11 Dec भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) : नीति से नवाचार और समृद्धि तक
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) क्रांति : नीति से नवाचार और समृद्धि तक, भारत की विकास यात्रा में अग्रणी
सामान्य अध्ययन-III : (अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और नवाचार)
प्रिलिम्स के लिए: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0), स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, FDI नीतियां।
मेन्स के लिए: GCCs की भारत की आर्थिक विकास में भूमिका, सरकारी नीतियों का प्रभाव, चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं।
परिचय :

- भारत की आर्थिक विकास यात्रा में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो नीतिगत समर्थन से लेकर समृद्धि की ओर संक्रमण को दर्शाते हैं।
- ये केंद्र, जो वैश्विक कंपनियों की ऑफशोर इकाइयां हैं, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), अनुसंधान एवं विकास (R&D), ग्राहक सेवा और व्यावसायिक प्रक्रियाओं जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्रदान करते हैं।
- पहले ये केवल बैक-ऑफिस सपोर्ट के रूप में कार्य करते थे, लेकिन अब वे नवाचार, डिजाइन और विकास के पावरहाउस बन चुके हैं।
- वित्त वर्ष 2019 में 40.4 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 64.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचा उनका संयुक्त राजस्व, 9.8% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है। वर्तमान में 1,700 से अधिक GCCs देश में 19 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।
- भारत सरकार की प्रगतिशील नीतियां, जैसे डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया, इस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही हैं। यह लेख GCCs के विकास, उनके आर्थिक प्रभाव और सरकारी पहलों का विश्लेषण करता है।
भारत में GCCs का विकास और वैश्विक महत्व :

भारत GCCs के लिए एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) जैसे क्लस्टर्स प्रमुख हैं। 2030 तक इस क्षेत्र का मूल्य 105 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 2,400 से अधिक केंद्रों से 2.8 मिलियन पेशेवरों को रोजगार मिलेगा। पिछले पांच वर्षों में 400 से अधिक नए GCCs और 1,100 यूनिट्स जोड़ी गई हैं, जो एयरोस्पेस, रक्षा, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में केंद्रित हैं। इंजीनियरिंग R&D GCCs समग्र GCC सेटअप की तुलना में 1.3 गुना तेजी से बढ़ रहे हैं।
भारत वैश्विक STEM कार्यबल का 28% और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग प्रतिभा का 23% योगदान देता है, जो GCCs को आकर्षित करता है। 2030 तक वैश्विक भूमिकाओं की संख्या 6,500 से बढ़कर 30,000 से अधिक होने की उम्मीद है। AI और ML जैसे क्षेत्रों में सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (CoEs) नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। आर्थिक सर्वे 2024-25 के अनुसार, GCCs पारंपरिक बैक-ऑफिस से आगे बढ़कर रणनीतिक हब बन गए हैं, जो सेवा क्षेत्र में विकास और नवाचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह बदलाव भारत की स्व-निर्भरता को मजबूत करता है और इसे डिजिटल तथा इंजीनियरिंग नवाचार में वैश्विक नेता बनाता है।
सरकारी नीतियां और पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
भारत सरकार ने GCCs के विकास के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, जो बुनियादी ढांचे, नवाचार, प्रतिभा विकास और नियामक समर्थन पर आधारित है।
बुनियादी ढांचा और क्लस्टर विकास: संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0) योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित, विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा प्रदान करती है। यह रेडी-बिल्ट फैक्ट्री (RBF) शेड और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के माध्यम से GCCs को तेजी से विस्तार करने में मदद करती है। वैश्विक निर्माताओं और उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को भारत में संचालन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
स्टार्टअप और नवाचार समर्थन: जेनेसिस (GENESIS) योजना, 490 करोड़ रुपये के बजट के साथ, टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देती है। यह GCCs के लिए फीडर इकोसिस्टम बनाती है और सहयोग को प्रोत्साहित करती है। स्टार्टअप इंडिया के तहत 1.97 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स AI/ML और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से GCCs को समर्थन देते हैं।
प्रतिभा विकास: स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और फ्यूचर स्किल्स प्राइम (MeitY और NASSCOM द्वारा) जैसे कार्यक्रम साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स और AI में कौशल प्रदान करते हैं। ये GCCs के लिए कुशल कार्यबल की पाइपलाइन सुनिश्चित करते हैं।
व्यापार सुगमता और नियामक समर्थन: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार, उदार FDI नीतियां, SEZ सुधार, कर छूट और सिंगल-विंडो क्लियरेंस ने GCCs को आकर्षित किया है। ये नीतियां लागत दक्षता, कुशल प्रतिभा पूल और सहयोग को बढ़ावा देती हैं।ये पहलें GCCs को केवल लागत-बचत केंद्र से नवाचार हब में परिवर्तित कर रही हैं, जो भारत की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दे रही हैं।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
GCCs के विकास के बावजूद चुनौतियां हैं, जैसे साइबर सुरक्षा जोखिम, कौशल अंतराल और क्षेत्रीय असमानता। टियर-II/III शहरों में विस्तार से रोजगार सृजन बढ़ सकता है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी बाधा है। भविष्य में, AI, ML और उन्नत विनिर्माण पर फोकस से GCCs भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में ऊपर ले जा सकते हैं। आर्थिक सर्वे 2024-25 के अनुसार, ये केंद्र सेवा क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देंगे और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेंगे।
निष्कर्ष:
GCCs भारत की नीति से समृद्धि की यात्रा का प्रतीक हैं, जो वैश्विक नवाचार और आर्थिक विकास को प्रेरित कर रहे हैं। सरकारी पहलों के माध्यम से तैयार पारिस्थितिकी तंत्र ने भारत को GCCs का वैश्विक केंद्र बनाया है। जैसा कि कहा जाता है, “नवाचार और नीति का संयोजन समृद्धि की कुंजी है।” GCCs आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी और वैश्वीकरण के मुद्दों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.निम्नलिखित में से कौन-सी योजना ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा प्रदान करने का उद्देश्य रखती है?
(a) स्टार्टअप इंडिया
(b) संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC 2.0)
(c) स्किल इंडिया
(d) डिजिटल इंडिया
(उत्तर: b)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भारत की आर्थिक विकास यात्रा में किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं? सरकारी नीतियों के योगदान का विश्लेषण करते हुए, इनकी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
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