08 Jan भारत में अवसंरचना सशक्तिकरण: तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन की भूमिका
तीन वर्षीय सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) परियोजना पाइपलाइन : भारत में अवसंरचना विकास की नई दिशा
पाठ्यक्रम : सामान्य अध्ययन-III : भारतीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार,
प्रस्तावना :
- भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और ‘विकसित भारत 2047’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत अवसंरचना का विकास अत्यंत आवश्यक है। सड़क, रेलवे, बंदरगाह, ऊर्जा, शहरी सेवाएं और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत को देखते हुए, भारत सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) को एक प्रमुख माध्यम के रूप में अपनाती जा रही है।
- इसी क्रम में वित्त मंत्रालय ने तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन तैयार की है, जो अवसंरचना विकास में निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पाइपलाइन से उर्वरकों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के प्रभाव को कम करने हेतु सरकार पर बजटीय भार बढ़ेगा, लेकिन इससे किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध होंगे, उत्पादन लागत घटेगी, संतुलित उर्वरीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा तथा रबी फसलों की उत्पादकता और कृषि आय में स्थिरता सुनिश्चित होगी।
- वित्त मंत्रालय ने तीन वर्षीय सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) परियोजना पाइपलाइन तैयार की है, जिसमें सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने के लिए 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 852 परियोजनाएं शामिल हैं।
तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन की प्रमुख विशेषताएँ
- इस पाइपलाइन में ₹17 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की 852 परियोजनाएँ शामिल की गई हैं।
परियोजनाएँ सड़क, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा, शहरी अवसंरचना एवं लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं। - इसका उद्देश्य निवेशकों, विकासकर्ताओं और अन्य हितधारकों को संभावित PPP परियोजनाओं की पूर्व जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे बेहतर योजना एवं निवेश निर्णय ले सकें। यह पहल अवसंरचना विकास में पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और समयबद्धता को बढ़ावा देगी।
- यह पाइपलाइन निवेशकों, विकासकर्ताओं और अन्य हितधारकों को संभावित PPP परियोजनाओं की शुरुआती जानकारी प्रदान करेगी, जिससे वे योजना निर्माण और निवेश संबंधी बेहतर निर्णय ले सकेंगे। परियोजनाएं विभिन्न क्षेत्रों जैसे सड़क, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा, शहरी अवसंरचना एवं लॉजिस्टिक्स में फैली हुई हैं।
- इसका उद्देश्य अवसंरचना विकास में पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और समयबद्धता को बढ़ावा देना है। भारत में बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में मौजूद कमी को दूर करने और सरकार पर राजकोषीय बोझ को कम करने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और एफडीआई प्रोत्साहन जैसी पहलों का उपयोग किया जाता है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) क्या है?
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) सार्वजनिक अवसंरचना या सेवाओं के प्रावधान के लिए सरकार (या सार्वजनिक प्राधिकरण) और निजी क्षेत्रक की एक संस्था के बीच एक दीर्घकालिक संविदात्मक व्यवस्था है। इसमें जोखिम और लाभ का बंटवारा दोनों पक्षों के बीच किया जाता है। PPP में सार्वजनिक अवसंरचना या सेवाओं के लिए सरकार और निजी संस्थाओं के बीच दीर्घकालिक अनुबंध शामिल होते हैं, जिसमें BOT, DBFO, EPC और HAM जैसे मॉडल शामिल हैं। यह मॉडल अवसंरचना वित्त-पोषण अंतराल को समाप्त करने, सरकार पर वित्तीय बोझ कम करने, उन्नत तकनीक और नवाचार तक पहुंच प्रदान करने तथा दक्षता में सुधार करने में सहायक है।
प्रमुख PPP मॉडल :
PPP के विभिन्न मॉडल भारत में अवसंरचना परियोजनाओं को कुशलतापूर्वक क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
निर्माण-परिचालन-हस्तांतरण (BOT – Build Operate Transfer): निजी संस्था एक निश्चित अवधि के लिए सुविधा का वित्त-पोषण, डिजाइन, निर्माण और संचालन करती है। यह उपयोगकर्ता शुल्क के माध्यम से आय अर्जित करती है। बाद में स्वामित्व सार्वजनिक क्षेत्रक को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
डिजाइन-निर्माण-वित्तपोषण-परिचालन (DBFO – Design Build Finance Operate): निजी संस्था डिजाइन से लेकर संचालन तक के पूरे चक्र को संभालती है। सरकार पूर्ण समय स्वामित्व बनाए रखती है और निजी संस्था को सेवा शुल्क या एकत्रित टोल के माध्यम से भुगतान करती है।
अभियांत्रिकी खरीद और निर्माण (EPC – Engineering Procurement Construction): सरकार परियोजना का वित्त-पोषण करती है और प्रबंधन अपने पास रखती है। निजी संस्था केवल डिजाइन और निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदार होती है।
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM – Hybrid Annuity Model): यह EPC और BOT का मिश्रण है। सरकार लागत का 40% हिस्सा किश्तों में देती है। विकासकर्ता शेष 60% जुटाता है और इसे एन्युटी के माध्यम से वसूल करता है।
PPP मॉडल की आवश्यकता और सरकारी पहलें :
भारत को 2030 तक अवसंरचना में अनुमानित $4.5 ट्रिलियन निवेश की आवश्यकता होगी। PPP मॉडल इस वित्त-पोषण अंतराल को पाटने में मदद करता है।
यह सरकार पर राजकोषीय बोझ कम करता है, भौतिक संपत्ति निर्माण का बोझ निजी क्षेत्रक पर डालकर सार्वजनिक कर राजस्व को सामाजिक कल्याण (स्वास्थ्य और शिक्षा) के लिए मुक्त करता है। साथ ही, निजी क्षेत्रक की अत्याधुनिक विशेषज्ञता तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को एकीकृत करता है, जिससे परियोजनाओं का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
सरकार PPP को समर्थन देने के लिए विभिन्न पहलें चला रही है, जैसे:
वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF): आर्थिक रूप से व्यवहार्य लेकिन वित्तीय रूप से कमजोर परियोजनाओं को सरकारी सहायता प्रदान करना।
FDI प्रोत्साहन: अवसंरचना क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करना।
मानकीकृत अनुबंध एवं जोखिम साझाकरण ढांचा: निवेशकों के विश्वास को मजबूत करना।
PPP को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें :
व्यवहार्यता अंतराल वित्त-पोषण योजना (VGF) संचालित की गई है।
भारत अवसंरचना परियोजना विकास कोष (IIPDF) और भारत अवसंरचना वित्त-पोषण कंपनी लिमिटेड की स्थापना की गई है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): अधिकांश क्षेत्रकों में PPP क्षेत्रक के स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) की इक्विटी में स्वचालित मार्ग से 100% FDI की अनुमति दी गई है।
निष्कर्ष :
तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन भारत की अवसंरचना रणनीति में एक महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार का प्रतिनिधित्व करती है। यह न केवल निजी निवेश को आकर्षित करेगी, बल्कि अवसंरचना विकास को गति देकर आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन को भी सुदृढ़ करेगी। पारदर्शी परियोजना पहचान, मजबूत अनुबंध ढांचे और प्रभावी निगरानी के माध्यम से PPP मॉडल भारत को अवसंरचना के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होगा। इस पाइपलाइन से अवसंरचना के विकास में तेजी आएगी, जो अंततः देश की समग्र प्रगति का आधार बनेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. PPP में सरकार और निजी क्षेत्रक के बीच दीर्घकालिक संविदात्मक व्यवस्था होती है।
2. हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में परियोजना लागत का एक भाग सरकार द्वारा अग्रिम रूप से वहन किया जाता है।
3. EPC मॉडल में परियोजना का संपूर्ण वित्त-पोषण निजी क्षेत्रक करता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 1 और 2
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.भारत में अवसंरचना विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के महत्व की विवेचना कीजिए। वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार की गई तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन किस प्रकार निवेश, दक्षता और आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित कर सकती है? (250 शब्द)
Best ias coaching in hindi medium
Best mentorship programme for upsc
- भारत में सार्वभौमिक दिव्यांगता समावेशन का पुनर्गठन मॉडल - February 10, 2026
- भारत-मलेशिया संबंध : व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम - February 10, 2026
- दसवीं अनुसूची : दल-बदल विरोधी कानून - February 9, 2026

No Comments