28 Jan भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी: यूरोपीय संघ के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी
भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी: यूरोपीय संघ के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी
पाठ्यक्रम :
जीएस – 2 – अंतर्राष्ट्रीय संबंध – भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी: यूरोपीय संघ के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी
प्रारंभिक परीक्षा के लिए
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के मुख्य स्तंभ क्या हैं?
मुख्य परीक्षा के लिए
भारत की विदेश नीति के लिए यूरोपीय संघ क्यों महत्वपूर्ण है?
खबरों में क्यों?

- 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ताओं को सफलतापूर्वक समाप्त करने की ऐतिहासिक घोषणा की।इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, जो लगभग 2 अरब लोगों और 27 ट्रिलियन डॉलर के बाजार को जोड़ेगा। इस समझौते से यूरोपीय संघ के सामानों के निर्यात को 2032 तक दोगुना करने की उम्मीद है, जिसमें टैरिफ में भारी कटौती शामिल है (जैसे कारों पर 110% से 10% तक)।
- शिखर सम्मेलन से पहले फरवरी 2025 में यूरोपीय आयोग के आयुक्तों का नई दिल्ली दौरा और नियमित उच्च-स्तरीय संपर्क (जी7, जी20, फोन कॉल) ने इस गति को मजबूत किया।अब एक नया संयुक्त रणनीतिक एजेंडा अपनाया गया है, जो व्यापार-निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, अंतरिक्ष और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगा।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का अवलोकन :
- भारत और यूरोपीय संघ के संबंध लोकतंत्र, विधि का शासन, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षवाद जैसे साझा मूल्यों पर टिके हैं। यह साझेदारी व्यापार-निवेश, सुरक्षा-रक्षा, जलवायु-स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, कनेक्टिविटी, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और जन-जन आदान-प्रदान को कवर करती है। यूरोपीय संघ वस्तुओं में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- 2024 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार €120 अरब (लगभग 130 अरब डॉलर) से अधिक था (यूरोपीय संघ से आयात €71.4 अरब, निर्यात €48.8 अरब)। सेवाओं का व्यापार €66 अरब से अधिक (यूरोपीय संघ से आयात €37.4 अरब, निर्यात €29.2 अरब)। पिछले दशक में वस्तुओं का व्यापार दोगुना और सेवाओं का 243% बढ़ा है।
- 2020 के ‘भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी: 2025 तक का रोडमैप’ के बाद संबंधों में तेजी आई, और अब 2026 शिखर सम्मेलन के साथ एफटीए का नया अध्याय शुरू हुआ है।
भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों का विकास :

भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी:
- भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षवाद और सतत विकास पर आधारित एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं।
- 1962 में भारत ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय (ईईसी) के साथ सबसे पहले राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। 1993-94 के संयुक्त राजनीतिक वक्तव्य और सहयोग समझौते से शुरू होकर, 2004 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा प्राप्त हुआ।
- जुलाई 2020 में अपनाया गया ‘भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी 2025 तक का रोडमैप’ इस साझेदारी को व्यापार से आगे सुरक्षा, जलवायु, डिजिटल और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में विस्तारित करने का आधार बना।
प्रमुख सहयोग क्षेत्र :

- व्यापार एवं आर्थिक सहयोग: ईयू भारत का प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। भारत से ईयू को मशीनरी, रसायन, वस्त्र, धातु और खनिज प्रमुख निर्यात हैं, जबकि ईयू से मशीनरी, परिवहन उपकरण और रसायन आयात होते हैं। सेवाओं में निर्यात 2019-2024 के बीच 19 अरब यूरो से 37 अरब यूरो तक बढ़ा। एफटीए से गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर कर बाजार पहुंच बढ़ेगी।
- रक्षा एवं सुरक्षा: 2025 में सुरक्षा-रक्षा साझेदारी की संभावनाएं तलाशी गईं। हिंद महासागर, गिनी की खाड़ी और अदन की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी सहयोग प्रमुख हैं। दिसंबर 2025 में भारतीय रक्षा निर्माताओं का ब्रुसेल्स दौरा और ईयू की राजनीतिक-सुरक्षा समिति का भारत दौरा इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
- स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु: 2016 में स्थापित स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी (सीईसीपी) का तीसरा चरण 2024 में शुरू हुआ। ईयू अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का भागीदार है। अपतटीय पवन, मीथेन कमी, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) में सहयोग, तथा EURATOM और CERN के साथ परमाणु एवं कण भौतिकी अनुसंधान उल्लेखनीय हैं।
- कनेक्टिविटी: 2021 की भारत-ईयू कनेक्टिविटी साझेदारी परिवहन, डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना पर केंद्रित है। सितंबर 2023 में घोषित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) तथा जून 2025 में त्रिपक्षीय विकास सहयोग तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देते हैं।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष: 2007 के समझौते के तहत स्मार्ट ग्रिड, जल, टीके, आईसीटी और ध्रुवीय विज्ञान में सहयोग। होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भागीदारी तथा आईएसआरओ-ईएसए समझौतों के तहत पृथ्वी अवलोकन, नौवहन और मिशन समर्थन। दिसंबर 2024 में पीएसएलवी द्वारा ईएसए का प्रोबा-3 प्रक्षेपण और मई 2025 में मानव अंतरिक्ष अन्वेषण पर आशय वक्तव्य प्रमुख उपलब्धियां हैं।
- प्रवासन एवं गतिशीलता: 2016 के साझा एजेंडे के तहत कानूनी प्रवासन मार्ग। 2024 के अंत तक ईयू में 9.31 लाख से अधिक भारतीय निवास कर रहे हैं, जो ब्लू कार्ड धारकों का सबसे बड़ा समूह है। इरास्मस मुंडस छात्रवृत्ति से 6,000 से अधिक भारतीय छात्र लाभान्वित हुए।
एफटीए का वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र पर प्रभाव :
- एफटीए भारत के वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। ईयू का वैश्विक वस्त्र आयात 2024 में 263.5 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसमें भारत का हिस्सा 7.2 अरब डॉलर (62,700 करोड़ रुपये) है।
- एफटीए से सभी श्रेणियों पर शून्य शुल्क तथा 12% तक टैरिफ कमी से बाजार पूरी तरह खुलेगा। रेडीमेड गारमेंट्स (~60%), सूती कपड़े (17%), एमएमएफ (12%), हस्तशिल्प, कालीन, जूट आदि क्षेत्रों में विस्तार होगा।
- यह 45 मिलियन प्रत्यक्ष रोजगार वाले क्षेत्र को एमएसएमई क्लस्टरों (तिरुप्पुर, सूरत, पानीपत, भदोही आदि) में उत्पादन, महिलाओं की भागीदारी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा। बांग्लादेश, पाकिस्तान, तुर्की जैसे प्रतिस्पर्धियों से टैरिफ असमानता दूर होगी, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
भारत की विदेश नीति के लिए महत्व :
ईयू भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ और ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ नीति का प्रमुख स्तंभ है। यह चीन-निर्भरता से विविधीकरण, इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था, जलवायु लक्ष्यों (नेट-जीरो) तथा वैश्विक चुनौतियों (साइबर, आतंकवाद) से निपटने में सहायक है। एफटीए से निर्यात विविधीकरण, रोजगार सृजन और ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण को बल मिलेगा। उच्च-स्तरीय संपर्क (टीटीसी, आईएमईसी) भारत को बहुपक्षीय मंचों (जी20, जी7) पर मजबूत बनाते हैं।
निष्कर्ष :
- भारत-ईयू साझेदारी साझा मूल्यों, आर्थिक परस्पर-निर्भरता और रणनीतिक हितों पर आधारित है। एफटीए इसकी नई ऊंचाई है, जो समावेशी विकास, सततता और वैश्विक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक समृद्धि और वैश्विक चुनौतियों से निपटने का मजबूत आधार प्रदान करती है। भारत-यूरोपीय संघ संबंध साझा मूल्यों, आर्थिक परस्पर निर्भरता और रणनीतिक हितों पर आधारित मजबूत साझेदारी है।
- 2026 शिखर सम्मेलन में एफटीए समापन से नई ऊंचाई। टीटीसी, ग्लोबल गेटवे, आईएमईसी, सुरक्षा-स्वच्छ ऊर्जा सहयोग ठोस परिणाम। यूरोपीय संघ भारत की ‘मल्टी-वेक्टर’ विदेश नीति का केंद्रीय स्तंभ, जो बहुपक्षवाद, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक स्थिरता में योगदान देता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
-
डिजिटल और हरित प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) का शुभारंभ 2022 में किया गया था।
-
यूरोपीय संघ वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
-
भारत-ईयू कनेक्टिविटी साझेदारी की शुरुआत 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. “हाल के वर्षों में भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को नई रणनीतिक गति मिली है।” भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा कीजिए और भारत की विदेश नीति के लिए उनके महत्व का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
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