07 Feb भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ की शर्तों (ToRs) पर हस्ताक्षर
भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ की शर्तों (ToRs) पर हस्ताक्षर
सामान्य अध्ययन-II : अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference – ToRs) पर हस्ताक्षर हुए। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में भारत की ओर से अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य वार्ताकार श्री अजय भदू तथा GCC की ओर से मुख्य वार्ताकार डॉ. राजा अल मरजूकी ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
यह घटना 2004 के आर्थिक सहयोग फ्रेमवर्क समझौते को आगे बढ़ाते हुए 2008 से रुकी हुई FTA वार्ताओं को पुनः शुरू करने का महत्वपूर्ण संकेत है। ToRs FTA के दायरे, संरचना, कार्यप्रणाली, बाजार पहुंच, निवेश उदारीकरण, व्यापार सुविधा, नियमों का मूल आदि को परिभाषित करते हैं।

GCC का संक्षिप्त परिचय :
स्थापना → 25 मई 1981
सदस्य देश → सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन (कुल 6)
मुख्यालय → रियाद (सऊदी अरब)
उद्देश्य → सदस्य देशों में समन्वय, एकीकरण और एकता को बढ़ावा देना
भारत-GCC व्यापारिक संबंधों की वर्तमान स्थिति (FY 2024-25)

कुल द्विपक्षीय व्यापार → 178.56 अरब अमेरिकी डॉलर (निर्यात: 56.87 अरब, आयात: 121.68 अरब)
भारत के कुल वैश्विक व्यापार का प्रतिशत → 15.42%
पिछले 5 वर्षों में औसत वार्षिक वृद्धि दर → 15.3%
GCC से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) → सितंबर 2025 तक 31.14 अरब डॉलर से अधिक
भारतीय डायस्पोरा → GCC देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय निवासी
भारत के लिए FTA का महत्व
ऊर्जा सुरक्षा और विविधीकरण — भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा GCC से आयात करता है (क्रूड ऑयल, LNG)। FTA से लंबी अवधि की आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
व्यापार विस्तार — निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स, चावल, टेक्सटाइल, मशीनरी, रत्न-आभूषण आदि को बढ़ावा मिलेगा। खाद्य प्रसंस्करण, पेट्रोकेमिकल्स, ICT, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों को विशेष लाभ।
निवेश आकर्षण — GCC विश्व का 9वां सबसे बड़ा GDP (2.3 ट्रिलियन डॉलर) वाला ब्लॉक है (61.5 मिलियन की आबादी)। FTA से निवेश में तेजी आएगी।
रणनीतिक साझेदारी — वैश्विक अनिश्चितताओं (रेड सी संकट, ऊर्जा मूल्य उतार-चढ़ाव) के बीच मजबूत व्यापारिक गलियारा बनेगा।
लोगों के बीच संबंध — 1 करोड़ भारतीयों के हितों की रक्षा और सांस्कृतिक-आर्थिक बंधन मजबूत होंगे।
संभावित चुनौतियाँ एवं रणनीति :
नियमों का मूल (Rules of Origin) पर सहमति
संवेदनशील क्षेत्रों (कृषि, MSME) की सुरक्षा
सेवाओं, डिजिटल व्यापार और निवेश अध्यायों पर विस्तृत वार्ता
निष्कर्ष :
यह ToRs पर हस्ताक्षर भारत की ‘Act East’ से ‘Act West’ नीति को मजबूती देता है। UAE और Oman के साथ पहले से मौजूद FTA/CEPA के बाद पूरे GCC ब्लॉक के साथ व्यापक समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में मजबूत स्थिति प्रदान करेगा। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारत की GDP वृद्धि, रोजगार सृजन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.निम्नलिखित में से कौन-सा देश खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का सदस्य नहीं है?
(a) सऊदी अरब
(b) संयुक्त अरब अमीरात
(c) ईरान
(d) कुवैत
उत्तर: (c) ईरान
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.”भारत और GCC के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ की शर्तों (ToRs) पर हालिया हस्ताक्षर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक कूटनीति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भूमिका को कैसे मजबूत करेंगे? चर्चा कीजिए।” (15 अंक)
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