भारत में मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (FLN) की वर्तमान स्थिति

भारत में मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (FLN) की वर्तमान स्थिति

भारत में मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (FLN) की वर्तमान स्थिति

पाठ्यक्रम: जीएस-2 शासन में भारतीय राजनीति और भारतीय समाज

 

यह एडिटोरियल को द हिंदू में प्रकाशित “Bridging India’s numeracy gap,” पर आधारित है। लेख में यह उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और NIPUN भारत मिशन के तहत साक्षरता में सुधार के बावजूद, भारत में संख्यात्मकता का निरंतर अंतर, शैक्षणिक सफलता, रोज़गार एवं समान विकास के लिये आवश्यक बुनियादी व उच्च-स्तरीय गणित कौशल सुनिश्चित करने हेतु प्रारंभिक कक्षाओं से आगे बढ़कर, तत्काल, बहुआयामी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

वर्तमान स्थिति:

  • ASER रिपोर्ट- 2024 में पाया गया कि कक्षा 3 के केवल 20.5% बच्चे कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं और केवल 25.9% बच्चे साधारण घटाव की संक्रिया कर सकते हैं।
  • ASER रिपोर्ट- 2024 बताती है कि कक्षा 5 के 48.7% छात्र धाराप्रवाह पढ़ सकते हैं, जबकि केवल 30.7% ही बुनियादी विभाजन के प्रश्न को हल कर सकते हैं, जो 18 प्रतिशत अंकों का अंतर दर्शाता है। किसी भी राज्य में साक्षरता परिणामों की तुलना में संख्यात्मकता का स्तर अधिक नहीं है।
  • परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण- 2024 में सफल राज्य-स्तरीय हस्तक्षेपों (उदाहरण के लिये: दादरा और नगर हवेली) पर प्रकाश डाला गया है, जो FLN फोकस को मध्यम ग्रेड तक बढ़ाते हैं, संख्यात्मक परिणामों में सुधार करते हैं।
  • गतिविधि-आधारित, स्तर-उपयुक्त शिक्षण की ओर शैक्षणिक बदलाव लागू किये जा रहे हैं, लेकिन इसके लिये अधिक पैमाने और एकीकरण की आवश्यकता है

मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy – FLN)

  • मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy – FLN) शिक्षा की आधारशिला है, जो बच्चों को पढ़ने-लिखने की बुनियादी क्षमता और सरल अंकगणितीय संक्रियाओं (जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग) में दक्षता प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार, प्रत्येक बच्चे को कक्षा 3 तक FLN हासिल कर लेना चाहिए, ताकि आगे की शिक्षा और जीवन कौशल में सफलता मिल सके। FLN न केवल शैक्षणिक प्रगति का आधार है, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण, सामाजिक समानता और समग्र विकास को भी बढ़ावा देता है।
  •  भारत में FLN की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ASER) 2024 के अनुसार, कक्षा 5 के 48.7% छात्र कक्षा 2 स्तर का पाठ धाराप्रवाह पढ़ सकते हैं, जबकि केवल 30.7% ही बुनियादी विभाजन के प्रश्न हल कर पाते हैं। यह साक्षरता और संख्याज्ञान के बीच 18 प्रतिशत अंकों का अंतर दर्शाता है।
  • ASER 2024 में कोविड-19 के बाद अधिगम में रिकवरी दिखाई गई है, लेकिन संख्याज्ञान में कमी बनी हुई है। NIPUN भारत मिशन (2021) का लक्ष्य 2026-27 तक सार्वभौमिक FLN हासिल करना है, लेकिन प्रगति धीमी है। इस लेख में FLN की प्रमुख चुनौतियों और उन्हें दूर करने के उपायों पर चर्चा की गई है।

FLN के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ : 

भारत में FLN की प्रगति बाधित करने वाली चुनौतियाँ बहुआयामी हैं, जो संरचनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक कारकों से जुड़ी हैं। ये निम्नलिखित हैं:
1. अधिगम घाटे और नामांकन-प्रभाविता का अंतर : प्राथमिक स्तर पर नामांकन दर 95% से अधिक है, लेकिन वास्तविक अधिगम न्यून है। ASER 2024 के अनुसार, कक्षा 3 के आधे से अधिक बच्चे कक्षा 2 स्तर का पाठ नहीं पढ़ सकते या सरल घटाव नहीं कर सकते। यह ‘अधिगम संकट’ को दर्शाता है, जहाँ बच्चे स्कूल जाते हैं लेकिन बुनियादी कौशल नहीं सीख पाते। कोविड-19 ने इस घाटे को और बढ़ाया, क्योंकि डिजिटल डिवाइड के कारण ग्रामीण और गरीब बच्चे दूरस्थ शिक्षा से वंचित रहे।
2. संख्याज्ञान-साक्षरता का स्पष्ट अंतर: साक्षरता में सुधार के बावजूद संख्याज्ञान पिछड़ रहा है। ASER 2024 में किसी भी राज्य में संख्याज्ञान साक्षरता से अधिक नहीं है। गणित की संचयी प्रकृति (जैसे स्थानीय मान से दशमलव तक) के कारण प्रारंभिक कमजोरी आगे की शिक्षा में बाधा बनती है, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ती है।
3.हस्तक्षेपों का सीमित विस्तार : NIPUN भारत मिशन मुख्य रूप से कक्षा 1-3 पर केंद्रित है, लेकिन ASER डेटा से पता चलता है कि कक्षा 5-8 में भी FLN की कमी बनी रहती है। उच्च प्राथमिक स्तर पर सुधारात्मक कार्यक्रमों की कमी से बच्चे उन्नत कौशल (जैसे भिन्न, प्रतिशत) नहीं सीख पाते।
4. सामाजिक-आर्थिक और भाषाई बाधाएँ: गरीबी, कुपोषण (35.5% बच्चे प्रभावित) और घरेलू भाषा-स्कूल माध्यम का असंगति संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियाँ और वंचित समुदाय विशेष रूप से प्रभावित हैं।
5. अपर्याप्त अवसंरचना और शिक्षण संसाधन: कई स्कूलों में शौचालय, पेयजल, शिक्षण सामग्री का अभाव है। उच्च छात्र-शिक्षक अनुपात (30:1 से अधिक) और अप्रशिक्षित शिक्षक व्यक्तिगत निर्देश में बाधा डालते हैं। गणित शिक्षण में शिक्षक तैयारी, वर्कलोड और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
6. कक्षा और वास्तविक जीवन का वियोग: बच्चे औपचारिक गणित सीखते हैं लेकिन व्यावहारिक अनुप्रयोग में संघर्ष करते हैं, जिससे कार्यात्मक संख्याज्ञान सीमित रहता है। पारंपरिक रटने-आधारित मूल्यांकन वैचारिक समझ को नजरअंदाज करता है। ये चुनौतियाँ शैक्षणिक असमानता को बढ़ाती हैं और रोजगार क्षमता को प्रभावित करती हैं, जिससे भारत का मानव पूँजी विकास बाधित होता है।

भारत में प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र से संबंधित प्रमुख योजनाएँ क्या हैं?

  • समग्र शिक्षा अभियानपूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तक की एकीकृत योजना, जो सार्वभौमिक पहुँच, बुनियादी अवसंरचना के विकास, गुणवत्ता, समानता और डिजिटल शिक्षा पर केंद्रित है।
  • NIPUN भारत मिशन: एक राष्ट्रीय पहल जिसका लक्ष्य सत्र 2026-27 तक कक्षा 3 के अंत तक सभी बच्चों के लिये सार्वभौमिक मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (FLN) सुनिश्चित करना है, जिसमें खेल-आधारित एवं बहुभाषी शिक्षाशास्त्र को लागू किया जाएगा।
  • PM SHRI स्कूल (उभरते भारत के लिये प्रधानमंत्री स्कूल): 14,500 से अधिक स्कूलों को उन्नत बुनियादी अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एकीकरण और मूल्य-आधारित शिक्षा के साथ मॉडल NEP-संरेखित संस्थानों में बदलने की योजना।
  • PM POSHAN (मध्याह्न भोजन योजना)सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 11 करोड़ से अधिक बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है, नामांकन, प्रतिधारण और अधिगम की प्रभावशीलता में सुधार करता है।
  • सर्व शिक्षा अभियान (SSA): नामांकन, प्रतिधारण, बुनियादी अवसंरचना और उपेक्षित समूहों के लिये समावेशी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रारंभिक शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने के लिये एक प्रमुख कार्यक्रम।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: स्कूलों में लड़कियों की शिक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, लड़कियों के नामांकन और प्रतिधारण पर विशेष ज़ोर देना।
  • कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV): वंचित समुदायों की लड़कियों के लिये आवासीय विद्यालय, ताकि शिक्षा की अभिगम्यता और गुणवत्ता में सुधार हो सके।
  • शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम6-14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देने वाला कानूनी प्रावधानअभिगम्यता एवं अधिगम के अधिकार को सुनिश्चित करना।
  • राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना: प्राथमिक स्तर से आगे निरंतर शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिये आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करती है।

FLN अंतराल दूर करने के उपाय

FLN को मजबूत करने के लिए बहुआयामी नीतिगत उपाय आवश्यक हैं, जो NEP 2020 और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित हों। प्रमुख उपाय निम्न हैं:
1. NIPUN भारत मिशन का विस्तार और निगरानी: मिशन को कक्षा 8 तक विस्तारित करें, जिसमें FLN+ कौशल (भिन्न, दशमलव) शामिल हों। राज्य-स्तरीय अनुकूलित योजनाएँ बनाएँ और वास्तविक समय निगरानी के लिए EGRA/EGMA जैसे अंतर्राष्ट्रीय उपकरण अपनाएँ। 2026-27 से आगे निरंतरता सुनिश्चित करें, जैसा कि विश्व बैंक की सिफारिश है।
2. शिक्षक प्रशिक्षण और सहायता में निवेश : बाल-केंद्रित, गतिविधि-आधारित और बहुभाषी शिक्षाशास्त्र पर फोकस करें। कनाडा/न्यूजीलैंड मॉडल की तरह सतत व्यावसायिक विकास और डिजिटल उपकरणों का उपयोग करें। DIKSHA प्लेटफॉर्म को मजबूत बनाएँ।
3. मातृभाषा और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा : NEP के अनुरूप प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में करें, जैसा कि दक्षिण अफ्रीका/युगांडा में सफल रहा है। इससे समझ और समावेशन बढ़ेगा।
4. अनुभवात्मक और वास्तविक जीवन अधिगम : फिनलैंड/जापान की तरह ‘करके सीखने’ की पद्धति अपनाएँ। समस्या-समाधान, कहानी सुनाना और सहकर्मी अधिगम को शामिल करें।
5. प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सुदृढ़ : 3-6 वर्ष आयु पर फोकस करें, आंगनवाड़ी को खेल-आधारित बनाएँ। ब्राजील के मॉडल से प्रेरणा लें।
6. सामाजिक-आर्थिक बाधाओं का समाधान : मध्याह्न भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा को एकीकृत करें। मेक्सिको की तरह सशर्त नकद अंतरण अपनाएँ। सामुदायिक भागीदारी और अभिभावक शिक्षा बढ़ाएँ।
7.अन्य योजनाओं का एकीकरण : समग्र शिक्षा अभियान, PM SHRI स्कूल, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और RTE अधिनियम को FLN से जोड़ें। डिजिटल डिवाइड कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करें।
ये उपाय यदि प्रभावी ढंग से लागू किए जाएँ, तो FLN में तेज सुधार संभव है, जैसा कि दादरा और नगर हवेली में देखा गया।

निष्कर्ष :

FLN भारत के शैक्षणिक पिरामिड का आधार है, जिसकी मजबूती समान विकास और SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है। चुनौतियाँ गंभीर हैं, लेकिन NIPUN भारत जैसी पहलों के माध्यम से समाधान संभव हैं। जैसा कि नेल्सन मंडेला ने कहा, “शिक्षा दुनिया बदलने का सबसे शक्तिशाली हथियार है।” सरकार, शिक्षक, समुदाय और नीति-निर्माताओं की सामूहिक प्रतिबद्धता से भारत एक साक्षर और सशक्त राष्ट्र बन सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: 

Q. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
1.शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) अधिनियम के अनुसार किसी राज्य में शिक्षक के रूप में नियुक्त होने हेतु अर्ह होने के लिये किसी व्यक्ति में संबंधित राज्य अध्यापक शिक्षा परिषद् द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता का होना आवश्यक है।

2.आर.टी.ई. अधिनियम के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षण हेतु किसी अभ्यर्थी के लिये राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिये गए अध्यापक अर्हता परीक्षण में उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

3.भारत में 90% से अधिक अध्यापक शिक्षा संस्थान प्रत्यक्ष रूप से राज्य सरकारों के अधीन हैं।
उपर्युत्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) केवल 3
उत्तर: (b)

  मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q1. “व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को सार्थक बनाने के लिये ‘सीखते हुए कमाना (अर्न व्हाइल यू लर्न)’ की योजना को सशक्त करने की आवश्यकता है।” टिप्पणी कीजिये। (2021)
Q 2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 धारणीय विकास लक्ष्य-4 (2030) के साथ अनुरूपता में है। उसका ध्येय भारत में शिक्षा प्रणाली की पुनःसंरचना और पुनःस्थापना है। इस कथन का समालोचनात्मक निरीक्षण कीजिये। (2020)

No Comments

Post A Comment