10 Oct भारत – ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंध : रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए आयाम
पाठ्यक्रम – मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र – 2 – के ‘ अंतर्राष्ट्रीय संबंध ’ के अंतर्गत – ‘ भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और समझौते ’ से संबंधित।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए – व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) और संबंधित रक्षा, व्यापार और संपर्क पहलों के तहत भारत-ब्रिटेन का हालिया द्विपक्षीय संबंध का महत्व।
मुख्य परीक्षा के लिए – नए व्यापार और रक्षा ढाँचे के अंतर्गत सामरिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भारत-ब्रिटेन संबंध।
खबरों में क्यों ?

- हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) की अक्टूबर 2025 में हुई भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा दी है। यह उनकी प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जिसके दौरान भारत और ब्रिटेन ने व्यापार, रक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, और सांस्कृतिक सहयोग को सशक्त करने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण था – व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (CETA – Comprehensive Economic and Trade Agreement), जिसके माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को औपचारिक और ठोस स्वरूप मिला। इसके अतिरिक्त, £350 मिलियन पाउंड के मिसाइल सौदे ने रक्षा सहयोग को नई मजबूती प्रदान की है।
भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य :
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की यात्रा का उद्देश्य केवल औपचारिक कूटनीतिक संवाद नहीं था, बल्कि यह व्यावहारिक सहयोग (Action-Oriented Partnership) की दिशा में एक ठोस कदम था। ब्रिटेन की 125 सदस्यीय उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने इस यात्रा को “सबसे बड़ी यूके ट्रेड मिशन” का दर्जा दिया है। इस प्रतिनिधिमंडल में विश्व की प्रसिद्ध कंपनियाँ जैसे Rolls-Royce, British Airways, BT, Diageo और London Stock Exchange Group शामिल थीं।
यात्रा की प्रमुख विशेषताएँ :
- सबसे बड़ा ब्रिटिश व्यापार मिशन : भारत में ब्रिटेन का अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल पहुँचा — 125 सदस्यीय टीम जिसमें शीर्ष औद्योगिक समूहों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल थे। मुंबई में आयोजित बैठकों में निवेश, विनिर्माण, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में साझेदारी पर गहन चर्चा हुई।
- भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) : जुलाई 2025 में संपन्न व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (CETA – Comprehensive Economic and Trade Agreement) को दोनों देशों ने “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार बाधाओं को घटाने, निवेश को सुगम बनाने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्य बिंदु :
- भारत ने ब्रिटिश वस्तुओं पर औसत टैरिफ 15% से घटाकर 3% कर दिया।
- कस्टम प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाया गया।
डिजिटल व्यापार के लिए विशेष प्लेटफॉर्म और समर्थन चैनल शुरू किए गए ताकि MSMEs को लाभ मिल सके।
क्षेत्रीय लाभ :
- व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर तुरंत 75% किया गया, जो अगले 10 वर्षों में 40% तक कम होगा।
- सॉफ्ट ड्रिंक, कॉस्मेटिक, ऑटोमोबाइल और मेडिकल उपकरण क्षेत्रों में बाजार पहुँच आसान होगी।
- छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को डिजिटल व्यापार और निर्यात चैनलों से नई गति मिलेगी।
आर्थिक प्रभाव :
- ब्रिटेन की GDP में £4.8 बिलियन प्रति वर्ष की वृद्धि का अनुमान।
- भारत को निर्यात में 60% की वृद्धि होने की संभावना।
- ब्रिटेन में £2.2 बिलियन अतिरिक्त वेतन और नई नौकरियों के अवसर उत्पन्न होंगे।
- भारत में भी निवेश और रोजगार सृजन के नए अवसर बनेंगे, विशेषकर विनिर्माण और हरित प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग :
- वायु रक्षा क्षमता को बढ़ावा : £350 मिलियन का मिसाइल सौदा भारत की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा।
- समुद्री सुरक्षा सहयोग (Maritime Security Cooperation) के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और संयुक्त अभ्यासों को बढ़ावा मिलेगा।
- रक्षा अनुसंधान और सह-उत्पादन (Co-production) के लिए संयुक्त परियोजनाओं पर सहमति बनी।
- संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और सैन्य शिक्षा साझेदारी : दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और सैन्य शिक्षा साझेदारी को भी सुदृढ़ किया गया।
- दिल्ली–लंदन के बीच तीसरी दैनिक उड़ान शुरू करने की घोषणा : व्यापार के साथ-साथ दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है और इसके साथ ही साथ , British Airways ने 2026 तक दिल्ली–लंदन के बीच तीसरी दैनिक उड़ान शुरू करने की घोषणा की, जिससे व्यापार और पर्यटन संबंध और गहरे होंगे।
भारत – ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंध को मजबूत करने के संदर्भ में शीर्ष नेतृत्व के मुख्य वक्तव्य:
- प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा — “ यह व्यापार समझौता विकास का लॉन्चपैड है। भारत हमारे लिए न केवल एक आर्थिक साझेदार है, बल्कि एक रणनीतिक सहयोगी भी है जो वैश्विक संतुलन में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।”
- ब्रिटिश व्यापार सचिव पीटर काइल ने कहा — “यह समझौता ब्रिटिश व्यवसायों को भारत के तेजी से बढ़ते बाजार तक प्राथमिक पहुँच प्रदान करेगा।”
- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि – “ यह साझेदारी भारत-यूके रोडमैप 2030 को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।”
भारत के लिए ब्रिटेन का महत्व :
- रणनीतिक साझेदार : ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (P5) और G7 दोनों का सदस्य है। यह भारत की वैश्विक आकांक्षाओं और बहुपक्षीय कूटनीति में सहयोग करता है।
- निवेश और व्यापार केंद्र : ब्रिटेन भारत में वित्तीय सेवाएँ, हरित ऊर्जा, फिनटेक और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अग्रणी निवेशक है।
- अनुसंधान और तकनीकी / प्रौद्योगिकी सहयोग : ब्रिटिश विश्वविद्यालयों और भारत के संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ औषधि, जैव-प्रौद्योगिकी और AI क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावशाली रही हैं।
- शिक्षा और रोजगार के अवसर : ब्रिटेन भारतीय छात्रों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। साथ ही, भारतीय पेशेवर ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में आईटी, स्वास्थ्य सेवा और बैंकिंग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
- यूरोप और वैश्विक वित्त का द्वार : ब्रेक्सिट के बाद भी लंदन वैश्विक वित्तीय केंद्र बना हुआ है, जो भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में प्रवेश का मार्ग प्रदान करता है।
ब्रिटेन के लिए भारत का महत्व :
- आर्थिक विकास साझेदार : भारत विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह ब्रिटेन के लिए निवेश, व्यापार और सेवा क्षेत्र में विशाल अवसर प्रदान करता है।
- इंडो-पैसिफिक रणनीतिक सहयोगी : भारत की भौगोलिक और सामरिक स्थिति ब्रिटेन के इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों देश क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और मुक्त नौवहन (Free Navigation) को सुनिश्चित करने में सहयोगी हैं।
- तकनीकी नवाचार का केंद्र : भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप पारिस्थितिकी ब्रिटेन की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को पूरक करती है।
- कुशल मानव संसाधन : भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और वित्तीय विशेषज्ञ ब्रिटिश अर्थव्यवस्था की श्रम कमी को पूरा कर रहे हैं।
- सांस्कृतिक और प्रवासी सेतु : यूके में लगभग 18 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समझ और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।
समाधान / आगे की राह :

- भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और व्यापार विविधीकरण : दोनों पक्षों को भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वार्ता को शीघ्रता से अंतिम रूप देना चाहिए, विशेष रूप से सेवाओं और निवेश संरक्षण जैसे शेष विवादास्पद मुद्दों को हल करके, व्यापार को पारंपरिक क्षेत्रों से परे ग्रीन एनर्जी, स्वास्थ्य सेवा, और फिनटेक जैसे उभरते क्षेत्रों में विविधता प्रदान करनी चाहिए।
- रक्षा और सुरक्षा साझेदारी का गहराव : रक्षा सहयोग को केवल खरीद-बिक्री तक सीमित न रखकर संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D), सह-उत्पादन (Co-production), और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके साथ ही दोनों देशों को समुद्री सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना चाहिए।
- उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त नवाचार निधि (Joint Innovation Funds) स्थापित करना चाहिए। इसके साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में भारत के अनुभव का लाभ उठाना और इसे यूके के साथ साझा करना चाहिए।
- जलवायु और ऊर्जा सहयोग : जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हरित हाइड्रोजन, सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश और प्रौद्योगिकी साझाकरण को बढ़ावा देना और दोनों ही देशों को जलवायु वित्त जुटाने के लिए वैश्विक मंचों पर सहयोग करना चाहिए।
- लोगों से लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाना : वीज़ा और आप्रवासन नीतियों को लचीला बनाना, ताकि छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों की आवाजाही आसान हो सके। यंग प्रोफेशनल्स स्कीम के दायरे और कोटे का विस्तार करना चाहिए। इसके साथ ही सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रवासी भारतीयों के साथ रचनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देना चाहिए।
- राजनीतिक संवाद को मजबूत करना : उच्च-स्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को नियमित बनाना ताकि संवेदनशीलता और विवाद के मुद्दों (जैसे खालिस्तानी अतिवाद) को विश्वास और पारदर्शिता के माहौल में संबोधित किया जा सके।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक साझेदारी को मजबूत करना : इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक साझेदारी को और मजबूत बनाना, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
निष्कर्ष :

- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की 2025 की भारत यात्रा भारत–ब्रिटेन संबंधों में एक नए और रणनीतिक युग की शुरुआत का प्रतीक है। इस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को वार्ता से क्रियान्वयन (Negotiation to Action) की दिशा में ठोस रूप से आगे बढ़ाया है।
- व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते (CETA) ने जहां व्यापारिक संबंधों को नई गहराई दी है, वहीं रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और हरित ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग ने इस साझेदारी को बहुआयामी और दीर्घकालिक बनाया है।
- भारत–ब्रिटेन संबंध अब केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित न रहकर आर्थिक विकास, नवाचार, जलवायु उत्तरदायित्व और वैश्विक स्थिरता पर आधारित एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हो रहे हैं।
- “India–UK Roadmap 2030” के अंतर्गत दोनों लोकतंत्र अब एक ऐसे भविष्य की ओर अग्रसर हैं, जो आपसी समृद्धि, तकनीकी प्रगति और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होगा।
- अंततः, यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देती है, बल्कि 21वीं सदी के लिए एक आधुनिक, विकासोन्मुख और टिकाऊ वैश्विक साझेदारी की आधारशिला रखती है, जो दोनों देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को भी अधिक संतुलित और सहयोगपूर्ण बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत-यूके संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :
- भारत और ब्रिटेन व्यापार बढ़ाने हेतु एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता कर रहे हैं।
- यूके-इंडिया टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव (TSI) कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है।
- भारत-यूके “यंग प्रोफेशनल्स स्कीम” बिना किसी प्रतिबंध के श्रमिकों की स्वतंत्र आवाजाही की अनुमति देती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
A. केवल एक
B. केवल दो
C. सभी तीन।
D. इनमें से कोई नहीं।
उत्तर – B
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. “ व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भारत–ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों के महत्व का विश्लेषण कीजिए। इसके साथ ही, भारत–ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों के समक्ष विद्यमान प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और बताइए कि दोनों देश आपसी सहयोग को और अधिक सशक्त एवं परिणामोन्मुख कैसे बना सकते हैं?” ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )
- राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस 2026 - May 6, 2026
- बुद्ध से बुलेट ट्रेन तक : 21वीं सदी में भारत – जापान द्विपक्षीय संबंध - May 5, 2026
- आत्मनिर्भर दलहन मिशन के अंतर्गत बिहार में पहली संरचित दलहन खरीद पहल शुरू - April 28, 2026

No Comments