08 Aug मध्य प्रदेश के सांसद ने मुख्यमंत्री से फसल बीमा प्रीमियम भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की अपील की
✎ मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए एक जोखिम प्रबंधन उपकरण है, जो वास्तविक उपज के बजाय मौसम मापदंडों पर आधारित क्षतिपूर्ति प्रदान करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाने, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय | GS Paper III — कृषि: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ एवं इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय
- Prelims: मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS), फसल बीमा, कृषि ऋण, सूखा, जलवायु परिवर्तन, बागवानी फसलें, सामान्य सेवा केंद्र (CSC), सहकारी समितियाँ
- Essay: भारत में कृषि संकट: कारण, परिणाम और समाधान, जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि: चुनौतियाँ और अनुकूलन रणनीतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए एक जोखिम प्रबंधन उपकरण है, जो वास्तविक उपज के बजाय मौसम मापदंडों पर आधारित क्षतिपूर्ति प्रदान करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, कर्नाटक के एक सांसद ने मुख्यमंत्री से मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Weather-Based Crop Insurance Scheme – WBCIS) के तहत प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है। राज्य में औसत से कम वर्षा और किसानों की वित्तीय कठिनाइयों के कारण कई किसान निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रीमियम का भुगतान नहीं कर पाए हैं। इस वर्ष प्रीमियम भुगतान केवल सहकारी समितियों या बैंकों के माध्यम से किया जाना था, जिससे सर्वर और तकनीकी समस्याओं के कारण कई किसानों को परेशानी हुई।
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि क्षेत्र मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे मौसम संबंधी अनिश्चितताएँ फसल उत्पादन और किसानों की आय को सीधे प्रभावित करती हैं।
- मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) को किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं जैसे वर्षा की कमी, अत्यधिक वर्षा, तापमान में बदलाव आदि से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) का एक घटक है, जिसे 2016 में शुरू किया गया था।
- योजना के तहत, सरकार बागवानी फसलों को भी शामिल करती है, जिससे विभिन्न प्रकार के किसानों को लाभ मिलता है।
- प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा आमतौर पर बुवाई के मौसम से पहले या उसके दौरान निर्धारित की जाती है, ताकि किसान अपनी फसलों का बीमा करा सकें।
- किसानों को अक्सर वित्तीय बाधाओं और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे समय पर प्रीमियम भुगतान में दिक्कतें आती हैं।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) क्या है?
- मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) एक जोखिम प्रबंधन उपकरण है जो किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
- यह योजना वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति आदि जैसे मौसम मापदंडों पर आधारित है, न कि वास्तविक फसल उपज के नुकसान पर।
- यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र में वास्तविक मौसम डेटा पूर्व-निर्धारित ‘ट्रिगर’ स्तरों से विचलित होता है, तो किसानों को क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता है, भले ही उनकी व्यक्तिगत फसल को कितना नुकसान हुआ हो।
- इसका उद्देश्य किसानों को त्वरित और पारदर्शी तरीके से क्षतिपूर्ति प्रदान करना है, क्योंकि इसमें फसल कटाई प्रयोगों (Crop Cutting Experiments) की आवश्यकता नहीं होती है।
- यह योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत कार्यान्वित की जाती है और इसमें केंद्र तथा राज्य सरकारें प्रीमियम में सब्सिडी देती हैं।
- WBCIS में विभिन्न प्रकार की फसलों को शामिल किया जाता है, जिनमें अनाज, दलहन, तिलहन और कुछ बागवानी फसलें शामिल हैं, जैसा कि राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित किया जाता है।
- इस योजना का प्रबंधन कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है और इसे बीमा कंपनियों के माध्यम से लागू किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मौसम आधारित फसल बीमा योजना | किसानों को प्रतिकूल मौसम घटनाओं जैसे कम वर्षा या अत्यधिक वर्षा से होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। |
| प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा | किसानों को योजना का लाभ उठाने के लिए निर्धारित समय के भीतर प्रीमियम का भुगतान करना होता है। समय-सीमा का विस्तार किसानों को भुगतान करने के लिए अधिक समय देता है। |
| बागवानी फसलें शामिल | सुपारी, काली मिर्च, अदरक और आम जैसी बागवानी फसलों को भी योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे इन फसलों के उत्पादकों को भी सुरक्षा मिलती है। |
| वर्षा में कमी | राज्य में औसत वर्षा में 34% और शिवमोग्गा जिले में 44% की कमी ने किसानों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है, जिससे प्रीमियम भुगतान में देरी हुई। |
| भुगतान के तरीके | पहले कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भुगतान का विकल्प था, लेकिन अब केवल सहकारी समितियों या बैंकों के माध्यम से भुगतान करना होता है, जिससे तकनीकी समस्याएँ उत्पन्न हुईं। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- किसानों की आय स्थिरता: यह योजना किसानों को अप्रत्याशित मौसम संबंधी आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाकर उनकी आय को स्थिर करने में मदद करती है।
- कृषि क्षेत्र को बढ़ावा: बीमा सुरक्षा किसानों को नई तकनीकों और फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: किसानों की वित्तीय सुरक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद करती है, जिससे समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
सामाजिक महत्व
- किसानों का सशक्तिकरण: यह योजना किसानों को अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक सुरक्षा जाल प्रदान करती है, जिससे उन्हें अधिक आत्मविश्वास और सशक्त महसूस होता है।
- आत्महत्या दर में कमी: फसल नुकसान के कारण होने वाले वित्तीय संकट अक्सर किसानों की आत्महत्या का एक प्रमुख कारण होते हैं। बीमा सुरक्षा इस जोखिम को कम करने में सहायक है।
- खाद्य सुरक्षा: फसल नुकसान से बचाव अप्रत्यक्ष रूप से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है, क्योंकि यह कृषि उत्पादन की निरंतरता को बनाए रखता है।
प्रशासनिक महत्व
- सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता: प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध यह दर्शाता है कि सरकारी नीतियों को जमीनी हकीकत और किसानों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
- डिजिटल भुगतान चुनौतियों का समाधान: कॉमन सर्विस सेंटर से हटकर केवल सहकारी समितियों/बैंकों के माध्यम से भुगतान की अनिवार्यता ने तकनीकी और सर्वर संबंधी समस्याएँ पैदा कीं, जो डिजिटल समावेशन की चुनौतियों को उजागर करती हैं।
चुनौतियाँ
1. वित्तीय बाधाएँ
- कम वर्षा के कारण फसल नुकसान और आय में कमी से किसानों के पास प्रीमियम भुगतान के लिए पर्याप्त धन की कमी हो जाती है।
- अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय कठिनाइयाँ किसानों को समय पर प्रीमियम का भुगतान करने से रोकती हैं।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र में किसानों की चुनौतियाँ
2. तकनीकी और पहुँच संबंधी समस्याएँ
- कॉमन सर्विस सेंटर के विकल्प को हटाने और केवल सहकारी समितियों या बैंकों के माध्यम से भुगतान की अनिवार्यता ने कई किसानों के लिए पहुँच को सीमित कर दिया।
- सर्वर डाउनटाइम और अन्य तकनीकी समस्याएँ भुगतान प्रक्रिया को बाधित करती हैं, जिससे किसान समय पर प्रीमियम जमा नहीं कर पाते।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस की चुनौतियाँ और डिजिटल डिवाइड
3. योजना की जागरूकता और समझ
- कई किसानों को योजना के विवरण, प्रीमियम भुगतान की प्रक्रिया और समय-सीमा के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती है।
- जटिल प्रक्रियाएँ और दस्तावेज़ीकरण किसानों के लिए योजना का लाभ उठाना मुश्किल बना देते हैं।
यूपीएससी लिंक: सरकारी योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन
4. मौसम की अनिश्चितता
- जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव किसानों के लिए योजना बनाने और वित्तीय प्रबंधन करने में कठिनाई पैदा करते हैं।
- लगातार सूखे या अत्यधिक वर्षा की स्थिति किसानों की वित्तीय स्थिति को और खराब करती है।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन के कृषि पर प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा | किसानों की वित्तीय स्थिति और तकनीकी बाधाओं के कारण समय पर भुगतान न कर पाना, जिससे वे योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं। |
| वर्षा में कमी | फसल उत्पादन में गिरावट और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव, जिससे उनकी ऋण चुकाने की क्षमता प्रभावित होती है। |
| भुगतान के तरीके | कॉमन सर्विस सेंटर के विकल्प को हटाने से डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की कमी वाले किसानों के लिए पहुँच में कमी आई है। |
| सर्वर और तकनीकी समस्याएँ | भुगतान प्रणाली में बाधाएँ किसानों को समय पर प्रीमियम जमा करने से रोकती हैं, जिससे अंतिम समय में भीड़ और तनाव बढ़ता है। |
| बागवानी फसलों का कवरेज | बागवानी फसलों के लिए बीमा का विस्तार स्वागत योग्य है, लेकिन इन फसलों के लिए भी प्रीमियम भुगतान की चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Weather-Based Crop Insurance Scheme)
आगे की राह
- प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा को किसानों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लचीला बनाया जाए और आवश्यकतानुसार बढ़ाया जाए।
- भुगतान के तरीकों को अधिक सुलभ बनाया जाए, जिसमें कॉमन सर्विस सेंटर जैसे विकल्पों को पुनः शामिल किया जाए और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को मजबूत किया जाए।
- बैंकों और सहकारी समितियों में सर्वर क्षमता और तकनीकी सहायता में सुधार किया जाए ताकि अंतिम समय में होने वाली भीड़ और तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके।
- किसानों के बीच फसल बीमा योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएँ, जिसमें स्थानीय भाषाओं और माध्यमों का उपयोग किया जाए।
- फसल बीमा योजनाओं के तहत शामिल फसलों की सूची का नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाए और स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार उसमें संशोधन किया जाए।
- किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए वैकल्पिक तंत्रों पर विचार किया जाए, विशेषकर प्रतिकूल मौसम की स्थिति में, ताकि वे प्रीमियम का भुगतान कर सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मौसम आधारित फसल बीमा योजना · प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन और कृषि · फसल बीमा प्रीमियम · किसानों की वित्तीय बाधाएँ · सहकारी समितियाँ और बैंक · डिजिटल भुगतान चुनौतियाँ · राज्य सरकार की भूमिका · कृषि नीतियाँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘अनुच्छेद 39’: ‘राज्य अपनी नीति का विशेषतः संचालन करेगा’}
- {‘अनुच्छेद 43’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
- {‘अनुच्छेद 48’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}
अवधारणा प्रवाह
कम वर्षा के कारण फसल नुकसान → किसानों की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव → प्रीमियम भुगतान में देरी या असमर्थता → मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लाभ से वंचित होने का जोखिम → सांसद द्वारा प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध → किसानों को वित्तीय सुरक्षा और राहत प्रदान करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का एक घटक है।
2. WBCIS में, फसल के नुकसान का आकलन सीधे उपज के नुकसान के आधार पर किया जाता है।
3. WBCIS में प्रीमियम का भुगतान केवल सहकारी समितियों और बैंकों के माध्यम से किया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) वास्तव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का एक घटक है, जिसे 2016 में लॉन्च किया गया था।
कथन 2 गलत है। WBCIS में, फसल के नुकसान का आकलन सीधे उपज के नुकसान के आधार पर नहीं किया जाता है, बल्कि अधिसूचित मौसम स्टेशनों द्वारा दर्ज किए गए प्रतिकूल मौसम मापदंडों (जैसे वर्षा, तापमान, आर्द्रता) के आधार पर किया जाता है।
कथन 3 गलत है। समाचार के अनुसार, पहले किसान कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी प्रीमियम का भुगतान कर सकते थे, लेकिन हाल ही में यह विकल्प हटा दिया गया है, जिससे केवल सहकारी समितियाँ और बैंक ही विकल्प बचे हैं। इसलिए, यह हमेशा से ‘केवल’ सहकारी समितियों और बैंकों के माध्यम से नहीं होता था।
Q2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान के खिलाफ बीमा कवरेज प्रदान करती है।
2. इस योजना के तहत किसानों द्वारा देय प्रीमियम की दर सभी खरीफ फसलों के लिए 2% और सभी रबी फसलों के लिए 1.5% है।
3. बागवानी फसलों को इस योजना के तहत कवर नहीं किया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। PMFBY का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण होने वाले फसल के नुकसान के खिलाफ किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
कथन 2 सही है। PMFBY के तहत, खरीफ फसलों के लिए किसानों द्वारा देय अधिकतम प्रीमियम 2% और रबी फसलों के लिए 1.5% है। वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए यह 5% है।
कथन 3 गलत है। समाचार में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मौसम आधारित बीमा योजना (जो PMFBY का हिस्सा है) के तहत सुपारी, काली मिर्च, अदरक और आम जैसी बागवानी फसलों को शामिल किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृषि क्षेत्र के लिए फसल बीमा योजनाओं के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में कृषि की भेद्यता और फसल बीमा योजनाओं (जैसे PMFBY, WBCIS) की आवश्यकता का संक्षिप्त परिचय।
2. **फसल बीमा योजनाओं का महत्व:**
* किसानों को प्राकृतिक आपदाओं (सूखा, बाढ़, कीट, रोग) से होने वाले वित्तीय नुकसान से सुरक्षा।
* आय स्थिरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
* किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों और उच्च जोखिम वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन।
* ऋण चुकौती क्षमता में सुधार और ऋणग्रस्तता में कमी।
* खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान।
3. **प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:**
* **प्रीमियम भुगतान संबंधी मुद्दे:** वित्तीय बाधाएँ, भुगतान की अंतिम तिथि का कम होना, तकनीकी समस्याएँ (सर्वर डाउन)।
* **जागरूकता की कमी:** किसानों के बीच योजना के लाभों और प्रक्रियाओं के बारे में अपर्याप्त जानकारी।
* **दावा निपटान:** दावों के आकलन में देरी, जटिल प्रक्रियाएँ, पारदर्शिता की कमी।
* **बुनियादी ढाँचा:** मौसम स्टेशनों की कमी, डेटा संग्रह में त्रुटियाँ, डिजिटल पहुँच की समस्याएँ।
* **फसलों का कवरेज:** सभी फसलों और क्षेत्रों का पर्याप्त कवरेज न होना, विशेषकर बागवानी फसलों के लिए।
* **राज्य सरकारों की भूमिका:** प्रीमियम सब्सिडी में देरी, योजना के प्रचार-प्रसार में कमी।
* **मध्यस्थों की भूमिका:** बैंकों और सहकारी समितियों द्वारा प्रीमियम संग्रह में समस्याएँ।
4. **संभावित समाधान:**
* **प्रीमियम भुगतान में लचीलापन:** अंतिम तिथि का विस्तार, भुगतान के अधिक विकल्प (CSC सहित), डिजिटल भुगतान प्रणालियों में सुधार।
* **जागरूकता अभियान:** व्यापक प्रचार-प्रसार, स्थानीय भाषाओं में जानकारी, किसान गोष्ठियाँ।
* **दावा निपटान में सुधार:** त्वरित और पारदर्शी दावा प्रक्रिया, प्रौद्योगिकी का उपयोग (रिमोट सेंसिंग, ड्रोन), शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना।
* **बुनियादी ढाँचे का विकास:** अधिक मौसम स्टेशनों की स्थापना, डेटा की सटीकता सुनिश्चित करना।
* **योजना का विस्तार:** अधिक फसलों और क्षेत्रों को शामिल करना, बागवानी फसलों के लिए विशेष प्रावधान।
* **केंद्र-राज्य समन्वय:** प्रीमियम सब्सिडी और कार्यान्वयन में बेहतर समन्वय।
* **तकनीकी समाधान:** ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का उपयोग कर पारदर्शिता बढ़ाना।
5. **निष्कर्ष:** भारत में कृषि की स्थिरता और किसानों के कल्याण के लिए फसल बीमा योजनाओं का महत्व और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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