भारतीय मेधा और मशीन लर्निंग का संगम : कोड से क्रांति बनाम विक्रम 1 और 2 का अनावरण

भारतीय मेधा और मशीन लर्निंग का संगम : कोड से क्रांति बनाम विक्रम 1 और 2 का अनावरण

मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र -3- के अंतर्गत ‘ सूचना एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ से संबंधित।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – ‘ इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026, विक्रम साराभाई, मेड इन इंडिया AI, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM), स्टार्टअप सर्वम AI, चंद्रयान-2, चंद्रयान-3, ‘विक्रम लैंडर’, संप्रभु एआई ’ से संबंधित। 

 

ख़बरों में क्यों ?

 

 

  • हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026’ में बंगलूरू स्थित एआई स्टार्टअप सर्वम AI ने ‘विक्रम’ श्रृंखला के दो नए लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) लॉन्च किए हैं। 
  • भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि – 
  • यह पूरी तरह से भारतीय भाषाओं और संस्कृति के अनुरूप तैयार किया गया है।
  • यह भारत की ‘संप्रभु एआई’ (Sovereign AI) क्षमता को मजबूत करता है।
  • इसे विशेष रूप से भारतीय हार्डवेयर सीमाओं और भाषाई विविधता को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

 

लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) क्या होता है?

 

  • लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एक प्रकार है जिसे डिप लर्निंग (Deep Learning) और विशाल डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जाता है।
  • कार्यक्षमता : ये मॉडल मानव भाषा को समझने, सारांशित करने, अनुवाद करने और नया टेक्स्ट उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं।
  • तकनीकी आधार : ये ‘ट्रांसफॉर्मर’ आर्किटेक्चर पर आधारित होते हैं। इनमें अरबों पैरामीटर्स (Parameters) होते हैं जो इन्हें शब्दों के बीच के जटिल संबंधों को समझने में मदद करते हैं।
  • उदाहरण : GPT-4 (OpenAI), Claude (Anthropic) और अब भारत का ‘विक्रम’

 

इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 के प्रमुख निष्कर्ष : 

 

  • इस समिट का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक एआई हब बनाना था। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का लोकतंत्रीकरण करना : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक को केवल अंग्रेजी बोलने वाली आबादी तक सीमित न रखकर ग्रामीण और क्षेत्रीय भाषाई क्षेत्रों तक पहुँचाना।
  • डेटा संप्रभुता की रक्षा करना : भारतीय नागरिकों के डेटा का उपयोग स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मॉडल के लिए करने पर जोर।
  • क्षेत्रीय प्रभाव : कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में एआई के उपयोग के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए समाधानों पर चर्चा।
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) प्रारूप को बढ़ावा देना : सरकार और निजी स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।

 

सर्वम AI द्वारा अपने इस महत्वाकांक्षी मॉडल का नाम ‘विक्रम’ क्यों रखा गया है ?

 

  • सर्वम AI द्वारा अपने इस महत्वाकांक्षी मॉडल का नाम ‘विक्रम’ रखने के पीछे गहरे रणनीतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारण हैं। यह नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि भारतीय विज्ञान और नेतृत्व के प्रति एक सम्मान है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं – 
  • डॉ. विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि देना : इस नाम का सबसे प्रमुख कारण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई को सम्मान देना है। जिस प्रकार साराभाई ने संसाधनों की कमी के बावजूद भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भर बनाया, सर्वम AI भी ‘विक्रम’ के माध्यम से भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना चाहता है।
  • साहस और पराक्रम का प्रतीक : संस्कृत में ‘विक्रम’ का अर्थ होता है – ‘वीरता’, ‘पराक्रम’ या ‘शक्ति’। यह नाम उस साहस को दर्शाता है जो एक भारतीय स्टार्टअप ने वैश्विक एआई दिग्गजों (जैसे Google और OpenAI) के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए दिखाया है। यह मॉडल भारतीय भाषाओं की जटिलताओं को सुलझाने की ‘शक्ति’ का प्रतीक है।
  • ‘चंद्रयान’ और ‘विक्रम लैंडर’ से जुड़ा होना : हाल के वर्षों में ‘विक्रम’ नाम भारतीय जनमानस में चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 के ‘विक्रम लैंडर’ के कारण बहुत लोकप्रिय हुआ है। जिस तरह विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर भारत की उपस्थिति दर्ज कराई, उसी तरह यह LLM भारतीय भाषाई डेटा के उस ‘अज्ञात’ क्षेत्र में भारत की तकनीकी पकड़ मजबूत करने का लक्ष्य रखता है जिसे पश्चिमी मॉडलों ने नजरअंदाज किया है।
  • भारतीय ज्ञान-परंपरा और विक्रम-बेताल जैसी भारतीय लोककथाएँ : ‘विक्रम-बेताल’ भारतीय लोककथाओं में ‘विक्रम-बेताल’ की कहानियाँ बुद्धिमत्ता, कठिन प्रश्नों के समाधान और तार्किक सोच के लिए जानी जाती हैं। एक ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ का काम भी जटिल सवालों के सटीक उत्तर देना होता है। यह नाम भारत की उस प्राचीन ज्ञान और तर्क करने की परंपरा (Logic and Reasoning) को आधुनिक तकनीक से जोड़ता है।
  • स्वदेशी पहचान को बनाए रखना : ‘विक्रम’ नाम स्वदेशी पहचान को मजबूती देता है। यह संदेश देता है कि यह मॉडल “भारत का है और भारत के लिए है।”

 

‘विक्रम’ LLM की प्रमुख विशेषताएँ : 

 

  • बहुभाषी दक्षता (Multilingualism) : यह हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी और कन्नड़ सहित 10 से अधिक प्रमुख भारतीय भाषाओं को मूल रूप से समझता है।
  • टोकनाइजेशन : ‘विक्रम’ का टोकनाइज़र भारतीय भाषाओं के लिए अनुकूलित है, जिससे यह अंग्रेजी-केंद्रित मॉडल की तुलना में भारतीय लिपियों को अधिक तेजी से और कम कंप्यूटिंग लागत पर संसाधित करता है।
  • सांस्कृतिक संदर्भ : इसमें भारतीय मुहावरों, स्थानीय संदर्भों और सांस्कृतिक बारीकियों की गहरी समझ है।
  • किफायती होना : इसे कम संसाधनों वाले उपकरणों पर चलाने के लिए अनुकूलित किया गया है।

 

‘विक्रम’ LLM के तकनीकी विनिर्देश : 

 

  • सर्वम AI ने ‘विक्रम’ को एक ‘कंप्यूट-एफिशिएंट’ मॉडल के रूप में डिज़ाइन किया है। इसकी प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
  • पैरामीटर आकार : ‘विक्रम’ श्रृंखला में मुख्य रूप से दो संस्करण शामिल हैं:
  • Vikram-7B : यह 7 बिलियन पैरामीटर्स वाला मॉडल है, जिसे सामान्य उपयोग और मध्यम स्तर के कंप्यूटिंग पावर वाले सर्वर के लिए बनाया गया है।
  • Vikram-1B : यह एक छोटा (Small Language Model – SLM) है, जिसे मोबाइल उपकरणों या ‘एज डिवाइसेस’ पर बिना इंटरनेट के भी चलाने के लिए अनुकूलित किया गया है।
  • अनुकूलित टोकनाइज़र (Optimized Tokenizer) : सामान्य LLM (जैसे Llama या GPT) हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के एक शब्द को 5-10 टुकड़ों (टोकन) में तोड़ते हैं, जिससे वे धीमे और महंगे हो जाते हैं। विक्रम का टोकनाइज़र भारतीय लिपियों के लिए 3x से 4x अधिक कुशल है। यह कम टोकन में अधिक जानकारी संसाधित करता है, जिससे इसकी गति बढ़ जाती है और लागत कम हो जाती है।
  • प्रशिक्षण डेटा : इसे लगभग 2 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें भारतीय समाचार पत्र, सरकारी दस्तावेज़, साहित्यिक पुस्तकें और क्षेत्रीय वेबसाइटों का डेटा शामिल है।
  • आर्किटेक्चर : यह ‘मिक्सचर ऑफ एक्सपर्ट्स’ (MoE) या डेंस ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर का उपयोग करता है, जो इसे जटिल सवालों के जवाब देने में सटीक बनाता है।

 

विक्रम के विशिष्ट उपयोग :

 

  • यह मॉडल केवल चैट करने के लिए नहीं है; इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में बदलाव लाने के लिए बनाया गया है। जो निम्नलिखित है – 
  • ई-गवर्नेंस और नागरिक सेवाएँ : 
  • बहुभाषी सहायता : ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक अपनी स्थानीय भाषा या बोली में सरकारी योजनाओं (जैसे PM-Kisan) के बारे में पूछ सकते हैं।
  • दस्तावेज़ का अनुवाद करना : सरकारी आधिकारिक पत्रों और कानूनी दस्तावेजों का सटीक और संदर्भ-सहित अनुवाद करना।
  • कृषि क्षेत्र : 
  • स्थानीय सलाह : किसान अपनी भाषा में मिट्टी की गुणवत्ता, मौसम के पूर्वानुमान और कीटनाशकों के उपयोग के बारे में ‘वॉइस-आधारित’ एआई सहायक से बात कर सकते हैं।
  • बाजार भाव : विभिन्न मंडियों के भावों का वास्तविक समय में विश्लेषण और किसानों को उनकी भाषा में जानकारी देना।
  • स्वास्थ्य सेवा : 
  • मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन : भारतीय डॉक्टरों के लिए अपनी स्थानीय भाषा में नुस्खे (Prescriptions) लिखना और उनका डिजिटल रिकॉर्ड रखना आसान बनाता है।
  • प्रारंभिक निदान : दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा वर्कर्स) लक्षणों के आधार पर प्राथमिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • शिक्षा : 
  • निजीकृत ट्यूटर : छात्रों के लिए उनकी मातृभाषा में जटिल गणितीय या वैज्ञानिक विषयों को समझाना।
  • कंटेंट जनरेशन : शिक्षकों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री और परीक्षा पत्र तैयार करना।

 

वैश्विक मॉडलों की तुलना में ‘विक्रम’ की श्रेष्ठता : 

 

विशेषता वैश्विक मॉडल (जैसे GPT/Llama) सर्वम ‘विक्रम’
भाषा प्राथमिकता मुख्य रूप से अंग्रेजी केंद्रित भारतीय भाषाओं (Indic) पर आधारित
लागत (Cost) भारतीय भाषाओं के लिए अधिक (अधिक टोकन के कारण) किफायती और कम टोकन उपयोग
सांस्कृतिक समझ पश्चिमी संदर्भों पर आधारित भारतीय मुहावरे, त्योहार और स्थानीय संदर्भ
हार्डवेयर भारी GPU की आवश्यकता कम शक्तिशाली हार्डवेयर पर भी सक्षम

 

भारत में कृत्रिम बुद्धिमता (AI) से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ: 

 

  • भारत में स्वदेशी LLM विकसित करने के मार्ग में कई बाधाएं हैं। जो निम्नलिखित है – 
  • डेटा की कमी : भारतीय भाषाओं (विशेषकर बोलियों) के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल डेटा की उपलब्धता सीमित है।
  • कंप्यूटिंग शक्ति : एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए आवश्यक GPU (जैसे NVIDIA H100) की भारी कमी और उच्च लागत।
  • प्रतिभा पलायन : शीर्ष एआई शोधकर्ता अक्सर बेहतर संसाधनों के लिए विदेशी कंपनियों का रुख करते हैं।
  • भाषाई विविधता : भारत की भाषाई जटिलता (हजारों बोलियाँ) किसी भी मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती है।

 

समाधान की राह : 

 

  • विक्रम जैसे मॉडलों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
  • भाषिणी (Bhashini) का उपयोग करना : सरकारी पहल ‘भाषिणी’ के तहत उपलब्ध डेटासेट का उपयोग करके मॉडल को और सटीक बनाना।
  • एआई मिशन को अनुदान देना : भारत सरकार के ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (GPU क्लस्टर्स) के लिए सब्सिडी देना।
  • ओपन सोर्स सहयोग को बढ़ावा देना : भारतीय डेवलपर्स के लिए इन मॉडलों को ओपन-सोर्स बनाना ताकि सामुदायिक स्तर पर सुधार हो सके।
  • एथिकल एआई के लिए सख्त नियम बनाना : डेटा गोपनीयता और एआई पूर्वाग्रह (Bias) को रोकने के लिए सख्त नियम बनाना।

 

 भविष्य की राह : ‘सर्वम 2.0’ और आगे की राह :

 

 

  • ‘विक्रम’ का अनावरण केवल शुरुआत है। सर्वम AI का लक्ष्य अब इसे ‘मल्टी-मोडल’ (Multimodal) बनाना है, यानी यह मॉडल केवल टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं की आवाज़ को भी उतनी ही सटीकता से समझ सके। इससे ‘वॉइस-फर्स्ट’ इंडिया की परिकल्पना साकार होगी, जहाँ लिखना-पढ़ना न जानने वाला व्यक्ति भी एआई का लाभ ले सकेगा।
  • ‘विक्रम’ LLM का उदय केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ‘डिजिटल भारत’ के आत्मनिर्भर होने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि हम भाषाई बाधाओं को दूर कर देते हैं, तो एआई का लाभ देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँच सकता है। सर्वम AI जैसे स्टार्टअप यह सिद्ध कर रहे हैं कि भारत केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्माता (Creator) बनने की क्षमता रखता है।

 

स्रोत – पी. आई. बी एवं द हिंदू।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1.’विक्रम’ लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 

  1. इसे ‘सर्वम AI’ द्वारा विकसित किया गया है और इसमें ‘Vikram-7B’ तथा ‘Vikram-1B’ जैसे संस्करण शामिल हैं।
  2. यह मॉडल विशेष रूप से भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों (जैसे मुहावरे और स्थानीय शब्द) के लिए अनुकूलित है।
  3. इसका ‘टोकनाइज़र’ वैश्विक मॉडलों (जैसे GPT) की तुलना में भारतीय लिपियों के लिए 3x से 4x अधिक कुशल है।
  4. यह केवल अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं तक सीमित है और दक्षिण भारतीय भाषाओं का समर्थन नहीं करता है।

कूट के आधार पर सही उत्तर का चयन करें: 

A. केवल 1 और 2 

B. केवल 2, 3 और 4 

C. केवल 1, 2 और 3

D. उपर्युक्त सभी।

उत्तर – C. केवल 1, 2 और 3 

व्याख्या : 

  • कथन 4 गलत है क्योंकि ‘विक्रम’ तमिल, तेलुगु, मराठी और कन्नड़ सहित 10 से अधिक प्रमुख भारतीय भाषाओं को मूल रूप से समझता है। अतः विकल्प C सही उत्तर है।  

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. हाल ही में चर्चा में रहे सर्वम AI द्वारा विकसित ‘विक्रम’ श्रृंखला के लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। चर्चा कीजिए कि यह भारत की ‘संप्रभु एआई’ क्षमता को मजबूत करने और भाषाई बाधाओं को दूर करने में किस प्रकार सहायक है? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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