भू-राजनीतिक व्यवधान: अंतर्देशीय आर्थिक गलियारे और भारत की रणनीति

भू-राजनीतिक व्यवधान और अंतर्देशीय आर्थिक गलियारे — concept mind map

भू-राजनीतिक व्यवधान: अंतर्देशीय आर्थिक गलियारे और भारत की रणनीति

✎ भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए भारत सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह के माध्यम से समन्वित उपाय किए हैं, जिनमें व्यापार सुगमता, रसद लागत में कमी और वित्तीय सहायता…

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अंतर-मंत्रालयी समन्वय तंत्र

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: भू-राजनीतिक व्यवधान, समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, अंतर-मंत्रालयी समूह, निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) योजना, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS), घरेलू समुद्री बीमा पूल
  • Essay: भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक व्यापार पर इसके निहितार्थ, भारत की आर्थिक संवृद्धि में समुद्री व्यापार की भूमिका और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए भारत सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह के माध्यम से समन्वित उपाय किए हैं, जिनमें व्यापार सुगमता, रसद लागत में कमी और वित्तीय सहायता शामिल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि सरकार भू-राजनीतिक व्यवधानों के वैश्विक समुद्री व्यापार और रसद पर पड़ने वाले प्रभावों की निरंतर निगरानी कर रही है। सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने और आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए कई समन्वित उपाय किए हैं, जिनमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, जैसे कि संघर्ष और व्यापार युद्ध, समुद्री व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं।
  • भारत एक प्रमुख समुद्री व्यापारिक राष्ट्र है, जिसका अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, जिससे यह इन व्यवधानों के प्रति संवेदनशील है।
  • इन व्यवधानों के कारण माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और रसद व्यय में वृद्धि हो सकती है, जिससे निर्यात-आयात प्रभावित होता है।
  • सरकार ने इन प्रभावों का आकलन करने और उनसे निपटने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है, जिसमें वाणिज्य विभाग, विदेश मंत्रालय, RBI और अन्य प्रमुख विभाग शामिल हैं।
  • इस समूह का उद्देश्य समुद्री व्यापार, बंदरगाह संचालन और आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतरता से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करना और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
  • सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन सहायता, शुल्क में छूट, व्यापार सुगमता उपाय और रसद लागत को कम करने की पहल शामिल हैं।

सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख उपाय क्या हैं?

  • निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) और अग्रिम प्राधिकरण योजनाओं के लिए निर्यात दायित्व अवधि को 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाया गया है।
  • RODTP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) दरों को बहाल किया गया है, जिससे निर्यातकों को राहत मिली है।
  • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने निर्यातकों के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की है।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)/मुक्त व्यापार वेयरहाउसिंग जोन (FTWZ) में रत्न और आभूषणों के आयात और भंडारण की अनुमति दी गई है।
  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने लौटाए गए और डायवर्ट किए गए कार्गो के लिए स्पष्टीकरण जारी किए और शुल्क माफी को 30 जून 2026 तक बढ़ाया।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने निर्यात ऋण अवधि को 270 से बढ़ाकर 450 दिन कर दिया है और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) की तरलता के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 शुरू की है।
  • प्रमुख बंदरगाहों ने ग्राउंड रेंट और विलंब शुल्क पर 100 प्रतिशत और रीफर शुल्क पर 80 प्रतिशत की छूट दी है।
  • कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और रेलवे ने व्यवधानों के कारण अटके कंटेनरों पर शुल्क माफ कर दिया और बंदरगाहों पर कंटेनरों की निकासी के लिए समर्पित माल गलियारे पर डबल-स्टैक सेवाएं शुरू कीं।
  • मंत्रिमंडल ने घरेलू समुद्री बीमा पूल के लिए लगभग 150 करोड़ डॉलर की संप्रभु गारंटी को मंजूरी दी है, जिससे माल ढुलाई और बीमा की लागत कम हुई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन वैश्विक समुद्री व्यापार पर भू-राजनीतिक प्रभावों की निरंतर निगरानी और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
निर्यात दायित्व अवधि का विस्तार निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) और अग्रिम प्राधिकरण योजनाओं के तहत निर्यातकों को राहत प्रदान करता है।
बंदरगाहों पर परिचालन सहायता और शुल्क में छूट माल ढुलाई की लागत को कम करता है और आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाता है।
आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की तरलता (Liquidity) में सुधार करता है।
घरेलू समुद्री बीमा पूल के लिए संप्रभु गारंटी निर्यात के लिए माल ढुलाई और बीमा लागत को कम करता है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • निर्बाध व्यापार प्रवाह सुनिश्चित करके आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है, विशेषकर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौरान।
  • निर्यातकों को विभिन्न योजनाओं के तहत राहत प्रदान करके निर्यात को बढ़ावा देता है और विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि करता है।
  • लॉजिस्टिक्स लागत (Logistics Cost) को कम करके भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।

सामरिक महत्व

  • आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती सुनिश्चित करके राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • अंतर-मंत्रालयी समन्वय के माध्यम से सरकार की प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है, जिससे संकट की स्थितियों में त्वरित निर्णय लिए जा सकते हैं।
  • घरेलू समुद्री बीमा पूल जैसी पहलें बाहरी निर्भरता को कम करती हैं और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करती हैं।

शासनिक महत्व

  • विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करके ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) उपायों को लागू करके नियामक बाधाओं को कम करता है और व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाता है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जिससे हितधारकों का सरकार पर विश्वास बढ़ता है।

चुनौतियाँ

1. भू-राजनीतिक अस्थिरता

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों में व्यवधान, जैसे कि लाल सागर संकट या अन्य क्षेत्रीय संघर्ष।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितता और अप्रत्याशितता, जिससे व्यापार योजनाएं बाधित होती हैं।

2. लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढाँचा

  • बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और निकासी में देरी, विशेषकर अप्रत्याशित व्यवधानों के दौरान।
  • अंतर्देशीय परिवहन (Inland Transport) नेटवर्क में क्षमता संबंधी सीमाएं, जो माल की आवाजाही को प्रभावित करती हैं।

3. वित्तीय और बीमा संबंधी चुनौतियाँ

  • बढ़ती माल ढुलाई और बीमा लागत, जो निर्यातकों के लिए परिचालन व्यय बढ़ाती है।
  • वैश्विक बीमा बाजारों में अस्थिरता और कवरेज प्राप्त करने में कठिनाई।

4. नियामक और प्रक्रियात्मक बाधाएँ

  • जटिल सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताएँ जो व्यापार को धीमा करती हैं।
  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, जिससे विलंब और अक्षमताएँ उत्पन्न होती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में देरी और लागत में वृद्धि।
बढ़ती माल ढुलाई और बीमा लागत निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव और व्यापार घाटे में वृद्धि की संभावना।
बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और कंटेनर निकासी माल के आवागमन में बाधा और परिचालन अक्षमता।
MSMEs के लिए तरलता की कमी छोटे व्यवसायों के लिए वित्तीय तनाव और व्यापार संचालन में बाधा।
पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता और मूल्य स्थिरता पर प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) योजना
  • अग्रिम प्राधिकरण योजना
  • आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0

आगे की राह

  • समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करना।
  • बंदरगाहों और अंतर्देशीय लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार करना, जिसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया जाए।
  • लॉजिस्टिक्स लागत को और कम करने के लिए नवाचारी समाधानों और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना।
  • निर्यातकों, विशेषकर MSMEs के लिए वित्तीय सहायता और बीमा कवरेज तक पहुँच को आसान बनाना।
  • व्यापार सुगमता उपायों को लगातार लागू करना और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को और सरल बनाना।
  • आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन (Resilience) बढ़ाने के लिए विविधीकरण (Diversification) रणनीतियों को अपनाना।
  • भू-राजनीतिक जोखिमों का आकलन करने और उनसे निपटने के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय तंत्र को और सुदृढ़ करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भू-राजनीतिक व्यवधान · वैश्विक समुद्री व्यापार · आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन · अंतर-मंत्रालयी समूह · व्यापार सुगमता · लॉजिस्टिक्स लागत · निर्यात संवर्धन योजनाएँ · आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना · बंदरगाह संचालन · अंतर्देशीय आर्थिक गलियारे

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ सूची (Union List) में विदेशी व्यापार और जहाजरानी का उल्लेख।
  • अनुच्छेद 301: भारत के राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता।
  • अनुच्छेद 282: संघ और राज्यों द्वारा किए जाने वाले व्यय।

अवधारणा प्रवाह

भू-राजनीतिक व्यवधान  →  वैश्विक समुद्री व्यापार पर प्रभाव  →  आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ  →  सरकार द्वारा अंतर-मंत्रालयी निगरानी  →  समन्वित नीतिगत उपाय  →  निर्बाध व्यापार और आर्थिक स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वाणिज्य विभाग के अंतर्गत गठित अंतर-मंत्रालयी समूह समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभावों का आकलन करता है।
2. इस समूह में विदेश मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, तथा भारतीय कंटेनर निगम शामिल हैं।
3. सरकार ने भू-राजनीतिक व्यवधानों के जवाब में निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) योजना के तहत निर्यात दायित्व अवधि को बढ़ाया है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई भी नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि अंतर-मंत्रालयी समूह का मुख्य कार्य भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभावों का आकलन करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि ये सभी मंत्रालय और निगम इस समूह के सदस्य हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि सरकार ने EPCG और अग्रिम प्राधिकरण योजनाओं के लिए निर्यात दायित्व अवधि को 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से उपाय सरकार द्वारा भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए नहीं किया गया है/किए गए हैं?
1. प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन सहायता और विलंब शुल्क में छूट।
2. RBI द्वारा निर्यात ऋण अवधि को 270 से बढ़ाकर 450 दिन करना।
3. MSME की तरलता के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 की शुरुआत।
4. सभी महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क को स्थायी रूप से शून्य करना।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 4
  3. केवल 2 और 3
  4. केवल 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 4 — विकल्प 1, 2 और 3 सरकार द्वारा किए गए उपायों में शामिल हैं। हालांकि, विकल्प 4 गलत है क्योंकि राजस्व विभाग ने 40 महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क को 15 जुलाई, 2026 तक शून्य किया है, न कि स्थायी रूप से।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भू-राजनीतिक व्यवधान वैश्विक समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं। इन चुनौतियों से निपटने और व्यापार सुगमता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए समन्वित उपायों का परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भू-राजनीतिक व्यवधानों (जैसे युद्ध, व्यापार प्रतिबंध) और उनके वैश्विक समुद्री व्यापार पर प्रभाव का संक्षिप्त परिचय। भारत के लिए समुद्री व्यापार के महत्व पर प्रकाश डालें।
2. सरकार का संस्थागत तंत्र: वाणिज्य विभाग के अंतर्गत गठित अंतर-मंत्रालयी समूह और उसकी भूमिका का उल्लेख करें। इसमें शामिल प्रमुख मंत्रालयों (विदेश मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, RBI आदि) को सूचीबद्ध करें।
3. उठाए गए समन्वित उपाय (विस्तार से):
a. व्यापार सुगमता और निर्यात प्रोत्साहन: निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) और अग्रिम प्राधिकरण योजनाओं के तहत निर्यात दायित्व अवधि का विस्तार, RoDTEP दरों की बहाली, लंबित बैंक गारंटी का निपटान।
b. लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह संचालन: प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन सहायता, भूमि किराया और विलंब शुल्क में छूट, रेल संपर्क के माध्यम से कंटेनर निकासी की सुविधा, समर्पित माल गलियारे पर डबल-स्टैक सेवाएं।
c. वित्तीय और बीमा सहायता: RBI/वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा विस्तारित निर्यात ऋण अवधि (270 से 450 दिन), MSME के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0, घरेलू समुद्री बीमा पूल के लिए संप्रभु गारंटी।
d. अन्य नियामक और राहत उपाय: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा स्पष्टीकरण और शुल्क माफी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आपातकालीन प्रकोष्ठ और आदेश, राजस्व विभाग द्वारा पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क में कमी।
4. इन उपायों का प्रभाव: निर्बाध माल ढुलाई, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, निर्यातकों को राहत।
5. निष्कर्ष: भारत की आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका के लिए इन उपायों के दीर्घकालिक महत्व पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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