भारत की जनगणना 2027 (India Census 2027)

भारत की जनगणना 2027 (India Census 2027)

भारत की जनगणना 2027 : डिजिटल युग में जनसंख्या आंकड़ों की नई रूपरेखा

    पाठ्यक्रम : जीएस 1-  सामाजिक मुद्दे

परिचय : 

  • भारत की 2027 की जनगणना देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्मार्टफोन ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए डेटा संग्रह होगा, जिससे प्रक्रिया तेज़, सटीक और पारदर्शी बनेगी; इसमें पहली बार एससी/एसटी के अलावा अन्य जातियों की गणना भी शामिल होगी और यह दो चरणों में (अप्रैल 2026 से शुरू होकर) होगी, जिसका लक्ष्य आधुनिक तकनीक से देश के सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रोफाइल को समझना है, ताकि बेहतर नीति-निर्माण हो सके।
  • जनगणना किसी भी देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया की रीढ़ होती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में जनसंख्या के सटीक, अद्यतन और सूक्ष्म स्तर के आंकड़े सामाजिक न्याय, संसाधन वितरण और समावेशी विकास के लिए अनिवार्य हैं।
  • 13 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारत की जनगणना 2027 को मंजूरी प्रदान की गई। यह देश की 16वीं जनगणना तथा स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी। कोविड-19 के कारण स्थगित 2021 की जनगणना के बाद यह अभ्यास नीति-निर्माण में उत्पन्न डेटा-अंतर को भरने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

भारत में जनगणना : ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में जनगणना की परंपरा औपनिवेशिक काल से प्रारंभ होती है।
1872: पहली गैर-समकालिक जनगणना
1881: पहली समकालिक जनगणना
1951: स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना
वैधानिक आधार: जनगणना अधिनियम, 1948
आयोजक संस्था: गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत का रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय
पिछली जनगणना: 2011 (जनसंख्या ~121 करोड़)
2021 की जनगणना स्थगित होने से कई कल्याणकारी योजनाएं पुराने आंकड़ों पर आधारित रहीं, जिससे लक्ष्य निर्धारण और संसाधन आवंटन प्रभावित हुआ।

जनगणना 2027 के मुख्य विवरण

 चरणबद्ध संचालन : जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:
1. प्रथम चरण (अप्रैल–सितंबर 2026)
मकान सूचीकरण एवं आवास गणना
घरों की संख्या, आवासीय स्थिति, मूलभूत सुविधाएं

2. द्वितीय चरण (फरवरी 2027) :
 जनसंख्या प्रगणना
आयु, लिंग, साक्षरता, धर्म, सामाजिक-आर्थिक विवरण

जनगणना 2027 की प्रमुख विशेषताएं:

पूर्णतः डिजिटल: मोबाइल ऐप (Android/iOS) और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा कलेक्शन, कागज़-आधारित फॉर्म खत्म।

दो-चरणीय प्रक्रिया:
चरण 1 (हाउसलिस्टिंग): अप्रैल से सितंबर 2026 तक घरों और सुविधाओं की जानकारी।
चरण 2 (जनगणना): फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना।
जाति गणना: स्वतंत्रता के बाद पहली बार अनुसूचित जातियों (SC) और जनजातियों (ST) के अलावा अन्य जातियों का डेटा भी एकत्र किया जाएगा (1931 के बाद)।
तकनीकी नवाचार: GPS एकीकरण, जियो-टैगिंग, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए CMMS पोर्टल, और डेटा सुरक्षा पर ज़ोर (DPDP Act के अनुरूप)।
स्व-गणना विकल्प: लोग NPR अपडेट के दौरान ऑनलाइन खुद भी जानकारी भर सकेंगे।
व्यापक कवरेज: लगभग 35 लाख फील्ड फंक्शनरी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बजट: ₹11,718.24 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

1. भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना
मोबाइल एप्लिकेशन आधारित डेटा संग्रह
कागज-मुक्त, तेज और अधिक सटीक प्रक्रिया
मानवीय त्रुटियों में कमी
2. जातिगत डेटा का संग्रह
जनसंख्या प्रगणना चरण में जातिगत आंकड़े दर्ज किए जाएंगे
सामाजिक न्याय, आरक्षण नीति और लक्षित कल्याण योजनाओं के लिए महत्त्वपूर्ण
3. नई तकनीकी पहल
जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS)
वास्तविक समय निगरानी
फील्ड-स्तरीय प्रगति की ट्रैकिंग
सेंसस-एज़-ए-सर्विस (CaaS)
मंत्रालयों को मशीन-रीडेबल और एक्शन-ओरिएंटेड डेटा
डेटा-आधारित शासन को बढ़ावा
4. नागरिक सहभागिता
स्व-प्रगणना (Self-Enumeration) का विकल्प
ई-गवर्नेंस और जनभागीदारी को प्रोत्साहन
जनगणना 2027 का महत्व और नीतिगत प्रभाव
सामाजिक क्षेत्र:शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला एवं बाल विकास योजनाओं की बेहतर योजना
आर्थिक क्षेत्र:श्रमबल, बेरोजगारी, जनसंख्या लाभांश का आकलन
सामाजिक न्याय: जातिगत आंकड़ों से पिछड़े वर्गों की सटीक पहचान

लक्षित आरक्षण और सब्सिडी नीति

SDGs की प्राप्ति: गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, समावेशी विकास
संघवाद पर प्रभाव:वित्त आयोग, परिसीमन और संसाधन बंटवारे में उपयोग

प्रमुख चुनौतियां :

महत्व (Significance):
नीति निर्माण: लक्षित सामाजिक-आर्थिक नीतियों और योजनाओं के लिए सटीक डेटा प्रदान करना (जैसे कौशल विकास, आपदा प्रबंधन)।
आधुनिक शासन: डिजिटल इंडिया के तहत गवर्नेंस में बड़ा कदम।
परिसीमन: लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का आधार बनेगा।
डिजिटल डिवाइड: दूरदराज के इलाकों और डिजिटल रूप से कम साक्षर आबादी तक पहुंचना।
प्रशिक्षण: फील्ड स्टाफ को ऐप के इस्तेमाल की अच्छी ट्रेनिंग देना।

डिजिटल डिवाइड – ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच
डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा
स्व-प्रगणना में डेटा की प्रामाणिकता : जातिगत डेटा से उत्पन्न राजनीतिक संवेदनशीलता

समाधान और आगे की राह

  • व्यापक जनजागरूकता अभियान
  • फील्ड कर्मियों का तकनीकी प्रशिक्षण
  • मजबूत डेटा सुरक्षा ढांचा
  • पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु CMMS का प्रभावी उपयोग

निष्कर्ष :

जनगणना 2027 भारत में डिजिटल गवर्नेंस, सामाजिक समावेशन और डेटा-आधारित नीति-निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि इसे समावेशी, सुरक्षित और समयबद्ध ढंग से लागू किया गया, तो यह भारत के विकास पथ को अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बना सकती है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.भारत की जनगणना 2027 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी।
2.जनसंख्या प्रगणना चरण में जातिगत डेटा भी एकत्र किया जाएगा।
3.जनगणना अधिनियम, 1951 इसके संचालन का वैधानिक आधार प्रदान करता है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2 केवल
(b) 2 और 3 केवल
(c) 1 और 3 केवल
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q.भारत की जनगणना 2027 की डिजिटल विशेषताओं एवं जातिगत डेटा संग्रह के महत्व का विश्लेषण कीजिए। यह प्रक्रिया सामाजिक-आर्थिक नीति-निर्माण को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है? (250 शब्द)

 

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