31 Dec भारत की संतुलित अर्थव्यवस्था 2025 : उच्च विकास, रोज़गार सृजन और मूल्य स्थिरता
भारत की संतुलित अर्थव्यवस्था 2025 : उच्च विकास, रोज़गार सृजन और मूल्य स्थिरता
पाठ्यक्रम : जीएस 3- भारतीय अर्थव्यवस्था
परिचय :
- भारत, विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक, वर्ष 2025 में अपनी आर्थिक मजबूती का एक नया अध्याय लिख रहा है। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक उच्च मध्य-आय अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर भारत ने 2025 में उच्च विकास दर, नियंत्रित मुद्रास्फीति, घटती बेरोजगारी और मजबूत निर्यात प्रदर्शन के माध्यम से वैश्विक पटल पर अपनी स्थिति को और सुदृढ़ किया है।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की रिपोर्ट के अनुसार, 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और 2030 तक जर्मनी को तीसरे स्थान से हटाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। भारत की इस आर्थिक प्रगति का विश्लेषण करता है, जिसमें विकास, स्थिरता और आत्मविश्वास के तीन आधार स्तंभों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

विकास की गति: उच्च वृद्धि दर का दौर
वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही के 7.8 प्रतिशत और 2024-25 की चौथी तिमाही के 7.4 प्रतिशत से अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग, निजी खपत, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के उछाल से प्रेरित है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।
इस विकास की पृष्ठभूमि में कई कारक कार्यरत हैं:
घरेलू कारक: सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता, आयकर और जीएसटी का सरलीकरण, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी तथा कम मुद्रास्फीति से अनुकूल मौद्रिक स्थितियाँ।
बाहरी कारक: सेवा निर्यात की मजबूती और व्यापार समझौतों का शीघ्र निष्पादन।
संरचनात्मक सुधार: कृषि की बेहतर संभावनाएँ, कॉर्पोरेट बैलेंस शीट की मजबूती और जीएसटी के निरंतर प्रभाव।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की यह गति “गोल्डीलॉक्स पीरियड” का प्रतीक है, जहाँ उच्च विकास और कम मुद्रास्फीति का अनूठा संतुलन है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ जैसे IMF, विश्व बैंक, मूडीज, OECD, S&P और ADB ने 2025-27 के लिए भारत की वृद्धि दर को 6.2 से 7.4 प्रतिशत के बीच अनुमानित किया है, जो G-20 देशों में सर्वाधिक है। यह विकास मॉडल अमृतकाल (2047 तक विकसित भारत) की दृष्टि से जुड़ा है, जहाँ सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने पर जोर है।
बेरोजगारी में कमी: युवा शक्ति का दोहन
भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (लगभग 26 प्रतिशत जनसंख्या 10-24 वर्ष की आयु वर्ग में) को रोजगार के माध्यम से उत्पादक बनाने में 2025 एक मील का पत्थर साबित हुआ है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, नवंबर 2025 में बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2025 (5.1 प्रतिशत) के बाद सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट मुख्य रूप से महिलाओं की बेरोजगारी में कमी (शहरी: 9.7 से 9.3 प्रतिशत; ग्रामीण: 4.0 से 3.4 प्रतिशत) से प्रेरित है। ग्रामीण बेरोजगारी 3.9 प्रतिशत और शहरी 6.5 प्रतिशत पर पहुँच गई है।
अन्य संकेतक भी सकारात्मक हैं:
श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): नवंबर 2025 में 55.8 प्रतिशत (सात महीने का उच्चतम)।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR): 53.2 प्रतिशत (अक्टूबर में 52.5 प्रतिशत से सुधार)।
यह ग्रामीण रोजगार वृद्धि, महिलाओं की भागीदारी और शहरी मांग से समर्थित है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का यह तालमेल फिलिप्स कर्व के सिद्धांत को साकार करता है, जहाँ उच्च विकास से श्रम मांग बढ़ती है। यह विषय स्किल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और जनसांख्यिकीय लाभांश की चुनौतियों (जैसे असंगठित क्षेत्र में रोजगार) से जुड़ा है।
मुद्रास्फीति का नियंत्रण: स्थिरता का आधार
2025 में मुद्रास्फीति में अभूतपूर्व कमी देखी गई। जनवरी में 4.26 प्रतिशत पर शुरू हुई सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर तक 0.71 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य (2-6 प्रतिशत बैंड) के नीचे है। RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 2.6 से घटाकर 2.0 प्रतिशत कर दिया। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) भी नवंबर में -0.32 प्रतिशत पर रहा।
इस कमी के कारण: खाद्य कीमतों में गिरावट।
अनुकूल मौद्रिक नीति (रेपो दर 5.25 प्रतिशत पर घटाई गई)।
इन्फ्लेशन-टारगेटिंग फ्रेमवर्क की सफलता। यह स्थिति विकास को सहारा देती है, क्योंकि कम मुद्रास्फीति से क्रय शक्ति बढ़ती है। UPSC के दृष्टिकोण से, यह मौद्रिक नीति, फिस्कल डेफिसिट और वैश्विक कमोडिटी कीमतों (जैसे तेल) से जुड़े मुद्दों को छूता है।
निर्यात और बाहरी क्षेत्र: वैश्विक एकीकरण
- 2025 में मर्चेंडाइज निर्यात जनवरी के 36.43 बिलियन डॉलर से नवंबर में 38.13 बिलियन डॉलर तक बढ़ा, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और पेट्रोलियम जैसे क्षेत्रों की 10-64 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई।
- सेवा निर्यात 8.65 प्रतिशत बढ़कर 270.06 बिलियन डॉलर हुआ। चालू खाता घाटा (CAD) 2.2 से घटकर 1.3 प्रतिशत रह गया, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 686.2 बिलियन डॉलर पर पहुँचा। FDI में 127.6 प्रतिशत वृद्धि (शुद्ध 7.7 बिलियन डॉलर) और रेमिटेंस में 10.7 प्रतिशत बढ़ोतरी ने बाहरी स्थिरता सुनिश्चित की।
- व्यापार समझौते (UK, ओमान, न्यूजीलैंड) और विविधीकरण (चीन, यूएई आदि) ने योगदान दिया। यह PLI स्कीम, मेक इन इंडिया और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से संबंधित है।
चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा :
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम
कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
असमान क्षेत्रीय विकास व कौशल असमानता
वित्तीय अनुशासन और उत्पादक रोजगार की जरूरत
निष्कर्ष:
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में उभरा है। उच्च आर्थिक विकास दर, घटती बेरोज़गारी, नियंत्रित मुद्रास्फीति तथा बढ़ते निर्यात ने एक संतुलित और स्थिर विकास मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितताओं के बावजूद प्राप्त किया गया है। 2025 भारत के आर्थिक इतिहास में टर्निंग प्वाइंट के रूप में उभर रहा है। उच्च विकास, नियंत्रित मुद्रास्फीति, कम बेरोजगारी और बढ़ते निर्यात ने भारत को संतुलित आर्थिक विकास मॉडल का वैश्विक उदाहरण बनाया है। यह प्रगति भारत को आत्मनिर्भर विकास और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के और करीब ले जाती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 2025 में भारत की आर्थिक स्थिति के संदर्भ में सही नहीं है?
(a) वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही।
(b) नवंबर 2025 में बेरोजगारी दर 4.7 प्रतिशत पर पहुँच गई।
(c) सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर 2025 में 0.71 प्रतिशत रही।
(d) विदेशी मुद्रा भंडार 686.2 बिलियन डॉलर से कम हो गया।
उत्तर: (d)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.”2025 में भारत की अर्थव्यवस्था उच्च विकास और नियंत्रित मुद्रास्फीति के अनूठे संतुलन का प्रतीक बनी है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए तथा बेरोजगारी, निर्यात और बाहरी क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डालिए। साथ ही, 2047 तक विकसित भारत बनने की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
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