15 Oct भारत का विजन 2025-2030 : संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विज्ञान-संचालित संरक्षण
यह लेख में “भारत का विजन 2025-2030 : संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विज्ञान-संचालित संरक्षण” शामिल है जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से संबंधित है।
पाठ्यक्रम :
जीएस – 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी – भारत का विजन 2025-2030 : संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विज्ञान-संचालित संरक्षण
प्रारंभिक परीक्षा के लिए
भारत का राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप क्या है और यह महत्वपूर्ण क्यों है?
मुख्य परीक्षा के लिए
रेड लिस्ट रोडमैप को लागू करने में भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
समाचार में क्यों?

- दुनिया के 17 महाविविध देशों में से एक, भारत ने व्यवस्थित जैव विविधता मूल्यांकन और संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
- आईयूसीएन विश्व संरक्षण सम्मेलन 2025 में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री, कीर्ति वर्धन सिंह ने भारत का राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विज़न 2025-2030 लॉन्च किया।
- यह पहल भारत के पर्यावरण शासन में एक नए चरण का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य देश भर में संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान, मूल्यांकन और संरक्षण के लिए एक वैज्ञानिक, आँकड़ा-आधारित ढाँचा प्रदान करना है।
- यह पहल Convention on Biological Diversity (CBD) और Kunming–Montreal Global Biodiversity Framework (KM-GBF) की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप के बारे में
- राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विज़न 2025-2030, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), और अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा, तथा सेंटर फॉर स्पीशीज़ सर्वाइवल-इंडिया के साथ मिलकर विकसित एक व्यापक योजना है।
- यह वैश्विक IUCN मानकों के अनुरूप भारतीय वनस्पतियों और जीवों की संरक्षण स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित, समावेशी और विज्ञान-आधारित तंत्र की परिकल्पना करता है।
- रोडमैप का लक्ष्य 2030 तक वनस्पतियों और जीवों, दोनों के लिए राष्ट्रीय रेड डेटा पुस्तकें प्रकाशित करना है, जो नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और संरक्षणवादियों के लिए प्रमुख संदर्भ दस्तावेज़ों के रूप में काम करेंगी।
- इससे उत्पन्न डेटा भविष्य की संरक्षण रणनीतियों, नीतिगत कार्यों और लक्षित संरक्षण प्रयासों को सूचित करेगा।
- भारत ने IUCN विश्व संरक्षण सम्मेलन 2025 (Abu Dhabi) में राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और Vision 2025-2030 लॉन्च किया।
मुख्य उद्देश्य और विजन 2025–2030
विज़न 2025-2030 भारत में जैव विविधता प्रबंधन के लिए एक मज़बूत वैज्ञानिक आधार स्थापित करने पर केंद्रित है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. संकटग्रस्त प्रजातियों पर एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना।
2. भारत के संरक्षण ढांचे को आईयूसीएन की रेड लिस्ट पद्धति के साथ संरेखित करना।
3. व्यवस्थित प्रजाति मूल्यांकन के लिए संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच क्षमता निर्माण।
4. राष्ट्रीय संरक्षण योजना में जैव विविधता डेटा का एकीकरण सुनिश्चित करना।
5. संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
6.भारत की जैव विविधता (flora & fauna) की स्थिति का मूल्यांकन (assessment), निगरानी (monitoring), और संरक्षण (conservation) को वैज्ञानिक एवं समन्वित ढंग से आगे बढ़ाने की दिशा में है।
पहल का महत्व
1. साक्ष्य-आधारित संरक्षण: प्रजातियों की स्थिति पर महत्वपूर्ण डेटा अंतराल को भरकर नीति-निर्माण को मजबूत करता है।
2. जैव विविधता समृद्धि: भारत में लगभग 104,000 जीव-जंतु प्रजातियां और 18,000 पुष्पीय पौधे पाए जाते हैं, जिनमें से 28% पौधे और 30% जीव-जंतु स्थानिक हैं।
3. प्रजातियों को प्राथमिकता देना: विलुप्त होने के खतरे वाली प्रजातियों की पहचान करने और संरक्षण प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
4. संसाधन आवंटन: आवास पुनर्स्थापन और संरक्षण के लिए धन और प्रयासों के प्रभावी उपयोग का मार्गदर्शन करना।
5. वैश्विक रिपोर्टिंग: जैव विविधता पर कन्वेंशन (सीबीडी) के तहत भारत के रिपोर्टिंग दायित्वों को सुगम बनाता है।
6. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ: 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकने के लिए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (केएमजीबीएफ) के अंतर्गत लक्ष्यों का समर्थन करता है।
कानूनी और संस्थागत ढांचा
- भारत की जैव विविधता संरक्षण को एक मजबूत कानूनी ढांचे का समर्थन प्राप्त है, जिसमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित) शामिल है,
- जो सीआईटीईएस परिशिष्ट, जैविक विविधता अधिनियम, 2002 और वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत सूचीबद्ध प्रजातियों को संरक्षण प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय रेड लिस्ट पहल, प्रजातियों के रुझानों और संरक्षण नीतियों की प्रभावशीलता की निगरानी के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आधार प्रदान करके इन प्रयासों का पूरक है।
- यह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में एक ज़िम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को भी मज़बूत करती है।
वैश्विक संदर्भ और प्रासंगिकता
- विश्व स्तर पर, प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का आकलन करने के लिए IUCN रेड लिस्ट को स्वर्ण मानक माना जाता है।
- दुनिया भर में मूल्यांकन की गई 1,63,000 से ज़्यादा प्रजातियों में से लगभग 28% विलुप्त होने के खतरे में हैं।
- भारत की राष्ट्रीय रेड लिस्ट पहल इन वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है और अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण समुदाय को बहुमूल्य आँकड़े प्रदान करती है।
यह कदम भारत को जैव विविधता निगरानी में एक क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित करता है - एशिया और अफ्रीका के अन्य विकासशील देशों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है, जो जैव विविधता दस्तावेजीकरण और संरक्षण योजना में समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
- ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ZSI) और बोटैनिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (BSI) द्वारा तैयार किया गया है, IUCN-India तथा Centre for Species Survival के सहयोग से।
आगे की चुनौतियां :
1. डेटा अंतराल: कई प्रजातियां, विशेषकर कम ज्ञात प्रजातियां, सीमित वर्गीकरण संबंधी जानकारी के कारण कम मूल्यांकित की गई हैं।
2. क्षेत्र सर्वेक्षण सीमाएँ:अपर्याप्त क्षेत्र सर्वेक्षण प्रजातियों की आबादी और प्रवृत्तियों के सटीक आकलन में बाधा डालते हैं।
3. निगरानी अवसंरचना: मजबूत निगरानी प्रणालियों की कमी से जैव विविधता की वास्तविक समय पर निगरानी कम हो जाती है।
4. संस्थागत समन्वय: प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न केन्द्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता है।
5. वित्तपोषण संबंधी बाधाएं: सीमित वित्तीय संसाधन बड़े पैमाने पर जैव विविधता आकलन और संरक्षण परियोजनाओं को प्रतिबंधित करते हैं।
6. मानव संसाधन की कमी: सर्वेक्षण, डेटा संग्रहण और विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित कार्मिकों की कमी।
7. लक्ष्य संरेखण: केएमजीबीएफ के अंतर्गत 2030 जैव विविधता लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान करना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष :
- राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विज़न 2025-2030 भारत की संरक्षण यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है।
- यह विज्ञान-आधारित, आँकड़ों पर आधारित और वैश्विक रूप से समन्वित जैव विविधता प्रशासन की ओर देश के बदलाव का प्रतीक है।
- प्रजातियों के आकलन को प्राथमिकता देकर और नीति-निर्माण में संरक्षण विज्ञान को एकीकृत करके, भारत पर्यावरण संरक्षण में अपने नेतृत्व को सुदृढ़ कर रहा है।
- चूंकि जैव विविधता पर आवास की हानि, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण दबाव बढ़ रहा है, इसलिए यह पहल राष्ट्रीय और वैश्विक स्थिरता प्रयासों के लिए आधारशिला का काम करेगी
- यह सुनिश्चित करेगी कि भारत की समृद्ध प्राकृतिक विरासत भावी पीढ़ियों के लिए भी फलती-फूलती रहे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. भारत के राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विजन 2025-2030 के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका लक्ष्य 2030 तक वनस्पतियों और जीवों के लिए राष्ट्रीय रेड डाटा पुस्तकें प्रकाशित करना है।
2. यह पहल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ZSI, BSI और IUCN के समन्वय से कार्यान्वित की जाती है।
3. यह केवल जैव विविधता पर कन्वेंशन (सीबीडी) के तहत वैश्विक रिपोर्टिंग पर केंद्रित है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2, और 3
उत्तर: A
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. जैव विविधता संरक्षण को मज़बूत करने में भारत के राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विज़न 2025-2030 के महत्व पर चर्चा कीजिए। इसके उद्देश्यों, वैश्विक प्रासंगिकता और चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
- भारत में सार्वभौमिक दिव्यांगता समावेशन का पुनर्गठन मॉडल - February 10, 2026
- भारत-मलेशिया संबंध : व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम - February 10, 2026
- दसवीं अनुसूची : दल-बदल विरोधी कानून - February 9, 2026

No Comments