स।
C. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण।
D. कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन।
उत्तर – D
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत की पोषण नीतियों और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में बाजरा के समावेश की प्रासंगिकता और प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )
Q.2. भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की मुख्य चुनौतियाँ क्या है और भारत सरकार द्वारा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपनाई गई मुख्य नीतियों का विस्तारपूर्वक एवं तर्कसंगत व्याख्या कीजिए। (UPSC CSE – 2019 शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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