23 Jul भारतीय रेलवे ने तीसरी लाइन परियोजना को 440 करोड़ रुपये में मंजूरी दी, जानिए पूरा विवरण
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — अवसंरचना (Infrastructure)
- Prelims: भारतीय रेलवे, दक्षिण पूर्वी रेलवे, तीसरी लाइन परियोजना, माल ढुलाई गलियारे, उच्च उपयोग नेटवर्क (HUN), रेल क्षमता विस्तार
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में अवसंरचना की भूमिका, रेलवे: भारत की जीवन रेखा और भविष्य की संवृद्धि का वाहक
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय रेलवे की निमपुरा-मिदनापुर तीसरी लाइन परियोजना उच्च उपयोग वाले नेटवर्क पर क्षमता विस्तार कर आर्थिक विकास को गति देने और आवश्यक वस्तुओं की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्वी रेलवे के निमपुरा पश्चिम आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन परियोजना को 440 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। यह परियोजना देश के महत्वपूर्ण माल ढुलाई गलियारों में से एक पर रेल क्षमता बढ़ाने और उच्च उपयोग वाले नेटवर्क मार्ग पर यात्री तथा माल ढुलाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो यात्री और माल ढुलाई दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन माध्यम प्रदान करती है।
- भारत में रेलवे नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है, जो प्रतिदिन लाखों यात्रियों और टन माल का परिवहन करता है।
- बढ़ती जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों के कारण कई प्रमुख रेल मार्गों पर क्षमता उपयोग (capacity utilization) 100% से अधिक हो गया है, जिससे भीड़भाड़ और परिचालन दक्षता में कमी आती है।
- सरकार ने ‘उच्च घनत्व वाले मार्गों’ (High Density Routes) और ‘उच्च उपयोग नेटवर्क’ (High Utilization Network) पर क्षमता विस्तार को प्राथमिकता दी है ताकि माल और यात्रियों की तेज आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
- रेलवे अवसंरचना में निवेश आर्थिक संवृद्धि को गति देने, उद्योगों को समर्थन देने और आवश्यक वस्तुओं की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- दक्षिण पूर्वी रेलवे का यह खंड मैंगनीज, लौह अयस्क, कोयला, सीमेंट जैसे प्रमुख वस्तुओं के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और वर्तमान में 115.71 प्रतिशत क्षमता उपयोग पर चल रहा है।
रेलवे क्षमता विस्तार परियोजनाएँ क्या हैं?
- रेलवे क्षमता विस्तार परियोजनाएँ उन पहलों को संदर्भित करती हैं जिनका उद्देश्य मौजूदा रेलवे नेटवर्क की वहन क्षमता (carrying capacity) को बढ़ाना है।
- इनमें नई लाइनों का निर्माण (जैसे तीसरी या चौथी लाइन), मौजूदा लाइनों का दोहरीकरण (doubling), विद्युतीकरण (electrification), सिग्नलिंग प्रणालियों का उन्नयन (upgradation) और यार्डों का पुनर्गठन (yard remodelling) शामिल है।
- मुख्य उद्देश्य यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को तेज करना, यात्रा के समय को कम करना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
- ये परियोजनाएँ विशेष रूप से उन ‘उच्च घनत्व वाले मार्गों’ पर केंद्रित होती हैं जहाँ मौजूदा अवसंरचना बढ़ती मांग को पूरा करने में असमर्थ है।
- क्षमता विस्तार से माल ढुलाई में वृद्धि होती है, जिससे उद्योगों को लाभ मिलता है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) मजबूत होती है।
- ये परियोजनाएँ आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देती हैं, रोजगार सृजित करती हैं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (regional connectivity) को बेहतर बनाती हैं।
- निंपुरा-मिदनापुर तीसरी लाइन परियोजना इसी तरह के क्षमता विस्तार का एक उदाहरण है, जो इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर भीड़भाड़ को कम करेगी और अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा प्रदान करेगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| परियोजना का नाम | निमपुरा पश्चिम आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच तीसरी लाइन परियोजना |
| स्थान | दक्षिण पूर्वी रेलवे, पश्चिम बंगाल |
| लंबाई | 14.52 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत | 440 करोड़ रुपये |
| उद्देश्य | उच्च उपयोग वाले नेटवर्क मार्ग पर यात्री और माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि |
| अतिरिक्त क्षमता | प्रति वर्ष 35 लाख टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह परियोजना कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और अन्य आवश्यक वस्तुओं जैसे प्रमुख सामानों की आवाजाही को सुगम बनाकर उद्योगों और व्यवसायों को मजबूत करेगी।
- उन्नत रेल अवसंरचना परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करेगी, नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाएगी और इस महत्वपूर्ण रेल गलियारे पर निर्भर उद्योगों के लिए कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी।
परिचालन महत्व
- यह मार्ग वर्तमान में 115.71 प्रतिशत क्षमता उपयोग पर चल रहा है, जो अत्यधिक भीड़भाड़ का संकेत है। तीसरी लाइन से क्षमता में काफी वृद्धि होगी और परिचालन लचीलापन बेहतर होगा।
- यह उच्च घनत्व वाले मार्गों पर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने के भारतीय रेलवे के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिससे यात्री और मालगाड़ियों की तेज आवाजाही संभव हो सकेगी।
रणनीतिक महत्व
- यह देश के महत्वपूर्ण माल ढुलाई गलियारों में से एक पर रेल क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
- यह परियोजना ‘उच्च उपयोग नेटवर्क (HUN-2)’ मार्ग का हिस्सा है, जो देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ता है और समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण
- रेलवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण अक्सर एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास और मुआवजे से संबंधित मुद्दे शामिल होते हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास और लोक नीति
2. पर्यावरणीय प्रभाव
- किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा परियोजना के निर्माण से स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिसके लिए उचित पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और शमन उपायों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी
3. वित्तपोषण और लागत प्रबंधन
- 440 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए समय पर और पर्याप्त वित्तपोषण सुनिश्चित करना तथा निर्माण के दौरान लागत वृद्धि को नियंत्रित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन
4. परियोजना का समय पर पूरा होना
- बड़े पैमाने की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में अक्सर देरी होती है, जिससे लागत बढ़ जाती है और अपेक्षित लाभों की प्राप्ति में विलंब होता है। कुशल परियोजना प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा और विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च नेटवर्क उपयोग | वर्तमान में 115.71 प्रतिशत क्षमता उपयोग पर चल रहा है, जिससे भीड़भाड़ और परिचालन में देरी होती है। |
| माल ढुलाई की बढ़ती मांग | कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट आदि आवश्यक वस्तुओं के परिवहन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त क्षमता। |
| यात्री यातायात | बढ़ते यात्री यातायात को समायोजित करने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त लाइनों की आवश्यकता। |
| परिचालन दक्षता | सिंगल लाइन खंडों के कारण परिचालन में लचीलेपन की कमी और समग्र नेटवर्क दक्षता पर नकारात्मक प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय रेल योजना (National Rail Plan)
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan)
आगे की राह
- परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और त्वरित किया जाना चाहिए, जिसमें प्रभावित लोगों के लिए उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
- परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) किया जाए और प्रभावी शमन उपायों को लागू किया जाए।
- परियोजना के कुशल और समयबद्ध निष्पादन के लिए आधुनिक परियोजना प्रबंधन तकनीकों और निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया जाए।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) के अवसरों का पता लगाया जाए, खासकर वित्तपोषण और तकनीकी विशेषज्ञता के लिए।
- रेलवे नेटवर्क के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि परिचालन दक्षता और सुरक्षा में सुधार हो सके।
- रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास को अन्य परिवहन माध्यमों जैसे सड़क और जलमार्ग के साथ एकीकृत किया जाए ताकि मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रेलवे अवसंरचना · माल ढुलाई गलियारे · क्षमता वृद्धि · आर्थिक विकास · यात्री परिवहन · उच्च घनत्व मार्ग · परिचालन दक्षता · मेक इन इंडिया · राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन · पीएम गति शक्ति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा किए गए व्यय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 301’, ‘note’: ‘व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता’}
अवधारणा प्रवाह
उच्च उपयोग वाले रेल मार्ग पर भीड़भाड़ → यात्री और माल ढुलाई की बढ़ती मांग → नई तीसरी लाइन परियोजना की मंजूरी → रेलवे नेटवर्क क्षमता में वृद्धि → आर्थिक संवृद्धि और औद्योगिक विकास को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निमपुरा पश्चिम आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच तीसरी रेलवे लाइन परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह परियोजना दक्षिण पूर्वी रेलवे के अंतर्गत आती है।
2. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल यात्री यातायात को बढ़ावा देना है।
3. यह उच्च उपयोग नेटवर्क (HUN-2) मार्ग का हिस्सा है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि परियोजना दक्षिण पूर्वी रेलवे के निमपुरा पश्चिम आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच है। कथन 2 गलत है क्योंकि परियोजना का उद्देश्य यात्री और माल ढुलाई दोनों को बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है क्योंकि यह खंड उच्च उपयोग नेटवर्क (HUN-2) मार्ग का हिस्सा है।
Q2. भारतीय रेलवे की क्षमता वृद्धि परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से लाभ अपेक्षित हैं?
1. माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि।
2. परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी।
3. नेटवर्क की विश्वसनीयता में वृद्धि।
4. आर्थिक विकास को समर्थन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी कथन सही हैं। रेलवे की क्षमता वृद्धि से माल ढुलाई क्षमता बढ़ती है, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होती हैं, नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ती है और अंततः यह आर्थिक विकास को भी समर्थन देता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में रेलवे अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। निमपुरा-मिदनापुर तीसरी लाइन जैसी परियोजनाएं देश के आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को किस प्रकार गति प्रदान करती हैं? (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारत में रेलवे अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण की आवश्यकता को विभिन्न बिंदुओं में स्पष्ट करें, जैसे बढ़ती जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियाँ, माल ढुलाई की मांग, सुरक्षा, गति और दक्षता। दूसरे भाग में निमपुरा-मिदनापुर तीसरी लाइन परियोजना का उदाहरण देते हुए बताएं कि कैसे ऐसी परियोजनाएं माल ढुलाई क्षमता बढ़ाती हैं, भीड़भाड़ कम करती हैं, परिचालन दक्षता में सुधार करती हैं और उद्योगों के लिए कनेक्टिविटी मजबूत करके आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देती हैं। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन और पीएम गति शक्ति जैसी सरकारी पहलों का भी उल्लेख किया जा सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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