भारत में भौमजल प्रबंधन : चुनौतियाँ और अवसर

भारत में भौमजल प्रबंधन : चुनौतियाँ और अवसर

भारत में भौमजल प्रबंधन : चुनौतियाँ और अवसर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी “गतिशील भौमजल संसाधन आकलन रिपोर्ट, 2025”: भारत में भौमजल प्रबंधन की चुनौतियां और अवसर

पाठ्यक्रम : जीएस-3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी

परिचय :

भारत, जहां कृषि और औद्योगिक विकास भौमजल पर अत्यधिक निर्भर है, भौमजल संसाधनों का सतत प्रबंधन एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने हाल ही में “गतिशील भौमजल संसाधन आकलन रिपोर्ट, 2025” जारी की है, जो केंद्रीय भूमिजल बोर्ड (CGWB) और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह रिपोर्ट देश के भौमजल संसाधनों का वार्षिक आकलन प्रस्तुत करती है, जो जल संकट, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में भौमजल पुनर्भरण, दोहन और आकलन इकाइयों के वर्गीकरण पर विस्तृत जानकारी दी गई है, जो नीति-निर्माण और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़ी है।

 

 

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु :

रिपोर्ट में भौमजल संसाधनों का गतिशील आकलन किया गया है, जो मौसम, वर्षा और मानवीय गतिविधियों के आधार पर बदलता रहता है। निम्नलिखित प्रमुख निष्कर्ष हैं:
वार्षिक भौमजल पुनर्भरण: कुल वार्षिक भौमजल पुनर्भरण 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) आंका गया है। यह वर्ष 2024 के 446.9 BCM की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाता है। पुनर्भरण मुख्यतः वर्षा, नदियों और सिंचाई प्रणालियों से होता है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से प्रभावित है।
भौमजल का दोहन योग्य संसाधन: दोहन योग्य वार्षिक भौमजल संसाधन बढ़कर 407.75 BCM हो गए हैं, जो 2024 में 406.19 BCM थे। यह वृद्धि बेहतर प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों का परिणाम है, लेकिन अभी भी अपर्याप्त है।
कुल वार्षिक भौमजल दोहन: वर्ष 2025 के लिए देश भर में कुल वार्षिक भौमजल दोहन की मात्रा 247.22 BCM आंकलित की गई है। यह सभी क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, घरेलू उपयोग) को शामिल करता है, जहां कृषि का हिस्सा लगभग 80-90% है।
भौमजल दोहन का स्तर: देश में दोहन योग्य उपलब्ध कुल भौमजल संसाधन में से लगभग 60.63% भौमजल का प्रत्येक वर्ष उपयोग किया जा रहा है। यह स्तर समग्र रूप से सुरक्षित लगता है, लेकिन क्षेत्रीय असमानताएं चिंताजनक हैं।
आकलन इकाइयों का वर्गीकरण: देश में कुल 6746 आकलन इकाइयां (ब्लॉक/मंडल/तालुका) हैं।

इनका वर्गीकरण निम्न प्रकार है:
सुरक्षित (Safe): 73.4% इकाइयां – जहां उपलब्ध वार्षिक भौमजल दोहन-योग्य संसाधनों का 70% से कम उपयोग किया जाता है।
अर्ध-संकटग्रस्त (Semi-critical): 10.5% इकाइयां – जहां 70–90% उपयोग हो रहा है।
संकटग्रस्त (Critical): 3.05% इकाइयां – जहां 90–100% उपयोग हो रहा है।
अत्यधिक दोहित (Over-exploited) : 11.1% इकाइयां – जहां दोहन स्तर वार्षिक पुनर्भरण दर से अधिक है। इनका क्षेत्रीय संकेंद्रण मुख्यतः उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश), पश्चिम भारत (राजस्थान, गुजरात) और दक्षिण भारत (कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश) में है।

लवणीय (Saline): 1.8% इकाइयां – जहां भौमजल की गुणवत्ता खराब है।

रिपोर्ट में श्रेणियों की परिभाषा स्पष्ट रूप से दी गई है, जो भौमजल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है। अत्यधिक दोहित क्षेत्रों में दोहन पुनर्भरण से अधिक होने से जल स्तर में गिरावट, भूमि धंसाव और जल प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

रिपोर्ट का महत्व : 

यह रिपोर्ट भारत के जल प्रबंधन में एक मील का पत्थर है, क्योंकि यह डेटा-आधारित नीतियां बनाने में सहायक है। इसका महत्व निम्न प्रकार है:

नीति-निर्माण और शासन: रिपोर्ट राज्यों को लक्षित हस्तक्षेप करने में मदद करती है, जैसे अटल भूजल योजना (ABHY) और जल जीवन मिशन के तहत संरक्षण प्रयास। यह राष्ट्रीय जल नीति 2012 और जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय कार्य योजना से जुड़ी है।
कृषि और अर्थव्यवस्था: भारत में 60% सिंचाई भौमजल पर निर्भर है। रिपोर्ट से पता चलता है कि दोहन स्तर 60.63% है, जो कृषि उत्पादकता को बनाए रखने के लिए सकारात्मक है, लेकिन अत्यधिक दोहित क्षेत्रों में फसल विविधीकरण और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों की आवश्यकता है।
पर्यावरणीय स्थिरता: जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा से पुनर्भरण प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट से प्राप्त डेटा वर्षा जल संचयन और वनरोपण जैसी योजनाओं को मजबूत करेगा, जो SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) से जुड़ा है।
क्षेत्रीय असमानताओं का समाधान: उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में अत्यधिक दोहन से जल संकट गहरा रहा है, जैसा कि चेन्नई और दिल्ली के जल संकटों में देखा गया। रिपोर्ट इन क्षेत्रों के लिए विशेष फोकस प्रदान करती है।
डेटा-संचालित विकास: 2024 की तुलना में वृद्धि दर्शाती है कि पिछले वर्षों के प्रयास (जैसे PMKSY – Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana) प्रभावी हो रहे हैं, लेकिन निरंतर निगरानी आवश्यक है।

चुनौतियां और सुझाव : 

रिपोर्ट के बावजूद कई चुनौतियां हैं:
क्षेत्रीय असमानताएं: 11.1% अत्यधिक दोहित इकाइयां राष्ट्रीय औसत को प्रभावित करती हैं, जो जल संघर्षों को जन्म दे सकती हैं।
गुणवत्ता संबंधी मुद्दे: लवणीय इकाइयां (1.8%) जल प्रदूषण को दर्शाती हैं, जो फ्लोराइड और आर्सेनिक प्रदूषण से जुड़ी हैं।
डेटा की सटीकता: गतिशील आकलन मौसम पर निर्भर है, इसलिए जलवायु परिवर्तन से अनिश्चितता बढ़ रही है।
प्रवर्तन की कमी: कानूनी ढांचा (जैसे मॉडल ग्राउंडवाटर बिल) अभी भी कई राज्यों में लागू नहीं है।

सुझाव:

  • वर्षा जल संचयन और रिचार्ज संरचनाओं का विस्तार।
  • स्मार्ट सिंचाई और फसल पैटर्न में बदलाव।
  • CGWB की क्षमता निर्माण और AI-आधारित मॉनिटरिंग।
  • अंतर-राज्यीय सहयोग, जैसे गंगा-कावेरी लिंकिंग प्रोजेक्ट।

निष्कर्ष: 

“गतिशील भौमजल संसाधन आकलन रिपोर्ट, 2025” भारत के जल सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो सतत विकास की दिशा में मार्गदर्शन करता है। हालांकि दोहन स्तर 60.63% पर नियंत्रित है, लेकिन अत्यधिक दोहित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। सरकार की योजनाएं जैसे जल शक्ति अभियान और राष्ट्रीय जल मिशन इस दिशा में कार्यरत हैं।  यह रिपोर्ट GS-3 (पर्यावरण, कृषि) और GS-1 (भूगोल) से जुड़ी है, जो जल संकट के बहुआयामी पहलुओं को समझने में सहायक है। सतत प्रबंधन से भारत जल-सुरक्षित राष्ट्र बन सकता है, लेकिन इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. “गतिशील भौमजल संसाधन आकलन रिपोर्ट, 2025” के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1.वार्षिक भौमजल पुनर्भरण 448.52 BCM आंका गया है, जो 2024 की तुलना में कमी दर्शाता है।
2.देश में अत्यधिक दोहित आकलन इकाइयों का प्रतिशत 11.1% है, जो मुख्यतः उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और दक्षिण भारत में केंद्रित हैं।
3.भौमजल दोहन का राष्ट्रीय स्तर 60.63% है, जिसमें सुरक्षित श्रेणी की इकाइयां 73.4% हैं।
4. संकटग्रस्त श्रेणी में उपलब्ध वार्षिक भौमजल का 70–90% उपयोग किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (B)

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. भारत में भौमजल संसाधनों की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए। “गतिशील भौमजल संसाधन आकलन रिपोर्ट, 2025” के प्रमुख निष्कर्षों के संदर्भ में, भौमजल संकट की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए तथा सतत प्रबंधन के लिए सुझाव दीजिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )

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