19 Sep भारत की परमाणु आपूर्ति शृंखला का सशक्तिकरण : सशक्त भारत – सुरक्षित भविष्य
सामान्य अध्ययन – 3 – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – के अंतर्गत – प्रारंभिक परीक्षा के लिए – भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL), लाइट वॉटर रिएक्टर (LWR), स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर, दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB)
मुख्य परीक्षा के लिए – भारत के विकास में परमाणु ऊर्जा की भूमिका, परमाणु क्षेत्र के आधुनिकीकरण की चुनौतियाँ तथा उनके समाधान हेतु आवश्यक सुधारों पर चर्चा कीजिए।
खबरों में क्यों?
- हाल ही में भारत अपने असैन्य परमाणु क्षेत्र में व्यापक कानूनी सुधारों की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
- भारत द्वारा किए जा रहे इन सुधारों का उद्देश्य नियंत्रित निजी एवं विदेशी निवेश को अनुमति देना, आपूर्तिकर्ता दायित्व से जुड़ी जटिलताओं का समाधान करना तथा वैश्विक मानदंडों के अनुरूप संरचना विकसित करना है।
- इस पहल के केंद्र में लाइट वॉटर रिएक्टर (LWR) और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से कम-कार्बन परमाणु क्षमता का विस्तार करना शामिल है।
परमाणु ऊर्जा : एक परिचय
परमाणु ऊर्जा वह शक्ति है जो परमाणुओं के केंद्र (नाभिक) से निकलती है। यह ऊर्जा दो प्रक्रियाओं से प्राप्त की जा सकती है—
- विखंडन ( फिशन ) : जब भारी परमाणु नाभिक कई छोटे भागों में टूटते हैं।
- संलयन ( फ्यूजन ) : जब हल्के नाभिक आपस में मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं।
यह ऊर्जा उच्च घनत्व और कम-कार्बन वाले स्रोत के रूप में जानी जाती है। परमाणु ऊर्जा न केवल सतत् विकास को गति देती है बल्कि स्थायी “बेस-लोड” बिजली उपलब्ध कराने में भी अहम है।

भारत में परमाणु ऊर्जा की स्थिति :
- भारत की मौजूदा स्थापित परमाणु क्षमता 8.18 गीगावॉट है, जिसे 2031-32 तक 22.48 गीगावॉट और 2047 तक 100 गीगावॉट तक ले जाने की योजना है।
- वर्तमान में 20 से अधिक रिएक्टर सक्रिय हैं, जिन्हें NPCIL संचालित करता है। एक दर्जन से अधिक नए संयंत्रों की परिकल्पना भी की जा चुकी है।
- कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर जैसी परियोजनाएँ भारत की तकनीकी प्रगति का संकेत देती हैं।
- बजट 2025-26 में 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसके अंतर्गत 2033 तक पाँच “भारत स्मॉल रिएक्टर (BSR)” स्थापित करने का लक्ष्य है।
भारत के लिए परमाणु ऊर्जा का महत्त्व :
- विश्वसनीय आपूर्ति : परमाणु संयंत्र लगातार बिजली देते हैं, जिससे बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है।
- दूरस्थ क्षेत्रों के लिए समाधान : SMR और माइक्रोरिएक्टर पारंपरिक ग्रिड से दूर क्षेत्रों में स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा सकते हैं।
- आपदा-प्रबंधन क्षमता : प्राकृतिक या भू-राजनीतिक व्यवधानों में भी स्थिर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित रहती है।
- नेट-ज़ीरो लक्ष्य : यह भारत का जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाकर वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने में सहायक है।
- औद्योगिक सहयोग : इस्पात, सीमेंट और डेटा सेंटर जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए भरोसेमंद आपूर्ति में सहायक है।
- रणनीतिक आत्मनिर्भरता : स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर जैसी उपलब्धियाँ तकनीकी स्वतंत्रता को बढ़ावा देती हैं।
भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण की प्रमुख चुनौतियाँ :
- आपूर्ति शृंखला व गुणवत्ता : भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला और गुणवत्ता से जुड़ी चुनौती यह है कि मध्यम और निम्न श्रेणी के आपूर्तिकर्ताओं में मानकों और क्षमता की गंभीर कमी है।
- गुणवत्ता आश्वासन (QA) : गुणवत्ता आश्वासन (QA) के क्षेत्र में प्रशिक्षित और योग्य पेशेवरों की कमी परियोजनाओं में बार-बार विलंब और रुकावट उत्पन्न करती है।
- साइबर सुरक्षा : साइबर सुरक्षा एक गंभीर खतरा है, क्योंकि संवेदनशील संयंत्र डेटा साइबर हमलों और रैंसमवेयर के निशाने पर रहता है।
- नियामक अड़चनें : नियामक अड़चनों की वजह से AERB और NPCIL के बीच समन्वय का अभाव परियोजनाओं के कार्यान्वयन को जटिल बना देता है।
- स्वदेशीकरण की सीमाएँ : स्वदेशीकरण की सीमाएँ भी स्पष्ट हैं, विशेषकर नियंत्रण और उपकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमता अभी अपर्याप्त है।
- कानूनी ढाँचे की बाधा : कानूनी ढाँचे की बाधाएँ भी बड़ी चुनौती हैं, क्योंकि 1962 का अधिनियम निजी भागीदारी को रोकता है और अस्पष्ट बीमा नियम व देयता की परिभाषाएँ निवेशकों के लिए जोखिमपूर्ण साबित होती हैं।
सुधार की राह / समाधान की दिशा :
- आपूर्ति शृंखला मज़बूत करना : आपूर्ति शृंखला को मज़बूत बनाने के लिए मध्यम और निम्न श्रेणी के आपूर्तिकर्ताओं हेतु गुणवत्ता उन्नयन कार्यक्रम लागू किए जाने चाहिए तथा नए विक्रेताओं का विकास किया जाना चाहिए।
- गुणवत्ता प्रबंधन : गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए योग्य QA विशेषज्ञों की नियुक्ति की जानी चाहिए, साथ ही थर्ड-पार्टी निरीक्षण और स्थलों पर स्थायी QA टीम की व्यवस्था भी आवश्यक है।
- साइबर सुरक्षा : साइबर सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए संयंत्रों और आपूर्तिकर्ताओं दोनों को शामिल करते हुए एक उन्नत और एकीकृत सुरक्षा ढाँचा तैयार करना होगा।
- कानूनी सुधार : कानूनी सुधारों के अंतर्गत विद्युत अधिनियम, परमाणु ऊर्जा अधिनियम और नागरिक दायित्व कानून में संशोधन कर निवेशकों के लिए आकर्षक और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सकता है।
- रणनीतिक प्रौद्योगिकी विकास : रणनीतिक प्रौद्योगिकी विकास को गति देने के लिए स्वदेशी SMR रणनीति को स्पष्ट समयसीमा के साथ लागू करना अनिवार्य है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा : वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की स्थिति को मज़बूत करने के लिए निर्यात को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष :
- भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र न केवल ऊर्जा सुरक्षा का आधार है, बल्कि औद्योगिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता का भी प्रमुख स्तंभ है। आपूर्ति शृंखला को मज़बूत करने, उच्च गुणवत्ता और साइबर सुरक्षा मानकों को लागू करने तथा स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक को आगे बढ़ाने से यह क्षेत्र घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में भी भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेगा। इन पहलों से देश एक स्थायी, लचीली और निम्न-कार्बन ऊर्जा व्यवस्था की ओर अग्रसर होगा, जो न केवल भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करेगी बल्कि यह एक मज़बूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी बढ़ावा देगी।
स्रोत – पी. आई. बी एवं इंडियन एक्सप्रेस।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत की वर्तमान और भविष्य की परमाणु ऊर्जा स्थिति के संदर्भ में कौन-से कथन सही हैं?
- मौजूदा स्थापित क्षमता 8.18 गीगावॉट है।
- वर्ष 2047 तक क्षमता को 100 गीगावॉट तक ले जाने की योजना है।
- भारत केवल विदेशी रिएक्टर तकनीकों पर निर्भर है, स्वदेशी परियोजनाएँ नहीं हैं।
- बजट 2025-26 में पाँच “भारत स्मॉल रिएक्टर (BSR)” की योजना बनाई गई है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए :
A. केवल 1, 2 और 3
B. केवल 1, 2 और 4
C. इनमें से कोई नहीं।
D. उपरोक्त सभी।
उत्तर – B
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र में हालिया कानूनी सुधारों, उनकी आवश्यकता, मौजूदा चुनौतियों और समाधान की दिशा पर चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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